ज्योतिष सम्बन्धी कहावतें

Submitted by Hindi on Thu, 03/25/2010 - 14:50
Author
घाघ और भड्डरी

अखै तीज रोहिनी न होई। पौष, अमावस मूल न जोई।।
राखी स्रवणो हीन विचारो। कातिक पूनों कृतिका टारो।।
महि-माहीं खल बलहिं प्रकासै। कहत भड्डरी सालि बिनासै।।


शब्दार्थ- तज-छोड़ना। मही-धरती। खल-दुष्ट।

भावार्थ- भड्डरी कहते हैं कि बैशाख अक्षय तृतीया को यदि रोहिणी नक्षत्र न पड़े, पौष की अमावस्या को यदि मूल नक्षत्र न पड़े, सावन की पूर्णमासी को यदि श्रवण न पड़े, कार्तिक की पूर्णमासी को यदि कृत्तिका न पड़े, तो समझ लेना चाहिए कि धरती पर दुष्टों का बल बढ़ेगा और धान की उपज नष्ट होगी।

Disqus Comment

More From Author

Related Articles (Topic wise)

Related Articles (District wise)

About the author

घाघ का जीवन वृत्त


नया ताजा