मां गंगा यमुना रामगंगा बचाओ समिति

Submitted by Hindi on Sun, 07/20/2014 - 10:58
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Name in English
Maa Ganga Yamuna Ramganga Bacho Samiti in hindi
संपर्क व्यक्ति
डॉ. ओ.एन.अग्रवाल
ईमेल
maaganga.agarwala@gmail.com
फोन न.
09259436260
Fax
9259436260
मोहल्ला/ गांव
टीबरीनाथ मंदिर क्षेत्र
डाक पता/ Postal Address
16 ए, जवाहर नगर (टीबरीनाथ मंदिर क्षेत्र), बरेली (उ.प्र.)
जिला / District
बरेली
राज्य / State
उ.प्र
तालुका / शहर
बरेली
पूर्ववर्ती सरकार ने सीवेज, नालों एवं फैक्ट्रियों के पानी से मां गंगा को प्रदूषित किया। इसकी रोकथाम के लिए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एस.टी.पी.) स्थापित किए। हम एस.टी.पी. के कड़े विरोधी हैं क्योंकि बिजली न होने पर इनके बाईपास से सीवेज गंगा में गिरता है। जब प्लांट चालू होता है तब ट्रीटमेंट के बाद शौचालय के सीवेज के पानी को गंगा में गिराकर करोड़ों हिंदुओं की आस्था और उनके स्वास्थ्य से खिलवाड़ की जा रही है। उ.प्र. में 33 एस.टी.पी. हैं और 39 निर्माणाधीन हैं। यह सफेद हाथी हैं। इनके बारे में कैग ने वर्ष 2012 में कहा : 19 वर्ष सौ करोड़ रू. नतीजा शून्य ज्ञापन में सीवेज के ट्रीटमेंट हेतु ई.आर.एच.पी.टी. टैक्नोलॉजी की विस्तृत जानकारी दी गई है। इसमें कालोनी के स्तर पर सीवेज का ट्रीटमेंट किया जाता है। नई दिल्ली के पूसा संस्थान ने प्रदूषित पानी को खेती में इस्तेमाल करने की स्वदेशी विधि विकसित की है। 1000 घन मीटर के बायो गैस प्लांटो में गोबर की बजाय सीवेज का इस्तेमाल करके सी.एन.जी. प्राप्त करने की सम्भावना है। नालों के पानी के सदुपयोग के लिए एवं फैक्ट्रियों के कचरे से गंगा को बचाने हेतु कई सुझाव दिए हैं। फैक्ट्रियों को शिफ्ट करना भी विकल्प है। बरेली में प्राथमिकता से रामगंगा को प्रदूषणमुक्त किया जाना चाहिए।एन.जी.आर.वी.ए. की 2200 करोड़ रू. की प्रोजेक्ट में इस समय दिल्ली की एजेंसी सर्वे कर रही है। 4 एस.टी.पी. लगाने की योजना है। हमारी मांग है कि शोधित या गैरशोधित सीवेज रामगंगा में न गिरे। आगामी 5 वर्ष के लिए प्राथमिकता वाले 6 क्षेत्र चिन्हित किए गए हैं और उनके कार्ययोजना का खाका पेश किया गया है। पिछले कड़ुवे अनुभवों को दृष्टिगत, नई केंद्र सरकार से अनुरोध है कि गंगा की सफाई की सौ पीसदी जिम्मेदारी अपने ऊपर लें ताकि भविष्य में ठीकरा उ.प्र. सरकार पर न फोड़ा जाए। लंदन की टेम्स नदी एवं गुजरात की साबरमती के कायाकल्प से सबक लेना चाहिए। 1974 एवं 1986 के जल सम्बंधी अधिनियमों में कई संशोधन करना जरूरी है। गंगा की वार्षिक सफाई, जल पुलिस की तैनाती, विद्युत शवदाह ग्रहों की स्थापना एवं डामों की मनमानी पर अंकुश लगाना जरूरी है। जागरुकता बढ़ाने के लिए “कौन बनेगा करोड़पति” की तर्ज पर “कौन बनेगा भगीरथ” कार्यक्रम शुरू किया जाए। ग्लोबल वार्मिंग से गंगा को बचाने हेतु ज्ञापन में 13 सुझाव दिए हैं। प्रधानमंत्री गंगा बचाओ राष्ट्रीय फंड शुरू किया जाना चाहिए ताकि लक्ष्य प्राप्ति हेतु धन की कमी आड़े न आए।

किस प्रकार का संगठन ( जैसे - सरकारी, एनजीओ, सीएसआर)
एनजीओ

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