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Submitted by HindiWater on Fri, 02/21/2020 - 10:10
शुद्ध जल उपलब्धता - मध्यप्रदेश के बढ़ते सधे कदम 
मध्यप्रदेश में पिछले कुछ दिनों से लोगों को पीने के साफ पानी को उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार के स्तर पर लगातार चिन्तन चल रहा है। कार्यशालाएं हो रही हैं। देश भर से जल विशेषज्ञों को आमंत्रित कर उनकी राय ली जा रही है। अनुभव बटोरे जा रहे हैं। इस चिन्तन में पीएचई मंत्री और ग्रामीण विकास मंत्री, अपनी-अपनी टीम को लेकर एक साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।

Content

Submitted by Hindi on Mon, 08/22/2011 - 11:12
Source:
संडे नई दुनिया, 21- 27 अगस्त 2011
घटते ग्लेशियर के वजह से गंगा अब संकट मेंदेहरादून- गंगा के लिए खतरे की घंटी बज रही है। भारत की सदानीरा और सबसे अधिक पवित्र मानी जाने वाली गंगा नदी अपने जन्मस्थान से ही संकट में पड़ गई है। वैश्विक स्तर पर हो रहा ग्लोबल वार्मिंग तो गंगा के उद्गम स्थान गंगोत्री को प्रभावित कर ही रहा है, अत्यधिक मानवीय गतिविधियां भी इस स्थान को नुकसान पहुंचा रही हैं। बीती सदी भर हुए शोधों से साफ हो गया है कि भले ही किसी भी ग्लेशियर का पिघलना सतत और प्राकृतिक क्रिया है लेकिन जिस तेजी से गंगोत्री ग्लेशियर पिघल रही है उससे तो यह इशारा मिल रहा है कि आने वाली सदी से पहले ही दुनिया के चुनिंदा बड़े और खूबसूरत ग्लेशियर का वजूद बच नहीं पाएगा। गंगा का उद्गम स्थल गंगोत्री ग्लेशियर ग्लोबल वार्मिंग के कारण बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। यह खुलासा आईएमएफ, दिल्ली की टीम ने साल भर किए गहन अध्ययन के बाद किया है।
Submitted by Hindi on Tue, 08/16/2011 - 15:59
Source:
चरखा फीचर्स

वैज्ञानिकों में पर्यावरण संबंधी चिंता इस बात का स्पष्ट इशारा है कि अगर इस विषय पर कोई ठोस उपाय नहीं निकाले गए तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। समय की मांग है कि पर्यावरण पर चिंता करना और उसके उपाय ढ़ूंढ़ना केवल वैज्ञानिकों का ही नहीं बल्कि हम सब का कर्तव्य है।

पिछले वर्ष लद्दाख के लेह में बादल फटने के कारण हुई तबाही अब भी लोगों की जेहन में ताजा है। 5-6 अगस्त 2010 की रात लेह पर जैसे आसमान से कहर टूट पड़ा। बादल फटने के कारण लेह में विभिषिका का जो तांडव हुआ उसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। अचानक आई बाढ़ के कारण नदी और नाले उफान पर आ गए और पल भर में ही लेह को अपनी चपेट में ले लिया। विकराल धारा ने मीलों लंबी सड़कों, पुलों, खेत बगीचे और घरों को देखते ही देखते लील लिया। तेज बहाव ने नए और पुराने या मिट्टी या कंक्रीट से बने घरों व भवनों में कोई भेदभाव नहीं किया। करीब 257 से ज्यादा लोगों ने अपनी जाने गंवाईं। इनमें 36 गैर लद्दाखी भी शामिल हैं।
Submitted by admin on Mon, 08/15/2011 - 10:10
Source:
Dainik Bhaskar e-paper

9 अगस्त 2011 इतिहास में दर्ज हो जाएगा, 9 अगस्त 1942 को गांधी जी ने बम्बई में अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा दिया था। 9 अगस्त 2011 को अब किसानों की जायज मांगों को बेरहमी दमन करने के लिए गोली चलाई गई। किसानों की मांग है कि पावना बांध का पानी पहले उनके खेतों में जाना चाहिए, ना कि शहर में। किसानों का ये आंदोलन तीन साल पुराना है। वो 2008 से ही पावना डैम से पिंपरी चिंचवाड़ तक पाइप लाइन बिछाने का विरोध कर रहे हैं। किसानों को डर है कि पाइप लाइन बन जाने से उन्हें सिंचाई के लिए भरपूर पानी नहीं मिलेगा। यह रपट भास्कर अखबार से ली गई है . . .

पूरे देश ने राखी और आजादी का त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया। लेकिन पुणे जिले के मावल क्षेत्र के किसानों के घर मातम छाया हुआ था। अपने हिस्से का पानी पिंपरी चिंचवड़ को दिए जाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे मावल क्षेत्र के किसानों ने बडर गांव के पास जब मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे पर जाम लगा दिया और उनका आंदोलन हिंसक हो गया तो पुलिस द्वारा की गई फायरिंग में चार लोग मारे गए। मारे गए किसान मोरेश्वर साठे, श्यामराव तुपे की बहनें और शांताबाई ठाकुर के भाई जीवनभर रक्षाबंधन से वंचित रहेंगे।

प्रश्न यह नहीं कि कौन गलत था और कौन सही। असली सवाल तो यह है कि हर बार राज्य की जनता को न्याय पाने के लिए कानून हाथ में क्यों लेना पड़ता है? चाहे वह नागपुर के न्यायालय में माननीय न्यायाधीश के सामने महिलाओं द्वारा की गई एक बलात्कारी की हत्या हो या मावल के लोगों द्वारा किया गया आंदोलन।

प्रयास

Submitted by RuralWater on Wed, 02/19/2020 - 10:49
चिपको की तर्ज पर बचाया तांतरी का जंगल
मैंने जिंदगी का सबसे अहम पाठ सीख लिया है कि कभी हार मत मानो और अपनी बातों का अनुसरण करते रहो। सभी महिलाएं चिपको आंदोलन की तर्ज पर पेड़ों से चिपक गईं। वनकर्मियों ने हमें समझाने की कोशिशें की, तो लकड़ी माफिया ने हमें रिश्वत देने की कोशिश की और मना करने पर हमें जान से मारने की धमकी भी दी। लेकिन हमने अपने कदम पीछे लेने से मना कर दिया।

नोटिस बोर्ड

Submitted by RuralWater on Mon, 02/17/2020 - 15:35
Source:
Hindi Watet Portal
नदी घाटी विचार मंच
अब खतरा मात्र नदी नही, नदी घाटियों पर सामने दिखता है। नदी घाटियों का व्यवसायिकरण हो रहा है। बांधों की बात तो पीछे छोड़े, पूरी नदी घाटी, नदी जोड़ परियोजना से प्रभावित होने की बात है; जिसका न केवल मानव बल्कि पूरी प्रकृति पर स्थानीय देशी और वैश्विक प्रभाव भी हो रहा है।
Submitted by HindiWater on Mon, 02/10/2020 - 10:51
Source:
जल संसाधन प्रबंधन पर पुणे में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला
राष्ट्रीय जल अकादमी, केन्द्रीय जल आयोग, पुणे में “जल संसाधन प्रबंधन पर प्रशिक्षण.सह.कार्यशाला” विषय पर 26-27 मार्च को गैर सरकारी संगठनों और मीडिया कर्मियों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में पंजीकरण कराने के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।
Submitted by HindiWater on Mon, 01/20/2020 - 11:07
Source:
मीडिया महोत्सव-2020
गत वर्षों की भांति इस बार भी 22-23 फरवरी, 2020 (शनिवार-रविवार, चतुर्दशी-अमावस्या, कृष्ण पक्ष, माघ, विक्रम संवत 2076) को “भारत का अभ्युदय : मीडिया की भूमिका” पर केन्द्रित “मीडिया महोत्सव-2020” का आयोजन भोपाल में होना सुनिश्चित हुआ है l

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खासम-खास

शुद्ध जल उपलब्धता - मध्यप्रदेश के बढ़ते सधे कदम 

Submitted by HindiWater on Fri, 02/21/2020 - 10:10
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
शुद्ध जल उपलब्धता - मध्यप्रदेश के बढ़ते सधे कदम 
मध्यप्रदेश में पिछले कुछ दिनों से लोगों को पीने के साफ पानी को उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार के स्तर पर लगातार चिन्तन चल रहा है। कार्यशालाएं हो रही हैं। देश भर से जल विशेषज्ञों को आमंत्रित कर उनकी राय ली जा रही है। अनुभव बटोरे जा रहे हैं। इस चिन्तन में पीएचई मंत्री और ग्रामीण विकास मंत्री, अपनी-अपनी टीम को लेकर एक साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं।

Content

ग्लोबल वार्मिंग की चपेट में गंगोत्री

Submitted by Hindi on Mon, 08/22/2011 - 11:12
Author
महेश पांडे और प्रवीन कुमार भट्ट
Source
संडे नई दुनिया, 21- 27 अगस्त 2011
घटते ग्लेशियर के वजह से गंगा अब संकट मेंघटते ग्लेशियर के वजह से गंगा अब संकट मेंदेहरादून- गंगा के लिए खतरे की घंटी बज रही है। भारत की सदानीरा और सबसे अधिक पवित्र मानी जाने वाली गंगा नदी अपने जन्मस्थान से ही संकट में पड़ गई है। वैश्विक स्तर पर हो रहा ग्लोबल वार्मिंग तो गंगा के उद्गम स्थान गंगोत्री को प्रभावित कर ही रहा है, अत्यधिक मानवीय गतिविधियां भी इस स्थान को नुकसान पहुंचा रही हैं। बीती सदी भर हुए शोधों से साफ हो गया है कि भले ही किसी भी ग्लेशियर का पिघलना सतत और प्राकृतिक क्रिया है लेकिन जिस तेजी से गंगोत्री ग्लेशियर पिघल रही है उससे तो यह इशारा मिल रहा है कि आने वाली सदी से पहले ही दुनिया के चुनिंदा बड़े और खूबसूरत ग्लेशियर का वजूद बच नहीं पाएगा। गंगा का उद्गम स्थल गंगोत्री ग्लेशियर ग्लोबल वार्मिंग के कारण बुरी तरह से प्रभावित हो रहा है। यह खुलासा आईएमएफ, दिल्ली की टीम ने साल भर किए गहन अध्ययन के बाद किया है।

लेह त्रासदी का एक सालः सुनो पर्यावरण कुछ कहता है!

Submitted by Hindi on Tue, 08/16/2011 - 15:59
Author
स्टानजिंग कुंजाग आंग्मो
Source
चरखा फीचर्स

वैज्ञानिकों में पर्यावरण संबंधी चिंता इस बात का स्पष्ट इशारा है कि अगर इस विषय पर कोई ठोस उपाय नहीं निकाले गए तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। समय की मांग है कि पर्यावरण पर चिंता करना और उसके उपाय ढ़ूंढ़ना केवल वैज्ञानिकों का ही नहीं बल्कि हम सब का कर्तव्य है।

पिछले वर्ष लद्दाख के लेह में बादल फटने के कारण हुई तबाही अब भी लोगों की जेहन में ताजा है। 5-6 अगस्त 2010 की रात लेह पर जैसे आसमान से कहर टूट पड़ा। बादल फटने के कारण लेह में विभिषिका का जो तांडव हुआ उसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। अचानक आई बाढ़ के कारण नदी और नाले उफान पर आ गए और पल भर में ही लेह को अपनी चपेट में ले लिया। विकराल धारा ने मीलों लंबी सड़कों, पुलों, खेत बगीचे और घरों को देखते ही देखते लील लिया। तेज बहाव ने नए और पुराने या मिट्टी या कंक्रीट से बने घरों व भवनों में कोई भेदभाव नहीं किया। करीब 257 से ज्यादा लोगों ने अपनी जाने गंवाईं। इनमें 36 गैर लद्दाखी भी शामिल हैं।

पानी के लिए जहां बहता है खून

Submitted by admin on Mon, 08/15/2011 - 10:10
Author
अशोक वानखड़े
Source
Dainik Bhaskar e-paper

9 अगस्त 2011 इतिहास में दर्ज हो जाएगा, 9 अगस्त 1942 को गांधी जी ने बम्बई में अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा दिया था। 9 अगस्त 2011 को अब किसानों की जायज मांगों को बेरहमी दमन करने के लिए गोली चलाई गई। किसानों की मांग है कि पावना बांध का पानी पहले उनके खेतों में जाना चाहिए, ना कि शहर में। किसानों का ये आंदोलन तीन साल पुराना है। वो 2008 से ही पावना डैम से पिंपरी चिंचवाड़ तक पाइप लाइन बिछाने का विरोध कर रहे हैं। किसानों को डर है कि पाइप लाइन बन जाने से उन्हें सिंचाई के लिए भरपूर पानी नहीं मिलेगा। यह रपट भास्कर अखबार से ली गई है . . .

पूरे देश ने राखी और आजादी का त्योहार बड़े धूमधाम से मनाया। लेकिन पुणे जिले के मावल क्षेत्र के किसानों के घर मातम छाया हुआ था। अपने हिस्से का पानी पिंपरी चिंचवड़ को दिए जाने के विरोध में प्रदर्शन कर रहे मावल क्षेत्र के किसानों ने बडर गांव के पास जब मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे पर जाम लगा दिया और उनका आंदोलन हिंसक हो गया तो पुलिस द्वारा की गई फायरिंग में चार लोग मारे गए। मारे गए किसान मोरेश्वर साठे, श्यामराव तुपे की बहनें और शांताबाई ठाकुर के भाई जीवनभर रक्षाबंधन से वंचित रहेंगे।

प्रश्न यह नहीं कि कौन गलत था और कौन सही। असली सवाल तो यह है कि हर बार राज्य की जनता को न्याय पाने के लिए कानून हाथ में क्यों लेना पड़ता है? चाहे वह नागपुर के न्यायालय में माननीय न्यायाधीश के सामने महिलाओं द्वारा की गई एक बलात्कारी की हत्या हो या मावल के लोगों द्वारा किया गया आंदोलन।

प्रयास

चिपको की तर्ज पर बचाया तांतरी का जंगल

Submitted by RuralWater on Wed, 02/19/2020 - 10:49
Source
अमर उजाला, 19 फरवरी, 2020
चिपको की तर्ज पर बचाया तांतरी का जंगल
मैंने जिंदगी का सबसे अहम पाठ सीख लिया है कि कभी हार मत मानो और अपनी बातों का अनुसरण करते रहो। सभी महिलाएं चिपको आंदोलन की तर्ज पर पेड़ों से चिपक गईं। वनकर्मियों ने हमें समझाने की कोशिशें की, तो लकड़ी माफिया ने हमें रिश्वत देने की कोशिश की और मना करने पर हमें जान से मारने की धमकी भी दी। लेकिन हमने अपने कदम पीछे लेने से मना कर दिया।

नोटिस बोर्ड

नदी घाटी विचार मंच

Submitted by RuralWater on Mon, 02/17/2020 - 15:35
Source
Hindi Watet Portal
नदी घाटी विचार मंच
अब खतरा मात्र नदी नही, नदी घाटियों पर सामने दिखता है। नदी घाटियों का व्यवसायिकरण हो रहा है। बांधों की बात तो पीछे छोड़े, पूरी नदी घाटी, नदी जोड़ परियोजना से प्रभावित होने की बात है; जिसका न केवल मानव बल्कि पूरी प्रकृति पर स्थानीय देशी और वैश्विक प्रभाव भी हो रहा है।

जल संसाधन प्रबंधन पर पुणे में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला

Submitted by HindiWater on Mon, 02/10/2020 - 10:51
जल संसाधन प्रबंधन पर पुणे में दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला
राष्ट्रीय जल अकादमी, केन्द्रीय जल आयोग, पुणे में “जल संसाधन प्रबंधन पर प्रशिक्षण.सह.कार्यशाला” विषय पर 26-27 मार्च को गैर सरकारी संगठनों और मीडिया कर्मियों के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में पंजीकरण कराने के लिए किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा।

मीडिया महोत्सव-2020

Submitted by HindiWater on Mon, 01/20/2020 - 11:07
मीडिया महोत्सव-2020
गत वर्षों की भांति इस बार भी 22-23 फरवरी, 2020 (शनिवार-रविवार, चतुर्दशी-अमावस्या, कृष्ण पक्ष, माघ, विक्रम संवत 2076) को “भारत का अभ्युदय : मीडिया की भूमिका” पर केन्द्रित “मीडिया महोत्सव-2020” का आयोजन भोपाल में होना सुनिश्चित हुआ है l

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