जल संगठनों की गतिविधियां

सुलभ द्वारा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का जन्म-दिवस-समारोह


. 17 सितम्बर, 2016
समय : 11:30 बजे पूर्वाह्न

समारोह-स्थल


मावलंकर ऑडिटोरियम
रफी मार्ग, नई दिल्ली-110 001

उद्घाटनकर्ता


माननीय श्री मनोज सिन्हा
दूरसंचार राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं रेल राज्यमंत्री, भारत सरकार

अध्यक्षता


माननीय श्री तरुण विजय
विचारक, चिंतक, वरिष्ठ पत्रकार एवं पूर्व सांसद

मुख्य अतिथि


माननीय स्वामी श्री अवधेशानंद गिरि महाराज
आचार्य महामंडलेश्वर, जूना अखाड़ा

विशिष्ट अतिथि


माननीय श्री हेमू गाँधी
प्रबंध निदेशक, गाँधी कॉर्पोरेशन, अहमदाबाद

नीर-नारी-नदी-सम्मेलन

Author: 
इंडिया वाटर पोर्टल (हिंदी)

दिनांक :- 22-23 सितम्बर 2016
स्थान :- बाल भवन नई दिल्ली



बाढ़ और सुखाड़ साथ-साथ भारत के हर कोने में दिखाई दे रहे हैं। पिछले सौ वर्षों में भूमि, वनों का कटाव, नदियों में मिट्टी का जमाव, बाढ़ और सुखाड़ पैदा कर रहा है। वहीं दूसरी तरफ लगातार तापमान में वृद्धि हो रही है। परिणामस्वरूप धरती को बुखार चढ़ रहा है और मौसम का मिजाज बिगड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन का गहरा प्रभाव हमारे जीवन पर होता जा रहा है। हमारी आर्थिकी, भौतिकी संस्कृति और आध्यात्मिकता का स्वरूप बदल रहा है जो हमें पराधीनता की तरफ ले जा रहा है।

हमारी सारी छोटी नदियां सूख रही हैं और बड़ी नदियां गन्दे नाले बन रही है। आबादी के बहुत बड़े हिस्से को जीवन जीने के लिये शुद्ध पेयजल प्राप्त नहीं हो रहा है। जबकि जीवन को हमारी संवैधानिक व्यवस्था में सुरक्षा प्रदान करना सरकार की जिम्मेदारी है। इसलिए जल सुरक्षा अधिकार के लिये जनता हर जगह लगातार मांग कर रही है लेकिन सरकार जनता की आवाज को अनसुना करके अपनी आँख और कान बंद कर के विकास के बड़े नारे लगा रही है।

आज विकास नें मानवता और प्रकृति के बीच दूरियाँ पैदा करके विस्थापन विकृति और विनाश का रास्ता पकड़ा है। इसलिए अब बेमौसम वर्षा, ओले पड़ना ग्लेशियर का पिघलना और समुद्री जलस्तर का ऊपर उठना तेजी से आरम्भ हो गया है। उत्तरी पूर्वी राज्यों में हाइड्रोपॉवर के लिये नदियों की हत्या हो रही है। उड़ीसा, बिहार, महाराष्ट्र, म.प्र., उ.प्र., पश्चिम बंगाल, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, उत्तराखण्ड इन सभी राज्यों में बाढ़ और सुखाड़ एक साथ दिखाई दे रही है। इसको रोकने के लिये भारत की स्वैच्छिक संस्थाओं ने तथा देश भर में चल रहे सामाजिक एवं पर्यावरणीय आन्दोलनों ने रचनात्मक कार्य करके बाढ़ और सुखाड़ का इलाज करके दिखाया है लेकिन सरकारें उनसे सीख नहीं ले रही हैं। बल्कि पश्चिमी देशों की विनाशकारी विकास से सीख लेकर विनाश के रास्ते पर चलकर देश को पर्यावरणीय संकट में धकेल रही है।

भगीरथ प्रयास सम्मान

Source: 
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)

भगीरथ प्रयास सम्मान की स्थापना वर्ष 2014 में की गई थी। इसका उद्देश्य ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करना है जो नदियों के संरक्षण को लेकर काम कर रहे हैं। इंटेक, सैनड्रप, टॉक्सिक्स लिंक, पीस इंस्टीट्यूट चैरिटेबल ट्रस्ट और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इण्डिया द्वारा संयुक्त रूप से यह सम्मान दिया जाता है। असल में पानी के संरक्षण को लेकर काम करने वालों को तो कई तरह के पुरस्कार दिये जाते हैं लेकिन नदियों पर काम करने वालों को पुरस्कार नहीं दिया जाता था। पेयजल के लिये नदी की दिशा मोड़ने, भूगर्भ और सतही पानी के अन्धाधुन्ध इस्तेमाल, उद्योगों और शहरी इस्तेमाल के लिये बेतहाशा पानी के इस्तेमाल के कारण भारत की नदियों पर बहुत प्रभाव पड़ा है। इससे जैव विविधता भी प्रभावित हुई है। देश में 14 बड़ी, 42 मध्यम और 55 छोटी नदियाँ हैं।

नदियों को बचाने के प्रयास के तहत इंटेक, सैनड्रप, टॉक्सिक्स लिंक, पीस इंस्टीट्यूट चैरिटेबल ट्रस्ट और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ-इण्डिया ने वर्ष 2014 में इण्डिया रीवर्स वीक शुरू किया था। इस कार्यक्रम का उद्देश्य था नदियों को लेकर काम करने वाले लोगों और संस्थाअों को एक प्लेटफॉर्म पर लाना और नदियों को बचाने के लिये नीतियों पर काम करना।

सम्भवतः यह अपने तरह का एक मात्र कार्यक्रम है जिसमें नदियों को बचाने के मुद्दे पर काम किया जाता है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य नदियों को बचाने की दिशा में किये जा रहे स्थानीय प्रयासों को पहचानकर उन्हें प्रोत्साहित करना भी है।

एक्सक्रीटा फ्लो डायग्राम बनाने की ट्रेनिंग

Source: 
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)

दिनांक- 07-08 सितम्बर 2016
स्थान- विज्ञान एवं पर्यावरण केन्द्र, नई दिल्ली
भाषा- अंग्रेजी


सेंटर अॉफ साइंस एंड एनवायरमेंट बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन से ग्रांट प्राप्त और दूसरे सेक्टरों के लोगों के लिये “एक्स्क्रीटा फ्लो डायग्राम (शिट फ्लो डायग्राम) की तैयारी” पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने जा रहा है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिये 20 सीटें हैं और प्रतिभागियों का चयन पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर किया जाएगा। कार्यक्रम की पूरी जानकारी निम्नलिखित वेबसाइट से प्राप्त की जा सकती है -

http://cseindia.org

उद्देश्य


शहरों में स्वच्छता के लिये योजना तैयार करने में शिट फ्लो डायग्राम एक महत्त्वपूर्ण साधन बनकर उभर रहा है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य एएफडी प्रमोशन इनिशिएटिव द्वारा तैयार किये गए इस साधन से प्रतिभागियों को लैस करना है।

फोटोग्राफी पर 5 दिवसीय वर्कशॉप

Source: 
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)

स्थान - सम्भावना इंस्टीट्यूट, कांगड़ा
तारीख - 1-5 अक्टूबर 2016


समाजिक मुद्दों पर काम कर रहे फोटोग्राफरों, कार्यकर्ताअों और शोधकर्ताअों के लिये सम्भावना इंस्टीट्यूट 1-5 अक्टूबर 2016 तक 5 दिवसीय फोटोग्राफी कार्यशाला (वर्कशॉप) आयोजित करने जा रहा है। कार्यशाला का उद्देश्य सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग और दस्तावेजीकरण को नई विजुअल मीडिया द्वारा प्रभावी तरीके से पेश करने की तकनीक सिखाना है ताकि प्रभावित लोगों, आम आदमी, नीति निर्माताओं, राजनीतिज्ञों और नौकरशाहों तक इसे प्रभावशाली तरीके से पहुँचाया जा सके।

कार्यशाला का फोकस तकनीक/रणनीति और परिप्रेक्ष्य पर होगा। इसमें हिस्सा लेने वालों के लिये कई तरह के लेक्चर, सामूहिक संवाद, मैराथन सत्र होंगे जिसमें प्रतिभागियों और विशेषज्ञों के बीच सीधा संवाद होगा। फोटोग्राफरों पर वीडियो डॉक्यूमेंट्री और फोटोग्राफी अप्रोच कार्यशाला का हिस्सा होंगे।