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खासम-खास

नदी तंत्र पर मानवीय हस्तक्षेप और जलवायु बदलाव का प्रभाव

Submitted by editorial on Sat, 03/16/2019 - 06:09
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदी तंत्रनदी तंत्र (फोटो साभार - विकिपीडिया)आदिकाल से नदियाँ स्वच्छ जल का अमूल्य स्रोत रही हैं। उनके जल का उपयोग पेयजल आपूर्ति, निस्तार, आजीविका तथा खेती इत्यादि के लिये किया जाता रहा है। पिछले कुछ सालों से देश की अधिकांश नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी हो रही है, छोटी नदियाँ तेजी से सूख रही हैं और लगभग सभी नदी-तंत्रों में प्रदूषण बढ़ रहा है। यह स्थिति हिमालयीन नदियों में कम तथा भारतीय प्रायद्वीप की नदियों में अधिक गम्भीर है। यह परिवर्तन प्राकृतिक नहीं है।

Content

दिल्ली की प्यास (भाग 2)

Submitted by admin on Thu, 02/12/2009 - 02:05
Author
संपादक

वर्तमान नीतियां


बडे ख़ेद की बात है कि हमारी जल नियोजन नीतियों का अभी तक ठीक से पुनर्मूल्यांकन नहीं किया गया है। हमारे योजनाकारों द्वारा बनाई जाने वाली, बड़े-बड़े बाँधों, बैराजों और नहरों संबंधित परियोजनाओं के संबंध में भी अब संदेह उठने लगे हैं। सातवीं योजना प्रपत्र के सुझाव के अनुसार यदि हमने प्रमुख बड़े और मध्यम आकार की जल योजनाओं का पुनरीक्षण और पुनर्मूल्यांकन किया होता तो आठवीं योजना में इन परियोजनाओं पर 26000 करोड़ रुपया

शंकराचार्यों ने केन्द्र को चेताया

Submitted by admin on Wed, 02/11/2009 - 14:45
Author
संपादक

द्वारिका पीठ व ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य के उत्तराधिकारी श्री अविमुक्तेश्वरा नन्द ने भागीरथी में नैसर्गिक प्रवाह की मांग को लेकर अनशन पर बैठे प्रसिद्ध पर्यावरणविद् डॉ. जी.डी. अग्रवाल के समर्थन में बोलते हुए केन्द्र सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उसने सही दिशा में सही कदम नहीं उठाया तो उसे आगामी चुनाव में इसके नतीजे भुगतने होंगे। कल शाम यहां पंजाबी भवन में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में डा. अग्रवाल के सहयोगियों व आई.आई.टी. में रहे उनके पूर्व विद्यार्थियों के साथ मीडिया कर्मियों को सम्बोधित करते हुये उन्होंने कहा कि चारों पीठों के सभी शंकरार्चायों का मत इस मुद्दे को लेकर एक समान है।

अब स्कूल्स वाटर पोर्टल

Submitted by admin on Wed, 02/11/2009 - 09:36
Author
संपादक

स्कूल्स वाटर पोर्टल का उद्घाटन

इंडिया वाटर पोर्टल द्वारा हाल में शुरु किया गया स्कूल्स वाटर पोर्टल (Schools Water Portal), एक ऐसा अनोखा मंच है जहां अध्यापक, छात्र, माता-पिता और प्रधानाध्यापक एक साथ पानी के बारे में हर तरह की जानकारी हासिल कर सकते हैं।
 

प्रयास

गाँव ने रोका अपना पानी

Submitted by editorial on Mon, 12/03/2018 - 20:37
Author
मनीष वैद्य
बेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदीबेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदी'खेत का पानी खेत में' और 'गाँव का पानी गाँव में' रोकने के नारे तो बीते पच्चीस सालों से सुनाई देते रहे हैं, लेकिन इस बार बारिश के बाद एक गाँव ने अपना पानी गाँव में ही रोककर जलस्तर बढ़ा लिया है। इससे गाँव के लोगों को निस्तारी कामों के लिये पानी की आपूर्ति भी हो रही है और ट्यूबवेल, हैण्डपम्प और कुएँ-कुण्डियों में भी कम बारिश के बावजूद अब तक पानी भरा है।

नोटिस बोर्ड

जन सुनवाई में जनता से खतरा क्यों

Submitted by editorial on Fri, 03/01/2019 - 22:42
Source
माटू जन संगठन, मेन मार्केट मोरी उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड, ग्राम छाम, पथरी भाग 4, हरिद्वार, उत्तराखण्ड
जन सुनवाई में शामिल न किये जाने से आक्रोशित लोगजन सुनवाई में शामिल न किये जाने से आक्रोशित लोग 01 मार्च, 2019। उत्तराखण्ड शासन-प्रशासन ने दिखा दिया कि बाँध कम्पनियाँ लोगों के अधिकारों और पर्यावरण से ज्यादा महत्त्वपूर्ण हैं।

यमुना घाटी में टॉन्स नदी की सहायक नदी सुपिन पर प्रस्तावित जखोल साकरी बाँध

128 दिन के लम्बे उपवास पर सरकार गम्भीर नहीं

Submitted by editorial on Thu, 02/28/2019 - 17:44
Source
फ्री गंगा, (अविरल गंगा), जेपी हेल्थ पैराडाइज,रोड नम्बर 28, मेहता चौक, रजौरी गार्डन,नई दिल्ली
सन्त आत्मबोधानंदसन्त आत्मबोधानंद 15 दिन की जाँच समिति अस्वीकार
28 फरवरी, 2019। मातृ सदन हरिद्वार में 26 वर्षीय उपवासरत आत्मबोधानंद जी का आज 128वां दिन है। देशभर में प्रदर्शनों, समर्थन में भेजे जा रहे पत्रों के बावजूद भी सरकार गम्भीर नहीं नजर आती।

जखोल साकरी बाँध: बिना जानकारी पुलिस के साये में जनसुनवाई

Submitted by editorial on Thu, 02/28/2019 - 14:43
Source
माटू जन संगठन, मेन मार्केट मोरी उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड, ग्राम छाम, पथरी भाग 4, हरिद्वार, उत्तराखण्ड
सुपिन नदीसुपिन नदी27 फरवरी, 2019। जखोल साकरी बाँध, सुपिन नदी, जिला उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड की 01 मार्च, 2019 को दूसरी पर्यावरणीय जनसुनवाई की घोषणा हुई है। इस बार जनसुनवाई का स्थल परियोजना स्थल क्षेत्र से 40 किलोमीटर दूर है। यह मोरी ब्लॉक में रखी गई है ताकि वह जनविरोध से बच जाए।

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नदी तंत्र पर मानवीय हस्तक्षेप और जलवायु बदलाव का प्रभाव

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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदी तंत्रनदी तंत्र (फोटो साभार - विकिपीडिया)आदिकाल से नदियाँ स्वच्छ जल का अमूल्य स्रोत रही हैं। उनके जल का उपयोग पेयजल आपूर्ति, निस्तार, आजीविका तथा खेती इत्यादि के लिये किया जाता रहा है। पिछले कुछ सालों से देश की अधिकांश नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह में कमी हो रही है, छोटी नदियाँ तेजी से सूख रही हैं और लगभग सभी नदी-तंत्रों में प्रदूषण बढ़ रहा है। यह स्थिति हिमालयीन नदियों में कम तथा भारतीय प्रायद्वीप की नदियों में अधिक गम्भीर है। यह परिवर्तन प्राकृतिक नहीं है।

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दिल्ली की प्यास (भाग 2)

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वर्तमान नीतियां


बडे ख़ेद की बात है कि हमारी जल नियोजन नीतियों का अभी तक ठीक से पुनर्मूल्यांकन नहीं किया गया है। हमारे योजनाकारों द्वारा बनाई जाने वाली, बड़े-बड़े बाँधों, बैराजों और नहरों संबंधित परियोजनाओं के संबंध में भी अब संदेह उठने लगे हैं। सातवीं योजना प्रपत्र के सुझाव के अनुसार यदि हमने प्रमुख बड़े और मध्यम आकार की जल योजनाओं का पुनरीक्षण और पुनर्मूल्यांकन किया होता तो आठवीं योजना में इन परियोजनाओं पर 26000 करोड़ रुपया

शंकराचार्यों ने केन्द्र को चेताया

Submitted by admin on Wed, 02/11/2009 - 14:45
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द्वारिका पीठ व ज्योर्तिमठ के शंकराचार्य के उत्तराधिकारी श्री अविमुक्तेश्वरा नन्द ने भागीरथी में नैसर्गिक प्रवाह की मांग को लेकर अनशन पर बैठे प्रसिद्ध पर्यावरणविद् डॉ. जी.डी. अग्रवाल के समर्थन में बोलते हुए केन्द्र सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उसने सही दिशा में सही कदम नहीं उठाया तो उसे आगामी चुनाव में इसके नतीजे भुगतने होंगे। कल शाम यहां पंजाबी भवन में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन में डा. अग्रवाल के सहयोगियों व आई.आई.टी. में रहे उनके पूर्व विद्यार्थियों के साथ मीडिया कर्मियों को सम्बोधित करते हुये उन्होंने कहा कि चारों पीठों के सभी शंकरार्चायों का मत इस मुद्दे को लेकर एक समान है।

अब स्कूल्स वाटर पोर्टल

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स्कूल्स वाटर पोर्टल का उद्घाटन

इंडिया वाटर पोर्टल द्वारा हाल में शुरु किया गया स्कूल्स वाटर पोर्टल (Schools Water Portal), एक ऐसा अनोखा मंच है जहां अध्यापक, छात्र, माता-पिता और प्रधानाध्यापक एक साथ पानी के बारे में हर तरह की जानकारी हासिल कर सकते हैं।
 

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गाँव ने रोका अपना पानी

Submitted by editorial on Mon, 12/03/2018 - 20:37
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मनीष वैद्य
बेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदीबेहरी में कच्चे बाँध से लबालब नदी'खेत का पानी खेत में' और 'गाँव का पानी गाँव में' रोकने के नारे तो बीते पच्चीस सालों से सुनाई देते रहे हैं, लेकिन इस बार बारिश के बाद एक गाँव ने अपना पानी गाँव में ही रोककर जलस्तर बढ़ा लिया है। इससे गाँव के लोगों को निस्तारी कामों के लिये पानी की आपूर्ति भी हो रही है और ट्यूबवेल, हैण्डपम्प और कुएँ-कुण्डियों में भी कम बारिश के बावजूद अब तक पानी भरा है।

नोटिस बोर्ड

जन सुनवाई में जनता से खतरा क्यों

Submitted by editorial on Fri, 03/01/2019 - 22:42
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माटू जन संगठन, मेन मार्केट मोरी उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड, ग्राम छाम, पथरी भाग 4, हरिद्वार, उत्तराखण्ड
जन सुनवाई में शामिल न किये जाने से आक्रोशित लोगजन सुनवाई में शामिल न किये जाने से आक्रोशित लोग 01 मार्च, 2019। उत्तराखण्ड शासन-प्रशासन ने दिखा दिया कि बाँध कम्पनियाँ लोगों के अधिकारों और पर्यावरण से ज्यादा महत्त्वपूर्ण हैं।

यमुना घाटी में टॉन्स नदी की सहायक नदी सुपिन पर प्रस्तावित जखोल साकरी बाँध

128 दिन के लम्बे उपवास पर सरकार गम्भीर नहीं

Submitted by editorial on Thu, 02/28/2019 - 17:44
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फ्री गंगा, (अविरल गंगा), जेपी हेल्थ पैराडाइज,रोड नम्बर 28, मेहता चौक, रजौरी गार्डन,नई दिल्ली
सन्त आत्मबोधानंदसन्त आत्मबोधानंद 15 दिन की जाँच समिति अस्वीकार
28 फरवरी, 2019। मातृ सदन हरिद्वार में 26 वर्षीय उपवासरत आत्मबोधानंद जी का आज 128वां दिन है। देशभर में प्रदर्शनों, समर्थन में भेजे जा रहे पत्रों के बावजूद भी सरकार गम्भीर नहीं नजर आती।

जखोल साकरी बाँध: बिना जानकारी पुलिस के साये में जनसुनवाई

Submitted by editorial on Thu, 02/28/2019 - 14:43
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माटू जन संगठन, मेन मार्केट मोरी उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड, ग्राम छाम, पथरी भाग 4, हरिद्वार, उत्तराखण्ड
सुपिन नदीसुपिन नदी27 फरवरी, 2019। जखोल साकरी बाँध, सुपिन नदी, जिला उत्तरकाशी, उत्तराखण्ड की 01 मार्च, 2019 को दूसरी पर्यावरणीय जनसुनवाई की घोषणा हुई है। इस बार जनसुनवाई का स्थल परियोजना स्थल क्षेत्र से 40 किलोमीटर दूर है। यह मोरी ब्लॉक में रखी गई है ताकि वह जनविरोध से बच जाए।

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