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खासम-खास

समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

Content

सरोजिनी नायडू पुरस्कार के लिए आवेदन आमंत्रित

Submitted by admin on Tue, 07/14/2009 - 13:41
द हंगर प्रोजेक्ट पंचायतीराज में महिलाओं की भूमिका पर सर्व श्रेष्ठ लेखन के लिए 2009 सरोजिनी नायडू पुरस्कार की घोषणा करता है। आपसे निवेदन है कि आपके क्षेत्र के पत्रकार बन्धुओं एवं अन्य मीडिया साथियों को उपरोक्त दी हुई जानकारी के बारे में अवगत करायें।

आज पंचायत की महिला जनप्रतिनिधियों द्वारा शासन के कामकाज में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ ही पानी, शराब के व्यसन, शिक्षा, स्वास्थ्य, घेरलू हिंसा, जेण्डर असमानता व अन्याय जैसे उन मुद्दों के प्रति राज्य को संवेदनशील बना रही है। `खामोश क्रांति` को एक आवाज़ की जरूरत है( इन महिलाओं के संघर्षों तथा सफलताओं को घरों, नागरिक समाज समूहों, शहरी अभिजात्य वर्ग, पेशेवरों, शिक्षाविदों तथा नीति निर्माताओं के दिलो-दिमाग तक पहुंचाने के लिए एक व्यवस्थित प्रयास जरूरी है।

'घनन-घनन घन घिर आए बदरा'

Submitted by admin on Wed, 07/08/2009 - 10:39
Source
विमल श्रीवास्तव

आकाश में छाए काले बादलों को देखकर किसका दिल झूमने नहीं लगता, चाहे वह जंगलों में रहने वाले मयूर हों, कवि हों, किसान हों या गर्मी से तपते हुए नगरवासी ।

फिर ये बादल भी कैसे-कैसे हैं; कोई तो काजल जैसे काले, कोई धुएं जैसे भूरे, कोई रूई के ढेर जैसे सफेद, तो कोई झीने दुपट्टे जैसे सफेद । इन्हीं बादलों पर अनगिनत कविताएं लिखी जा चुकी हैं, सैकड़ों फिल्मी गीत बनाए गए हैं, महाकवि कालीदास ने तो मेघदूतम् जैसा अमर महाकाव्य भी लिख डाला है । लेकिन बादलों की सुन्दरता अपनी चरम सीमा पर तब पहुंचती है जब शाम को ढलते सूरज या भोर के उगते सूरज की किरणें आकाश के साथ-साथ बादलों को भी नारंगी, लाल, पीला जामा पहना देती हैं ।

बजट में झील, नदियां

Submitted by admin on Tue, 07/07/2009 - 09:29
Source
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
नई दिल्ली, 6 जुलाई 09। केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को लोकसभा में वर्ष 2009-10 का बजट पेश करते हुए राष्ट्रीय नदी और झील संरक्षण योजना के लिए 562 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया है।

सरकार पहले ही राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण का गठन कर चुकी है। वर्ष 2008-09 में राष्ट्रीय नदी और झील संरक्षण के लिए 335 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था।

मुखर्जी ने बताया कि पिछले वर्ष जलवायु परिवर्तन संबंधी राष्ट्रीय कार्ययोजना प्रारंभ हुई थी। उसके तहत आठ राष्ट्रीय मिशनों की शुरुआत की जा रही है, जिनमें बहुआयामी, दीर्घावधिक तथा एकीकृत दृष्टिकोण होगा।

प्रयास

कार मैकेनिक से बना पर्यावरण प्रेमी, खेत में 300 से ज्यादा मोरों का बसेरा

Submitted by HindiWater on Tue, 08/20/2019 - 15:54
हिम्मताराम भांबू।हिम्मताराम भांबू। हिम्मताराम भांबू राजस्थान के नागौर जिले के रहने वाले हैं। नागौर जिला पानी की उपलब्धता के हिसाब से डार्क जोन में होने से यहां के लोगों को भारी दिक्कतों को सामना करना पड़ता है। हिम्मताराम भांबू का बचपन इन्हीं परेशानियों से जूझते और कठिनाईयों से निबटने के उपायों को देखते हुए ही बीता था। खेती-किसानी के लिए हिम्मताराम को गांव में कक्षा 6 के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। पैसों की तंगी के कारण बचपन से ही मैकेनिक का काम शुरू कर दिया था और स्थानीय ट्रैक्टर मालिकों को पुर्जे खोलने और मरम्मत करने में सहायता करने लगे।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
Source
दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

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सरोजिनी नायडू पुरस्कार के लिए आवेदन आमंत्रित

Submitted by admin on Tue, 07/14/2009 - 13:41
द हंगर प्रोजेक्ट पंचायतीराज में महिलाओं की भूमिका पर सर्व श्रेष्ठ लेखन के लिए 2009 सरोजिनी नायडू पुरस्कार की घोषणा करता है। आपसे निवेदन है कि आपके क्षेत्र के पत्रकार बन्धुओं एवं अन्य मीडिया साथियों को उपरोक्त दी हुई जानकारी के बारे में अवगत करायें।

आज पंचायत की महिला जनप्रतिनिधियों द्वारा शासन के कामकाज में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ ही पानी, शराब के व्यसन, शिक्षा, स्वास्थ्य, घेरलू हिंसा, जेण्डर असमानता व अन्याय जैसे उन मुद्दों के प्रति राज्य को संवेदनशील बना रही है। `खामोश क्रांति` को एक आवाज़ की जरूरत है( इन महिलाओं के संघर्षों तथा सफलताओं को घरों, नागरिक समाज समूहों, शहरी अभिजात्य वर्ग, पेशेवरों, शिक्षाविदों तथा नीति निर्माताओं के दिलो-दिमाग तक पहुंचाने के लिए एक व्यवस्थित प्रयास जरूरी है।

'घनन-घनन घन घिर आए बदरा'

Submitted by admin on Wed, 07/08/2009 - 10:39
Source
विमल श्रीवास्तव

आकाश में छाए काले बादलों को देखकर किसका दिल झूमने नहीं लगता, चाहे वह जंगलों में रहने वाले मयूर हों, कवि हों, किसान हों या गर्मी से तपते हुए नगरवासी ।

फिर ये बादल भी कैसे-कैसे हैं; कोई तो काजल जैसे काले, कोई धुएं जैसे भूरे, कोई रूई के ढेर जैसे सफेद, तो कोई झीने दुपट्टे जैसे सफेद । इन्हीं बादलों पर अनगिनत कविताएं लिखी जा चुकी हैं, सैकड़ों फिल्मी गीत बनाए गए हैं, महाकवि कालीदास ने तो मेघदूतम् जैसा अमर महाकाव्य भी लिख डाला है । लेकिन बादलों की सुन्दरता अपनी चरम सीमा पर तब पहुंचती है जब शाम को ढलते सूरज या भोर के उगते सूरज की किरणें आकाश के साथ-साथ बादलों को भी नारंगी, लाल, पीला जामा पहना देती हैं ।

बजट में झील, नदियां

Submitted by admin on Tue, 07/07/2009 - 09:29
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इंडो-एशियन न्यूज सर्विस
नई दिल्ली, 6 जुलाई 09। केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने सोमवार को लोकसभा में वर्ष 2009-10 का बजट पेश करते हुए राष्ट्रीय नदी और झील संरक्षण योजना के लिए 562 करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया है।

सरकार पहले ही राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण का गठन कर चुकी है। वर्ष 2008-09 में राष्ट्रीय नदी और झील संरक्षण के लिए 335 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया था।

मुखर्जी ने बताया कि पिछले वर्ष जलवायु परिवर्तन संबंधी राष्ट्रीय कार्ययोजना प्रारंभ हुई थी। उसके तहत आठ राष्ट्रीय मिशनों की शुरुआत की जा रही है, जिनमें बहुआयामी, दीर्घावधिक तथा एकीकृत दृष्टिकोण होगा।

प्रयास

कार मैकेनिक से बना पर्यावरण प्रेमी, खेत में 300 से ज्यादा मोरों का बसेरा

Submitted by HindiWater on Tue, 08/20/2019 - 15:54
हिम्मताराम भांबू।हिम्मताराम भांबू। हिम्मताराम भांबू राजस्थान के नागौर जिले के रहने वाले हैं। नागौर जिला पानी की उपलब्धता के हिसाब से डार्क जोन में होने से यहां के लोगों को भारी दिक्कतों को सामना करना पड़ता है। हिम्मताराम भांबू का बचपन इन्हीं परेशानियों से जूझते और कठिनाईयों से निबटने के उपायों को देखते हुए ही बीता था। खेती-किसानी के लिए हिम्मताराम को गांव में कक्षा 6 के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। पैसों की तंगी के कारण बचपन से ही मैकेनिक का काम शुरू कर दिया था और स्थानीय ट्रैक्टर मालिकों को पुर्जे खोलने और मरम्मत करने में सहायता करने लगे।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
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दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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