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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Fri, 02/21/2020 - 10:10
शुद्ध जल उपलब्धता - मध्यप्रदेश के बढ़ते सधे कदम 
मध्यप्रदेश में पिछले कुछ दिनों से लोगों को पीने के साफ पानी को उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार के स्तर पर लगातार चिन्तन चल रहा है। कार्यशालाएं हो रही हैं। देश भर से जल विशेषज्ञों को आमंत्रित कर उनकी राय ली जा रही है। अनुभव बटोरे जा रहे हैं। इस चिन्तन में पीएचई मंत्री और ग्रामीण विकास मंत्री, अपनी-अपनी टीम को लेकर एक साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।

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Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 15:10
Source:
drought india
भारत इस समय गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। भारत इस समय गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। साफ पानी न मिलने के कारण हर साल दो लाख लोग जान गवां रहे हैं। देश के करीब 60 लाख लोग पानी की गंभीर किल्लत का सामना कर रहे हैं। वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि बढ़ती आबादी के कारण 2030 तक भारत में पानी की मांग उपलब्धता से दोगुनी हो जाएगी। 2030 के बाद ये संकट और भी ज्यादा गहरा सकता है। जिससे भारत की जीडीपी में 6 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन इन सभी समस्याओं के बीच उत्तर प्रदेश में पांच करोड़ यूकेलिप्टिस के पौधे लगाने का निर्णय धरती की कोख को सोखने की तैयारी करने के समान प्रतीत हो रहा है। जिससे पानी की भीषण कमी झेल रहे उत्तर प्रदेश में निकट भविष्य में पानी की और बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। जिसका नुकसान आसपास के इलाकों को भी उठाना पड़ेगा।
Submitted by UrbanWater on Tue, 06/18/2019 - 14:48
Source:
दैनिक जागरण, 13 जून 2019
ganga
50 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका केवल गंगा के जल पर निर्भर है। 50 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका केवल गंगा के जल पर निर्भर है। इसमें भी 25 करोड़ लोग तो पूर्ण रूप से गंगा के जल पर आश्रित हैं। स्पष्ट है कि गंगा आस्था ही नहीं, आजीविका का भी स्रोत है। नदियां केवल जल का नहीं बल्कि जीवन का भी स्रोत होती है। विश्व की अनेक संस्कृतियों और सभ्यताओं का जन्म नदियों के तट पर ही हुआ है। नदियां संस्कृति की संरक्षक हैं और संवाहक भी हैं। नदियों ने मनुष्यों को जन्म तो नहीं, परंतु जीवन दिया है। वास्तव में जिस प्रकार मनुष्य को जीने का अधिकार है, उसी प्रकार हमारी नदियों को भी स्वच्छंद होकर अविरल एवं निर्मल रूप से प्रवाहित होने का अधिकार है। नदियों को जीवनदायिनी कहा जाता है, फिर भी लाखों-करोड़ों लीटर प्रदूषित जल इनमें प्रवाहित किया जाता है। आज नदियों में शौच करना, फूल और पूजन सामग्री डालना, उर्वरक कीटनाशक डालना आम बात हो गई है।
Submitted by UrbanWater on Mon, 06/17/2019 - 11:31
Source:
matri sadan
मातृ सदन में स्वामी शिवानंद और ब्रम्हचारी आत्मबोधानंद। गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए मातृसदन बीस वर्षों से संघर्षरत है। हरिद्वार की पवित्र भूमि पर गंगा की रक्षा के लिए मातृसदन के दो संत स्वामी निगमानंद और प्रख्यात वैज्ञानिक स्वामी ज्ञानस्परूप सानंद उर्फ प्रो. जीडी अग्रवाल अपने प्राणों की आहुति दे चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद भी गंगा के प्रति शासन और प्रशासन की उदासीनता कम नहीं हुई। विभिन्न योजनाओं में करोड़ों रुपये व्यय करने के बाद भी गंगा में प्रदूषण कम नहीं हुआ। केंद्र सरकार और नेशनल मिशन फाॅर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) द्वारा गंगा की रक्षा के लिए मातृसदन को दिए लिखित आश्वासन पर भी अभी तक अमल नहीं किया गया है। केंद्र सरकार और एनएमसीजी के इस रवैया से रुष्ठ होकर मातृसदन ने अब पहले से वृहद आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है और इस बार मातृसदन के आंदोलन को देशभर में फैलाते हुए मातृशक्ति मातृसदन के आंदोलन की बागडोर संभालेंगी तथा आंदोलन को धार देने का काम करेंगी।

प्रयास

Submitted by RuralWater on Wed, 02/19/2020 - 10:49
चिपको की तर्ज पर बचाया तांतरी का जंगल
मैंने जिंदगी का सबसे अहम पाठ सीख लिया है कि कभी हार मत मानो और अपनी बातों का अनुसरण करते रहो। सभी महिलाएं चिपको आंदोलन की तर्ज पर पेड़ों से चिपक गईं। वनकर्मियों ने हमें समझाने की कोशिशें की, तो लकड़ी माफिया ने हमें रिश्वत देने की कोशिश की और मना करने पर हमें जान से मारने की धमकी भी दी। लेकिन हमने अपने कदम पीछे लेने से मना कर दिया।

नोटिस बोर्ड

Submitted by RuralWater on Mon, 02/17/2020 - 15:35
Source:
Hindi Watet Portal
नदी घाटी विचार मंच
अब खतरा मात्र नदी नही, नदी घाटियों पर सामने दिखता है। नदी घाटियों का व्यवसायिकरण हो रहा है। बांधों की बात तो पीछे छोड़े, पूरी नदी घाटी, नदी जोड़ परियोजना से प्रभावित होने की बात है; जिसका न केवल मानव बल्कि पूरी प्रकृति पर स्थानीय देशी और वैश्विक प्रभाव भी हो रहा है।
Submitted by HindiWater on Mon, 02/10/2020 - 10:51
Source:
जल संसाधन प्रबंधन पर पुणे में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला
राष्ट्रीय जल अकादमी, केन्द्रीय जल आयोग, पुणे में “जल संसाधन प्रबंधन पर प्रशिक्षण.सह.कार्यशाला” विषय पर 26-27 मार्च को गैर सरकारी संगठनों और मीडिया कर्मियों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में पंजीकरण कराने के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।
Submitted by HindiWater on Mon, 01/20/2020 - 11:07
Source:
मीडिया महोत्सव-2020
गत वर्षों की भांति इस बार भी 22-23 फरवरी, 2020 (शनिवार-रविवार, चतुर्दशी-अमावस्या, कृष्ण पक्ष, माघ, विक्रम संवत 2076) को “भारत का अभ्युदय : मीडिया की भूमिका” पर केन्द्रित “मीडिया महोत्सव-2020” का आयोजन भोपाल में होना सुनिश्चित हुआ है l

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खासम-खास

शुद्ध जल उपलब्धता - मध्यप्रदेश के बढ़ते सधे कदम 

Submitted by HindiWater on Fri, 02/21/2020 - 10:10
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
शुद्ध जल उपलब्धता - मध्यप्रदेश के बढ़ते सधे कदम 
मध्यप्रदेश में पिछले कुछ दिनों से लोगों को पीने के साफ पानी को उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार के स्तर पर लगातार चिन्तन चल रहा है। कार्यशालाएं हो रही हैं। देश भर से जल विशेषज्ञों को आमंत्रित कर उनकी राय ली जा रही है। अनुभव बटोरे जा रहे हैं। इस चिन्तन में पीएचई मंत्री और ग्रामीण विकास मंत्री, अपनी-अपनी टीम को लेकर एक साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।

Content

धरती की कोख सोखने की तैयारी

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 15:10
drought india
भारत इस समय गंभीर जल संकट से जूझ रहा है।भारत इस समय गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। भारत इस समय गंभीर जल संकट से जूझ रहा है। साफ पानी न मिलने के कारण हर साल दो लाख लोग जान गवां रहे हैं। देश के करीब 60 लाख लोग पानी की गंभीर किल्लत का सामना कर रहे हैं। वर्तमान परिदृश्य को देखते हुए अनुमान लगाया जा रहा है कि बढ़ती आबादी के कारण 2030 तक भारत में पानी की मांग उपलब्धता से दोगुनी हो जाएगी। 2030 के बाद ये संकट और भी ज्यादा गहरा सकता है। जिससे भारत की जीडीपी में 6 प्रतिशत तक कमी आने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन इन सभी समस्याओं के बीच उत्तर प्रदेश में पांच करोड़ यूकेलिप्टिस के पौधे लगाने का निर्णय धरती की कोख को सोखने की तैयारी करने के समान प्रतीत हो रहा है। जिससे पानी की भीषण कमी झेल रहे उत्तर प्रदेश में निकट भविष्य में पानी की और बड़ी समस्या खड़ी हो सकती है। जिसका नुकसान आसपास के इलाकों को भी उठाना पड़ेगा।

अब गंगा को बचाने की जिम्मेदारी हमारी है

Submitted by UrbanWater on Tue, 06/18/2019 - 14:48
Source
दैनिक जागरण, 13 जून 2019
ganga
50 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका केवल गंगा के जल पर निर्भर है।50 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका केवल गंगा के जल पर निर्भर है। 50 करोड़ से अधिक लोगों की आजीविका केवल गंगा के जल पर निर्भर है। इसमें भी 25 करोड़ लोग तो पूर्ण रूप से गंगा के जल पर आश्रित हैं। स्पष्ट है कि गंगा आस्था ही नहीं, आजीविका का भी स्रोत है। नदियां केवल जल का नहीं बल्कि जीवन का भी स्रोत होती है। विश्व की अनेक संस्कृतियों और सभ्यताओं का जन्म नदियों के तट पर ही हुआ है। नदियां संस्कृति की संरक्षक हैं और संवाहक भी हैं। नदियों ने मनुष्यों को जन्म तो नहीं, परंतु जीवन दिया है। वास्तव में जिस प्रकार मनुष्य को जीने का अधिकार है, उसी प्रकार हमारी नदियों को भी स्वच्छंद होकर अविरल एवं निर्मल रूप से प्रवाहित होने का अधिकार है। नदियों को जीवनदायिनी कहा जाता है, फिर भी लाखों-करोड़ों लीटर प्रदूषित जल इनमें प्रवाहित किया जाता है। आज नदियों में शौच करना, फूल और पूजन सामग्री डालना, उर्वरक कीटनाशक डालना आम बात हो गई है।

मातृशक्ति ने थामी गंगा रक्षा की कमान, होगा आंदोलन

Submitted by UrbanWater on Mon, 06/17/2019 - 11:31
matri sadan
मातृ सदन में स्वामी शिवानंद और ब्रम्हचारी आत्मबोधानंद।मातृ सदन में स्वामी शिवानंद और ब्रम्हचारी आत्मबोधानंद। गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए मातृसदन बीस वर्षों से संघर्षरत है। हरिद्वार की पवित्र भूमि पर गंगा की रक्षा के लिए मातृसदन के दो संत स्वामी निगमानंद और प्रख्यात वैज्ञानिक स्वामी ज्ञानस्परूप सानंद उर्फ प्रो. जीडी अग्रवाल अपने प्राणों की आहुति दे चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद भी गंगा के प्रति शासन और प्रशासन की उदासीनता कम नहीं हुई। विभिन्न योजनाओं में करोड़ों रुपये व्यय करने के बाद भी गंगा में प्रदूषण कम नहीं हुआ। केंद्र सरकार और नेशनल मिशन फाॅर क्लीन गंगा (एनएमसीजी) द्वारा गंगा की रक्षा के लिए मातृसदन को दिए लिखित आश्वासन पर भी अभी तक अमल नहीं किया गया है। केंद्र सरकार और एनएमसीजी के इस रवैया से रुष्ठ होकर मातृसदन ने अब पहले से वृहद आंदोलन का बिगुल फूंक दिया है और इस बार मातृसदन के आंदोलन को देशभर में फैलाते हुए मातृशक्ति मातृसदन के आंदोलन की बागडोर संभालेंगी तथा आंदोलन को धार देने का काम करेंगी।

प्रयास

चिपको की तर्ज पर बचाया तांतरी का जंगल

Submitted by RuralWater on Wed, 02/19/2020 - 10:49
Source
अमर उजाला, 19 फरवरी, 2020
चिपको की तर्ज पर बचाया तांतरी का जंगल
मैंने जिंदगी का सबसे अहम पाठ सीख लिया है कि कभी हार मत मानो और अपनी बातों का अनुसरण करते रहो। सभी महिलाएं चिपको आंदोलन की तर्ज पर पेड़ों से चिपक गईं। वनकर्मियों ने हमें समझाने की कोशिशें की, तो लकड़ी माफिया ने हमें रिश्वत देने की कोशिश की और मना करने पर हमें जान से मारने की धमकी भी दी। लेकिन हमने अपने कदम पीछे लेने से मना कर दिया।

नोटिस बोर्ड

नदी घाटी विचार मंच

Submitted by RuralWater on Mon, 02/17/2020 - 15:35
Source
Hindi Watet Portal
नदी घाटी विचार मंच
अब खतरा मात्र नदी नही, नदी घाटियों पर सामने दिखता है। नदी घाटियों का व्यवसायिकरण हो रहा है। बांधों की बात तो पीछे छोड़े, पूरी नदी घाटी, नदी जोड़ परियोजना से प्रभावित होने की बात है; जिसका न केवल मानव बल्कि पूरी प्रकृति पर स्थानीय देशी और वैश्विक प्रभाव भी हो रहा है।

जल संसाधन प्रबंधन पर पुणे में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला

Submitted by HindiWater on Mon, 02/10/2020 - 10:51
जल संसाधन प्रबंधन पर पुणे में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला
राष्ट्रीय जल अकादमी, केन्द्रीय जल आयोग, पुणे में “जल संसाधन प्रबंधन पर प्रशिक्षण.सह.कार्यशाला” विषय पर 26-27 मार्च को गैर सरकारी संगठनों और मीडिया कर्मियों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में पंजीकरण कराने के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।

मीडिया महोत्सव-2020

Submitted by HindiWater on Mon, 01/20/2020 - 11:07
मीडिया महोत्सव-2020
गत वर्षों की भांति इस बार भी 22-23 फरवरी, 2020 (शनिवार-रविवार, चतुर्दशी-अमावस्या, कृष्ण पक्ष, माघ, विक्रम संवत 2076) को “भारत का अभ्युदय : मीडिया की भूमिका” पर केन्द्रित “मीडिया महोत्सव-2020” का आयोजन भोपाल में होना सुनिश्चित हुआ है l

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