जल संगठनों की गतिविधियां

इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार – 2010 के लिए आवेदन आमंत्रित

Source: 
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय
वर्ष 2010 के लिए इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार के लिए (भारतीय नागरिकों/संगठनों) जिन्होंने पर्यावरण की सुरक्षा/संरक्षण के लिए विशिष्ट कार्य किए हों, से नामांकन आमंत्रित किए जाते हैं। भारत के ऐसे कोई भी नागरिक जिनके पास पर्यावरण के क्षेत्र में कम से कम 10 वर्षों का कार्य अनुभव हो (उन्हें इस अनुभव के समर्थन में प्रकाशित/फिल्ड कार्य का विवरण प्रस्तुत करना होगा)/ऐसे एनजीओ जो कम से कम पांच वर्षों से पर्यावरण के क्षेत्र में कार्यरत हों/राज्य/यूटी’ज के पर्यावरण एवं वन विभाग राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड/जिला कलक्टर/ मजिस्ट्रेट नीचे दिए गए निर्धारित प्रारुप में भारत के किसी ऐसे नागरिक/संगठन के नाम का प्रस्ताव कर सकते हैं जिनके पास पर्यावरण के क्षेत्र में कम से कम पांच वर्षों का कार्यरत अनुभव

जल सत्याग्रह पर राष्ट्रीय सम्मेलन

राष्ट्रीय सम्मेलनराष्ट्रीय सम्मेलन

25-26 जून को भोपाल में


वाटर डाइजेस्ट जो जल उद्योगों के लिए एक मीडिया कंपनी के रूप में काम कर रहा हैं। वाटर डाइजेस्ट, दैनिक भास्कर प्रकाशन समूह के सहयोग से जल पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन कर रहा हैं। इसके साथ ही भास्कर का जल सत्याग्रह अभियान अब पानी से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों और उनके हल के लिए विचार-विमर्श व सुझावों का मंच बनकर उभर रहा है। इस प्रयास को आग बढ़ाते हुए भास्कर फाउंडेशन 25-26 जून को भोपाल में जल और उसकी महत्ता पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर रहा है।

नेपाल में उठेगा नदियों के प्रदूषण से प्रभावितों का मुददा

नीर फाउन्डेशन के रमन त्यागी करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व


नेपाल इंजीनियनिंग कॉलिज द्वारा सेफ ड्रिंकिंग वाटर प्रोजेक्ट व डेवलेपमेंट पार्टनरशिप आफ हायर एजूकेशन प्रोग्राम के तहत एक तीन दिवसीय सेमीनार का आयोजन किया जा रहा है। इसमें करीब 30 देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। इस सेमीनार का विषय एप्रोप्रियेट वाटर सप्लाई शोल्यूशन फार इंफोरमल सेटिलमेंट एण्ड मारजिनालाइज्ड कम्यूनिटीज रखा गया है। यह सेमीनार 19 से 21 मई, 2010 को नेपाल की राजधानी काठमांडू के होटल हिमालय में आयोजित की जा रही है। इस सेमीनार के लिए पानी की सल्लाई, बर्बादी, देखरेख, स्वास्थ्य, सरकारी जिम्मेदारियां, कानून, पर्यावरण, नए जानकारियां तथा विश्व में सरकारी व गैर सरकारी स्तर

“किफायती, स्थाई सेनिटेशनः भारतीय अनुभव” पर राष्ट्रीय सम्मेलन

वाश संस्थानवाश संस्थानभारत में नागरिक समाज संगठनों, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय गैर सरकारी संगठनों, संयुक्त राष्ट्र के सक्रिय समर्थन और जुड़ाव के साथ, राज्य और केंद्र सरकारों के लगातार प्रयास स्वच्छता के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। हालांकि, सेनिटेशन की तरफ रुझान बढ़ रहा है फिर भी खुले में शौच मुक्त (ODF) गांवों में फिर से वही परम्परा शुरु हो रही है, बढ़ती जनसंख्या और लगातार पलायन के कारण शहरी स्लमों के बढ़ने आदि विभिन्न चुनौतियां इस क्षेत्र में बढ़ रही है जिससे स्वच्छता के स्थायी परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं। हाल में किये गए कुछ अध्ययनों से संकेत मिला है कि अगर समय पर इन चुनौतियों को संबोधित नहीं किया गया तो एशिया और अफ्रीका की अधिकांश जनता के लिये स्व

पंजाब में जल प्रदूषक यूरेनियम, आर्सेनिक, फ़्लोराइड, नाइट्रेट आदि के खतरे पर कार्यशाला

पंजाब के दक्षिण-पश्चिम मालवा इलाके में मानव स्वास्थ्य सम्बन्धी खतरों के मूल्यांकन सम्बन्धी सेमिनार (30-31 मार्च 2010, सर्किट हाउस, भटिण्डा)

पृष्ठभूमि


पंजाब इस समय एक बेहद गम्भीर पर्यावरणीय खतरे और सामूहिक (सार्वजनिक) स्वास्थ्य पर संकट का सामना कर रहा है और जीवन दाँव पर लगे हैं। जल प्रदूषक यूरेनियम, आर्सेनिक, फ़्लोराइड, नाइट्रेट आदि का यह खतरा हालांकि समूचे पंजाब पर मंडरा रहा है लेकिन पंजाब का “मालवा क्षेत्र” इससे अधिक प्रभावित होने वाला है क्योंकि इसका क्षेत्रफ़ल भी बड़ा है और इलाके में जनसंख्या भी अधिक है।