अम्लीय वर्षा (Acid Rain in Hindi)

अम्लीय वर्षा


वह वर्षा जिसमें वायुमंडल में निहित रासायनिक तत्व अथवा प्रदूषक मिल गये हों तथा जो पृथ्वी पर एक हल्के अमलीय सांद्रण के रूप में गिरती है।

Rain, which in the course of its history has combined with chemical elements or pollutants in the atmosphere and reaches the earth's surface as a weak acid solution.

अम्लीय वर्षा, यह प्राकॄतिक रूप से ही अम्लीय होती है। इसका कारण यह है कि CO2 (कार्बन डाय ऑक्साईड) जो पॄथ्वी के वायुमंडल में प्राकृतिक रूप में विद्यमान है जो जल के साथ क्रिया करके कार्बोनिक एसिड बनाता है।
अम्लवर्षा में अम्ल दो प्रकार के वायु प्रदूषणों से आते हैं। So2 & Nox , ये प्रदूषक प्रारंभिक रुप से कारखानों की चिमनियों, बसों व स्वचालित वाहनों के जलाने से उत्सर्जित होकर वायुमंडल में मिल जाते है।

अम्लवर्षा के दुष्परिणाम
अम्लवर्षा के कारण जलीय प्राणियों की मृत्यृ खेंतो और पेड़-पौधों की वृद्धि में गिरावट, तांबा और सीसा जैसे घातक तत्वों का पानी में मिल जाना, ये सभी दुष्परिणाम देखे जा सकते है। जर्मनी व पश्चिम यूरोप में जंगलो का नष्ट होने का कारण अम्लवर्षा है।

समस्या का समाधान
इस समस्या का समाधान एक ही प्रकार से संभव है। इसके लिये घातक वायु और पदार्थ के स्त्रोत जहाँ से ये प्रदूषक उत्पन्न हो रहे है, उनकों वहीं पर नियंत्रित करना, और वे सभी व्यक्ति और संस्थाएं जो इस विषय पर कार्यरत है उन्हें सारी जानकरी देना।

Acid rain

Acid rain is rain or any other form of precipitation that is unusually acidic. It has harmful effects on plants, aquatic animals, and infastructure. Acid rain is mostly caused by human emissions ofsulfur and nitrogen compounds which react in the atmosphere to produce acids. In recent years, many governments have introduced laws to reduce these emissions.

Definition
"Acid rain" is a popular term referring to the deposition of wet (rain, snow, sleet, fog and cloudwater, dew) and dry (acidifying particles and gases) acidic components. A more accurate term is “acid deposition”. Distilled water, which contains no carbon dioxide, has a neutral pH of 7. Liquids with a pH less than 7 are acidic, and those with a pH greater than 7 are basic. “Clean” or unpolluted rain has a slightly acidic pH of about 5.2, because carbon dioxide and water in the air react together to form carbonic acid, a weak acid (pH 5.6 in distilled water), but unpolluted rain also contains other chemicals.
H2O (l) + CO2 (g) → H2CO3 (aq)
Carbonic acid then can ionize in water forming low concentrations of hydronium ions:
2H2O (l) + H2CO3 (aq) CO32- (aq) + 2H3O+(aq)

The extra acidity in rain comes from the reaction of primary air pollutants, primarily sulfur oxides and nitrogen oxides, with water in the air to form strong acids (like sulfuric and nitric acid). The main sources of these pollutants are industrial power-generating plants and vehicles.

साभार –
1- http://en.wikipedia.org/wiki/Acid_rain
2- http://hi.wikipedia.org/wiki/अम्लीय_वर्षा
अन्य स्रोतों से: 

4 - अम्‍ल वर्षा (Acid Rains)


वर्षा जल में अम्‍लों की बड़ी मात्रा को या उपस्‍थिति को अम्‍लीय वर्षा कहा जाता है। प्राकृतिक कारणों से भी शुद्ध वर्षा का जल अम्‍लीय होता है। इसका प्रमुख कारण वायुमंडल में मानवीय क्रियाकलापों के कारण सल्‍फर ऑक्‍साइड व नाइट्रोजन ऑक्‍साइड के अत्‍यधिक उत्‍सर्जन के द्वारा बनती हैं। यही गैसें वायुमंडल में पहुँचकर जल से रसायनिक क्रिया करके सल्‍फेट तथा सल्‍फ्‍यूरिक अम्‍ल का निर्माण करती है। जब यह अम्‍ल, वर्षा के साथ धरातल पर पहुँचता है तो इसे अम्‍ल वर्षा कहते हैं। शुद्ध जल का Ph स्‍तर 5.5 से 5.7 के बीच होता है। अम्‍लीय वर्षा जिसकी पीएच स्‍तर 5.5 से कम होती है। यदि जल का पीएच मान 4 से कम होता है तो यह जल जैविक समुदाय के लिए हानिकारक होता है।

पर्यावरणीय संकट है अम्लीय वर्षा


स्वाति शर्मा
संपूर्ण विश्व अभी ओजोन क्षरण और ग्रीन हाउस प्रभाव के दुष्परिणाम से उबर भी नहीं पाया है, कि अम्लीय वर्षा ने पर्यावरण को संकट में डाल दिया है। यह समस्या अभी विकसित देशों में तबाही मचा रही है, लेकिन वह दिन दूर नहीं, जब यह समस्या विकासशील देशों के आगे खड़ी हो जाएगी।

अम्लीय वर्षा पर्यावरण के सभी घटकों (भौतिक एवं जैविक) को खतरे में डाल देती है। जब मानव जनित स्रोतों से उत्सर्जित सल्फर डाई ऑक्साइड (एस ओ 2) एवं नाइट्रोजन ऑक्साइड (एन ओ 2) गैस वायुमंडल की जल वाष्प के साथ मिलकर सल्फ्यूरिक एसिड व नाइट्रिक एसिड का निर्माण करती हैं तथा यह अम्लश जल के साथ पृथ्वी के धरातल पर पहुंचता है, तो इस प्रकार की वर्षा को अम्लीय वर्षा कहते हैं।

प्राकृतिक पर्यावरण को नष्ट करने में अम्लीय वर्षा की प्रमुख भूमिका होती है। यह वर्षा मुख्यतया कनाडा, स्वीडन, नार्वे, फिनलैंड, इंग्लैंड, नीदरलैण्ड, जर्मनी, इटली, फ्रांस, तथा यूनान जैसे विकसित देशों में विगत चार-पांच दशक से एक गंभीर पर्यावरणीय समस्या बनी हुई है। इसने धारातल पर मौजूद संपूर्ण भौतिक एवं जैविक जगत को खतरे में डाल दिया है।

अम्लीय वर्षा का दुष्प्रभाव एक स्थान विशेष तक ही सीमित नहीं रहता और न ही यह सल्फर डाइ ऑक्साइड तथा नाइट्रस ऑक्साइड उगलने वाले औद्योगिक एवं परिवहन स्रोतों के क्षेत्रों तक ही सीमित रहता है। यह स्रोतों से दूर अत्यधिक विस्तृत क्षेत्रों को भी प्रभावित करती है, क्योंकि अम्लीय वर्षा के उत्तरदायी कारक गैसीय रूप में होते हैं, जिन्हें हवा तथा बादल दूर तक फैला देते हैं। जिससे ब्रिटेन एवं जर्मनी में स्थित कारखानों से निकली सल्फर डाइ ऑक्साइड एवं नाइट्रस ऑक्साइड के कारण नार्वे, स्वीडन तथा फिनलैण्ड में विस्तृत अम्लीय वर्षा होती है, जिसके फल स्वरूप इन देशों की अधिकांश झीलों के जैवीय समुदाय समाप्त हो चुके है, इसीलिए ऐसी झीलों को अब जैविकीय दृष्टि से मृत झील कहते हैं।

अम्लीय वर्षा नामक यह पर्यावरणीय आपदा भारतवासियों को भी झेलनी पड़ सकती है। नई दिल्ली स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के वायुमंडलीय विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों द्वारा किए गए वैज्ञानिक अधययनों के अनुसार भारत के कुछ हिस्सों में वर्षा जल की रासायनिक प्रकृति धीरे-धीरे अम्लीयता की ओर बढ़ रही है। रिपोर्ट के अनुसार राजधानी दिल्ली, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र मध्य प्रदेश, तमिलनाडु एवं अंडमान द्वीपों में वर्षा जल की अम्लीयता लगातार बढ़ती जा रही है।

भारत के प्रमुख औद्योगिक शहरों मुंबई, कोलकाता, कानपुर, नई दिल्ली, आगरा, नागपुर, अहमदाबाद, हैदराबाद, जयपुर, चेन्नई एवं जमशेदपुर आदि नगरों के वायुमंडल में अम्लीय वर्षा उत्पन्न करने वाली विषाक्त सल्फरडाइ ऑक्साइड गैसों की सांद्रता काफी बढ़ गई है। एक अनुमान के अनुसार सन् 1990 में हमारा देश 4400 किलो टन सल्फर हवा में छोड़ता था, जबकि आज इसकी मात्रा बढ़ कर 7500 किलो टन के आसपास है जो सन् 2015 एवं 2020 में बढ़ कर क्रमश: 10900 किलो टन एवं 18500 किलो टन हो जाएगी।

भाभा एटामिक रिसर्च सेंटर व वर्ल्ड मीट्रोलॉजिकल ऑरगनाइजेशन द्वारा किए गए अध्ययनों से ज्ञात हुआ है कि अधिकांश भारतीय नगरों में वर्षा जल में अम्लता का स्तर सुरक्षा सीमा से अभी कम है, लेकिन वह दिन दूर नहीं, जब अम्लीय वर्षा विकसित देशों की तरह भारत में भी तबाही मचाना शुरू कर देगी। भारत में भी हानिकारक गैसों की सांद्रता पर रोकथाम पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पा रही है। अम्लीय वर्षा का पारिस्थितिक तंत्र पर दुष्प्रभाव पड़ता है। इससे जल प्रदूषण बढ़ता है, जिससे इसमें रहने वाले जीव-जंतु नष्ट होने लगते हैं।

कनाडा के ओन्टोरियों प्रांत में 2,50,000 झीलों में से 50,000 झीलें अम्लीय वर्षा से बुरी तरह प्रभावित हैं जिनमें से 140 झीलों को मृत घोषित कर दिया गया है। अम्लीय वर्षा का वनों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, क्योंकि इससे पत्तियों की सतह पर मोम जैसी परत नष्ट हो जाती है, साथ ही पत्तियों के स्टोमेटा बंद हो जाते हैं। कनाड़ा, यू.एस.ए. स्वीडन, नार्वे, फिनलैण्ड, जर्मनी व मधय यूरोप के कई देशों में वन संपदा को अम्लीय वर्षा से भारी क्षति हुई है।

1- http://en.wikipedia.org/wiki/Acid_rain
 
 
 


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