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खासम-खास

समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

Content

जब जलवायु परिवर्तन ने खत्म कर दिया एक अंतरराष्ट्रीय विवाद

Submitted by HindiWater on Thu, 07/18/2019 - 15:39
Author
उमेश कुमार राय
घोड़ामारा आइलैंड भी धीरे-धीरे पानी में समा रहा है।घोड़ामारा आइलैंड भी धीरे-धीरे पानी में समा रहा है। जलवायु परिवर्तन दुनियाभर के उन तमाम देशों के लिए खतरा है, जो समुद्र के किनारे बसे हुए हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते जलस्तर ने छोटे देशों के वजूद पर संकट ला दिया है। पश्चिम बंगाल का सुंदरवन भी इससे अछूता नहीं है। सुंदरवन में करीब 100 द्वीप हैं, जिनमें से कई द्वीपों पर खतरा मंडरा रहा है। जानकार बताते हैं कि पिछले 10-15 सालों में कई द्वीपों का अस्तित्व मिट चुका है। ऐसा ही एक द्वीप था - न्यू मूर। इस द्वीप के मालिकाने को लेकर चार दशक पहले भारत और बांग्लादेश के बीच काफी विवाद हुआ था।

स्वच्छ पानी को पाने की जंग

Submitted by UrbanWater on Thu, 07/18/2019 - 12:19
Source
बुन्देलखण्ड कनेक्ट, जून 2019
दुनिया की 70 फीसदी आबादी प्रदूषित पानी पीने को मजबूर।दुनिया की 70 फीसदी आबादी प्रदूषित पानी पीने को मजबूर। एक अनुमान के अनुसार देश के करीब 265 गाँवों तक स्वच्छ जल लोगों को नहीं मिल रहा। नदियों का पानी जहरीला हो रहा है। बुन्देलखण्ड के हमीरपुर जिले में एक गाँव का पानी इतना जहरीला है कि जानवर भी उसे नहीं पीते।  70 फीसदी लोगों को प्रदूषित पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ता है। शायद यही कारण है कि लोग अब केन और मंदाकिनी नदी को बचाने के लिए खुद ब खुद आगे आ रहे है। पानी के दुरूपयोग और दोहन को रोकने के लिए संकल्पित होना होगा। यूनिसेफ के फुजैल कहते हैं, शुद्ध पेयजल के लिए सरकार ने 1300 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रावधान बनाया है। एक सर्वे के मुताबिक हर 27 सेकेण्ड में एक बच्चे की मौत प्रदूषित पानी पीने से होती है।

जलग्रस्त क्षेत्रों में सुगन्धित खस की खेती

Submitted by HindiWater on Thu, 07/18/2019 - 11:11
Source
विज्ञान प्रगति, जून 2019
जलग्रस्त क्षेत्रों में सुगन्धित खस की खेती। जलग्रस्त क्षेत्रों में सुगन्धित खस की खेती। खस या वेटीवर एक भारतीय मूल की बहुवर्षीय घास है, जिसका वानस्पतिक नाम वेटीवेरिया जिजेनऑयडीज है, जो पोएसी परिवार के अन्तर्गत आती है। पौधे के जमीन के अन्दर रहने वाले भाग में हल्के पीले रंग या भूरे से लाल रंग वाली उत्कृष्ट जड़ें होती हैं, जिनसे आसवन पर व्यवसायिक स्तर का खस का तेल प्राप्त होता है। खस की रेशेदार जड़ें नीचे की ओर बढ़ती हुई 2.3 मीटर तक भूमि की गहराई में फैलती हैं और इन जड़ों की सुगन्ध बहुत ही दृढ़ होती है।

प्रयास

बैंक की नौकरी छोड़, आदिवासियों को औषधीय खेती से दे रहे रोजगार

Submitted by HindiWater on Fri, 08/09/2019 - 17:38
राजाराम त्रिपाठी ।राजाराम त्रिपाठी । घटती खेती का कारण किसानों के प्रति सरकार का रवैया भी है, जिस कारण किसान अब खेती करना पसंद नहीं कर रहे हैं और हजारों परिवार खेती छोड़ चुके हैं तथा कोई अन्य काम कर रहे हैं। इन कारणों से किसानी और खेती वर्ततान में देश मे बड़ा मुद्दा है। लेकिन इन सभी के बीच छत्तीसगढ़ के राजाराम त्रिपाठी भी हैं, जिन्होंने बैंक की नौकरी छोड़ औषधीय खेती शुरू की और आज वें आदिवासियों को औषधीय खेती से रोजगार दे रहे हैं। 

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
Source
दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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खासम-खास

समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

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जब जलवायु परिवर्तन ने खत्म कर दिया एक अंतरराष्ट्रीय विवाद

Submitted by HindiWater on Thu, 07/18/2019 - 15:39
Author
उमेश कुमार राय
घोड़ामारा आइलैंड भी धीरे-धीरे पानी में समा रहा है।घोड़ामारा आइलैंड भी धीरे-धीरे पानी में समा रहा है। जलवायु परिवर्तन दुनियाभर के उन तमाम देशों के लिए खतरा है, जो समुद्र के किनारे बसे हुए हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते जलस्तर ने छोटे देशों के वजूद पर संकट ला दिया है। पश्चिम बंगाल का सुंदरवन भी इससे अछूता नहीं है। सुंदरवन में करीब 100 द्वीप हैं, जिनमें से कई द्वीपों पर खतरा मंडरा रहा है। जानकार बताते हैं कि पिछले 10-15 सालों में कई द्वीपों का अस्तित्व मिट चुका है। ऐसा ही एक द्वीप था - न्यू मूर। इस द्वीप के मालिकाने को लेकर चार दशक पहले भारत और बांग्लादेश के बीच काफी विवाद हुआ था।

स्वच्छ पानी को पाने की जंग

Submitted by UrbanWater on Thu, 07/18/2019 - 12:19
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बुन्देलखण्ड कनेक्ट, जून 2019
दुनिया की 70 फीसदी आबादी प्रदूषित पानी पीने को मजबूर।दुनिया की 70 फीसदी आबादी प्रदूषित पानी पीने को मजबूर। एक अनुमान के अनुसार देश के करीब 265 गाँवों तक स्वच्छ जल लोगों को नहीं मिल रहा। नदियों का पानी जहरीला हो रहा है। बुन्देलखण्ड के हमीरपुर जिले में एक गाँव का पानी इतना जहरीला है कि जानवर भी उसे नहीं पीते।  70 फीसदी लोगों को प्रदूषित पानी पीने के लिए मजबूर होना पड़ता है। शायद यही कारण है कि लोग अब केन और मंदाकिनी नदी को बचाने के लिए खुद ब खुद आगे आ रहे है। पानी के दुरूपयोग और दोहन को रोकने के लिए संकल्पित होना होगा। यूनिसेफ के फुजैल कहते हैं, शुद्ध पेयजल के लिए सरकार ने 1300 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रावधान बनाया है। एक सर्वे के मुताबिक हर 27 सेकेण्ड में एक बच्चे की मौत प्रदूषित पानी पीने से होती है।

जलग्रस्त क्षेत्रों में सुगन्धित खस की खेती

Submitted by HindiWater on Thu, 07/18/2019 - 11:11
Source
विज्ञान प्रगति, जून 2019
जलग्रस्त क्षेत्रों में सुगन्धित खस की खेती। जलग्रस्त क्षेत्रों में सुगन्धित खस की खेती। खस या वेटीवर एक भारतीय मूल की बहुवर्षीय घास है, जिसका वानस्पतिक नाम वेटीवेरिया जिजेनऑयडीज है, जो पोएसी परिवार के अन्तर्गत आती है। पौधे के जमीन के अन्दर रहने वाले भाग में हल्के पीले रंग या भूरे से लाल रंग वाली उत्कृष्ट जड़ें होती हैं, जिनसे आसवन पर व्यवसायिक स्तर का खस का तेल प्राप्त होता है। खस की रेशेदार जड़ें नीचे की ओर बढ़ती हुई 2.3 मीटर तक भूमि की गहराई में फैलती हैं और इन जड़ों की सुगन्ध बहुत ही दृढ़ होती है।

प्रयास

बैंक की नौकरी छोड़, आदिवासियों को औषधीय खेती से दे रहे रोजगार

Submitted by HindiWater on Fri, 08/09/2019 - 17:38
राजाराम त्रिपाठी ।राजाराम त्रिपाठी । घटती खेती का कारण किसानों के प्रति सरकार का रवैया भी है, जिस कारण किसान अब खेती करना पसंद नहीं कर रहे हैं और हजारों परिवार खेती छोड़ चुके हैं तथा कोई अन्य काम कर रहे हैं। इन कारणों से किसानी और खेती वर्ततान में देश मे बड़ा मुद्दा है। लेकिन इन सभी के बीच छत्तीसगढ़ के राजाराम त्रिपाठी भी हैं, जिन्होंने बैंक की नौकरी छोड़ औषधीय खेती शुरू की और आज वें आदिवासियों को औषधीय खेती से रोजगार दे रहे हैं। 

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
Source
दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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