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Submitted by HindiWater on Sat, 11/30/2019 - 10:06
मध्यप्रदेश के परम्परागत तालाबों का जल विज्ञान
मध्यप्रदेश के बुन्देलखंड, बघेलखंड, मालवा तथा महाकोशल अंचलों में परम्परागत तालाबों की समृद्ध परम्परा रही है। इस परम्परा के प्रमाण सर्वत्र मिलते हैं। सबसे पहले उनकी आंचलिक विशेषताओं पर सांकेतिक जानकारी। उसके बाद परम्परागत जल विज्ञान का विवरण।

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Submitted by admin on Sat, 05/29/2010 - 08:26
Source:

नोबल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक स्व.सी.वी. रमन से किसी ने एक बार भारतीय संस्कृति के वैज्ञानिक पहलुओं पर चर्चा के दौरान पूछा- “क्या सचमुच ही अमृत जैसी कोई पेय वस्तु रही है, जिसके लिए देव-दानव संग्राम की स्थिति बन गई थी।”
Submitted by admin on Fri, 05/28/2010 - 08:28
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बिजनैस स्टैंडर्ड/ मई 24, 2010

भारत को क्या दुनिया भर में बढ़ते कबाड़ और जहरीले कचरे के ढेर का आयात करना चाहिए और उसे पुन:चक्रित कर इस्तेमाल में लाना चाहिए? क्या यह हमारे लिए एक कारोबारी संभावना के रूप में उभर सकता है? क्या इस अवसर का फायदा उठाना चाहिए क्योंकि धनी देशों को इलेक्ट्रॉनिक से लेकर चिकित्सा उत्पादों तक के कचरे का निस्तारण करने के लिए सस्ते और प्रभावी साधन की जरूरत है? हालांकि सवाल यह है कि क्या हम दूसरों के कचरे का प्रबंधन कर सकते हैं, खासतौर से तब जबकि हम खुद अपने कचरे का निस्तारण करने में असफल रहे हैं।
Submitted by admin on Wed, 05/26/2010 - 11:33
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खाद बनने के लिए गोबर आदि को सड़ाना पड़ता है, ऐसी भाषा हम बोलते हैं और ‘सड़ाना’ शब्द के साथ कुछ कमी का, बिगाड़ का भाव है। असल में उसे हम ‘सड़ाना’ नहीं, ‘पकाना’ कहेंगे, ‘गलाना’ कहेंगे जैसे कि अनाज पकाकर खाया जाता है।

मैले से माने गये अनर्थ का मूल कारण यह है कि उसे चीन में कच्चा या अधपका ही उपयोग में लाया जाता होगा। यह हमने ऊपर देखा। किसी चीज का खाद के तौर पर उपयोग करने के पहले वह पूरी गली हुई याने पकी होनी चाहिए, यह बात आदमी प्राचीन काल से जानता आया है। गोबर के गलने के बाद ही खाद के तौर पर किसान उसका उपयोग करता है। गोबर आदि को ताजा देने के बजाय सड़ा-गलाकर देना अधिक उपयोगी है। यह बात जरा विचित्र तो लगती है क्योंकि और चीजें तो ताजी अच्छी होती हैं, जैसा कि हम अनुभव करते हैं, फिर खाद के संबंध में यह उल्टी बात क्यों? इसकी एक वजह तो यह है कि खाद बनने के लिए गोबर

प्रयास

Submitted by HindiWater on Sat, 12/07/2019 - 11:31
पत्नी-बेटे मरे तो पेड़ों को ही बना लिया सबकुछ, अब हैं चालीस हजार वृक्षों के पिता
अपनी खेती बाड़ी से मैं खुश था। इससे होने वाली आय इतनी थी कि मेरे परिवार को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होती थी, लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि जब सब कुछ अच्छा चल रहा हो तो ऊपर वाले का वज्र टूटता है। मेरे साथ ही ऐसा ही हुआ। 

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Fri, 12/06/2019 - 11:05
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गंगा की रक्षा के लिए 15 दिसंबर से पद्मावती मातृसदन में करेंगी अनशन
मातृसदन द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मांगों के संदर्भ में एक पत्र भेजा गया, लेकिन अभी तक मांग पूरी नहीं हुई। जिस कारण मातृसदन की साध्वी पद्मावती ने 15 दिसंबर 2019 से 6 सूत्रीय मांगों को लेकर अनशन की घोषणा कर दी है। अनशन के बारे में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर भी अवगत करा दिया गया है। 
Submitted by HindiWater on Wed, 11/27/2019 - 13:25
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"संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स-2019" के लिए आवेदन
गैर-लाभकारी संगठन चरखा विकास संचार नेटवर्क ने 'संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स 2019’ की घोषणा की है। इसके अंतर्गत उन लेखकों को मंच प्रदान किया जाएगा जो ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में छुपी ऐसी प्रतिभाओं को उजागर करने का हौसला रखते हैं, जो मीडिया की नजरों से अब तक दूर रहा है।
Submitted by HindiWater on Mon, 11/25/2019 - 09:44
Source:
दैनिक जागरण, 25 नवम्बर 2019
‘ग्रीन कुंभ’ की थीम पर होगा हरिद्वार कुंभ
कुंभ-2021 को भव्य, शानदार, यादगार और अनूठा बनाने के लिए कुंभ मेला अधिष्ठान बड़े पैमाने पर तैयारी कर रहा है। विशेष यह कि इस बार हरिद्वार यह आयोजन ‘ग्रीन कुंभ’ की थीम पर होगा। इसमें गंगा की शुद्धता और पर्यावरण की रक्षा पर विशेष फोकस रहेगा। इसके तहत विद्युत ऊर्जा का कम से कम (लगभग शून्य) और सौर ऊर्जा का अधिकाधिक इस्तेमाल करने की योजना है।

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खासम-खास

मध्यप्रदेश के परम्परागत तालाबों का जल विज्ञान

Submitted by HindiWater on Sat, 11/30/2019 - 10:06
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास'
मध्यप्रदेश के बुन्देलखंड, बघेलखंड, मालवा तथा महाकोशल अंचलों में परम्परागत तालाबों की समृद्ध परम्परा रही है। इस परम्परा के प्रमाण सर्वत्र मिलते हैं। सबसे पहले उनकी आंचलिक विशेषताओं पर सांकेतिक जानकारी। उसके बाद परम्परागत जल विज्ञान का विवरण।

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धरती का अमृत है पानी

Submitted by admin on Sat, 05/29/2010 - 08:26
Author
मुनिदेव उपाध्याय

नोबल पुरस्कार विजेता वैज्ञानिक स्व.सी.वी. रमन से किसी ने एक बार भारतीय संस्कृति के वैज्ञानिक पहलुओं पर चर्चा के दौरान पूछा- “क्या सचमुच ही अमृत जैसी कोई पेय वस्तु रही है, जिसके लिए देव-दानव संग्राम की स्थिति बन गई थी।”

क्या हो हमारा ई-कचरा प्रबंधन मॉडल

Submitted by admin on Fri, 05/28/2010 - 08:28
Author
सुनीता नारायण
Source
बिजनैस स्टैंडर्ड/ मई 24, 2010

भारत को क्या दुनिया भर में बढ़ते कबाड़ और जहरीले कचरे के ढेर का आयात करना चाहिए और उसे पुन:चक्रित कर इस्तेमाल में लाना चाहिए? क्या यह हमारे लिए एक कारोबारी संभावना के रूप में उभर सकता है? क्या इस अवसर का फायदा उठाना चाहिए क्योंकि धनी देशों को इलेक्ट्रॉनिक से लेकर चिकित्सा उत्पादों तक के कचरे का निस्तारण करने के लिए सस्ते और प्रभावी साधन की जरूरत है? हालांकि सवाल यह है कि क्या हम दूसरों के कचरे का प्रबंधन कर सकते हैं, खासतौर से तब जबकि हम खुद अपने कचरे का निस्तारण करने में असफल रहे हैं।

कम्पोस्ट

Submitted by admin on Wed, 05/26/2010 - 11:33
Author
बल्लभस्वामी

खाद बनने के लिए गोबर आदि को सड़ाना पड़ता है, ऐसी भाषा हम बोलते हैं और ‘सड़ाना’ शब्द के साथ कुछ कमी का, बिगाड़ का भाव है। असल में उसे हम ‘सड़ाना’ नहीं, ‘पकाना’ कहेंगे, ‘गलाना’ कहेंगे जैसे कि अनाज पकाकर खाया जाता है।

मैले से माने गये अनर्थ का मूल कारण यह है कि उसे चीन में कच्चा या अधपका ही उपयोग में लाया जाता होगा। यह हमने ऊपर देखा। किसी चीज का खाद के तौर पर उपयोग करने के पहले वह पूरी गली हुई याने पकी होनी चाहिए, यह बात आदमी प्राचीन काल से जानता आया है। गोबर के गलने के बाद ही खाद के तौर पर किसान उसका उपयोग करता है। गोबर आदि को ताजा देने के बजाय सड़ा-गलाकर देना अधिक उपयोगी है। यह बात जरा विचित्र तो लगती है क्योंकि और चीजें तो ताजी अच्छी होती हैं, जैसा कि हम अनुभव करते हैं, फिर खाद के संबंध में यह उल्टी बात क्यों? इसकी एक वजह तो यह है कि खाद बनने के लिए गोबर

प्रयास

पत्नी-बेटे मरे तो पेड़ों को ही बना लिया सबकुछ, अब हैं चालीस हजार वृक्षों के पिता

Submitted by HindiWater on Sat, 12/07/2019 - 11:31
Source
डाउन टू अर्थ, दिसंबर 2019
अपनी खेती बाड़ी से मैं खुश था। इससे होने वाली आय इतनी थी कि मेरे परिवार को किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होती थी, लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि जब सब कुछ अच्छा चल रहा हो तो ऊपर वाले का वज्र टूटता है। मेरे साथ ही ऐसा ही हुआ। 

नोटिस बोर्ड

गंगा की रक्षा के लिए 15 दिसंबर से पद्मावती मातृसदन में करेंगी अनशन

Submitted by HindiWater on Fri, 12/06/2019 - 11:05
मातृसदन द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मांगों के संदर्भ में एक पत्र भेजा गया, लेकिन अभी तक मांग पूरी नहीं हुई। जिस कारण मातृसदन की साध्वी पद्मावती ने 15 दिसंबर 2019 से 6 सूत्रीय मांगों को लेकर अनशन की घोषणा कर दी है। अनशन के बारे में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर भी अवगत करा दिया गया है। 

"संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स-2019" के लिए आवेदन

Submitted by HindiWater on Wed, 11/27/2019 - 13:25
गैर-लाभकारी संगठन चरखा विकास संचार नेटवर्क ने 'संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स 2019’ की घोषणा की है। इसके अंतर्गत उन लेखकों को मंच प्रदान किया जाएगा जो ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में छुपी ऐसी प्रतिभाओं को उजागर करने का हौसला रखते हैं, जो मीडिया की नजरों से अब तक दूर रहा है।

‘ग्रीन कुंभ’ की थीम पर होगा हरिद्वार कुंभ

Submitted by HindiWater on Mon, 11/25/2019 - 09:44
Source
दैनिक जागरण, 25 नवम्बर 2019
कुंभ-2021 को भव्य, शानदार, यादगार और अनूठा बनाने के लिए कुंभ मेला अधिष्ठान बड़े पैमाने पर तैयारी कर रहा है। विशेष यह कि इस बार हरिद्वार यह आयोजन ‘ग्रीन कुंभ’ की थीम पर होगा। इसमें गंगा की शुद्धता और पर्यावरण की रक्षा पर विशेष फोकस रहेगा। इसके तहत विद्युत ऊर्जा का कम से कम (लगभग शून्य) और सौर ऊर्जा का अधिकाधिक इस्तेमाल करने की योजना है।

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