ज्वार (Tide)

Submitted by Hindi on Fri, 05/28/2010 - 11:01

ज्वार, ज्वार भाटा

चंद्रमा और सूर्य के गुरुत्वाकर्षण द्वारा पृथ्वी पर स्थित सागरों के जल तल में होने वाला उत्थान एवं पतन जिसमें ऊँची-ऊँची तरंगे उत्पन्न होती हैं। सागरीय जल के ऊपर उठकर आगे बढ़ने को ज्वार (tide) और नीचे गिरकर पीछे लौटने को भाटा (ebb) कहते हैं। ज्वार से निर्मित उच्च जल-तल को उच्चज्वार (high tide) और भाटा से निर्मित निम्न जल तल को निम्न ज्वार (low tide) कहा जाता है। ज्वारोत्पत्ति में चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति प्रधान होती है तथा सूर्य के गुरुत्वाकर्षण का प्रभाव गौण होता है। सूर्य का द्रव्यमान (mass) चंद्रमा के द्रव्यमान से 260 लाख गुना अधिक है किन्तु वह पृथ्वी से चंद्रमा की तुलना में लगभग 380 गुना अधिक दूरी पर है जिसके कारण सागरों पर सूर्य की ज्वारोत्पादक शक्ति चंद्रमा की ज्वारोत्पादक शक्ति की मात्र 4/9 ही होती है।

प्रत्येक चांद्रमास की पूर्णिमा (full moon) और अमावस्या (black moon) को जब सूर्य, चन्द्र और पृथ्वी लगभग एक सीधी रेखा में होते हैं, सूर्य और चंद्रमा के सम्मिलित गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से अधिक ऊँचा ज्वार (दीर्घ ज्वार) उत्पन्न होता है। इसके विपरीत प्रत्येक चांद्रमास के कृष्ण पक्ष तथा शुक्ल पक्ष की सप्तमी-अष्टमी तिथियों को चंद्रमा और सूर्य पृथ्वी के साथ समकोण बनाते हैं तथा दोनों की गुरुत्वाकर्षण शक्तियां विपरीत दिशा में कार्य करती हैं जिसके परिणामस्वरूप लघु ज्वार की उत्पत्ति होती है। दैनिक ज्वार एक चांद्र दिन (24 घंटा 52 मिनट) के अंतर पर आते हैं। अतः प्रतिदिन दैनिक ज्वार 52 मिनट की देरी से और अर्द्ध दैनिक ज्वार 26 मिनट की देरी से आते हैं।

अन्य स्रोतों से

Tides in Hindi (ज्वार, ज्वार-भाटा)


महासागरों एवं सागरों के जल-तल में चंद्रमा तथा सूर्य के गुरुत्वाकर्षण से उत्पन्न उतार-चढ़ाव। गुरुत्वाकर्षण बल प्रत्यक्षतः सूर्य तथा चंद्रमा के द्रव्यमानों के अनुसार भिन्न-भिन्न होता है। सूर्य का द्रव्यमान (mass) चंद्रमा से 260 लाख गुणा अधिक है परंतु पृथ्वी से 380 गुणा अधिक दूर होने के कारण सूर्य की ज्वार उत्पन्न करने की शक्ति चंद्रमा की शक्ति का 4/9 है।

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