Latest

अपकेन्द्रीय पम्पों का प्रचालन सिद्धान्त

अगर एक बाल्टी को एक हाथ की लम्बाई पर घुमाये तो यह क्रिया उसमें भरे जल पर इतना दाब उत्पन्न कर देगी कि उसके तल में लगी टोंटी से पानी की एक धार निकलने लगेगी। एक अपकेन्द्रीय पम्प में आंतरनोदकों पर लगे वेन (vane) हाथ और रस्सी के समान ही कार्य करते हैं। पम्प का बाल्यूट बाल्टी की तरह पानी रखता है। दोनों मामलों के सिद्धान्त एक समान हैं। जैसे आतरनोदक घूमता है यह पानी को बाहरी किनारों की ओर फेंकता है। वाल्यूट के अन्दर का पानी तब तक दाब में रहता है जब तक कि यह बाहर नही आ जाता। चूषण पाइप के द्वारा पानी आंतरनोदक के मध्य मे प्रवेश करता है।

अपकेन्द्री पम्प की स्थापना

यॉंत्रिक शक्ति चालित उपकरण

यॉंत्रिक शक्ति चालित उपकरणों में विभिन्न प्रकार के पम्प आते हैं। पम्पों के प्रचालन में लगने वाले यांत्रिक सिद्धान्तों के आधार पर उनको निम्नलिखित वर्गो में बाटा जाता हैः

1- घूणी पम्प (Rotary pump)

2- ऊर्ध्वाधर टरबाइन पम्प (Vertical turbine pump)
3- निमज्जक पम्प (Submersible pump)
4- नोदक पम्प (Propeller pump)
5- प्रत्यांगामी विस्थापन पम्प (Reciprocating pump)
6- अपकेन्द्री पम्प (Centrifugal pump)
सिंचाई के प्रयोजन के लिए उपर्युक्त प्रकार के पम्पों में से विस्थापन पम्पों तथा अपकेन्द्री पम्पों का प्रयोग व्यापक रूप से किया जाता है।

पानी उठाने के उपकरण

जब पानी खेत से निचली जगह पर उपलब्ध होता है, तो उसे खेत के तल तक उठाने के लिए विभिन्न प्रकार के उपकरण प्रयुक्त किये जाते हैं। शक्ति स्रोत के आधार पर पानी उठाने वाले उपकरणों को मानव शक्ति चालित, पशु शक्ति चालित और यांत्रिक शक्ति चालित में विभाजित किया जा सकता है। नदी, भूजल और कुओं से पानी उठाने के लिये प्रयोग किये जाने वाले उपकरणो को विस्तार मे नीचे दिया गया है।
मानव शक्ति- चालित उपकरणः मानव शक्ति चालित पानी उठाने के प्रमुख उपकरण निम्नलिखित हैं:

नदी मुख अथवा लघु खाडि़यों की खोज

नदीमुख वे स्‍थान होते हैं जहां ताजे पानी की नदियां और धाराएं समुद्र के पानी से मिलती हुई महासागरों में गिरती हैं। विभिन्‍न प्रकार के पक्षी, मछली तथा अन्‍य वन्‍य जातियां इन नदी मुखों को अपना आवास बनाती हैं। इन नदी मुखों तथा इसके आसपास की भूमि पर जनता निवास करती है, मछलियां पकड़ती हैं, तैरती है और प्रकृति का आनंद उठाती है।

उड़ना

Author: 
आइजैक एसिमोव
Source: 
भारत ज्ञान विज्ञान समिति
लोग चलकर, दौड़कर, उछल-कूदकर, रेंगकर, तैरकर या पहियों को घुमाकर आगे जाते हैं। वे चाहे जो भी करें, उनका शरीर लगभग हमेशा जमीन को छूता रहता है। कोई आदमी कूदकर हवा में उड़ता है, यह केवल कुछ क्षणों के लिए होता है और फिर वह दोबारा जमीन पर आ जाता है।

यह बात सभी जीव-जंतुओं पर लागू नहीं होती। चिड़िया, चमगादड़ और कीड़े- सभी उड़ सकते हैं। उनके पंख हवा को धक्का देते हैं। जब वे उड़ते हैं, हवा उन्हें उसी तरह ऊपर उठाए रहती है, जैसे जमीन हमें उठाए रहती हैं।

उड़ने में कितनी आजादी दिखती है। तुम्हें चट्टानों और पहाड़ियों पर चढ़ना नहीं पड़ता या नदियों के जरिए तैरना नहीं पड़ता या कीचड़ में पांव धंसाने पड़ते। तुम बस साफ हवा में, जिस दिशा में चाहो बढ़ सकते हो। मुझे पक्का विश्वास है कि ऐसे मौके जरूर रहे होंगे जब तुमने चाहा होगा कि काश, तुम भी अपनी बाहें हिलाकर चिड़िया की तरह उड़ान भर सकते।

प्राचीन समय में लोगों की भी ऐसी चाह थी कि उड़ सकें और उन्होंने ऐसी कथाएं बनाई जिनमें उड़ना संभव था। उन्होंने ऐसी कालीनों की कल्पना की जो सिर्फ एक जादुई शब्द के बोलने पर उड़ सकती थीं। उन्होंने पंखों वाले घोड़ों की कहानियां कहीं जो अपने सवारों को हवा के जरिए तेजी से ले जा सकते थे।

सबसे प्रसिद्ध पुरानी कहानी लगभग 2500 साल पहले प्राचीन यूनानियों ने बनाई। उन्होंने एक चतुर आविष्कारक डेडॉलस और उसके बेटे इकारस की कथा बनाई जो क्रेट के पास एक द्वीप पर कैद थे। डेडॉलस के पास कोई नाव नहीं थी, तो उस द्वीप से निकलने के लिए उसने अपने और अपने बेटे के लिए पंख बनाए। उसने लकड़ी का एक हल्का ढांचा बनाया, उसे मोम से पोता और मोम में चिड़ियों के पर चिपका दिए। इन पंखों को ऊपर-नीचे हिलाने से वह हवा में उठकर उड़ सकता था। वह और इकारस एक साथ उड़ निकले। डेडॉलस करीब 805 किलोमीटर दूर उड़कर सिसली पहुंचा, परन्तु इकारस उड़ने का मजा लेने के लिए, बहुत ऊंचा उड़ता गया। सूर्य के ज्यादा पास पहुंचने पर गर्मी से मोम पिघलने लगा। उसके पंखों पर चिपके पर ढीले होकर गिरते गए और इकारस नीचे गिरकर मर गया।

जोड़ा सांको वाला घर

Source: 
केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान, एनसीईआरटी
यह ओडियो केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान और एनसीईआरटी द्वारा तैयार किया गया है। इसमें कक्षा-5 की पुस्तक रिमझिम में संकलित पाठ को प्रस्तुत किया गया है। पाठ का शीर्षक है- जोड़ा सांकों वाला घर जानने के लिये सुनिये.....




Program download keejiye


डाउनलोड करें





पानी रे पानी

Source: 
केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान, एनसीईआरटी
यह ओडियो केंद्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी संस्थान और एनसीईआरटी द्वारा तैयार किया गया है। इसमें कक्षा-5 की हिंदी की पुस्तक रिमझिम में संकलित अध्याय पानी रे पानी को प्रस्तुत किया गया है। बाढ़ और जल चक्र के बारे में बच्चों को सरलतम भाषा में समझाने का प्रयास किया गया है। पानी कहां से आता है और कहां जाता है जानने के लिये सुनिये.....


Program download keejiye


डाउनलोड करें



मकर संक्रांति: एक वैज्ञानिक दृष्टिकोण

Author: 
डॉ. गणेशकुमार पाठक
Source: 
अभिव्यक्ति हिन्दी, १ जनवरी २००३
भारत पर्वों एवं त्योहारों का देश है। यहाँ कोई भी महीना ऐसा नहीं हैं, जिसमें कोई न कोई त्यौहार न पड़ता हो, इसीलिए अपने देश में यह उक्ति प्रसिद्ध है कि 'सदा दीवाली साल भर, सातों बार त्यौहार'। इन्हीं त्यौहारों में मकर संक्रांति भी है, जिसकी अपनी एक अलग ही विशेषता है एवं वैज्ञानिक आधार है।

ग्रहों एवं नक्षत्रों का प्रभाव

इस खबर के स्रोत का लिंक: 
http://www.abhivyakti-hindi.org/parva/

सेहत के विरुद्ध सोडा

Author: 
अर्बुदा ओहरी
Source: 
अभिव्यक्ति हिन्दी, 9 अक्तूबर 2007
कोल्ड ड्रिंक सुपर मार्केट, सिनेमा, शॉपिंग माल, यहाँ तक कि स्कूलों में भी बहुत आसानी से नज़र आ जाने वाला पेय है। बड़ों की बात छोड़िए अब तो बच्चे भी हर ब्रांड के स्वाद को बखूबी पहचानते हैं। कोल्ड ड्रिंक एक ऐसा पेय है जो मेक्डोनल्ड, बर्गर किंग, पिज्ज़ा इत्यादि के साथ मील में भी शामिल है। बाज़ार में कार्बोनेटेड और नॉन-कार्बोनेटेड दोनों ही प्रकार के सॉफ्ट ड्रिंक खूब प्रचलित हैं। ऐसा माना जाता है कि अमेरिका वासियों की कैलोरी का सबसे बड़ा स्रोत कोल्ड ड्रिंक ही है। वहाँ अवयस्क लोग अपने शरीर को मिलने वाली 13 प्रतिशत कैलोरी कार्बोनेटेड व नॉन-कार्बोनेटेड कोल्ड ड्रिंक से ही प्राप्त करते हैं।
इस खबर के स्रोत का लिंक: 
http://www.abhivyakti-hindi.org