संदर्भः

Submitted by admin on Sat, 01/23/2010 - 16:29
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Author
महेश कुमार मिश्र ‘मधुकर’


1. वायु पुराण/अ.-27/श्लोक-18 से 22 तक

2. ‘मानव’ शब्द का प्रयोग भारतीय परम्परा के अनुसार भारत भूमि पर जन्में ‘मनु’ का अपत्य (सन्तान) = मानव।

3. 225-266.

पंचगव्य-सफेद गाय का मूत्र, काली गाय का गोबर, लाल गाय का दूध, सफेद गाय का दही तथा कपिला गाय का घी- इन पाँच ‘गव्यों’ का यौगिक ‘पंचगव्य’ कहलाता है। यह ‘महापातक नाशक’ है-

सित गोमूत्रं गृहणीयात् कुष्णाया गोः शकृत् तथा।

ताम्रायाश्च पयो ग्राह्यं श्वेताया दधि उच्यते।।71।।

कपिलाया घृतं ग्राह्यं महापातक नाशनम्।

सर्व तीर्थेस्थिते तोये कुशैर्द्रव्यं पृथक्-पृथक्।।72।। (यम स्मृति)

अत्रि स्मृति के अनुसार-गोबर से दुगुना गोमूत्र, चौगुना घी, अठगुना दूध, अठगुना दही लेकर उन्हें ‘ऊँकार’ द्वारा मिलाता जाये फिर ऊँकार का उच्चारण करके-पंचगव्य का प्रयोग करें।

शकृव द्विगुण गोमूत्रं, सर्पिदद्यात् चतुर्गुणम्।

क्षीरमष्टगुणं देयं, पंचगण्यं तथा दधि।।295।।

4. ‘पाली’कूप, तडाग आदि जलाशयों की रक्षा के लिए बना हुआ घेरा ‘पाली’कहलाता है। स्त्रियाँ ‘पाली’ पर बैठकर ही इस व्रत को सम्पन्न करती हैं। वरूणा देवता की पूजा इसी पर बैठकर की जाती है।

5. मुक्ता के स्थान पर ‘मुक्त्वा’ होना चाहिए।
 

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