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प्रदूषित झील पर अदालत ने जताई नाराजगी

Source: 
जनसत्ता, 5 अक्टूबर 2015

मनोज कुमार की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में कहा गया है कि तुगलकाबाद किले के निकट प्राधिकरण की भूमि पर वन क्षेत्र है और वहाँ स्थानीय निवासी रसायन का प्रयोग करके गैरकानूनी तरीके से कारखाने चला रहे हैं और उनका प्रदूषित कचरा, विषाक्त जल जंगल में बह रहा है जिससे कृत्रिम झील बन गई है।

मिट्टी और बालू की जगह अब फ्लाईएश

Source: 
राजस्थान पत्रिका, 05 अक्टूबर 2015
उपजाऊ मिट्टी और जलीय जीवों को बचाने के लिए एनजीटी ने उठाया कदम

पर्यावरण एवं वन मन्त्रालय के विशेष सचिव शशि शेखर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, केन्द्रीय लोक निर्माण विभाग, रोड कांग्रेस, नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन और केन्द्रीय प्रदूषण नियन्त्रण मंडल के अफसरों के साथ बैठक कर (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के आदेश को लागू कराने के निर्देश भी दे चुके हैं। इसके साथ ही फ्लाई एस को निर्माण स्थल तक ले जाने में आने वाला खर्च पावर प्लांट प्रबंधन और निर्माण कार्य में जुटे ठेकेदारों को मिलकर उठाने के निर्देश दिये गये हैं।

ગ્લોબલ વોર્મિંગ - સળગતી સમસ્યા

Author: 
રૂપેશ જોષી
source: 
યોજના, જુલાઈ-૨૦૧૦
વૈજ્ઞાનિકો એવું અનુમાન કરે છે કે વર્ષ ૨૦૨૫ થી ૨૦૭૫ ની વચ્ચેના સમયગાળામાં અંગારવાયુનું પ્રમાણ ઔદ્યોગિક ક્રાંતિ પહેલા જેટલું હતું. તેનાથી બમણું થઈ જવા પામશે. આ રીતે અંગારવાયુની જમાવટથી વધારે માત્રામાં ઉષ્ણતા પૃથ્વી ઉપર રોકશે અને વૈશ્વિક તાપમાન ૧.૫ સે થી ૫.૫ સે સુધી વધી જવા પામશે. તેને લીધે બંને ધ્રુવો ઉપરનો બરફ પીગળવા માંડશે અને સમુદ્રોેની સપાટીઓ ૧ મી. થી ૩ મી. જેટલી ઊંચી આવશે અને તેના પરિણામે વિશ્વના નીચાણવાળા ભાગો જેવા કે ન્યુયોર્ક, લંડન, ટોકિયો, બાંગ્લાદેશ, લક્ષદ્વિપ અને નેધરલેન્ડ અને અન્ય વિસ્તારો પાણીમાં ડૂબી જશે.

मौसम के लिए भी खतरनाक है मोटापा

जंक फूड और मोटे बच्चेजंक फूड और मोटे बच्चेअगर आप वजन घटाने के लिए प्रेरणा की तलाश में हैं, तो इंटरनेशनल जर्नल ऑफ इपिडेमियोलॉजी के नवीनतम अंक में प्रकाशित इस रिपोर्ट के परिणामों पर नजर डालना आपके लिए फायदेमंद हो सकता है.

इसके मुताबिक अधिक वजन या मोटापे को एक पर्यावरणीय समस्या के रूप में देखना चाहिए क्योंकि इसके साथ अतिरिक्त भोजन और परिवहन उत्सर्जन की समस्या भी जुडी

कहां है हमारी ग्रीन पार्टी

सुनीता नारायणसुनीता नारायण सुनीता नारायण
इस आमचुनाव में दो सवाल ऐसे हैं जिनके बारे में कोई जिक्र नहीं हो रहा है. पहला सवाल, ग्रीन पार्टी की बात हम कब करेंगे और दूसरा सवाल क्या पर्यावरण कभी चुनावी मुद्दा बन पायेगा? दोनों ही सवालों के जवाब एक सिरे से गुंथे हुए है. भारतीय लोकतंत्र और भारतीय पर्यावरण दोनों ही ऐसे विषय हैं जिनके बारे में एक साथ सोचने का वक्त आ गया है क्योंकि दोनों के सामने एक ही प्रकार की चुनौती है.

नीरमय अल्ट्रा फिल्ट्रेशन वाटर प्यूरीफायर

नीरमय वाटर प्यूरीफायरनीरमय वाटर प्यूरीफायर

ओउम् टेक्नोलॉजीज प्रस्तुत करते हैं: नीरमय अल्ट्रा फिल्ट्रेशन वाटर प्यूरीफायर

ओउम् टेक्नोलॉजीज पर्यावरण के अनुकूल घरेलू उपकरण बनाने वाली एक कंपनी है जिसने नीरमय ब्रांड नाम से अल्ट्रा फिल्ट्रेशन वाटर प्यूरीफायर प्रस्तुत किया है। कंपनी का दावा है कि नीरमय अल्ट्रा फिल्ट्रेशन वाटर प्यूरीफायर 0.01 माइक्रोन से भी ज्यादा ठोस और बैक्टीरिया और वायरस को भी खत्म कर देता है। यह बिजली के बिना काम करता है, रखरखाव की भी बहुत कम जरूरत पड़ती है और झिल्ली भी लंबे समय तक चलती है। नीरमय अल्ट्रा फिल्ट्रेशन वाटर प्यूरीफ

भोपाल का पानी

सेहत पर भारी पानीसेहत पर भारी पानीभास्कर न्यूज/ भोपाल. राजधानी में पानी के प्रदूषण की भयावहता उजागर होने के बाद अब सरकार ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है। आवास एवं पर्यावरण मंत्री जयंत मलैया ने स्थिति पर तुरंत काबू पाने के निर्देश दिए हैं। शुक्रवार को भास्कर ने प्रदूषण नियंत्रण मंडल की रिपोर्ट के हवाले से बताया था कि राजधानी के भूमिगत तथा बाहरी जल में भारी तत्वों की उपस्थिति घातक स्तर तक पहुंच चुकी है। इसके बाद शुक्रवार को दिनभर गहमागहमी का माहौल रहा। आवास एवं पर्यावरण मंत्री ने प्रदूषण नियंत्रण मंडल के

बांधों से विकास?


-विमल भाई
एनएचपीसी कहती है कि बांध से विकास होगा तो फिर प्रश्न ये है कि पूरी जानकारी लोगों को क्यों नहीं दी जा रही है? जानकारी हिन्दी में क्यों नहीं दी जा रही है? सरकार को कहीं इस बात का डर तो नहीं है कि यदि लोग सच्चाई जान जाएंगे तो बांध का विरोध करेगें।

जल संरक्षण और अपशिष्ट जल प्रबंधन के कारपोरेटी प्रयास

चूंकि कंपनियां पानी की सबसे बड़ी उपयोगकर्ता और उत्सर्जक हैं। ऐसे में भारत में पानी और सफ़ाई की स्थिति में कंपनियों की निर्णायक भूमिका है। खासतौर इस समय की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था और औद्योगिक विकास के संदर्भ में इस पक्ष का महत्व और बढ़ गया है। कंपनियों की गतिविधियों का पर्यावरण और संसाधनों पर पड़ रहे असर की आलोचनात्मक परख के साथ-साथ यह भी ज़रूरी है कि पर्यावरण के नज़रिए से कंपनियों के ज़िम्मेदारी भरे कदमों की सराहना भी की जाए। चाहे उनकी सीमा कुछ भी हो। आगे भारत की प्रमुख घरेलू और बहुराष्ट्रीय, सरकारी और निजी कंपनियों के प्रयासों का वर्णन किया गया है।

भारत पेट्रोलियम, थाणे जिला, महाराष्ट्र: बूंद परियोजना