भूमिगत जल/जल स्रोतों का सदुपयोग

बरसात की माप
(गांव तितवी, तालुका परोला, जिला- जलगांव, महाराष्ट्र)
उद्देश्य:
गांववालों को बारिश की वास्तविक मात्रा और एक जल वर्ष में पानी कुल उपलब्धता के बारे में जागरुक बनाना। अडगांव (यावल तालुका), तितवी (परोला तालुका) और मालशेवगा (चालीसगांव तालुका) में रेनगॉग बनाए गए और बारिश की मात्रा जानने की प्रक्रिया शुरू की गई।

भूमिगत जल/जल स्रोतों का सदुपयोग

महाराष्ट्र में पेजल भरते लोग, फोटोः विश्वनाथमहाराष्ट्र में पेयजल भरते लोग, फोटोः विश्वनाथ वर्तमान स्रोतों की रक्षा-
( गांव- पटूरदा, तालुका संग्रामपुर, जिला-बुलढ़ाना, महाराष्ट्र)
पूर्व स्थितियां:
जल के मुख्य स्रोत कुएं सूखे और उपेक्षित थे और उनमें से कुछ कूड़ेदान में तब्दील हो गए थे।
सारांश-
स्रोत कुएं कूड़ेदान बन गए थे। कुएं के आसपास गंदगी का ढ़ेर लगा हुआ था। गांववाले इन कुओं के पास गए और वहां की गंदगी देखकर चकित रह गए। गांववालों ने कुओं को साफ़ करने के लिए साथ-साथ काम किया। एक कुएं के सफ़ाई अभियान ने दो अन्य कुओं को साफ़ करने के लिए प्रेरित किया।
बदलाव की प्रकिया:

जहर बुझा पानी

चांद नहीं यह हिडंन नदी हैचांद नहीं यह हिडंन नदी हैसंजय तिवारी/ उत्तर प्रदेश के पश्चिमी हिस्से में बहनेवाली हिडंन जब दिल्ली के पास यमुना में आकर मिलती है तो कितनों को तारती है पता नहीं लेकिन बहुतों को मारती जरूर है।

अब इस बात का दस्तावेजी प्रमाण हैं कि पिछले पांच सालों में प्रदूषित हिंडन के कारण 107 लोगों को कैंसर हुआ है। कौन हैं वो लोग जिन्होंने एक नदी को मारने का हथियार बना दिया? मेरठ के पास जयभीम नगर झोपड़पट्टी में पिछले 5 सालों में ही 124 लोग काल के गाल में समाहित हो चुके हैं। इन गरीबों का कसूर यह है कि वे मिनरल वाटर नहीं पीते। वे जो पानी भूमि के गर्भ से निकालकर पीते हैं वह इतना जहरीला है कि बचना संभव नहीं।