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खासम-खास

नदियों के प्रवाह की अनदेखी पड़ेगी भारी

Submitted by editorial on Sun, 10/07/2018 - 17:59
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
Source
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
कृष्ण गोपाल ‘व्यास’कृष्ण गोपाल ‘व्यास’धरती पर हमारे स्वस्थ बचे रहने के लिये नदियाँ बेहद आवश्यक हैं। यदि हमारी पीढ़ी ने नदियों के घटते प्रवाह की अनदेखी की तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें नदियों के विनाश और पर्यावरण को गम्भीर नुकसान पहुँचाने वाले बेहद गैर-जिम्मेदार पूर्वजों के तौर पर याद करेंगी। इसलिये नदियों की बर्बादी को रोका जाना चाहिए। उनके प्रवाह की बहाली के लिये सार्थक प्रयास किया जाना चाहिए।

Content

साड़ी से रेन वाटर हार्वेस्टिंग

Submitted by admin on Fri, 02/06/2009 - 00:15
Author
इंडिया टूगेदर
श्री पद्रे

वर्षाजल एकत्रित करने का देशज तरीका


कर्नाटक और केरल के भारी वर्षा वाले इलाके के गाँवों में ग्रामीण जनता पेयजल प्राप्त करने के लिये अपना खुद का “डिजाइन” किया हुआ “रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम” अपनाती है। इस खालिस देशी विधि के मुताबिक एक साड़ी के चारों कोनों को बारिश के दौरान खुले में बाँध दिया जाता है और उसके ढलुवाँ हिस्से के बीचोंबीच नीचे पानी एकत्रित करने के लिये एक बर्तन लगा दिया जाता है, जिससे कि एक ही विधि में पानी का इकठ्ठा होना और पानी का छनकर साफ़ होना हासिल कर लिया जाता है।

नर्मदा : उद्गम पर ही सूख रही

Submitted by admin on Thu, 02/05/2009 - 18:52
Author
अमन नम्र

अमरकंटक में घटती हरियाली का अंदाजा इस सैटेलाइट फोटो से लगाएं, इसमें नर्मदा कुंड व आसपास के इलाके में फैला बंजर इलाका साफ तौर पर देखा जा सकता है।

नर्मदा उद्गम - अमरकंटक में खतरानर्मदा उद्गम - अमरकंटक में खतरा

अमन नम्र


जल प्रबंधन पर भागीदारी दृष्टिकोण

Submitted by admin on Tue, 02/03/2009 - 10:14
Author
admin
पेपर के लिए आवाह्न-

जल संसाधनों के प्रबंधन पर भागीदारी दृष्टिकोण पर परिसंवाद (Seminar-‘Participatory Approach in water resource management’)
मार्च-19-20, 2009, नई दिल्ली, काउंसिल फॉर सोशल डेवलपमेंट(फिरदौस फातिमा रिज़वी, काउंसिल फॉर सोशल डेवलपमेंट, नई दिल्ली की ओर से)
काउंसिल फॉर सोशल डेवलपमेंट, नई दिल्ली, ‘जल संसाधनों के प्रबंधन पर भागीदारी दृष्टिकोण’ पर एक परिसंवाद का आयोजन किया जा रहा है।

प्रयास

पुनर्जीवित हुआ ढाई सौ साल पुराना तालाब

Submitted by editorial on Fri, 10/12/2018 - 14:31
Author
मनीष वैद्य
मीठा तालाबमीठा तालाब"जिस दौर में ये तालाब बने थे, उस दौर में आबादी और भी कम थी। यानी तब जोर इस बात पर था कि अपने हिस्से में बरसने वाली हरेक बूँद इकट्ठी कर ली जाये और संकट के समय में आसपास के क्षेत्रों में भी उसे बाँट लिया जाये। वरुण देवता का प्रसाद गाँव अपनी अंजुली में भर लेता था।

नोटिस बोर्ड

गंगा के लिये गंगाभक्त ने त्यागे प्राण

Submitted by editorial on Thu, 10/11/2018 - 18:26
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
Source
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंदस्वामी ज्ञानस्वरूप सानंदगंगा भक्त और प्रसिद्ध पर्यावरणविद स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (प्रोफेसर जी.डी. अग्रवाल) ने गुरूवार को एम्स, ऋषिकेश में अपने प्राण त्याग दिए। वे 87 वर्ष के थे। गंगा की अविरलता और निर्मलता को कायम रखने के उद्देश्य से गंगा एक्ट लागू करने सहित अन्य कई माँगों को लेकर स्वामी सानंद 22 जून से आमरण अनशन पर थे। गुरूवार को उनके अनशन का 112 वाँ दिन था।

मिलिए सीएसआर की बेहतरीन शख्सियतों से

Submitted by editorial on Mon, 10/01/2018 - 14:35
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
Source
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
इण्डिया सीएसआरइण्डिया सीएसआरआयोजक - इण्डिया सीएसआर
दिन - सोमवार
तारिख - 01 अप्रैल 2019
स्थान - पीएचडी हाउस, अगस्त क्रान्ति मार्ग, नई दिल्ली।


इण्डिया सीएसआर (कारपोरेट सस्टेनेबिलिटी एंड रिस्पॉन्सिबिलिटी) द्वारा सोमवार 1 अप्रैल 2019 को पीएचडी हाउस (अगस्त क्रान्ति मार्ग, नई दिल्ली) में सीएसआर लीडरशिप समिट एंड अवार्ड का आयोजन किया जा रहा है।यह 2019 की इण्डिया की सबसे बड़ी लीडरशिप समिट में से एक होगी जो नागरिकों, बिजनेस और स्वयंसेवी संगठनों के लिये मील का पत्थर साबित होगी।

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नदियों के प्रवाह की अनदेखी पड़ेगी भारी

Submitted by editorial on Sun, 10/07/2018 - 17:59
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इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
कृष्ण गोपाल ‘व्यास’कृष्ण गोपाल ‘व्यास’धरती पर हमारे स्वस्थ बचे रहने के लिये नदियाँ बेहद आवश्यक हैं। यदि हमारी पीढ़ी ने नदियों के घटते प्रवाह की अनदेखी की तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें नदियों के विनाश और पर्यावरण को गम्भीर नुकसान पहुँचाने वाले बेहद गैर-जिम्मेदार पूर्वजों के तौर पर याद करेंगी। इसलिये नदियों की बर्बादी को रोका जाना चाहिए। उनके प्रवाह की बहाली के लिये सार्थक प्रयास किया जाना चाहिए।

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साड़ी से रेन वाटर हार्वेस्टिंग

Submitted by admin on Fri, 02/06/2009 - 00:15
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इंडिया टूगेदर
श्री पद्रे

वर्षाजल एकत्रित करने का देशज तरीका


कर्नाटक और केरल के भारी वर्षा वाले इलाके के गाँवों में ग्रामीण जनता पेयजल प्राप्त करने के लिये अपना खुद का “डिजाइन” किया हुआ “रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम” अपनाती है। इस खालिस देशी विधि के मुताबिक एक साड़ी के चारों कोनों को बारिश के दौरान खुले में बाँध दिया जाता है और उसके ढलुवाँ हिस्से के बीचोंबीच नीचे पानी एकत्रित करने के लिये एक बर्तन लगा दिया जाता है, जिससे कि एक ही विधि में पानी का इकठ्ठा होना और पानी का छनकर साफ़ होना हासिल कर लिया जाता है।

नर्मदा : उद्गम पर ही सूख रही

Submitted by admin on Thu, 02/05/2009 - 18:52
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अमन नम्र

अमरकंटक में घटती हरियाली का अंदाजा इस सैटेलाइट फोटो से लगाएं, इसमें नर्मदा कुंड व आसपास के इलाके में फैला बंजर इलाका साफ तौर पर देखा जा सकता है।

नर्मदा उद्गम - अमरकंटक में खतरानर्मदा उद्गम - अमरकंटक में खतरा

अमन नम्र


जल प्रबंधन पर भागीदारी दृष्टिकोण

Submitted by admin on Tue, 02/03/2009 - 10:14
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admin
पेपर के लिए आवाह्न-

जल संसाधनों के प्रबंधन पर भागीदारी दृष्टिकोण पर परिसंवाद (Seminar-‘Participatory Approach in water resource management’)
मार्च-19-20, 2009, नई दिल्ली, काउंसिल फॉर सोशल डेवलपमेंट(फिरदौस फातिमा रिज़वी, काउंसिल फॉर सोशल डेवलपमेंट, नई दिल्ली की ओर से)
काउंसिल फॉर सोशल डेवलपमेंट, नई दिल्ली, ‘जल संसाधनों के प्रबंधन पर भागीदारी दृष्टिकोण’ पर एक परिसंवाद का आयोजन किया जा रहा है।

प्रयास

पुनर्जीवित हुआ ढाई सौ साल पुराना तालाब

Submitted by editorial on Fri, 10/12/2018 - 14:31
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मनीष वैद्य
मीठा तालाबमीठा तालाब"जिस दौर में ये तालाब बने थे, उस दौर में आबादी और भी कम थी। यानी तब जोर इस बात पर था कि अपने हिस्से में बरसने वाली हरेक बूँद इकट्ठी कर ली जाये और संकट के समय में आसपास के क्षेत्रों में भी उसे बाँट लिया जाये। वरुण देवता का प्रसाद गाँव अपनी अंजुली में भर लेता था।

नोटिस बोर्ड

गंगा के लिये गंगाभक्त ने त्यागे प्राण

Submitted by editorial on Thu, 10/11/2018 - 18:26
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इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
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इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंदस्वामी ज्ञानस्वरूप सानंदगंगा भक्त और प्रसिद्ध पर्यावरणविद स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (प्रोफेसर जी.डी. अग्रवाल) ने गुरूवार को एम्स, ऋषिकेश में अपने प्राण त्याग दिए। वे 87 वर्ष के थे। गंगा की अविरलता और निर्मलता को कायम रखने के उद्देश्य से गंगा एक्ट लागू करने सहित अन्य कई माँगों को लेकर स्वामी सानंद 22 जून से आमरण अनशन पर थे। गुरूवार को उनके अनशन का 112 वाँ दिन था।

मिलिए सीएसआर की बेहतरीन शख्सियतों से

Submitted by editorial on Mon, 10/01/2018 - 14:35
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इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
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इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
इण्डिया सीएसआरइण्डिया सीएसआरआयोजक - इण्डिया सीएसआर
दिन - सोमवार
तारिख - 01 अप्रैल 2019
स्थान - पीएचडी हाउस, अगस्त क्रान्ति मार्ग, नई दिल्ली।


इण्डिया सीएसआर (कारपोरेट सस्टेनेबिलिटी एंड रिस्पॉन्सिबिलिटी) द्वारा सोमवार 1 अप्रैल 2019 को पीएचडी हाउस (अगस्त क्रान्ति मार्ग, नई दिल्ली) में सीएसआर लीडरशिप समिट एंड अवार्ड का आयोजन किया जा रहा है।यह 2019 की इण्डिया की सबसे बड़ी लीडरशिप समिट में से एक होगी जो नागरिकों, बिजनेस और स्वयंसेवी संगठनों के लिये मील का पत्थर साबित होगी।

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