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जल संगठनों की गतिविधियां

आमंत्रण : आठवाँ मीडिया सम्मेलन

source: 
विकास संवाद
साथियों
विकास और जनसरोकार के मुद्दों पर बातचीत का सिलसिला साल-दर-साल आगे बढ़ता ही जा रहा है। हालाँकि इस बार हम यह राष्ट्रीय सम्मेलन अपने तय समय से थोडा देर से करने जा रहे हैं, लेकिन कई बार मार्च में संसद और राज्य विधानसभाओं के सत्र और बजट की आपाधापी में फंसने के कारण बहुत सारे साथी आ नहीं पाते थे। और इस बार तो थे चुनाव और उसके बाद नई सरकार तो, इस बार सोचा थोडा लेट चलें, लेकिन सब मिल सकें।

आप सब जानते ही हैं कि यह सफ़र 2007 में सतपुड़ा की रानी पचमढ़ी से शुरू हुआ। चित्रकूट, बांधवगढ़, महेश्वर, छतरपुर, पचमढ़ी फिर सुखतवा (केसला) के बाद इस बार हम यह आयोजन चंदेरी में करने जा रहे हैं। इस बार कई दौर की बैठकों के बाद चंदेरी संवाद के लिए जो विषय चुना गया है, वह है।

आदिवासी – हमारी, आपकी और मीडिया की नजर में
समय, स्थान- 23,24,25 अगस्त 2014, चंदेरी, जिला- अशोकनगर, मध्यप्रदेश

कोल्हापुर में होगा चौथा भारत विकास संगम

Author: 
अजित षडंगी
Source: 
भारतीय पक्ष, जुलाई 2014
तारिख : 19-25 जनवरी 2015 तक।
स्थान : श्रीक्षेत्र सिद्धगिरि मठ, कणेरी गांव, कोल्हापुर।


सरकार देश के विकास को लेकर क्या सोचती है, इसका ढिंढोरा तो खूब पीटा जाता है, लेकिन विकास के बारे में समाज की क्या सोच है, इसे जानने के बहुत कम अवसर मिलते हैं। कोल्हापुर का सम्मेलन इस कमी को पूरा करेगा। यहां आपको उस भारत के दर्शन होंगे, जिसके सपने देश की सज्जनशक्ति देखती है। भारत विकास संगम की कोशिश है कि ये सपने कुछ गिने-चुने समाजसेवी ही नहीं, बल्कि देश की जनता भी देखे। और जब कोई सपना देश की जनता देखती है तो वह सपना-सपना नहीं रहता, वह सच्चाई बन जाता है।

उत्तर प्रदेश और कर्नाटक की यात्रा करता हुआ भारत विकास संगम का राष्ट्रीय सम्मेलन अब महाराष्ट्र के कोल्हापुर में दस्तक देने वाला है। ‘भारतीय संस्कृति उत्सव’ के नाम से आयोजित हो रहे इस बार के सम्मेलन की मेजबानी का जिम्मा श्री क्षेत्र सिद्धगिरि मठ, कणेरी के ऊपर है। 19 जनवरी से 25 जनवरी, 2015 के बीच होने वाले इस सम्मेलन की तैयारियां जोरों पर है।

भारत विकास संगम का चौथा सम्मेलन भारतीय संस्कृति उत्सव के नाम से महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में आयोजित किया जा रहा है। कोल्हापुर को मां लक्ष्मी का धाम माना जाता है। जो लोग तिरुपति में भगवान विष्णु का दर्शन करने जाते हैं, वे यहां मां लक्ष्मी के दर्शन के लिए अवश्य आते हैं।

गंगा संवर्धन हेतु काशी कुंभ का निमंत्रण

Source: 
जल जन जोड़ो अभियान
तारिख : 12-20 जुलाई 2014 तक।
स्थान : काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू)


कुम्भ तो बिना बुलाए आयोजित होते थे। इनमें शामिल होने वाले लोग गंगा को और अधिक गंदा करके जाते हैं। कुम्भ का भावार्थ ही बदल दिया है। पहले कुम्भ में राजा, प्रजा, संत ये सब मिलकर देवता और राक्षस के रूप में वैचारिक मंथन करते थे। इस मंथन में समाज की बुराइयों का जहर और समाज की अच्छाइयों के अमृत को अलग-अलग रखने की विधि पर विचार करके निर्णय होता था। निर्णयों को कुम्भ का निर्णय मानकर राजा, प्रजा और संत सब अपने जीवन में पालना करते थे।

आप जानते हैं, गंगा के विषय में सरकार बहुत चिंतित है और गंगा मंथन कर रही है। समाज को भी सरकार के इस मंथन में साथ रहना चाहिए। गंगा की पवित्रता की रक्षा करने का काम गंगा किनारे के घाटों पर रहने वाले पुजारी और संतजन ही करते थे। राजनैतिक उथल-पुथल, गुलामी और समाज के आर्थिक लोभ लालच ने गंगा सेवा का रूप बदल दिया है।

‘गंगा-मंथन’ 7 जुलाई को

Author: 
जनसत्ता ब्यूरो
Source: 
जनसत्ता, 28 जून, 2014

वर्तमान सरकार ने ‘नदी विकास एवं गंगा पुनरुत्थान’ मंत्रालय बनाकर अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट कर दी हैं। सरकार जल्दी ही गंगा पर एक समन्वित योजना बनाना चाहती है। बड़ी योजना बनाने से पहले गंगा पुनरुद्धार मंत्रालय ‘गंगा मंथन’ कार्यक्रम का आयोजन कर रही है।

आयोजन का स्थान विज्ञान भवन, नई दिल्ली होगा। समय सुबह 8 बजे से शाम 5 बजे तक।

गंगा को अविरल एवं निर्मल बनाने की योजना को जनआंदोलन का रूप देने की पहल करते हुए सरकार सात जुलाई को ‘गंगा मंथन’ कार्यक्रम आयोजित कर रही है। इसमें कई पर्यावरणविद, वैज्ञानिक, धर्मगुरु, गंगा इलाके के सांसद एवं जनप्रतिनिधि हिस्सा लेंगे।

केंद्रीय मंत्री उमा भारती का भी कहना है कि गंगा को अविरल एवं निर्मल बनाने का विषय ऐसा है जो बिना जन आंदोलन के पूरा ही नहीं हो सकता।

कार्यक्रम निर्धारण हेतु जल-जन जोड़ो अभियान की बैठक

Source: 
जल जन जोड़ो अभियान

जल-जन जोड़ो अभियान द्वारा आगामी कार्यक्रमों की रणनीति निर्धारण हेतु बैठक


तिथि : 13-14 जून 2014
स्थान : गांधी शांति प्रतिष्ठान, नई दिल्ली
समय : प्रातः 10 से सायं 5 बजे तक


16वीं लोकसभा चुनाव संपन्न हुए। नए सरकार की गठन प्रक्रिया प्रारंभ है। आप सब अवगत हैं कि जल-जन जोड़ो अभियान भारत में प्राकृतिक संसाधनों के संवर्द्धन एवं गरिमा के साथ भारत के प्रत्येक नागरिक को आवश्यकतानुसार शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की पक्षधरिता करता है। इसके लिए अभियान ने पिछले 1 वर्ष में आप सब के सहयोग से महत्वपूर्ण कार्य किए।

लेाकसभा चुनाव में अभियान ने देश भर में राजनैतिक दलों एवं मीडिया के साथ संवाद करके पानी के मुद्दे को राजनैतिक दलों के घोषणा-पत्र में शामिल कराने के लिए निरंतर कार्यक्रमों का आयोजन आप सबके सहयोग से किया है। राजनैतिक दलों द्वारा पानी के मुद्दों को अपने-अपने घोषणा पत्र में अलग-अलग तरह से सम्मिलित किया है। जल-जन जोड़ो अभियान पानी के सामुदायीकरण की वकालत करता है। पानी पर समुदाय का प्रथम अधिकार सुनिश्चित हो, इसके लिए भारत में पेयजल सुरक्षा कानून के निर्माण के लिए नई सरकार से उम्मीद करता है।