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तूफ़ान क्यों आते हैं

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अभिव्यक्ति हिन्दी
जब नमी से भरी हुई ढेर-सी गर्म हवा तेज़ी से ऊपर की ओर उठती है तब तूफ़ान आते हैं।

तुमने तूफ़ान की शुरुआत से पहले हवा को तेज़ होते हुए देखा होगा। जब बादल को बड़े होते जाते हैं और गहरे होते हुए आसमान में अँधेरा छाने लगता है। ये तूफ़ान के लक्षण हैं।

बादलों के अंदर पानी के कण तेज़ी से घूमते हैं और आपस में टकराते हैं, जिससे बिजली पैदा होती है। बिजली पैदा होने का काम तब-तक चलता रहता है जब तक वह बड़ी-सी चिंगारी बन कर एक बादल से दूसरे बादल तक होती हुई धरती तक ज़ोरदार चमक बन कर कौंध नहीं जाती।
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तेज चलती हवा में ठंड क्यों लगती है?

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बाल संसार
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बालसंसार.ब्लॉगस्पाट.कॉम
बच्चो, सर्दी का मौसम चल रहा है। सर्दियों में जिस दिन हवा न चल रही हो, आपने राहत महसूस की होगी। हवा न चल रही हो तो कम तापमान पर भी हमारा शरीर अधिक परेशानी नहीं मानता। अगर तेज हवा चल रही हो तो वही ठंड असहनीय लगती है। ऐसा क्यों होता है?
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क्या है बाँस?

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बाल संसार
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बच्चो, बाँस तो आप सबने अवश्य देखा होगा। नया भवन बनाने के लिए लंबे-लंबे व छोटे बाँसों का प्रयोग होता देखा होगा। हमारे घरों में रखीं अस्थाई सीढियां भी अधिकतर बाँस से ही बनी होती हैं। लेकिन हम अकसर समझ नहीं पाते कि बाँस वनस्पति की किस श्रेणी में आते हैं। बाँस के बारे में अधिकांश लोग यह सोचते हैं कि ये झाड़ी की श्रेणी में आते हैं। इसका कारण यह है कि बाँस एक स्थान पर झुंड के रूप में मिलते हैं। बाँस लंबे होते हैं इसलिए कुछ लोग समझते हैं कि ये पेड़ है। आओ आज इस अजब वनस्पति के बारे में जानें।
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मनुष्य कितनी गर्मी सहन कर सकता है?

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बाल संसार
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बालसंसार.ब्लॉगस्पाट.कॉम
मनुष्य कितनी गर्मी सह सकता है? इस प्रश्न का उत्तर भिन्न-भिन्न देशों व क्षेत्रों के लोगों के लिए अलग-अलग हो सकता है। भारत व दक्षिणी देशों के लोग जितनी गर्मी सह सकते हैं, वह ठंडे देशों के लोगों के लिए असहनीय हो सकती है। भारत में ही कई स्थानों पर तापमान 46-47 डिग्री-सेलसियस तक पहुँच जाता है। मध्य आस्ट्रेलिया का तापमान तो कई बार 50 डिग्री से. से भी अधिक हो जाता है। धरती पर सब से अधिक तापमान 57 डिग्री से. रिकार्ड किया गया है। इतना तापमान कैलिफोर्निया की ‘मौत की घाटी’ में होता है।
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आसमान में क्यों चमकती है बिजली?

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बाल संसार
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बालसंसार.ब्लॉगस्पाट.कॉम

बच्चो, आपने वर्षा से पहले या वर्षा के दौरान आसमान में बिजली चमकती तो अवश्य देखी होगी। अक्सर ही जब आकाश में बादल छा जाते हैं और तेज हवा चलती है तो बिजली चमकती है। बिजली वर्षा आने से पहले अथवा वर्षा के बीच भी चमकती हुई देखी जाती है। आओ जाने कि बिजली चमकती क्यों है?

बादलों में नमी होती है। यह नमी बादलों में जल के बहुत बारीक कणों के रूप में होती है। हवा और जलकणों के बीच घर्षण होता है। घर्षण से बिजली पैदा होती है और जलकण आवेशित हो जाते हैं यानि चार्ज हो जाते हैं। बादलों के कुछ समूह धनात्मक तो कुछ ऋणात्मक आवेशित होते हैं। धनात्मक और ऋणात्मक आवेशित बादल जब एक-दूसरे के समीप आते हैं तो टकराने से अति उच्च शक्ति की बिजली उत्पन्न होती है। इससे दोनों तरह के बादलों के बीच हवा में विद्युत-प्रवाह गतिमान हो जाता है। विद्युत-धारा के प्रवाहित होने से रोशनी की तेज चमक पैदा होती है। आकाश में यह चमक अकसर दो-तान किलोमीटर की ऊँचाई पर ही उत्पन्न होती है। इस चमक के उत्पन्न होने के बाद हमें बादलों की गरज भी सुनाई देती है। बिजली और गरज के बीच गहरा रिश्ता है। बिजली चमकने के बाद ही बादल क्यों गरजते है?

वास्तव में हवा में प्रवाहित विद्युत-धारा से बहुत अधिक गरमी पैदा होती है। हवा में गरमी आने से यह अत्याधिक तेजी से फैलती है और इसके लाखों करोड़ अणु आपस में टकराते हैं। इन अणुओं के आपस में टकराने से ही गरज की आवाज उत्पन्न होती है। प्रकाश की गति अधिक होने से बिजली की चमक हमें पहले दिखाई देती है। ध्वनि की गति प्रकाश की गति से कम होने के कारण बादलों की गरज हम तक देर से पहुँचती है।

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बादल कैसे बनते हैं?

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अभिव्यक्ति हिन्दी, 9 जनवरी 2007
बादल पानी या बर्फ़ के हज़ारों नन्हें नन्हें कणों से मिलकर बनते हैं। ये नन्हें कण इतने हल्के होते हैं कि वे हवा में आसानी से उड़ने लगते हैं।

बादल के तीन प्रमुख प्रकार होते हैं— सिरस, क्युमुलस और स्ट्रेटस। इन नामों को बादलों की प्रकृति और आकार के आधार पर रखा गया है। बहुत बार बादल मिलेजुले आकार-प्रकार के भी होते हैं। ऐसे बादलों को मिलेजुले नामों से जाना जाता है। इन प्रकारों के विषय में ठीक से जानने के लिए उन के दस नाम रखे गए हैं। ये सब नाम लैटिन भाषा में हैं।
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हवा क्यों बहती है?

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अभिव्यक्ति हिन्दी, 1 दिसंबर 2006
पृथ्वी के चारों ओर रहनेवाली हवा हमेशा चलती रहती है। गर्म हवा ऊपर उठती है और ठंडी हवा नीचे आती है। जैसे ही गर्म हवा ऊपर उठती है, उसकी खाली की हुई जगह को भरने के लिए ठंडी हवा नीचे आती है। सूर्य की गरमी से धरती और समुद्र के अलग अलग हिस्से अलग अलग समय पर गरम होते हैं। और इस तरह धरती पर हवा का बहना जारी रहता है।

हवा के बड़े हिस्से को 'एअर मास' या वायु संहिति कहते हैं। यह अपने पास स्थित धरती या समुद्र के जिस हिस्से के ऊपर से गुज़रता है उसी स्थान के तापमान के अनुसार गर्म, सूखा, ठंडा या नम हो जाता है।

जलवायु

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अभिव्यक्ति हिन्दी, 01 नवंबर 2004
मौसम के प्रकार और बनावट को जलवायु कहते हैं। किसी स्थान की जलवायु कैसी है यह इस पर निर्भर करता है कि मौसम किस तरह बदलता है और कैसा रहता है। साथ ही वह जगह समुद्र से कितनी दूर है और उसके आसपास पहाड़ हैं या जंगल या रेगिस्तान।

अलग–अलग स्थानों की विशेष जलवायु को अलग–अलग नाम भी दिए गए हैं। जैसे टुंड्रा या ध्रुवीय जलवायु जो उत्तरी ध्रुव पर आर्कटिक महासागर के आसपास होती है। यहां साल के अधिकतर समय बर्फ जमी रहती है केवल गर्मियों के दिनों में ही हल्की हरियाली देखने को मिलती है पर गर्मियां भी काफी शीतल होती हैं।

मौसम क्या है

Source: 
अभिव्यक्ति हिन्दी
मौसम धूप, हवा, बारिश और बर्फ मौसम के ही अलग अलग रूप हैं। मौसम कैसा है यह कई बातों पर निर्भर करता है—

धूप में कितनी गर्मी है।
हवा में कितना पानी है।
बादल हैं या नहीं।
हवा की गति कितनी है।
हवा की दिशा क्या है।


मौसम कैसा भी हो यह हम सबके जीवन को प्रभावित करता है इसलिए हमारे जीवन में इसका बहुत महत्व है। तभी तो मौसम का हाल हम टी वी में सुनते हैं और समाचारपत्र में भी पढ़ते हैं। इसका अध्ययन करने का काम कुछ विशेष लोग करते हैं। इन विशेषज्ञों को मौसम–वैज्ञानिक कहते हैं।

ओज़ोन की पर्त के नीचे और पृथ्वी के ऊपर चारों ओर वायुमंडल है। मौसम का आना, जाना और बदलना केवल इस वायुमंडल में ही होता है।