नर्मदा का घटता जलप्रवाह

Submitted by admin on Sun, 02/14/2010 - 15:11
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क्रांति चतुर्वेदी

मध्यप्रदेश की जीवनरेखा नर्मदा नदी के जल बहाव में भारी गिरावट आई है। 10 अक्टूबर 2000 को समाप्त वर्षाकाल में नर्मदा में मात्र 8 अरब 90 करोड़ 78 लाख क्यूबिक मीटर पानी बहकर गया था। पिछले 27 वर्षों का उच्चतम रिकॉर्ड 1938 का है, जब 39 अरब 24 करोड़ 47 लाख क्यूबिक मीटर पानी नर्मदा में बहकर गया था।

नर्मदा की गणना देश की पुण्यवान नदियों में होती है। जल संग्रहण के क्षेत्र में भी यह दूसरी बड़ी नदियों में अपना विशेष महत्व रखती है। मध्यप्रदेश की तो नर्मदा भाग्यरेखा भी है तथा जल संग्रहण के मामले में अपना पहला स्थान रखती है। ओंकारेश्वर से 12 किमी. दूर ग्राम मोरटक्का (खेड़ीघाट) में नर्मदा से बहने वाले जल के प्रतिदिन के नाप के हिसाब से इस वर्ष वर्षाकाल में पिछले वर्षाकाल की तुलना में करीब 14 अरब क्यूबिक मीटर पानी कम बहकर गया।

जल माप संयंत्र का यह वह स्थान है। जहाँ नर्मदा की कुल चौड़ाई 700 मीटर है। यह स्थान सम्पूर्ण नर्मदा का मध्यभाग कहलाता है। नर्मदा नदी के उद्गम स्थान अमरकंटक से लेकर मोरटक्का तक की लंबाई 820 किलोमीटर है और इसका विशाल जल संग्रहण क्षेत्र 67 हजार 190 वर्ग किलोमीटर है। शासकीय रिकार्ड के हिसाब से सन् 1980 के (10 जून से 10 अक्टूबर तक) वर्षा के चार माह में 38 अरब 3 करोड़ 56 लाख क्यूबिक मीटर पानी नर्मदा में बहकर गया जबकि सन् 1981 के वर्षाकाल में 23 अरब 81 करोड़ 34 लाख क्यूबिक मीटर पानी बहकर गया। साधारण बढ़ोत्तरी-घटोत्री के साथ अगले वर्षों मे भी पानी बहता रहा। उल्लेखनीय रूप से सन् 1983 में वर्षाकाल का जल बहाव एक रिकार्ड था। इस वर्ष नर्मदा का जल 39 अरब 24 करोड़ 76 लाख क्यूबिक मीटर बहकर गया। यह 1961 वाली वर्षा के पश्चात 24 वर्षों का उच्चतम रिकार्ड रहा । जब सन् 1961 के 16 सितंबर के दिन नर्मदा खतरे के निशान से 9.744 मीटर ऊपर बह रही थी। सन् 1992 में 12 अरब 72 करोड़ 70 लाख क्यूबिक मीटर, सन् 1993 में 26 अरब 2 करोड़ 50 लाख क्यूबिक मीटर, सन् 1994 में 60 अरब 68 करोड़ 40 लाख क्यूबिक मीटर, सन् 1995 में 14 अरब 94 करोड़ 10 लाख क्यूबिक मीटर, सन् 1996 में 11 अरब 93 करोड़ 7 लाख क्यूबिक मीटर, सन् 1997 में 17 अरब 10 करोड़ 7 लाख क्यूबिक मीटर, सन् 1998 में 21 अरब 16 करोड़ 8 लाख क्यूबिक मीटर, सन् 1999 में 23 अरब 12 करोड़ 3 लाख क्यूबिक मीटर, सन् 2000 में 8 अरब 90 करोड़ 78 लाख क्यूबिक मीटर बह कर गया।

नर्मदा किनारे के इलाकों के नदी, नाले, कुएं व तालाब सूखे हैं। कुओं का जलस्तर भी गिर चुका है। हजारों मूक पशु चारे और पानी के अभाव में दूर-दराज के क्षेत्रों से लाकर भगवान भरोसे नर्मदा किनारे के जंगलों में छोड़े जा रहे हैं।

सन् 2000-2001 को यदि ‘नर्मदा के दोहन’ का वर्ष कहा जाए तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। कई अवर्षा व सूखे वाले क्षेत्रों को नर्मदा से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा। कई दूर-दराज के इलाकों में मोटर व रेलवे टैंकरों के माध्यम से नर्मदा का जल पेयजल के रूप मे उपलब्ध कराया जाएगा। शासन का यह पहला कर्तव्य है कि वह नर्मदा की प्रदूषण से रक्षा करे।
 

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About the author

.पत्रकार और लेखक क्रांति चतुर्वेदी का जल पर लेखन से गहरा नाता है। पानी पर आज कई अध्ययन यात्राएँ कर चुके हैं। जल, जंगल और प्राकृतिक संसाधन प्रबन्धन पर पाँच पुस्तकें भी लिख चुके हैं। मध्य प्रदेश के सन्दर्भ ग्रन्थ ‘हार्ट ऑफ इण्डिया’ के सम्पादक भी रह चुके हैं। पानी की पत्रकारिता के लिये भारतीय पत्रकारिता जगत की प्रतिष्ठित के.के.

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