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जल संगठनों की गतिविधियां

INVITATION: Launching of India Water Portal Hindi And discussion

प्रिय मित्र
यह सूचित करने में हमें अति हर्ष का अनुभव हो रहा है कि इंडिया वाटर पोर्टल के हिन्दी संस्करण hindi.indiawaterportal.org की शुरुआत हो रही है।

जल विवादों पर फिल्मोत्सव

“Peace and Conflict Resolution: Reflections through Cinema”

शीर्षक से मेटा- कल्चर डायलोजिक्स, बंगलौर फिल्म सोसायटी, एलायंस फ्रेंकैस डि बैंगलोर और मैक्समूलर भवन एक सप्ताह तक चलने वाले फिल्मोत्सव का आयोजन कर रहे हैं। यह उत्सव 13-19 अक्टूबर, 2008 को बंगलौर में आयोजित किया जा रहा है। अर्घ्यम्, सिटिजन मैटर्स और विस्तार के सहयोग से उत्सव का आयोजन किया जा रहा है।


स्थान- एलायंस फ्रेंकैस डि बैंगलोर, न.-108. थिमैया रोड, वसन्त नगर, बंगलौर।


मुफ्त प्रवेश


अधिक जानकारी के लिए देखें-
http://conflicts.indiawaterportal.org/?q=node/55

इंटेग्रेटिड वाटर एण्ड वेस्ट वाटर मेनेजमेंट पर राष्ट्रीय कॉंफ्रेंस

इंटेग्रेटिड वाटर एण्ड वेस्ट वाटर मेनेजमेंट पर राष्ट्रीय कॉंफ्रेंस (IWMA 2008)
(45वीं वार्षिक कॉंफ्रेंस IAEM )
डॉ. Triguna सेन सभागार, एलुमिनि एसोसिएशन हॉल
जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता - 700 032
इंडियन एसोसिएशन फॉर इंवायर्नमेंटल मेनेजमेंट (IAEM)
NEERI, नागपुर के एसोसिएशन में
स्कूल ऑफ वाटर रिसोर्स इंजीनियरिंग (SWRE) जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता
द्वारा आयोजित

सेनिटेशन पर तीसरा दक्षिण एशियाई सम्मेलन

सेनिटेशन पर तीसरा दक्षिण एशियाई सम्मेलनसेनिटेशन पर तीसरा दक्षिण एशियाई सम्मेलनसेनिटेशन पर तीसरा दक्षिण एशियाई सम्मेलन, नई दिल्ली में 16 से 21 नवम्बर 2008 को , आयोजित किया जा रहा है. 18-21 नवंबर 2008 के मुख्य सम्मेलन से पहले दो दिन (16-17 नवम्बर 2008) को क्षेत्र दौरों की योजना बनाई गई है.

कागज़ात जमा करने के बारे में अधिक जानकारी यहाँ प्राप्त की जा सकती है: पेपर प्रस्तुति विवरण

पेपर जमा करने की अंतिम तिथि 10 अक्टूबर तक के लिए बढ़ा दी गई है

जलबिरादरी का आमंत्रण

जलबिरादरी

आमंत्रण

हाल के वर्षों में भारत की नदियों पर नित नए संकट से आप परिचित हैं। जब तक हमारा समाज नदी के किनारे बैठकर नदी की चिन्ता करता था.... उसकी नीति व निगरानी की व्यवस्था करता था; तब तक हमारी नदियां पूरी तरह शुद्ध, सदानीरा व अविरल बनी रहीं। अच्छी ताकतों द्वारा एकजुट होकर पानी.... प्रकृति के प्रति हो रहे बुरे कामों को रोकने की साझा कोशिश को ही भारत की पुरातन प्रकृति प्रबन्धन व्यवस्था में कुंभ का नाम दिया गया। कुंभ का मूल अभिप्राय व अवधारणा यही है।