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जल संगठनों की गतिविधियां

नर्मदा कार्ययोजना: विशेषज्ञ राय हेतु 08 को सेमिनार


दिनांक: 08 मई, 2017
स्थान: भोपाल, मध्य प्रदेश
आयोजक: मध्य प्रदेश शासन

सेमिनार का विषय: नदी जल और पर्यावरण संरक्षण

मध्य प्रदेश शासन के योजना, आर्थिकी एवं सांख्यिकी विभाग के अपर मुख्य सचिव श्री दीपक खाण्डेकर से प्राप्त आमंत्रण पत्रानुसार, शासन 08 मई को भोपाल में नदी जल और पर्यावरण संरक्षण विषय पर एक सेमिनार आयोजित कर रहा है। सेमिनार का उद्देश्य, नर्मदा नदी संरक्षण एवं संवर्द्धन कार्यों को अधिक प्रभावी बनाने हेतु विशेषज्ञों के अनुभवों का लाभ लेना है। इसी उद्देश्य से सेमिनार में चर्चा हेतु विषयवार पाँच समूहों का गठन किया गया है:

सामाजिक एवं पर्यावरणीय न्याय नेतृत्व निर्माण शिविर


तिथि : 01 से 03 अप्रैल, 2017
स्थान : तरुण आश्रम, भीकमपुरा, तहसील: थानागाजी, जिला : अलवर ( राजस्थान )
आयोजक: तरुण भारत संघ, अलवर


पिछले 42 वर्षाें से जल, जंगल, जमीन, जंगली जानवर, जंगलवासी को बचाने और सम्बन्धित समाज को स्वावलम्बी बनाने के काम लगा है। तरुण भारत संघ के भीकमपुरा, अलवर स्थित तरुण आश्रम में आयोजित प्रथम सामाजिक एवं पर्यावरणीय न्याय नेतृत्व निर्माण शिविर में भारत के सभी राज्यों से करीब 170 चुनिन्दा कार्यकर्ता सम्मिलित हुए थे। शिविर में मेधा पाटकर, पीवी राजगोपाल, सुमन शाह, बी आर पाटिल और स्वयं जलपुरुष राजेन्द्र सिंह जैसे नामचीन लोगों ने अपने अनुभव साझा किये थे। प्राकृतिक सम्पदाओं का शोषण और अतिक्रमण जितनी तेजी से बढ़ रहा है, इसकी चिन्ता भी इतनी ही तेजी से बढ़ रही है। यह चिन्ता, बेचैनी पैदा करने की हद तक आगे आती दिखाई तो दे रही है, लेकिन संकट की तेजी के अनुपात में समाधान व शान्ति के संगठित प्रयासों की गति अभी काफी सुस्त है।

प्राप्त आमंत्रण पत्र में उल्लिखित इस निष्कर्ष के आलोक में तरुण भारत संघ ने 01 अप्रैल से 03 अप्रैल, 2017 के बीच सामाजिक एवं पर्यावरणीय न्याय नेतृत्व निर्माण शिविर की जानकारी दी है। तरुण भारत संघ ने भीमराव अम्बेडकर के जन्मदिन को आधार बनाकर गत वर्ष एक ऐसा ही शिविर 09 अप्रैल से 14 अप्रैल के बीच आयोजित किया था। प्रस्तावित शिविर, इस शृंखला का दूसरा शिविर है।

निमंत्रण - जल क्रान्ति अभियान

Author: 
सुशील कुमार

जल संसाधन नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय, भारत सरकार
तिथि- 07 मार्च 2017
समय- सायं 3.00 से 5.00 बजे तक
स्थान- मावलंकर हाल, कांस्टीट्यूशन क्लब, रफी मार्ग, नई दिल्ली


जल क्रान्ति अभियानजल क्रान्ति अभियानजल संसाधन नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से जल क्रान्ति अभियान से जुड़े सभी गैर सरकारी संगठनों एवं जल के मुद्दे पर काम करने वाले समुदायों का सम्मेलन आयोजित किया गया है। इस सम्मेलन में देश में जल जागरूकता बढ़ाने, नदियों में बहाव की निगरानी करने और पानी को प्रदूषण से बचाने जैसी कई मुख्य मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

विशेष सूचना


सभी गैर सरकारी संगठनों एंव समुदायों से निवेदन है कि कार्यक्रम में शामिल होने से पूर्व इसके लिये आवेदन करें। तथा इसमें सम्मिलित होने का प्रबन्ध वे स्वयं करें।

12 मार्च को हिमालय-गंगा बचाओ विमर्श


अवसर : दाण्डी मार्च वर्षगाँठ
स्थान : गाँधी दर्शन, राजघाट, नई दिल्ली
तिथि : 12 मार्च, 2017
समय : सुबह 10.30-4.00 बजे तक
आयोजक : सेव गंगा मूवमेंट (पुणे) और गाँधी दर्शन एवं स्मृति समिति, नई दिल्ली


यह विमर्श ऐसे समय में हो रहा है, जहाँ एक तरफ कानपुर में गंगाजल में लाल और सफेद रंग के कीडे़ पाये जाने से नई चुनौती पेश हो गई है, तो दूसरी ओर बिहार मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने पटना में एक अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन कर गंगा में प्रस्तावित बैराजों के खिलाफ मुहिम का ऐलान कर दिया है। भागलपुर से पटना के बीच बेतहाशा बढ़ती गाद के दुष्परिणाम से बचने के लिये फरक्का बैराज को तोडे़ जाने की माँग वह पहले ही कर चुके हैं।

गंगा-गांधी संयोग


भारत की आजादी के लिये जन-जनार्दन को एकजुट करने और ब्रिटिश सत्ता को जनता की सत्ता की ताकत बताने के लिये महात्मा गाँधी ने कभी दाण्डी मार्च किया था। आने वाले 12 मार्च, को दाण्डी मार्च की वर्षगाँठ है। आयोजकों ने इस मौके को जल सत्याग्रह दिवस के रूप में मनाने का आह्वान किया है।

''गंगा, सभी नदियों और जलसंचरनाओं की प्रतीक है; गिरिराज हिमालय, सभी पर्वतों, जंगलों और वन्यजीवन का और गाँधी, सत्य और अहिंसा की संस्कृति का।'' - प्रेषित विस्तृत आमंत्रण पत्र में गंगा, हिमालय और गाँधी को इन शब्दों में एक साथ जोड़ने की कोशिश करते हुए श्रीमती रमा राउत ने खुले मन के रचनात्मक समालोचना विमर्श की इच्छा जताई है। श्रीमती रमा राउत, भारत सरकार की गंगा पुनरुद्धार विशेषज्ञ सलाहकार समिति की सदस्य होने के साथ-साथ 'सेव गंगा मूवमेंट' की संस्थापक-संयोजक हैं।

कार्यक्रम - भारत की जल संस्कृति

Author: 
सुशील कुमार

तारीख - 18 और 19 मई 2017
स्थान - गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज, सजौली, शिमला- 171006


भारत की जल संस्कृतिभारत की जल संस्कृतिजल हमारे जीवन का सबसे अनिवार्य तत्व है। पृथ्वी के सन्तुलन को बनाए रखने में भी इसका सर्वाधिक योगदान है। जीवन का उद्भव और विकास जल में ही हुआ है। हमारी सभ्यताएँ और संस्कृतियाँ नदियों के किनारे ही जन्मी और विकसित हुई हैं। भारत में सभी जल संसाधनों को पवित्र माना जाता है। जल की गुणवत्ता के कारण ही धार्मिक ग्रन्थों जैसे- वेद, पुराण और उपनिषद में इसके संरक्षण के लिये ‘जल नीति’ वर्णन मिलता है। योजनाबद्ध तरीके से जल के उपयोग और प्रबन्धन का तरीका बताया जाता है जिससे इसे संरक्षित किया जा सके और सही उपयोग हो। नदियाँ हमारी संस्कृति, सभ्यता, संगीत, कला, साहित्य, और वास्तुकला की केन्द्रीय भूमिका में शामिल रही हैं।

पंजीकरण शुल्क (प्रति व्यक्ति)
1. भारतीय नागरिक- 2500 रुपए
2. विद्यार्थी- 1000 रुपए
3. विदेशी नागिरक- 150 अमेरिकी डॉलर
4. स्थानीय शिमलावासी- 1500 रुपए