नया ताजा

पसंदीदा आलेख

आगामी कार्यक्रम

खासम-खास

नदियों के प्रवाह की अनदेखी पड़ेगी भारी

Submitted by editorial on Sun, 10/07/2018 - 17:59
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
Source
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
कृष्ण गोपाल ‘व्यास’कृष्ण गोपाल ‘व्यास’धरती पर हमारे स्वस्थ बचे रहने के लिये नदियाँ बेहद आवश्यक हैं। यदि हमारी पीढ़ी ने नदियों के घटते प्रवाह की अनदेखी की तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें नदियों के विनाश और पर्यावरण को गम्भीर नुकसान पहुँचाने वाले बेहद गैर-जिम्मेदार पूर्वजों के तौर पर याद करेंगी। इसलिये नदियों की बर्बादी को रोका जाना चाहिए। उनके प्रवाह की बहाली के लिये सार्थक प्रयास किया जाना चाहिए।

Content

निमन्त्रण

Submitted by admin on Mon, 02/23/2009 - 18:57
Author
संपादक
निमन्त्रण प्रिय साथी,

National Meet on Himalayan Waters in Delhi

हिमालय सेवा संघ दिनाँक 17, 18 एवं 19 मार्च, 2009 को एक तीन दिवसीय राष्ट्रीय बैठक नई दिल्ली में आयोजित कर रहा है। यह बैठक हिमालय क्षेत्र में जल, जंगल एवं जमीन के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रयासरत कार्यकर्ताओं एवं ग्रामवासियों का एक सांझा रचनात्मक मंच बनाने का प्रयास करेगी।

बैठक का आयोजन राष्ट्रीय बाल भवन, कोटला रोड़, नई दिल्ली - 110 002 में किया जा रहा है। हम आशा करते है कि इस बैठक में नौजवान, बच्चे एवं उत्साही युवक और युवतियॉं भी चर्चाओं में भाग लेंगे।

खारे पानी में मीठा फल

Submitted by admin on Wed, 02/18/2009 - 09:58
Author
जागरण याहू
Feb 15,2009 / जागरण याहू
नई दिल्ली, [रणविजय सिंह]। बीएसएफ के रिटायर्ड कमानडेंट बलजीत सिंह त्यागी ने बंजर भूमि पर फलदार पेड़ लगाने में तीन बार विफल रहने पर भी हिम्मत नहीं हारे। कृषि वैज्ञानिकों से पता चला कि भूमिगत पानी खारा होने से यहा पेड़ नहीं उग सकते। उन्होंने अपनी मेहनत व लगन से डेढ़ लाख लीटर क्षमता के वाटर हार्वेस्टिंग व भूमिगत जल रिचार्ज टैंक से जमीन को मीठे पानी से तर कर दिया। जिससे बाझ जमीन की कोख उर्वरा हो गई।

फ़रहाद कॉण्ट्रेक्टर

Submitted by admin on Sun, 02/15/2009 - 02:32
Author
संपादक

एक कर्मठ शिष्य, एक “जल-दूत” हैं


एक पुस्तक किस प्रकार किसी व्यक्ति का समूचा जीवन, उसकी सोच, उसकी कार्यक्षमता और जीवन के प्रति अवधारणा को बदल सकती है, उसका साक्षात उदाहरण हैं गुजरात के फ़रहाद कॉण्ट्रेक्टर, जिन्हें उनकी विशिष्ट समाजसेवा के लिये “संस्कृति अवार्ड” प्राप्त हुआ है और जिनकी कर्मस्थली है सतत सूखे से प्रभावित राजस्थान की मरुभूमि। फ़रहाद जब भी कुछ कहना शुरु करते हैं, वे उस पुस्तक का उल्लेख करते हैं, सबसे पहले उल्लेख करते हैं, अपने कथन के अन्त भी उसी पुस्तक के उद्धरण देते हैं। बीच-बीच में वे पुस्तक के बारे में बताते चलते हैं, कि किस प्रकार कोई पुस्तक किसी को इतना प्रभावित कर सकती है।

प्रयास

पुनर्जीवित हुआ ढाई सौ साल पुराना तालाब

Submitted by editorial on Fri, 10/12/2018 - 14:31
Author
मनीष वैद्य
मीठा तालाबमीठा तालाब"जिस दौर में ये तालाब बने थे, उस दौर में आबादी और भी कम थी। यानी तब जोर इस बात पर था कि अपने हिस्से में बरसने वाली हरेक बूँद इकट्ठी कर ली जाये और संकट के समय में आसपास के क्षेत्रों में भी उसे बाँट लिया जाये। वरुण देवता का प्रसाद गाँव अपनी अंजुली में भर लेता था।

नोटिस बोर्ड

गंगा के लिये गंगाभक्त ने त्यागे प्राण

Submitted by editorial on Thu, 10/11/2018 - 18:26
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
Source
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंदस्वामी ज्ञानस्वरूप सानंदगंगा भक्त और प्रसिद्ध पर्यावरणविद स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (प्रोफेसर जी.डी. अग्रवाल) ने गुरूवार को एम्स, ऋषिकेश में अपने प्राण त्याग दिए। वे 87 वर्ष के थे। गंगा की अविरलता और निर्मलता को कायम रखने के उद्देश्य से गंगा एक्ट लागू करने सहित अन्य कई माँगों को लेकर स्वामी सानंद 22 जून से आमरण अनशन पर थे। गुरूवार को उनके अनशन का 112 वाँ दिन था।

मिलिए सीएसआर की बेहतरीन शख्सियतों से

Submitted by editorial on Mon, 10/01/2018 - 14:35
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
Source
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
इण्डिया सीएसआरइण्डिया सीएसआरआयोजक - इण्डिया सीएसआर
दिन - सोमवार
तारिख - 01 अप्रैल 2019
स्थान - पीएचडी हाउस, अगस्त क्रान्ति मार्ग, नई दिल्ली।


इण्डिया सीएसआर (कारपोरेट सस्टेनेबिलिटी एंड रिस्पॉन्सिबिलिटी) द्वारा सोमवार 1 अप्रैल 2019 को पीएचडी हाउस (अगस्त क्रान्ति मार्ग, नई दिल्ली) में सीएसआर लीडरशिप समिट एंड अवार्ड का आयोजन किया जा रहा है।यह 2019 की इण्डिया की सबसे बड़ी लीडरशिप समिट में से एक होगी जो नागरिकों, बिजनेस और स्वयंसेवी संगठनों के लिये मील का पत्थर साबित होगी।

Latest

खासम-खास

नदियों के प्रवाह की अनदेखी पड़ेगी भारी

Submitted by editorial on Sun, 10/07/2018 - 17:59
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
Source
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
कृष्ण गोपाल ‘व्यास’कृष्ण गोपाल ‘व्यास’धरती पर हमारे स्वस्थ बचे रहने के लिये नदियाँ बेहद आवश्यक हैं। यदि हमारी पीढ़ी ने नदियों के घटते प्रवाह की अनदेखी की तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें नदियों के विनाश और पर्यावरण को गम्भीर नुकसान पहुँचाने वाले बेहद गैर-जिम्मेदार पूर्वजों के तौर पर याद करेंगी। इसलिये नदियों की बर्बादी को रोका जाना चाहिए। उनके प्रवाह की बहाली के लिये सार्थक प्रयास किया जाना चाहिए।

Content

निमन्त्रण

Submitted by admin on Mon, 02/23/2009 - 18:57
Author
संपादक
निमन्त्रण प्रिय साथी,

National Meet on Himalayan Waters in Delhi

हिमालय सेवा संघ दिनाँक 17, 18 एवं 19 मार्च, 2009 को एक तीन दिवसीय राष्ट्रीय बैठक नई दिल्ली में आयोजित कर रहा है। यह बैठक हिमालय क्षेत्र में जल, जंगल एवं जमीन के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रयासरत कार्यकर्ताओं एवं ग्रामवासियों का एक सांझा रचनात्मक मंच बनाने का प्रयास करेगी।

बैठक का आयोजन राष्ट्रीय बाल भवन, कोटला रोड़, नई दिल्ली - 110 002 में किया जा रहा है। हम आशा करते है कि इस बैठक में नौजवान, बच्चे एवं उत्साही युवक और युवतियॉं भी चर्चाओं में भाग लेंगे।

खारे पानी में मीठा फल

Submitted by admin on Wed, 02/18/2009 - 09:58
Author
जागरण याहू
Feb 15,2009 / जागरण याहू
नई दिल्ली, [रणविजय सिंह]। बीएसएफ के रिटायर्ड कमानडेंट बलजीत सिंह त्यागी ने बंजर भूमि पर फलदार पेड़ लगाने में तीन बार विफल रहने पर भी हिम्मत नहीं हारे। कृषि वैज्ञानिकों से पता चला कि भूमिगत पानी खारा होने से यहा पेड़ नहीं उग सकते। उन्होंने अपनी मेहनत व लगन से डेढ़ लाख लीटर क्षमता के वाटर हार्वेस्टिंग व भूमिगत जल रिचार्ज टैंक से जमीन को मीठे पानी से तर कर दिया। जिससे बाझ जमीन की कोख उर्वरा हो गई।

फ़रहाद कॉण्ट्रेक्टर

Submitted by admin on Sun, 02/15/2009 - 02:32
Author
संपादक

एक कर्मठ शिष्य, एक “जल-दूत” हैं


एक पुस्तक किस प्रकार किसी व्यक्ति का समूचा जीवन, उसकी सोच, उसकी कार्यक्षमता और जीवन के प्रति अवधारणा को बदल सकती है, उसका साक्षात उदाहरण हैं गुजरात के फ़रहाद कॉण्ट्रेक्टर, जिन्हें उनकी विशिष्ट समाजसेवा के लिये “संस्कृति अवार्ड” प्राप्त हुआ है और जिनकी कर्मस्थली है सतत सूखे से प्रभावित राजस्थान की मरुभूमि। फ़रहाद जब भी कुछ कहना शुरु करते हैं, वे उस पुस्तक का उल्लेख करते हैं, सबसे पहले उल्लेख करते हैं, अपने कथन के अन्त भी उसी पुस्तक के उद्धरण देते हैं। बीच-बीच में वे पुस्तक के बारे में बताते चलते हैं, कि किस प्रकार कोई पुस्तक किसी को इतना प्रभावित कर सकती है।

प्रयास

पुनर्जीवित हुआ ढाई सौ साल पुराना तालाब

Submitted by editorial on Fri, 10/12/2018 - 14:31
Author
मनीष वैद्य
मीठा तालाबमीठा तालाब"जिस दौर में ये तालाब बने थे, उस दौर में आबादी और भी कम थी। यानी तब जोर इस बात पर था कि अपने हिस्से में बरसने वाली हरेक बूँद इकट्ठी कर ली जाये और संकट के समय में आसपास के क्षेत्रों में भी उसे बाँट लिया जाये। वरुण देवता का प्रसाद गाँव अपनी अंजुली में भर लेता था।

नोटिस बोर्ड

गंगा के लिये गंगाभक्त ने त्यागे प्राण

Submitted by editorial on Thu, 10/11/2018 - 18:26
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
Source
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंदस्वामी ज्ञानस्वरूप सानंदगंगा भक्त और प्रसिद्ध पर्यावरणविद स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (प्रोफेसर जी.डी. अग्रवाल) ने गुरूवार को एम्स, ऋषिकेश में अपने प्राण त्याग दिए। वे 87 वर्ष के थे। गंगा की अविरलता और निर्मलता को कायम रखने के उद्देश्य से गंगा एक्ट लागू करने सहित अन्य कई माँगों को लेकर स्वामी सानंद 22 जून से आमरण अनशन पर थे। गुरूवार को उनके अनशन का 112 वाँ दिन था।

मिलिए सीएसआर की बेहतरीन शख्सियतों से

Submitted by editorial on Mon, 10/01/2018 - 14:35
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
Source
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
इण्डिया सीएसआरइण्डिया सीएसआरआयोजक - इण्डिया सीएसआर
दिन - सोमवार
तारिख - 01 अप्रैल 2019
स्थान - पीएचडी हाउस, अगस्त क्रान्ति मार्ग, नई दिल्ली।


इण्डिया सीएसआर (कारपोरेट सस्टेनेबिलिटी एंड रिस्पॉन्सिबिलिटी) द्वारा सोमवार 1 अप्रैल 2019 को पीएचडी हाउस (अगस्त क्रान्ति मार्ग, नई दिल्ली) में सीएसआर लीडरशिप समिट एंड अवार्ड का आयोजन किया जा रहा है।यह 2019 की इण्डिया की सबसे बड़ी लीडरशिप समिट में से एक होगी जो नागरिकों, बिजनेस और स्वयंसेवी संगठनों के लिये मील का पत्थर साबित होगी।

Upcoming Event

Popular Articles