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ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है पानी

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नवभारत टाइम्स
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नवभारत टाइम्स, जूलाई 2010
वॉशिंगटन।। पानी पीने के फायदों को जानते हुए भी अगर आपने अभी तक रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की आदत नहीं डाली है तो अब जरा पानी को लेकर सीरियस हो जाइए। एक स्टडी में पता लगा है कि पानी हमें ज्यादा अलर्ट रखता है। यही नहीं हमारे ब्लड प्रेशर को भी कंट्रोल करता है।

वैंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के रिसर्चरों ने एक स्टडी में पाया कि पानी पीने से हमारे नर्वस सिस्टम की एक्टिविटी बढ़ जाती है जिससे हम ज्यादा अलर्ट रहते हैं। इसी कारण हमारा ब्लड प्रेशर भी बढ़ता है और एनर्जी का खर्च भी।

पानी पियो बार-बार

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लाईव हिंदुस्तान डॉट कॉम
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लाईव हिंदुस्तान डॉट कॉम
बहुत देर तक बैठना पड़ता था उन्हें। काम ही कुछ ऐसा था। वह कोशिश करते थे कि कुछ एक्सरसाइज हो जाए, लेकिन रोज कर नहीं पाते थे। वजन बढ़ता ही जा रहा था। वैन्डरबिल्ट यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च के मुताबिक अगर हम दिन में तीन गिलास पानी ज्यादा पी लेते हैं, तो एक साल में पांच किलो वजन कम कर सकते हैं। इसके अलावा पानी पीने से हम कहीं ज्यादा तरोताजा होते हैं। हमारा मेटाबॉलिज्म भी बेहतर होता है।

आमतौर पर माना जाता है कि हमें दिन में 10-12 गिलास पानी तो पीना ही चाहिए। इस लिहाज से अगर हम 14-15 गिलास पानी पी लें, तो उसका असर दिखने लगेगा। अगर हमारा वजन ज्यादा है, तो उससे घटने लगेगा। वजन अगर ठीकठाक है, तो भी सेहत दुरुस्त रखने में वह मदद करेगा। उससे हम जल्दी से थकान नहीं महसूस करेंगे।

गंगाजल अमृत नहीं अब आर्सेनिक

मदन जैड़ा/ हिन्दुस्तान
नई दिल्ली, 15 जनवरी।
गंगा का पानी कभी सबसे स्वच्छ होता था इसलिए वेदों-पुराणों तक में कहा गया है-गंगा तेरा पानी अमृत। मान्यता थी कि इसे पीकर या इसमें डुबकी लगाकर बीमारियां दूर हो जाती हैं। लेकिन अब स्थिति उलट है। गंगा के इर्द-गिर्द बढ़ते शहरीकरण, उद्योग धंधों से निकलने वाले कचरे, प्रदूषणकारी तत्वों के बढ़ने के कारण गंगाजल में आर्सेनिक का जहर घुल गया है।

मेघ पाईन अभियान क्या है?

मेघ पाईन अभियान

मेघ पाईन अभियान क्या है?


यह एक प्रयास है वर्षाजल के प्रासंगिकता को पहचानने व उसके संग्रहण को व्यापक स्तर पर फैलाने का, जो उत्तर बिहार के ग्रामीण इलाकों में रह रहे लाखों लोगों को साफ व सुनिश्चित पेयजल उपलब्ध कराने में मदद देना।

मेघ पाइन अभियान का मुख्य उददेश्य


1- उत्तर बिहार के ग्रामीण लोगों के बीच वैचारिक व व्यवहारिक बदलाव लाकर स्थानीय जल प्रबंधन तकनीकों को प्रभावी तरीके से पूर्णजीवित व स्थापित करना है और

बाढ़ के समय पेयजल

मेघ पाईन अभियानमेघ पाईन अभियानबाढ़ के समय पेयजल की उपलब्धता यानी साफ पीने का पानी का उपलब्धता काफी कम हो जाती है। ऐसे में साफ पानी पाने के लिए वर्षाजल संग्रहण ही एक मात्र उपाय है। बाढ़ के समय पेयजल को पाना एक कौशल का काम हो जाता है – आइए समझें उनसे जुड़े सवाल और उनके उत्तर -

बाढ़ के समय वर्षाजल को पीने की आवश्यकता क्यों है?

एक्वाया इंस्टीट्यूट के कार्य

साफ और सुरक्षित जल के द्वारा स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए एक्वाया इंस्टीट्यूट ने नई तकनीकियाँ अपनाई हैं।

इंस्टीट्यूट द्वारा अपनाई गई रणनीतियों की एक प्रस्तुति-

पानी, साफ-सफाई और स्वास्थ्यप्रद स्थितियों के बारे में कुछ तथ्य


1- अगर स्वास्थ्यप्रद स्थितियां या बेहतर स्वस्थ माहौल की बात की जाए तो इसमें निजी साफ-सफाई से लेकर आसपास का साफ-सुथरा माहौल भी शामिल होता है। यूं भी पानी से जुड़ी बीमारियों या प्रदूषित पानी, खराब स्वास्थ्य और गरीबी का एक खास दायरा गंदे पानी और साफ-सफाई की खराब स्थितियों की वजह से सामने आता है।
2- साफ-सफाई का ध्यान न रखने से पानी प्रदूषित होता है। प्रदूषित पानी यानी जिसमें गंदगी की वजह से सूक्ष्म जीव पैदा होने लगते हैं।
3- दुनिया की 26 अरब से ज्यादा की आबादी में से 40 प्रतिशत बुनियादी सफाई सुविधाओं से महरूम है।
4- दुनिया में एक अरब से भी ज्यादा लोग प्रदूषित पानी का इस्तेमाल पीने के लिए करते हैं।
5- बीमारियों और खराब स्वास्थ्य का सीधा संबंध गंदे पानी, सफाई का अभाव और अस्वस्थकर स्थितियों से है। गंदे पानी और गंदगी से डायरिया, टाइफाइड, पाराटाइफाइड, बुखार, हेपेटाइटिस ए, हेपेटाइटिस ई और एफ, फ्लूरोसिस, आर्सेनिक जनित बीमारी जैसी बीमारियां होती हैं। कुछ दूसरी बीमारियां हैं:- लेजिनोलिसिस, मेथमोग्लोबीनेमिया, सिन्टोसोमिएसिस, आंत का संक्रमण, डेंगू, मलेरिया, जापानी इंसेफलाइटिस। वेस्टनील वायरस संक्रमण, येलो फीवर और इम्पेटिगो यानी त्वचा से संबंधित बीमारी भी हो सकती है।
5- दुनिया भर में डायरिया से 1,085,000 से लेकर 2,187,000 मौतें हो जाती हैं। यह मौतें गंदे पानी, खराब सफाई व्यवस्था और दूषित पानी के कारण हो जाती हैं। डायरिया से मरने वाले 90 फीसदी पांच साल से कम के बच्चे होते हैं।
6- साफ और गैर हानिकारक पानी की आपूर्ति, बेहतर सफाई और स्वस्थ माहौल डायरिया को 20 प्रतिशत तक घटा सकती है। बेहतर स्थिति से डायरिया से होने वाली 50 प्रतिशत मौतें कम हो सकती है।
7- शौच-गृह के इस्तेमाल या बच्चों का मल-मूत्र साफ करने के बाद हाथ धोने और भोजन से पहले हाथों की अच्छी तरह सफाई डायरिया को 33 प्रतिशत कम कर देती है।

जल-जनित बीमारियों से जूझते शहर

जल जनित बीमारियांजल जनित बीमारियांडा. सिद्धार्थ अग्रवाल/ राष्ट्रीय सहारा


देश के चार बड़े शहरों मुंबई, दिल्ली, कोलकाता तथा चेन्नई में पीने एवं अन्य उपयोग हेतु पानी की उपलब्धता प्रति व्यक्ति 135 लीटर प्रतिदिन के मानक से आधा से भी कम है। यघपि 91 प्रतिशत शहरी क्षेत्रों में पेयजल सुविधा उपलब्ध है परन्तु यह सभी शहरों में समान नहीं है। छोटे शहरों में, जिनमें करीब एक–तिहाई आबादी है, पानी की उपलब्धता करीब 60 प्रतिशत लोगों को ही है। स्लम एवं अन्य गरीब बस्तियों में तो यह और भी कम है। इन बस्तियों में हैण्डपम्प तथा नलों पर पानी लेने हेतु लम्बी कतारें लगानी पड़ती हैं और पानी की आपूर्ति मात्र कुछ घण्टे ही होती है।

जलसंरक्षण के आसान तरीके

स्थान- जलगांव जिले में तालुका यावल का अदगांव, परोला तालुका का तितवी गांव और चालीसगांव तालुका का मलशेवगा गांव

उद्देश्‍य :-
कम कीमत पर घरेलू इस्तेमाल योग्य पानी उपलब्ध कराने, इसे गंदा होने से बचाने और साफ रखने के तरीकों को प्रोत्साहित करना जिसका सबसे बडा और सीधा असर बच्चों का स्वास्थ्य बेहतर रखने पर हो सके।

परिस्थिति :-