इनविरॉनिक्स ट्रस्ट

Submitted by bipincc on Sat, 02/06/2010 - 20:48
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संपर्क व्यक्ति
राममूर्ति श्रीधर, निशान्त अलग, ललित ठाकुर, हिमांशु उपाध्याय, एस वनिता एवं अन्य
ईमेल
environics@gmail.com
फोन न.
91-11-29531814
डाक पता/ Postal Address
33, बी, तीसरा तल सैदुल्लाजाब, मेहरौली बदरपुर रोड, नई दिल्ली (भारत)


अपने नाम के अनुरूप इनविरॉनिक्स ट्रस्ट का दायरा पर्यावरण एवं मानवीय व्यवहार के जटिल क्षेत्र में फैला हुआ है। ट्रस्ट का मिशन है उन सामुदायिक विकास की समस्याओं का अवष्किारिक एवं प्रमाणित समाधान करना जो कि विशिष्ट इको सिस्टम एवं सामाजिक-राजनैतिक-सांस्कृतिक वातारण की विविधता और जटिलता के अनुरूप हो। इनविरॉनिक्स मानवीय व्यवहार के पर्यावरण को प्रभावित करने वाले अध्ययन को आगे बढ़ाती है। विश्व पर्यावरण एवं विकास आयोग के अनुसार टिकाऊ विकास वह होता है जो कि मौजूदा पीढ़ी की आवश्यकताओं व आकांक्षाओं को पूरा करने के साथ साथ भावी पीढ़ी की योग्यता के साथ भी कोई समझौता न करे। यह ऐसी अवधारणा है जो कि विकास के आर्थिक पहलुओं के आधार पर ही पर्यावरण का ध्यान सुनिश्चित करने के साथ साथ यूनेस्को द्वारा प्रतिपादित व्यापक दृष्टिकोण का भी ध्यान रखती है।

पिछले कुछ सालों में इनविरॉनिक्स ट्रस्ट ने सतत विकास का व्यावहारिक मॉडल विकसित किया है। सतत विकास ‘प्रक्रियाओं का वह समूह होता है जो कि स्थानीय एवं वैश्विक प्रणालियों को इकोलॉजिकल सद्भाव में रहने योग्य बनाए’। ट्रस्ट का मानना है कि सतत विकास के प्रमुख गुण निम्न होते हैं:

* समानता एवं न्याय

* पर्यावरणीय सुदृढ़ता

* आत्म निर्भरता

* आर्थिक सक्षमता

ट्रस्ट पर्वतीय क्षेत्र एवं वहां के समुदायों पर फोकस करते हुए विकास के सन्दर्भ में स्थानीय समुदायों को सहयोग उपलब्ध कराते हुए उन्हें स्वतंत्र रूप से कार्य करने का अवसर उपलब्ध कराती है। इनके लिए कुछ मानदंड आवश्यक होते हैं जो कि व्यावहारिक वातावरण से उत्पन्न होने वाले समझ के अनुरूप लक्ष्य तय करते हैं। इन मानदंडों को संक्षेप में इस प्रकार व्यक्त किया जा सकता है:

पर्वतीय इकोसिस्टम की विविधता और जटिलता को पर्यावरण के समझ के माध्यम से ही ध्यान दिया जा सकता है;

इकोसिस्टम की क्षमता को आर्थिक व इकोलॉजिकल सन्दर्भों में व्यक्त किया जा सकता है;

इकोलॉजिकल मूल्यों को कम किए बगैर प्राथमिक उत्पादन प्रणालियों की आर्थिक क्षमता को महत्व दिया जा सकता है;

विकास की प्रक्रियाओं में महिलाओं की भागीदारी को महत्व दिया जाना चाहिए;

समुदायों को उनके संसाधनों, तकनीकों एवं निवेशों के मामले में आत्मनिर्भर बनाया जाना चाहिए;

स्थानीय स्तर पर गुणवत्ता आधारित उत्पादों को विक्रय हेतु बढ़ावा दिया जाना चाहिए;

बाहरी दुनिया के साथ रणनीतिक सीमा में बढ़ोतरी किया जाना चाहिए ताकि व्यापक अर्थव्यवस्था के साथ एकीकरण का लाभ मिल सके।