जल संगठनों की गतिविधियां
इंदिरा गांधी पर्यावरण पुरस्कार – 2010 के लिए आवेदन आमंत्रित
Source:
पर्यावरण एवं वन मंत्रालयजल सत्याग्रह पर राष्ट्रीय सम्मेलन
राष्ट्रीय सम्मेलन
25-26 जून को भोपाल में
वाटर डाइजेस्ट जो जल उद्योगों के लिए एक मीडिया कंपनी के रूप में काम कर रहा हैं। वाटर डाइजेस्ट, दैनिक भास्कर प्रकाशन समूह के सहयोग से जल पर एक राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन कर रहा हैं। इसके साथ ही भास्कर का जल सत्याग्रह अभियान अब पानी से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों और उनके हल के लिए विचार-विमर्श व सुझावों का मंच बनकर उभर रहा है। इस प्रयास को आग बढ़ाते हुए भास्कर फाउंडेशन 25-26 जून को भोपाल में जल और उसकी महत्ता पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित कर रहा है।
नेपाल में उठेगा नदियों के प्रदूषण से प्रभावितों का मुददा
नीर फाउन्डेशन के रमन त्यागी करेंगे भारत का प्रतिनिधित्व
नेपाल इंजीनियनिंग कॉलिज द्वारा सेफ ड्रिंकिंग वाटर प्रोजेक्ट व डेवलेपमेंट पार्टनरशिप आफ हायर एजूकेशन प्रोग्राम के तहत एक तीन दिवसीय सेमीनार का आयोजन किया जा रहा है। इसमें करीब 30 देशों के प्रतिनिधि भाग लेंगे। इस सेमीनार का विषय एप्रोप्रियेट वाटर सप्लाई शोल्यूशन फार इंफोरमल सेटिलमेंट एण्ड मारजिनालाइज्ड कम्यूनिटीज रखा गया है। यह सेमीनार 19 से 21 मई, 2010 को नेपाल की राजधानी काठमांडू के होटल हिमालय में आयोजित की जा रही है। इस सेमीनार के लिए पानी की सल्लाई, बर्बादी, देखरेख, स्वास्थ्य, सरकारी जिम्मेदारियां, कानून, पर्यावरण, नए जानकारियां तथा विश्व में सरकारी व गैर सरकारी स्तर
“किफायती, स्थाई सेनिटेशनः भारतीय अनुभव” पर राष्ट्रीय सम्मेलन
वाश संस्थानभारत में नागरिक समाज संगठनों, राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय गैर सरकारी संगठनों, संयुक्त राष्ट्र के सक्रिय समर्थन और जुड़ाव के साथ, राज्य और केंद्र सरकारों के लगातार प्रयास स्वच्छता के क्षेत्र में सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। हालांकि, सेनिटेशन की तरफ रुझान बढ़ रहा है फिर भी खुले में शौच मुक्त (ODF) गांवों में फिर से वही परम्परा शुरु हो रही है, बढ़ती जनसंख्या और लगातार पलायन के कारण शहरी स्लमों के बढ़ने आदि विभिन्न चुनौतियां इस क्षेत्र में बढ़ रही है जिससे स्वच्छता के स्थायी परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं। हाल में किये गए कुछ अध्ययनों से संकेत मिला है कि अगर समय पर इन चुनौतियों को संबोधित नहीं किया गया तो एशिया और अफ्रीका की अधिकांश जनता के लिये स्वपंजाब में जल प्रदूषक यूरेनियम, आर्सेनिक, फ़्लोराइड, नाइट्रेट आदि के खतरे पर कार्यशाला
पंजाब के दक्षिण-पश्चिम मालवा इलाके में मानव स्वास्थ्य सम्बन्धी खतरों के मूल्यांकन सम्बन्धी सेमिनार (30-31 मार्च 2010, सर्किट हाउस, भटिण्डा)
पंजाब इस समय एक बेहद गम्भीर पर्यावरणीय खतरे और सामूहिक (सार्वजनिक) स्वास्थ्य पर संकट का सामना कर रहा है और जीवन दाँव पर लगे हैं। जल प्रदूषक यूरेनियम, आर्सेनिक, फ़्लोराइड, नाइट्रेट आदि का यह खतरा हालांकि समूचे पंजाब पर मंडरा रहा है लेकिन पंजाब का “मालवा क्षेत्र” इससे अधिक प्रभावित होने वाला है क्योंकि इसका क्षेत्रफ़ल भी बड़ा है और इलाके में जनसंख्या भी अधिक है।
पृष्ठभूमि
पंजाब इस समय एक बेहद गम्भीर पर्यावरणीय खतरे और सामूहिक (सार्वजनिक) स्वास्थ्य पर संकट का सामना कर रहा है और जीवन दाँव पर लगे हैं। जल प्रदूषक यूरेनियम, आर्सेनिक, फ़्लोराइड, नाइट्रेट आदि का यह खतरा हालांकि समूचे पंजाब पर मंडरा रहा है लेकिन पंजाब का “मालवा क्षेत्र” इससे अधिक प्रभावित होने वाला है क्योंकि इसका क्षेत्रफ़ल भी बड़ा है और इलाके में जनसंख्या भी अधिक है।

