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जल संगठनों की गतिविधियां

भारत में भी बड़े पैमाने पर काम करेगा ‘वी आर वाटर फाउंडेशन’

Source: 
वी आर वाटर फाउंडेशन

वी आर वाटर फाउंडेशनवी आर वाटर फाउंडेशनपानी और स्वच्छता पर वैश्विक स्तर पर काम करने वाला ‘वी आर वाटर फाउंडेशन’ भारत में व्यापक स्तर पर काम करने की योजना बना रहा है। इसके लिये फाउंडेशन के बैनर तले भारत में अलग चैप्टर शुरू किया जाएगा।

आगामी 26 जुलाई को नई दिल्ली में केन्द्रीय ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पेयजल व स्वच्छता मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर की मौजूदगी में इसकी औपचारिक घोषणा की जाएगी। कार्यक्रम में रोका बाथरूम्स प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर के. ई. रंगनाथन और वी आर वाटर फाउंडेशन के जेवियर टोरस भी उपस्थित रहेंगे।

गौरतलब हो कि फाउंडेशन की स्थापना वर्ष 2010 में रोका बाथरूम प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड ने अपनी सीएसआर एक्टिविटी के लिये की थी।

आमंत्रण - ग्‍यारहवाँ राष्‍ट्रीय मीडि‍या संवाद

Source: 
विकास संवाद

विषय - मीडि‍या, बच्‍चे और असहि‍ष्‍णुता
दिनांक - 18-19-20 अगस्‍त, 2017
स्थान - ओरछा, मध्य प्रदेश


मीडिया के साथियों के साथ बैठकर कुछ महत्त्‍वपूर्ण मुद्दों पर नया जानने, आपसी समझ बनाने, एक-दूसरे के विचारों को समझने, अपने रोजाना के काम-काज से हटकर मैदानी इलाकों के आम लोगों की जिन्दगी में झाँकने और विकास के तमाम आयामों पर एक बेहतर संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से पि‍छले दस सालों से यह कोशिश जारी है। हर बार समाज को मथने वाला कोई विषय होता है, जिस पर हम गहराई से संवाद करने का प्रयास करते हैं।आपको विकास संवाद राष्‍ट्रीय मीडिया संवाद के ग्‍यारहवें साल का आमंत्रण सौंपते हुए बेहद खुशी हो रही है। आपके संग-साथ से ही यह सफर निरन्तर जारी है और हम सब मिलकर इसे और बेहतर बनाकर इसकी सार्थकता को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।

मीडिया के साथियों के साथ बैठकर कुछ महत्त्‍वपूर्ण मुद्दों पर नया जानने, आपसी समझ बनाने, एक-दूसरे के विचारों को समझने, अपने रोजाना के काम-काज से हटकर मैदानी इलाकों के आम लोगों की जिन्दगी में झाँकने और विकास के तमाम आयामों पर एक बेहतर संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से पि‍छले दस सालों से यह कोशिश जारी है। हर बार समाज को मथने वाला कोई विषय होता है, जिस पर हम गहराई से संवाद करने का प्रयास करते हैं।

गैर सरकारी संगठनों एवं मीडिया कर्मियों के लिये दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम

Source: 
केन्द्रीय जल आयोग

तारिख - 31 जुलाई - 01 अगस्त 2017
स्थान - राष्ट्रीय जल अकादमी, केन्द्रीय जल आयोग, पुणे


राष्ट्रीय जल अकादमी में “Training-Cum-Workshop on Water Resources Management” विषय पर 31 july – 01 August 2017 के दौरान गैर सरकारी संगठनों और मीडिया कर्मियों के लिये दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यक्रम सम्बन्धी प्रमुख बिन्दुएँ पृष्ठांकित (overleaf) हैं।

अनुरोध है कि आपके संगठन में जल क्षेत्र पर कार्य करने वाले कर्मियों को इस कार्यक्रम से लाभ उठाने हेतु यथाशीघ्र नामित करने का कष्ट करें। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने हेतु कोई भी प्रोग्राम शुल्क नहीं है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लेने की जानकारी संलग्न विवरणिका (program brochure, also available at our website) में दी गई है।

29 मई को महानदी जलाधिकार सम्मेलन


लू और कुछ अन्य परिस्थितियों के कारण महानदी जलाधिकार सम्मेलन 29 मई को नहीं होगा। आयोजकों ने जल्द ही नई तिथि तय कर सूचित करने की जानकारी दी है।

तिथि : 29 मई, 2017
समय : प्रातः 10 बजे से दोपहर बाद 03 बजे तक
स्थान : इन्सटीट्युशन आॅफ इंजीनियर्स (रेडक्रास भवन के सामने), सचिवालय मार्ग, भुवनेश्वर, उड़ीसा
आयोजक : महानदी बचाओ, आजीविका बचाओ अभियान

विषय : महानदी एवं अन्य नदी बेसिन में जलाधिकार

एक परिचय महानदी


. महानदी यानी महान नदी। महानदी, मध्य-पूर्वी भारत की सबसे खास नदियों में से एक है। महानदी, कई पहाड़ी और मैदानी प्रवाहों से मिलकर बनी उत्तर प्रवाहिणी नदी है। महानदी की यात्रा छत्तीसगढ़ से फरसिया गाँव से शुरू होकर उड़ीसा के रास्ते बंगाल की घाटी में प्रवेश करती है। प्रवेश से पूर्व, ब्राह्मणी नदी के साथ मिलकर विशाल डेल्टा बनाती है। महानदी का यात्रामार्ग 858 किलोमीटर लंबा है। इस बीच महानदी, कई नदियों और कटक, संबलपुर जैसे प्राचीन व्यापारिक नगरों से संगम करती चलती है।

एक समय तक महानदी, अपने मूल स्रोत से करीब 190 किलोमीटर तक पारम्परिक नौवाहन के लिये विख्यात थी। हीराकुण्ड बाँध के निर्माण ने यह सुविधा समाप्त की। हीराकुण्ड बाँध निर्माण से पहले महानदी भारतीय उपमहाद्वीप में सबसे अधिक गाद लेकर चलने वाली नदियों में से एक थी।

बिहार गंगा गाद और अविरलता पर दिल्ली में सेमिनार


दिनांक : 18-19 मई, 2017
समय : प्रातः 09 बजे से 05 पाँच बजे सायं तक
स्थान : इण्डिया इंटरनेशनल सेंटर, लोदी एस्टेट, नई दिल्ली -110003

सेमिनार का विषय : बिहार में गंगा की अविरलता में बाधक गाद : समस्या और समाधान

आयोजक : जल संसाधन विभाग, बिहार शासन, पटना

गंगा के पास भले ही 'राष्ट्रीय नदी' और 'जीवित इकाई' का दर्जा हो, लेकिन उसकी सांस को बाधित करने के प्रयास अभी रुके नहीं हैं। उत्तराखण्ड की गंगा के गले के लगी फाँसों से हम परिचित ही हैं। हल्दिया से इलाहाबाद तक राष्ट्रीय जलमार्ग - एक परियोजना की ज़िद ठाने केन्द्र सरकार, एक ओर गंगा की कृत्रिम ड्रेजिंग यानी उडाही करके नदी की गाद से छेड़-छाड़ कर रही है, तो दूसरी ओर टर्मिनल, जलपोतों की मरम्मत आदि के लिये निर्माण के जरिए गंगा नदी भूमि पर बाधायें खड़ी करने जा रही है। इस पूरे परिदृश्य के बीच में फरक्का बैराज दुष्परिणाम के पीड़ितों ने अवाज उठानी शुरू कर दी है। खासकर, पश्चिम बंगाल के माल्दा टाउन और मुर्शिदाबाद ज़िले कटान से बुरी तरह प्रभावित हैं।