जलवायु परिवर्तन: 15 लाख भारतीयों पर मंडरा रहा मौत का खतरा

Submitted by HindiWater on Thu, 10/31/2019 - 16:02

फोटो - climate.nasa.gov

जलवायु परिवर्तन (climate change) के कारण ग्लोबल वार्मिंग (global warming) बढ़ने से हर साल पृथ्वी गर्म हो रही है। गर्मी बढ़ने से ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है और समुद्र किनारे बसे शहरों तथा देशों पर भविष्य में डूबने का खतरा बना हुआ है। भूमि शुष्क होकर मरुस्थल में तब्दील हो रही है। बढ़ती गर्भी के कारण गर्म दिनों की संख्या बढ़ती जा रही है, इससे जैव विविधता बुरी तरह प्रभावित हो रही है। कई पशु-पक्षी और वनस्पतियां विलुप्त हो चुके हैं। तो वहीं लाखों इंसानों की भी मौत हो चुकी है, लेकिन अब यदि हम नहीं सुधरे तो स्थिति काफी भयावह हो जाएगी। जिस कारण हर साल करीब 15 लाख भारतीयों को अपनी जान गवानी पड़ेगी। 

एक रिपोर्ट के मुताबिक बीते 20 वर्षों में जलवायु परिवर्तन (climate change) के कारण पांच लाख से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। इसका मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाली प्राकृतिक अपदाएं (natural calamities) हैं। तो वहीं वायु प्रदूषण (air pollution)  के कारण हर तीन मिनट में एक बच्चे की मौत हो जाती है। यहां तक कि प्रदूषित शहरों में मां के गर्भ में भी बच्चा सुरक्षित नहीं है। जलवायु परिवर्तन की इस समस्या को देखते हुए सभी देश गंभीर तो हुए हैं, लेकिन कोई ठोस पहल करने के बजाए अधिकांश देश अपनी अर्थव्यवस्था (economy) को मजबूत करने को प्राथमिकता दे रहे हैं। भारत में भी जलवायु परिवर्तन का असर बड़े पैमाने पर दिख रहा है। असमय बारिश, सूखा, अतिवृष्टि, अधिक बर्फबारी और समाप्त होता भूजल आदि भारत की अर्थव्यवस्था (indian economy) के लिए खतरा बन रहे हैं। तो वहीं हर साल आने वाली बाढ़ से देश को अरबों रुपयों का नुकसान हो रहा है। दिल्ली, मुंबई जैसे शहर अब इंसानों के रहने के अनुकूल नहीं रह गए हैं और ‘‘हीट चैंबर’’ में तब्दील हो चुके हैं, जिसमें जलवायु परिवर्तन (climate change) की अहम भूमिका है। ग्लोबल वार्मिंग (global warming) बढ़ने से दिल्ली ही नहीं बल्कि पूरे भारत में और अधिक समस्या खड़ी हो सकती है और लाखों लोग असमय काल के गाल में समा सकते हैं। 31 अक्टूबर को दिल्ली के यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो सेंटर में आयोजित कार्यक्रम में क्लाइमेट इंपैक्ट लैब द्वारा टाटा सेंटर फाॅर डेवलपमेंट के सहयोग से किए गए अध्ययन में ये सामने आया है। 

अध्ययन में भारत में ग्रीन हाउस गैसों (green house gas) के कारण 2100 तक तापमान में औसन 4 डिग्री सेंटीग्रेड की बढ़ोतरी होने की संभावना जताई गई है। गर्म दिनों की संख्या में भी इजाफा होगा और देश के 16 राज्य, वर्तमान में भारत के सबसे गर्म राज्य ‘पंजाब’ से भी ज्यादा गर्म होंगे तथा पंजाब का सालाना औसत तापमान बढ़तर 36 डिग्री सेंटीग्रेड हो जाएगा। तो वहीं उड़ीसा में बेहद गर्म दिनों की संख्या में सबसे ज्यादा वृद्धि होगी। अध्ययन में राजधानी दिल्ली में गर्म दिनों की संख्या में 22 गुना, हरियाणा में 20 गुना, राजस्थान में 7 गुना और पंजाब में 17 गुना अधिक होने की संभावना जताई गई है। गर्म दिनों की संख्या बढ़ने और तापमान में वृद्धि के कारण जनजीवन प्रभावित होगा और मृत्युदर भी बढ़ेगी। दरअसल बेहद गर्म दिनों की संख्या बढ़ने और तापमान में परिवर्तन का असर मृत्युदर पर पड़ता है। बार बार मौसम के बदलने, असमय बदलने और गर्मी ज्यादा होने से विभिन्न प्रकार की बीमारियों के कारण अधिक लोगों की मौत हो जाती है। इसलिए महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, आंध्र प्रदेश, राजस्थान, बिहार और उत्तर प्रदेश में प्रतिवर्ष होने वाली मौतों में 64 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे वर्ष 2100 से प्रतिवर्ष मरने वालों की 15 लाख से अधिक हो जाएगी। जलवायु परिवर्तन की इस विभिषीका को रोकने के लिए लोगों का अपनी जीवनशैली में बदलाव करना बेहद जरूरी है।
 

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