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Submitted by HindiWater on Thu, 12/12/2019 - 13:10
मध्य प्रदेश जलाधिकार अधिनियम: हक़दारी या निजीकरण की तैयारी ?
चर्चा है कि मध्य प्रदेश, इन दिनों जलाधिकार अधिनियम बनाने वाला भारत का पहला राज्य बनने की तैयारी में व्यस्त है। वर्ष-2024 तक सभी को नल से जल पिलाने की केन्द्रीय घोषणा भी इसी कालखण्ड में ज़मीन पर विस्तार पाने की होड़ में है। सामान्यतः कम विद्रोही प्रवृत्ति के कारण म. प्र. पहले भी कई केन्द्रीय योजनाओं-परियोजनाओं को व्यवहार में उतारने के पायलट प्रोजेक्ट की भूमि बनाता रहा है।

Content

Submitted by Hindi on Mon, 10/27/2014 - 09:20
Source:
कल्पतरू एक्सप्रेस, 27 अक्टूबर 2014
Yamuna
दिल्ली का मीडिया और केंद्र सरकार यमुना सफाई पर फतवे जारी करते रहते हैं, लेकिन नजफगढ़ नाले से लेकर 16 बड़े नालों ने दिल्ली में यमुना का जो हाल कर रखा है वह यमुना के मानव फांस का ही द्योतक है। शुक्र है आज कृष्ण नहीं हुए वरना वे कालिंदी के उद्धार के लिए दिल्ली को ही नाथते। दिल्ली ही आज का वह ‘कालिया नाग’ है जिसने यमुना को विषैला कर रखा है। जरूरी है कि या तो वह अपनी आदत सुधार ले या यमुना को छोड़कर कहीं और चला जाए।यम द्वितीया के दिन जब यम फांस से मुक्ति के लिए मृत्यु लोक के वासी यमुना में डुबकी लगाकर अपने को तार रहे थे तो यमुना मानव फांस से मुक्ति के लिए छटपटा रही थी। कहते हैं कि यम द्वितीया के दिन मथुरा में स्नान का विशेष पुण्य होता है और इसीलिए भाई-बहन के इस पर्व को सफल बनाने के उद्देश्य से प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए थे। तीन हजार क्यूसेक पानी विशेष तौर पर छोड़ा गया था। अफसरों की मुस्तैदी से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट चलते रहे, सीवेज पंपिंग स्टेशन ओवर फ्लो नहीं हुए। लेकिन, न यमुना को ताजा पानी नसीब हुआ, न ही उसके भक्तों को। अगर आस्था के आगे मनुष्य ने आंख और नाक बंद करने की कला न सीखी होती तो उस पानी में डुबकी लगाना और अपना उद्धार करना मुश्किल था।

इन्हीं स्थितियों से ऊबकर यमुना सत्याग्रहियों ने दो नवंबर को एक बार फिर हथिनी कुंड बैराज पर आर-पार की लड़ाई का फैसला किया है। हथिनी कुंड बैराज वह जगह है, जहां पर हरियाणा यमुना में से अपनी जरूरत के लिहाज से पानी निकाल लेता है। जबरदस्ती का यह सिलसिला ताजेवाला से शुरू होता है और वजीराबाद, ओखला होते हुए गोकुल बैराज और उससे आगे तक जारी रहता है। हरियाणा अगर यमुना के पानी के अधिकतम दोहन के लिए जिम्मेदार है तो दिल्ली उसके दोहन के साथ प्रदूषण के लिए सर्वाधिक जिम्मेदार है। यमुना को धीरे-धीरे मारने के इस पाप में उत्तर प्रदेश का भी योगदान है, लेकिन वह हरियाणा और दिल्ली के पाप के आगे दब जाता है। उत्तर प्रदेश का एक उदाहरण गोकुल बैराज है जिसे मथुरा, आगरा और वृंदावन को पानी देने के लिए यमुना पर बनाया गया था, लेकिन इसके फाटक बंद होने से किसानों की जमीनें डूब गईं और वे मुआवजे के लिए तरस रहे हैं। हार कर किसानों ने अब बैराज में कूदकर आत्महत्या की धमकी दी है।

उधर, हरियाणा के मुख्यमंत्री दिल्ली पर यमुना को प्रदूषित करने का आरोप लगाते रहे हैं। यह आरोप तब भी लगता था जब दिल्ली में कांग्रेसी मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और हरियाणा में उन्हीं की पार्टी के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा थे। यह आरोप अब भी बंद नहीं होगा, चाहे दिल्ली में राष्ट्रपति शासन और हरियाणा में भाजपा सरकार रहे। उसकी वजह भी है। वजीराबाद से पहले यमुना साफ भी है और उसमें पानी भी है। लेकिन, वजीराबाद से ओखला तक पहुंचने में यमुना देश के सबसे चमकदार और सबके कल्याण का लंबा-चौड़ा दावा करने वाली देश की राजधानी की मार से इतनी पस्त हो जाती है कि न तो उसमें पानी बचता है न ही स्वच्छता। ऊपर से तुर्रा यह है कि हम यमुना को टेम्स बना देंगे।

दिल्ली का मीडिया और वहां स्थित केंद्र सरकार यमुना सफाई पर लंबे-चौड़े फतवे जारी करती रहती है। लेकिन, मशहूर नजफगढ़ नाले से लेकर सोलह बड़े नालों ने दिल्ली में यमुना का जो हाल कर रखा है वह यमुना के मानव फांस का ही द्योतक है। शुक्र है आज कृष्ण नहीं हुए वरना वे कालिंदी के उद्धार के लिए दिल्ली को ही नाथते। क्योंकि दिल्ली को नाथे बिना यमुना का उद्धार संभव नहीं है। दिल्ली ही आज का वह ‘कालिया नाग’ है जिसने यमुना को विषैला कर रखा है और जरूरी है कि या तो वह अपनी आदत सुधार ले या यमुना को छोड़कर कहीं और चला जाए। लेकिन, मुश्किल है कि दिल्ली को नाथेगा कौन?

बड़े-बड़े दावे करने वाली दिल्ली यमुना के साथ कितना छल कर रही है, यह बात आंकड़ों से साबित होती है। यमुना सफाई के नाम पर कई हजार करोड़ रुपये पानी की तरह बहा दिए जाने के बावजूद राजधानी में अभी महज 17 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जा सके हैं। वे सिर्फ आधी गंदगी का शोधन कर पाते हैं। इस बीच यूपीए सरकार ने 2013 में जापान सरकार के सहयोग से ओखला बैराज पर 1656 करोड़ रुपये की लागत से अति आधुनिक सफाई संयंत्र लगाने की योजना बनाई थी। लेकिन, अब यह राशि कम पड़ रही है और आंकड़ा 6000 करोड़ तक जा रहा है। उधर, दिल्ली जल बोर्ड की योजना के तहत राजधानी में सीवेज ट्रीटमेंट पर 2031 तक 25 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं।

यमुना प्रदूषण के बढ़ते जाने और सफाई खर्च के बीच एक समानुपाती रिश्ता है। यह बात ब्रज लाइफ लाइन वेलफेयर से जुड़े यमुना मुक्ति के योद्धा महेंद्रनाथ चतुर्वेदी की एक पुस्तिका से प्रमाणित होती है। ‘सफरनामा’ नाम से प्रकाशित उनकी यह पुस्तक आरंभ में ही कहती है- ‘नदी के प्रदूषण का प्राथमिक कारक कॉलीफार्म बैक्टीरिया जहां निजामुद्दीन ब्रिज पर 1999 में आठ करोड़ पचास लाख था, वह बढ़कर 2012 में 17 अरब की संख्या पार कर गया। वह भी छह हजार करोड़ रुपयों की भारी राशि के खर्च किए जाने के बाद।’ यह इस तथ्य को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त है कि सरकारी धन की किस प्रकार बंदरबांट की गई है। यहां यह जानना भी दिलचस्प है कि वह 1983-84 के वर्ष को यमुना के प्रदूषण की शुरुआत का वर्ष बताते हैं और लगभग यही वर्ष गंगा एक्शन प्लान का भी है।

आज सवाल यह है कि क्या यमुना की सफाई जल संसाधन मंत्री उमा भारती और उनके साथ धार्मिक तरीके से इसे मुद्दा बनाने का कोलाहल करने वाले लोगों के द्वारा होगी या विशुद्ध वैज्ञानिक तरीके से औद्योगिक लॉबी द्वारा की जाएगी? यह एक गंभीर सवाल है और इस पर समाज में ही नहीं सरकार के भीतर भी खींचतान कम नहीं है। वे इसे वोट के लिए धार्मिक मसला बनाना चाहते हैं, लेकिन औद्योगिक शक्तियों व हरित क्रांति से पोषित किसान लॉबी के बिजली पानी के हितों की कुर्बानी देकर गंगा- यमुना को मुक्त नहीं करना चाहते। पर, यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि गंगा और यमुना किसी पार्टी को वोट नहीं देतीं और न ही किसी धर्म की माला जपती हैं।

वे सभी धर्मों के अनुयायियों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से समभाव से ही व्यवहार करती हैं। लेकिन, उनकी अन्याय और अत्याचार सहने की एक सीमा है। जब वे कुपित होती हैं तो न तो हिन्दू बहुल उत्तराखंड को बख्शती हैं और न ही मुस्लिम बहुल कश्मीर को। इसलिए नदियों का अपना धर्म और अपनी राजनीति है। वह धर्म है नदियों के साफ-सुथरे तरीके से अविरल बहने का। हमें उसे समझना होगा और उसे इस लोकतंत्र में जगह देनी ही होगी। तभी यमुना का मानव फांस दूर होगा और तभी वह हमारा यम फांस दूर कर पाएंगी।

(लेखक कल्पतरु एक्सप्रेस के कार्यकारी संपादक हैं), ईमेल-tripathiarunk@gmail.com

Submitted by Hindi on Sun, 10/26/2014 - 12:36
Source:
जनसत्ता, 26 अक्टूबर 2014
भारत को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए विज्ञापनों पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। उसी का अध्यक्ष पत्रकारों के सवालों के जवाब में यह कह रहा हो कि अभी यह समय मुख्यमंत्री कौन पर बात करने का नहीं, पटाखे जलाने का है। और हमने देखा कि लगभग सभी न्यूज चैनलों के स्क्रीन पटाखे के धुएँ से भर गए। आस्थावान समाज के लिए बेहतर है कि वह टेलीविजन की सारी सामग्री को अभियान का दूसरा संस्करण ही मानेस्वच्छता अभियान के तहत दीपिका पादुकोण, शाहरुख खान और अभिषेक बच्चन ने ‘कॉमेडी नाइट्स विद कपिल’ के प्रस्तोता कपिल शर्मा की झाडू से सफाई की। फिल्म ‘हैप्पी न्यू इयर’ के प्रमोशन में आए इन सितारों ने पहले स्टूडियो के फर्स पर झाड़ू फिराई फिर एक-एक करके कपिल शर्मा के शरीर पर। जाहिर है, यह सब मनोरंजन के लिए किया गया। जो स्टूडियो में मौजूद दर्शक और खुद कपिल शर्मा लगातार हंसते रहे।

नरेंद्र मोदी सरकार के स्वच्छता अभियान की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि ‘कॉमेडी नाइट्स विद कपिल’ और ‘बिग बॉस’ जैसे आधा दर्जन टेलीविजन कार्यक्रमों में इसकी चर्चा किसी न किसी रूप में हुई। कुछ में तो सीधे-सीधे पूरी टीम को सफाई करते दिखाया गया, तो कुछ में संवादों के जरिए यह बताने की कोशिश की गई कि देश में स्वच्छता अभियान चल रहा है।

Submitted by HindiWater on Wed, 10/22/2014 - 15:50
Source:
कुरुक्षेत्र, अक्टूबर 2014
Swachh Bharat
“स्वच्छता स्वतंत्रता से ज्यादा महत्वपूर्ण है” महात्मा गांधी

आजादी के 64 वर्ष बाद भी देश की आधी से अधिक आबादी खुले में शौच करती है जोकि वाकई में चिंता का विषय है। शौचालयों का नहीं होना, पानी का अभाव या अपर्याप्त प्रौद्योगिक के कारण संचालन और रखरखाव के अभाव के कारण हालात नहीं सुधर रहे हैं।

ऐसा नहीं है कि शौचालय बनाने की दिशा में अभी तक कोई कार्य नहीं किया गया लेकिन यह कार्य बेहद धीमी गति से हुआ और जो हुआ वह भी गुणवत्ता या रखरखाव में कमी या संचालन के अभाव के कारण लोगों के जीवन-स्तर में उतना परिवर्तन नहीं ला पाया जितना कि इतने वर्षों में आना चाहिए था। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में 590 मिलियन लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Fri, 12/13/2019 - 10:46
जलवायु परिवर्तन से लड़ रही 8 साल की भारतीय योद्धा
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में सबसे कम उम्र की भारतीय योद्ध ने वैश्विक नेताओं से धरती को बचाने की अपील की है। अपने जुनून के कारण भारतीय ग्रेटा के नाम से मशहूर आठ वर्षीय लिसीप्रिया कंगुजम ने पृथ्वी को बचाने और बच्चों के भव्ष्यि को बचाने के लिए फौरन कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। 

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Fri, 12/06/2019 - 11:05
Source:
गंगा की रक्षा के लिए 15 दिसंबर से पद्मावती मातृसदन में करेंगी अनशन
मातृसदन द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मांगों के संदर्भ में एक पत्र भेजा गया, लेकिन अभी तक मांग पूरी नहीं हुई। जिस कारण मातृसदन की साध्वी पद्मावती ने 15 दिसंबर 2019 से 6 सूत्रीय मांगों को लेकर अनशन की घोषणा कर दी है। अनशन के बारे में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर भी अवगत करा दिया गया है। 
Submitted by HindiWater on Wed, 11/27/2019 - 13:25
Source:
"संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स-2019" के लिए आवेदन
गैर-लाभकारी संगठन चरखा विकास संचार नेटवर्क ने 'संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स 2019’ की घोषणा की है। इसके अंतर्गत उन लेखकों को मंच प्रदान किया जाएगा जो ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में छुपी ऐसी प्रतिभाओं को उजागर करने का हौसला रखते हैं, जो मीडिया की नजरों से अब तक दूर रहा है।
Submitted by HindiWater on Mon, 11/25/2019 - 09:44
Source:
दैनिक जागरण, 25 नवम्बर 2019
‘ग्रीन कुंभ’ की थीम पर होगा हरिद्वार कुंभ
कुंभ-2021 को भव्य, शानदार, यादगार और अनूठा बनाने के लिए कुंभ मेला अधिष्ठान बड़े पैमाने पर तैयारी कर रहा है। विशेष यह कि इस बार हरिद्वार यह आयोजन ‘ग्रीन कुंभ’ की थीम पर होगा। इसमें गंगा की शुद्धता और पर्यावरण की रक्षा पर विशेष फोकस रहेगा। इसके तहत विद्युत ऊर्जा का कम से कम (लगभग शून्य) और सौर ऊर्जा का अधिकाधिक इस्तेमाल करने की योजना है।

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खासम-खास

मध्य प्रदेश जलाधिकार अधिनियम: हक़दारी या निजीकरण की तैयारी ?

Submitted by HindiWater on Thu, 12/12/2019 - 13:10
Author
अरुण तिवारी
चर्चा है कि मध्य प्रदेश, इन दिनों जलाधिकार अधिनियम बनाने वाला भारत का पहला राज्य बनने की तैयारी में व्यस्त है। वर्ष-2024 तक सभी को नल से जल पिलाने की केन्द्रीय घोषणा भी इसी कालखण्ड में ज़मीन पर विस्तार पाने की होड़ में है। सामान्यतः कम विद्रोही प्रवृत्ति के कारण म. प्र. पहले भी कई केन्द्रीय योजनाओं-परियोजनाओं को व्यवहार में उतारने के पायलट प्रोजेक्ट की भूमि बनाता रहा है।

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मानव फांस में उलझी यमुना

Submitted by Hindi on Mon, 10/27/2014 - 09:20
Author
अरुण कुमार त्रिपाठी
Source
कल्पतरू एक्सप्रेस, 27 अक्टूबर 2014
दिल्ली का मीडिया और केंद्र सरकार यमुना सफाई पर फतवे जारी करते रहते हैं, लेकिन नजफगढ़ नाले से लेकर 16 बड़े नालों ने दिल्ली में यमुना का जो हाल कर रखा है वह यमुना के मानव फांस का ही द्योतक है। शुक्र है आज कृष्ण नहीं हुए वरना वे कालिंदी के उद्धार के लिए दिल्ली को ही नाथते। दिल्ली ही आज का वह ‘कालिया नाग’ है जिसने यमुना को विषैला कर रखा है। जरूरी है कि या तो वह अपनी आदत सुधार ले या यमुना को छोड़कर कहीं और चला जाए।यम द्वितीया के दिन जब यम फांस से मुक्ति के लिए मृत्यु लोक के वासी यमुना में डुबकी लगाकर अपने को तार रहे थे तो यमुना मानव फांस से मुक्ति के लिए छटपटा रही थी। कहते हैं कि यम द्वितीया के दिन मथुरा में स्नान का विशेष पुण्य होता है और इसीलिए भाई-बहन के इस पर्व को सफल बनाने के उद्देश्य से प्रशासन ने विशेष इंतजाम किए थे। तीन हजार क्यूसेक पानी विशेष तौर पर छोड़ा गया था। अफसरों की मुस्तैदी से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट चलते रहे, सीवेज पंपिंग स्टेशन ओवर फ्लो नहीं हुए। लेकिन, न यमुना को ताजा पानी नसीब हुआ, न ही उसके भक्तों को। अगर आस्था के आगे मनुष्य ने आंख और नाक बंद करने की कला न सीखी होती तो उस पानी में डुबकी लगाना और अपना उद्धार करना मुश्किल था।

इन्हीं स्थितियों से ऊबकर यमुना सत्याग्रहियों ने दो नवंबर को एक बार फिर हथिनी कुंड बैराज पर आर-पार की लड़ाई का फैसला किया है। हथिनी कुंड बैराज वह जगह है, जहां पर हरियाणा यमुना में से अपनी जरूरत के लिहाज से पानी निकाल लेता है। जबरदस्ती का यह सिलसिला ताजेवाला से शुरू होता है और वजीराबाद, ओखला होते हुए गोकुल बैराज और उससे आगे तक जारी रहता है। हरियाणा अगर यमुना के पानी के अधिकतम दोहन के लिए जिम्मेदार है तो दिल्ली उसके दोहन के साथ प्रदूषण के लिए सर्वाधिक जिम्मेदार है। यमुना को धीरे-धीरे मारने के इस पाप में उत्तर प्रदेश का भी योगदान है, लेकिन वह हरियाणा और दिल्ली के पाप के आगे दब जाता है। उत्तर प्रदेश का एक उदाहरण गोकुल बैराज है जिसे मथुरा, आगरा और वृंदावन को पानी देने के लिए यमुना पर बनाया गया था, लेकिन इसके फाटक बंद होने से किसानों की जमीनें डूब गईं और वे मुआवजे के लिए तरस रहे हैं। हार कर किसानों ने अब बैराज में कूदकर आत्महत्या की धमकी दी है।

उधर, हरियाणा के मुख्यमंत्री दिल्ली पर यमुना को प्रदूषित करने का आरोप लगाते रहे हैं। यह आरोप तब भी लगता था जब दिल्ली में कांग्रेसी मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और हरियाणा में उन्हीं की पार्टी के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा थे। यह आरोप अब भी बंद नहीं होगा, चाहे दिल्ली में राष्ट्रपति शासन और हरियाणा में भाजपा सरकार रहे। उसकी वजह भी है। वजीराबाद से पहले यमुना साफ भी है और उसमें पानी भी है। लेकिन, वजीराबाद से ओखला तक पहुंचने में यमुना देश के सबसे चमकदार और सबके कल्याण का लंबा-चौड़ा दावा करने वाली देश की राजधानी की मार से इतनी पस्त हो जाती है कि न तो उसमें पानी बचता है न ही स्वच्छता। ऊपर से तुर्रा यह है कि हम यमुना को टेम्स बना देंगे।

दिल्ली का मीडिया और वहां स्थित केंद्र सरकार यमुना सफाई पर लंबे-चौड़े फतवे जारी करती रहती है। लेकिन, मशहूर नजफगढ़ नाले से लेकर सोलह बड़े नालों ने दिल्ली में यमुना का जो हाल कर रखा है वह यमुना के मानव फांस का ही द्योतक है। शुक्र है आज कृष्ण नहीं हुए वरना वे कालिंदी के उद्धार के लिए दिल्ली को ही नाथते। क्योंकि दिल्ली को नाथे बिना यमुना का उद्धार संभव नहीं है। दिल्ली ही आज का वह ‘कालिया नाग’ है जिसने यमुना को विषैला कर रखा है और जरूरी है कि या तो वह अपनी आदत सुधार ले या यमुना को छोड़कर कहीं और चला जाए। लेकिन, मुश्किल है कि दिल्ली को नाथेगा कौन?

बड़े-बड़े दावे करने वाली दिल्ली यमुना के साथ कितना छल कर रही है, यह बात आंकड़ों से साबित होती है। यमुना सफाई के नाम पर कई हजार करोड़ रुपये पानी की तरह बहा दिए जाने के बावजूद राजधानी में अभी महज 17 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाए जा सके हैं। वे सिर्फ आधी गंदगी का शोधन कर पाते हैं। इस बीच यूपीए सरकार ने 2013 में जापान सरकार के सहयोग से ओखला बैराज पर 1656 करोड़ रुपये की लागत से अति आधुनिक सफाई संयंत्र लगाने की योजना बनाई थी। लेकिन, अब यह राशि कम पड़ रही है और आंकड़ा 6000 करोड़ तक जा रहा है। उधर, दिल्ली जल बोर्ड की योजना के तहत राजधानी में सीवेज ट्रीटमेंट पर 2031 तक 25 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं।

.यमुना प्रदूषण के बढ़ते जाने और सफाई खर्च के बीच एक समानुपाती रिश्ता है। यह बात ब्रज लाइफ लाइन वेलफेयर से जुड़े यमुना मुक्ति के योद्धा महेंद्रनाथ चतुर्वेदी की एक पुस्तिका से प्रमाणित होती है। ‘सफरनामा’ नाम से प्रकाशित उनकी यह पुस्तक आरंभ में ही कहती है- ‘नदी के प्रदूषण का प्राथमिक कारक कॉलीफार्म बैक्टीरिया जहां निजामुद्दीन ब्रिज पर 1999 में आठ करोड़ पचास लाख था, वह बढ़कर 2012 में 17 अरब की संख्या पार कर गया। वह भी छह हजार करोड़ रुपयों की भारी राशि के खर्च किए जाने के बाद।’ यह इस तथ्य को प्रमाणित करने के लिए पर्याप्त है कि सरकारी धन की किस प्रकार बंदरबांट की गई है। यहां यह जानना भी दिलचस्प है कि वह 1983-84 के वर्ष को यमुना के प्रदूषण की शुरुआत का वर्ष बताते हैं और लगभग यही वर्ष गंगा एक्शन प्लान का भी है।

आज सवाल यह है कि क्या यमुना की सफाई जल संसाधन मंत्री उमा भारती और उनके साथ धार्मिक तरीके से इसे मुद्दा बनाने का कोलाहल करने वाले लोगों के द्वारा होगी या विशुद्ध वैज्ञानिक तरीके से औद्योगिक लॉबी द्वारा की जाएगी? यह एक गंभीर सवाल है और इस पर समाज में ही नहीं सरकार के भीतर भी खींचतान कम नहीं है। वे इसे वोट के लिए धार्मिक मसला बनाना चाहते हैं, लेकिन औद्योगिक शक्तियों व हरित क्रांति से पोषित किसान लॉबी के बिजली पानी के हितों की कुर्बानी देकर गंगा- यमुना को मुक्त नहीं करना चाहते। पर, यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि गंगा और यमुना किसी पार्टी को वोट नहीं देतीं और न ही किसी धर्म की माला जपती हैं।

वे सभी धर्मों के अनुयायियों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों से समभाव से ही व्यवहार करती हैं। लेकिन, उनकी अन्याय और अत्याचार सहने की एक सीमा है। जब वे कुपित होती हैं तो न तो हिन्दू बहुल उत्तराखंड को बख्शती हैं और न ही मुस्लिम बहुल कश्मीर को। इसलिए नदियों का अपना धर्म और अपनी राजनीति है। वह धर्म है नदियों के साफ-सुथरे तरीके से अविरल बहने का। हमें उसे समझना होगा और उसे इस लोकतंत्र में जगह देनी ही होगी। तभी यमुना का मानव फांस दूर होगा और तभी वह हमारा यम फांस दूर कर पाएंगी।

(लेखक कल्पतरु एक्सप्रेस के कार्यकारी संपादक हैं), ईमेल-tripathiarunk@gmail.com

सफाई और मनोरंजन

Submitted by Hindi on Sun, 10/26/2014 - 12:36
Author
विनीत कुमार
Source
जनसत्ता, 26 अक्टूबर 2014
भारत को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए विज्ञापनों पर करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। उसी का अध्यक्ष पत्रकारों के सवालों के जवाब में यह कह रहा हो कि अभी यह समय मुख्यमंत्री कौन पर बात करने का नहीं, पटाखे जलाने का है। और हमने देखा कि लगभग सभी न्यूज चैनलों के स्क्रीन पटाखे के धुएँ से भर गए। आस्थावान समाज के लिए बेहतर है कि वह टेलीविजन की सारी सामग्री को अभियान का दूसरा संस्करण ही मानेस्वच्छता अभियान के तहत दीपिका पादुकोण, शाहरुख खान और अभिषेक बच्चन ने ‘कॉमेडी नाइट्स विद कपिल’ के प्रस्तोता कपिल शर्मा की झाडू से सफाई की। फिल्म ‘हैप्पी न्यू इयर’ के प्रमोशन में आए इन सितारों ने पहले स्टूडियो के फर्स पर झाड़ू फिराई फिर एक-एक करके कपिल शर्मा के शरीर पर। जाहिर है, यह सब मनोरंजन के लिए किया गया। जो स्टूडियो में मौजूद दर्शक और खुद कपिल शर्मा लगातार हंसते रहे।

नरेंद्र मोदी सरकार के स्वच्छता अभियान की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि ‘कॉमेडी नाइट्स विद कपिल’ और ‘बिग बॉस’ जैसे आधा दर्जन टेलीविजन कार्यक्रमों में इसकी चर्चा किसी न किसी रूप में हुई। कुछ में तो सीधे-सीधे पूरी टीम को सफाई करते दिखाया गया, तो कुछ में संवादों के जरिए यह बताने की कोशिश की गई कि देश में स्वच्छता अभियान चल रहा है।

गांधीजी का स्वच्छ भारत का सपना बनेगा हकीकत

Submitted by HindiWater on Wed, 10/22/2014 - 15:50
Author
कुरुक्षेत्र पत्रिका
Source
कुरुक्षेत्र, अक्टूबर 2014
“स्वच्छता स्वतंत्रता से ज्यादा महत्वपूर्ण है” महात्मा गांधी

.आजादी के 64 वर्ष बाद भी देश की आधी से अधिक आबादी खुले में शौच करती है जोकि वाकई में चिंता का विषय है। शौचालयों का नहीं होना, पानी का अभाव या अपर्याप्त प्रौद्योगिक के कारण संचालन और रखरखाव के अभाव के कारण हालात नहीं सुधर रहे हैं।

ऐसा नहीं है कि शौचालय बनाने की दिशा में अभी तक कोई कार्य नहीं किया गया लेकिन यह कार्य बेहद धीमी गति से हुआ और जो हुआ वह भी गुणवत्ता या रखरखाव में कमी या संचालन के अभाव के कारण लोगों के जीवन-स्तर में उतना परिवर्तन नहीं ला पाया जितना कि इतने वर्षों में आना चाहिए था। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में 590 मिलियन लोग खुले में शौच करने को मजबूर हैं।

प्रयास

जलवायु परिवर्तन से लड़ रही 8 साल की भारतीय योद्धा

Submitted by HindiWater on Fri, 12/13/2019 - 10:46
Source
हिंदुस्तान, 13 दिसंबर 2019
जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई में सबसे कम उम्र की भारतीय योद्ध ने वैश्विक नेताओं से धरती को बचाने की अपील की है। अपने जुनून के कारण भारतीय ग्रेटा के नाम से मशहूर आठ वर्षीय लिसीप्रिया कंगुजम ने पृथ्वी को बचाने और बच्चों के भव्ष्यि को बचाने के लिए फौरन कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। 

नोटिस बोर्ड

गंगा की रक्षा के लिए 15 दिसंबर से पद्मावती मातृसदन में करेंगी अनशन

Submitted by HindiWater on Fri, 12/06/2019 - 11:05
मातृसदन द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मांगों के संदर्भ में एक पत्र भेजा गया, लेकिन अभी तक मांग पूरी नहीं हुई। जिस कारण मातृसदन की साध्वी पद्मावती ने 15 दिसंबर 2019 से 6 सूत्रीय मांगों को लेकर अनशन की घोषणा कर दी है। अनशन के बारे में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर भी अवगत करा दिया गया है। 

"संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स-2019" के लिए आवेदन

Submitted by HindiWater on Wed, 11/27/2019 - 13:25
गैर-लाभकारी संगठन चरखा विकास संचार नेटवर्क ने 'संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स 2019’ की घोषणा की है। इसके अंतर्गत उन लेखकों को मंच प्रदान किया जाएगा जो ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में छुपी ऐसी प्रतिभाओं को उजागर करने का हौसला रखते हैं, जो मीडिया की नजरों से अब तक दूर रहा है।

‘ग्रीन कुंभ’ की थीम पर होगा हरिद्वार कुंभ

Submitted by HindiWater on Mon, 11/25/2019 - 09:44
Source
दैनिक जागरण, 25 नवम्बर 2019
कुंभ-2021 को भव्य, शानदार, यादगार और अनूठा बनाने के लिए कुंभ मेला अधिष्ठान बड़े पैमाने पर तैयारी कर रहा है। विशेष यह कि इस बार हरिद्वार यह आयोजन ‘ग्रीन कुंभ’ की थीम पर होगा। इसमें गंगा की शुद्धता और पर्यावरण की रक्षा पर विशेष फोकस रहेगा। इसके तहत विद्युत ऊर्जा का कम से कम (लगभग शून्य) और सौर ऊर्जा का अधिकाधिक इस्तेमाल करने की योजना है।

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