1988 से भी पहले से फैक्ट्री बना रही हैं हिंडन को जहरीला

Submitted by Hindi on Sun, 09/24/2017 - 10:16
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राजस्थान पत्रिका, 24 सितम्बर, 2017

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पत्र से हुआ खुलासा


.गाजियाबाद। हिंडन की सफाई को लेकर महानगर गाजियाबाद में प्रशासन और तमाम एनजीओ काम कर रहे हैं। प्रदूषण को खत्म करने के लिये प्रशासनिक स्तर पर योजना बनाई जा रही है। इतना ही नहीं नदी के तट पर बसे 805 गाँवों के लोगों के स्वास्थ्य की देख-रेख के लिये जिला प्रशासन हेल्थ कार्ड बनवाए जा रहे हैं, लेकिन सफाई के इन कदमों की जरूरत यहाँ 1988 से पहले से थी।

डीएम से की गई थी सिफारिश


1988 से फैक्ट्री हिंडन को जहरीला करने में लगी हैं। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पत्र से इसका खुलासा हुआ है। पत्र के मुताबिक आधा दर्जन से अधिक फैक्ट्री हिंडन के पानी को जहरीला बनाने में लगी हुई थीं। अधिकारी की तरफ से इन फैक्ट्री को बन्द कराए जाने के लिये सिफारिश भी की गई थी, लेकिन इस सिफारिश को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। इसकी बदौलत आज हिंडन के पानी की ऑक्सीजन भी पूरी तरीके से खत्म हो चुकी है।

इन फैक्ट्रियों ने लगाए थे संयंत्र


प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने उस समय मैसर्स दीवान रिक्लेम रबर, मैसर्स स्वदेशी पॉलिटेक्स लिमिटेड, ओरिएंटल कार्बन में उत्प्रवाह संयंत्र लगवा लिये गये। इन सभी फैक्ट्रियों पर उस समय अभियोजनात्मक कार्रवाई न्यायालय में विचाराधीन थी। इसके अलावा अन्य फैक्ट्रियों पर कार्रवाई किये जाने की बात कही गई थी।

लोक विकास परिषद ने उठाई थी माँग


हिंडन की स्वच्छता को लेकर लोक विकास परिषद की तरफ से 1988 में माँग उठाई गई थी। इनमें हिंडन के अन्दर फैली हुई जलकुम्भी घास को हटाने, पोस्टमार्टम हाउस के पानी को हिंडन में न डाले जाने पक्के घाट और केमिकल युक्त पानी छोड़ने वाली फैक्ट्रियों पर कार्रवाई किये जाने की माँग शामिल थी। इसी पर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने कार्रवाई करते हुए आधा दर्जन फैक्ट्रियों पर कार्रवाई की थी।

हिंडन की स्वच्छता के लिये दोबारा से रूपरेखा तैयार की जा रही है। अभियान चलाकर फैक्ट्रियों के खिलाफ मोर्चा खोल लोगों को जागरूक किया जाएगा। -वेदप्रकाश गर्ग, अध्यक्ष लोक विकास परिषद संगठन

इंडस्ट्री से आने वाले गन्दे पानी को हमारी तरफ से रुकवाया गया है। कुछ फैक्ट्री को सील भी किया गया है। इस सम्बन्ध में जेडीए और नगर निगम को पत्र भी लिखा जाएगा। -अजय शर्मा, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड अधिकारी

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