जल संगठनों की गतिविधियां

जनजातीय जीवन पर केन्द्रित छायांकन प्रतियोगिता प्रतिबिम्ब 2016

Source: 
आदिम जाति कल्याण विभाग, 3 मार्च, 2016
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अपने कैमरे से जनजातीय जीवन के झिलमिल रंगों को

विषय
1. जीवनशैली एवं संस्कार
2. पर्व-उत्सव एवं अनुष्ठान
3. नृत्य, परिधान एवं अलंकार

प्रतियोगिता के लिये बहुरंगी जनजातीय जीवन के यादगार फोटोग्राफ खींचकर 22 मार्च 2016 तक नीचे लिखे वन्या के पते पर भेजें

1. प्रत्येक विषय के अन्तर्गत तीन पुरस्कार दिये जाएँगे : प्रथम रुपए 51,000, द्वितीय-रुपए 21,000 एवं तृतीय-रुपए 11,000।
2. यह प्रतियोगिता निःशुल्क है।
3. छायाकार की आयु 21 वर्ष से कम नहीं हो।
4. आदिम जाति कल्याण विभाग तथा उसके अधीनस्थ कार्यालयों/संस्थाओं के कर्मचारियों को छोड़कर प्रतियोगिता सभी के लिये खुली है।
5. छायाचित्र मौलिक हो। छायाचित्र 10 इंच x 18 इंच आकार से कम न हो। छायाकार अधिकतम तीन प्रविष्टियाँ भेज सकते हैं।
6. प्रत्येक प्रविष्ट (छायाचित्र) के पीछे बड़े अक्षरों में छायाकर का नाम, पता, दूरभाष. शीर्षक एवं प्रविष्ट के सम्बन्ध में तकनीकी जानकारी कैमरा, लैंस फिल्म डिजिटल/ऑप्टिकल का उल्लेख हो। साथ ही छायाकार अपना बायोडाटा एवं जन्मतिथि सम्बन्धी प्रमाणपत्र अथवा शपथ-पत्र संलग्न करें। छायाचित्र की सी.डी. भी संलग्न कर भेजें। बिना सी.डी. के छायाचित्रों की प्रविष्ट पर विचार नहीं होगा।
7. प्रतियोगिता हेतु पूर्व में पुरस्कृत/विक्रीत छायाचित्र मान्य नहीं होंगे।
8. वन्या द्वारा आयोजित छायांकन प्रतियोगिता में पूर्व में भेजे गए छायाचित्रों को पुनः भेंजे।
9. छायाचित्र व्यक्तिगत रूप से अथवा रजिस्टर्ड डाक से ही भेजें। डाक/कोरियर से प्राप्त होने वाली प्रविष्टियाँ मार्ग में क्षतिग्रस्त होने पर अथवा खो जाने पर वन्या उत्तरदायी नहीं होगा।

गंगा पुनर्जीवन के लिये विकास और शोध दृष्टिकोण पर संगोष्ठी


स्थान- राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की
तिथि- 16-17 दिसम्बर 2015

आगामी 16-17 दिसम्बर 2015 को ‘जल संसाधन एवं गंगा संरक्षण मंत्रालय’ द्वारा ‘नमामि गंगे’ के तहत राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान रुड़की में दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन होने जा रहा है। जिसका मुद्दा है “गंगा पुनर्जीवन के लिये विकास और शोध दृष्टिकोण”।

भारत सरकार के नमामि गंगे कार्यक्रम को ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, रुड़की (एनआईएच) में गंगा पुनर्जीवन के लिये विकास और शोध दृष्टिकोण विषय पर गंगा संरक्षण मंत्रालय द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हितधारकों, शोधकर्ताओं, अकादमिक, प्रबन्धकों, स्वयंसेवी समूहों आदि के साथ गंगा से जुड़े विभिन्न आयामों जैसे सतत विकास, प्रबन्धन और पुनर्जीवन के विषय में बात करना है। इस कार्यक्रम में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिये कोई शुल्क नहीं है। यात्रा व्यय प्रतिभागियों को स्वयं वहन करना होगा।

गोष्ठी से सम्बन्धित अधिक जानकारी के लिये संलग्नक देखें। पंजीकरण फार्म और सूचना ब्रोशर संलग्न से डाउनलोड किया जा सकता है। जानकारी www.nih.ernet.in पर भी उपलब्ध है।

अधिक जानकारी के लिए कृपया आयोजकों से graspnih@gmail.com पर ईमेल पर भी सम्पर्क किया जा सकता है।

डॉ. एस.डी. खोबरागड़े,
वैज्ञानिक एवं कार्यक्रम सचिव

"राष्ट्रीय मीडिया कार्यशाला -2015" का आयोजन

Author: 
हिन्दी इंडिया वाटर पोर्टल
तीन वर्षों से स्पंदन संस्था द्वारा मध्यप्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद के सहयोग से मीडिया चौपाल का आयोजन किया जा रहा है। इस वर्ष यह आयोजन ‘जीवाजी विश्वविद्यालय’, ग्वालियर में होना है।

राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, भारत सरकार के सहयोग से "राष्ट्रीय मीडिया कार्यशाला -2015" का आयोजन 10-11 अक्टूबर, 2015 को हो रहा है।

वर्ष 2013 में मीडिया चौपाल का मुख्य-विषय "जन-जन के लिए मीडिया" तथा वर्ष 2014 का मुख्य विषय ‘नदी संरक्षण’ था। इस राष्ट्रीय मीडिया कार्यशाला का केन्द्रीय विषय "नदी संरक्षण एवं पुनर्जीवन" है।

वाराणसी में बनेगी गंगा पर निर्णायक रणनीति

Author: 
कुमार कृष्णन
तारीख : 10-11-12 अप्रैल 2015
स्थान : सर्वसेवा संघ, राजघाट,वाराणसी


इस अधिवेशन में गंगा मुक्ति आन्दोलन के साथ-साथ साझा संस्कृति मंच और सर्व सेवा संघ भी है। तीन दिवसीय सम्मेलन में गाँधी शान्ति प्रतिष्ठान की अध्यक्षा राधा भट्ट, स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द, सुप्रसिद्ध पत्रकार भरत झुनझुनवाला, अनिल चमड़िया, बी.डी.त्रिपाठी, प्रो. यू.के. चौधरी, राज्यसभा सदस्य अली अनवर, अनिल साहिनी, अमरनाथ भाई, वृजखंडेलवाल, जया मिश्रा, पर्यावरणविद् सुरेश भाई सहित देश के नदियों और घाटियों के संघर्ष से जुड़े लोग हिस्सा लेंगे। यह जानकारी गंगा मुक्ति आन्दोलन के अनिल प्रकाश ने दी। जमीन, खेती, ​हरियाली, जीव-जन्तुओं और पौधों सबकी हिफाज़त करती है गंगा। हमारे मछुआरे, किसान, सब्जी उत्पादक और गंगा बेसिन के किसानों का जीना मरना गंगा के साथ है। अपनी आजीविका के लिए गंगा पर आश्रित है। इसके पास सदियों से इंसानी तजुर्बा है। आज हिमालय से लेकर गंगा सागर तक पूरी गंगा बेसिन संकटग्रस्त है।

दसियों करोड़ लोगों की जीविका, उनका जीवन तथा जीव-जन्तुओं और वनस्पतियों तक के अस्तित्व पर खतरा मँडराने लगा है। गंगा की समस्या के समाधान की अब तक की कोशिशें ही उसकी बर्बादी और तबाही का सबब बनती जा रही हैं। गंगा के ज्वलन्त सवालों को लेकर 10-11-12 अप्रैल 2015 सर्वसेवा संघ, राजघाट, वाराणसी में गंगा मुक्ति आन्दोलन का वाराणसी सम्मेलन आयोजित किया गया है।

डॉक्टर तलाशेंगे स्केलेटल फ्लोरोसिस के रोगियों का निदान

Author: 
पुष्यमित्र
स्केलेटल फ्लोरोसिस के मरीजों के लिए उम्मीद की नयी रोशनी सामने आयी है। गया में राज्य भर के हड्डी रोग विशेषज्ञ एकजुट होकर इस मसले पर विचार-विमर्श करेंगे। यह कांफ्रेंस बोध गया में 13-15 फरवरी के बीच होगा। यह जानकारी कांफ्रेंस की स्वागत समिति के अध्यक्ष डॉ फरहत हुसैन और आयोजन सचिव डॉ प्रकाश सिंह ने दी। उन्होंने बताया कि इस कांफ्रेस में नेशनल ऑर्थोपेडिक एसोसियेशन के कम से कम पांच पूर्व सचिव भाग लेंगे।

स्केलेटल फ्लोरोसिस पर बेहतर उपाय की तलाश
उन दोनों ने बताया कि इस कांफ्रेंस में हड्डियों से संबंधित विकार खास तौर पर विकलांगता के उपायों पर विचार किया जायेगा। यह भी जानने की कोशिश की जायेगी कि क्या किसी तरह की सर्जिकल इंटरवेंशन के जरिये कोई समाधान निकाला जा सकता है, साथ ही इस संबंध में किस तरह के मेडिकल एजुकेशन प्रोग्राम चलाये जा सकते हैं इस पर भी विचार किया जायेगा। बिहार के कई गांवों के पानी में फ्लोराइड की अधिक मात्रा होने से लोग स्थायी विकलांगता के शिकार हो गये हैं। उम्मीद है कि इस कांफ्रेंस में उनके उपचार का कोई तरीका निकल पाये।

डॉ. हुसैन और डॉ. सिंह कहते हैं कि हालांकि राज्य के फ्लोराइड प्रभावित गांवों में राहत पहुंचाना सरकार की जिम्मेदारी है, मगर मेडिकल बिरादरी इस तरह की जिम्मेदारी उठाने में संकोच नहीं करती है। डॉ. द्वय ने माना कि उन इलाकों में या तो पेयजल को फ्लोराइड मुक्त किया गया है या लोग बड़े पैमाने पर पलायन कर रहे हैं। पेयजल को फ्लोराइड मुक्त करना बहुत महंगा उपाय है, लिहाजा गांव के लोग लाचार होकर पलायन कर जाते हैं।

तीन दिन का होगा सेमिनार