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खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Sun, 01/02/2022 - 13:06
आजाद बहती लोहित नदी, फोटो साभार : पेमा खांडू
नोडल विभाग की भूजल शाखा, साल में चार बार भूजल स्तर के परिवर्तन को दर्ज करती है। परिवर्तन के आधार पर भूजल दोहन के प्रतिशत को ज्ञात करती है। प्रतिशत के आधार पर विकासखंड़ों को सुरक्षित, सेमी-क्रिटिकल, क्रिटिकल और अतिदोहित श्रेणियों में विभाजित करती है लेकिन भूजल दोहन के कारण उत्पन्न होने वाले कुदरती जलचक्र के असन्तुलन, असन्तुलन के कुप्रभाव और उन कुप्रभावों को ठीक करने की रणनीति पर कोई काम नहीं करती। इसी कारण, पूरे देश में कुओं, नलकूपों, परकोलेशन तालाबों तथा नदियों के सूखने की समस्या का इलाज नहीं हो पा रहा है। इस बेरुखी के चलते अनेक लोग, अवैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर नदियों पर काम कर रहे हैं। उदाहरण के लिए कुछ संगठन नदी के किनारे की गंदगी साफ कर रहे है। कुछ उसके पानी से प्लास्टिक या अन्य किस्म की बायलाजिकल गंदगी हटा रहे हैं।

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Submitted by admin on Fri, 06/26/2009 - 19:29
Source:
भारतीय पक्ष

बोतलबंद पानी में पानी तो आदमी पी जाता है लेकिन बोतल पर्यावरण के सिर आ पड़ती है। पैसिफिक इंस्टीटयूट का कहना है कि अमरीकी जितना मिनरल वाटर पीता है उसका बाटल बनाने के लिए 20 मिलियन बैरल पेट्रो उत्पादों को खर्च किया जाता है। एक टन बाटल तीन टन कार्बन डाईआक्साईड का उत्सर्जन करता है।पहले कुछ डराने वाले आंकड़े फिर चौंकाने वाले तथ्य भी। फिर यह भी कि लाभ की मानसिकता के आगे इंसानियत कैसे घुटने टेक देती है। सिविल सोसायटी के कुकर्मों की लिस्ट लंबी है।

Submitted by admin on Fri, 06/26/2009 - 10:03
Source:
timesofindia.indiatimes.com
पानी का अगला घूँट पीने से पहले थोड़ा रुकिये, क्या आप आश्वस्त हैं कि यह पानी पीने के लिये सुरक्षित है? नहीं ना… जी हाँ, जयपुर (राजस्थान) के निवासियों के लिये यह प्रश्न बेहद अहम बन गया है। जो पानी आप पी रहे हैं उसमें बैक्टीरिया और विभिन्न केमिकल्स का ऐसा भयानक घालमेल है जो कभी भी आपके स्वास्थ्य पर एक बुरा प्रभाव तो डाल ही सकता है, शरीर के किसी महत्वपूर्ण अंग को भी कुछ समय बाद खराब बना सकता है। यह वही पानी है जो रोज़ाना आपके नलों से आ रहा है, और जिसके बारे में लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के अधिकारी, आधिकारिक रूप से कहते हैं कि “यह पानी सुरक्षित है…”।
Submitted by admin on Thu, 06/25/2009 - 12:12
Source:
amarujala.com

वैश्विक तापमान वृद्धि का हिमालय पर पड़ने वाला प्रभाव स्पष्ट दिखाई देने लगा है। अब मध्य हिमालय की पहाड़ियों पर हिमपात नहीं होता। टिहरी के सामने प्रताप नगर की पहाड़ियों और उससे जुड़ी हुई खैर पर्वतमाला पर अब बर्फ नहीं दिखाई देती। यही नहीं, भागीरथी के उद्गम गोमुख ग्लेशियर में बर्फ पीछे हट रही है। हिमालय के पारिस्थितिकी तंत्र विशेषज्ञों ने भविष्यवाणी की है कि वर्ष 2030 में गोमुख ग्लेशियर पूर्णतया लुप्त हो जाएगा। यानी गंगा सिर्फ पहाड़ी नालों से पोषित नदी बनकर रह जाएगी। इन नालों में गर्मियों में जब पानी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, पानी का स्तर न्यूनतम होता है। मैंने गोमुख की यात्रा पहली बार

प्रयास

Submitted by Shivendra on Mon, 01/10/2022 - 12:07
सोलर पैनल और सोलर लिफ्टिंग कार्य
उत्तराखण्ड राज्य के पौडी जनपद के अर्न्तगत द्वाराीखाल ब्लाक का सुदूरवर्ती छोटा सा गांव पाली, सडक से लगभग 1 किमी0 दूरी पर बसा हुआ है।  इस गांव में पानी की किल्लत काफी थी जिसके चलते ज्यादातर परिवार शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हुए और शेष परिवार सड़क के नजदीक मष्टखाल या चैलूसैंण आ बसे।इस समय लगभग 13 परिवार ही गांव में निवास करते हैं।

नोटिस बोर्ड

Submitted by Shivendra on Mon, 12/06/2021 - 14:01
Source:
एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन
इंडिया वाटर पार्टनरशिप द्वारा जलवायु परिवर्तन के दौर में उत्तराखंड में जल संसाधानों की क्षमता को बढ़ाने को लेकर एक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम जल संसाधनो पर काम कर रहे राज्य के तमाम सरकारी विभागों संस्था और अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने का काम करेगा। इंडिया वाटर पार्टनरशिप मैनजमेंट (IWRM)  की इस उत्साहपूर्वक पहल से राज्य सरकार को पानी को लेकर हालही की चुनौतियों और हर क्षेत्र में उसका सही इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी। 
Submitted by Editorial Team on Thu, 10/07/2021 - 11:03
Source:
चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

अभी‌ ‌तक‌ ‌हम‌ ‌अलग‌ ‌–अलग‌ ‌माध्यमों‌ ‌पर‌ ‌तरह‌ ‌–तरह‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌देखते‌ ‌आये‌ ‌हैं.‌ ‌क्या‌ ‌आपने‌ ‌कभी‌ ‌सोचा‌ ‌है‌ ‌कि‌ ‌जो‌ ‌सिनेमा‌ ‌हमें‌ ‌देखने‌ ‌को‌ ‌मिलता‌ ‌रहा‌ ‌है‌ ‌क्या‌ ‌उसके‌ ‌अलावा‌ ‌भी‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌कोई‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌है.‌ ‌और‌ ‌यह‌ ‌भी‌ ‌कि‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌से‌ ‌आपका‌ ‌भी‌ ‌रिश्ता‌ ‌बन‌ ‌सकता‌ ‌है। दोस्तों,‌ ‌प्रतिरोध‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌अभियान‌ ‌सम्भावना‌ ‌ट्रस्ट‌ ‌के‌ ‌साथ‌ ‌मिलकर‌ ‌आगामी‌ ‌18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर‌ ‌हिमांचल‌ ‌के‌ ‌पालमपुर‌ ‌शहर‌ ‌में‌ ‌चार‌ ‌दिनी‌ ‌वर्कशॉप‌ ‌आयोजित‌ ‌कर‌ ‌रहा‌ ‌है‌। ‌जिसके‌ ‌लिए‌ ‌हम‌ ‌आपको‌ ‌न्योता‌ ‌दे‌ ‌रहे‌ ‌हैं।

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
Source:
एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।

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खासम-खास

भारत की सूखती नदियाँ और बेखबरी का आलम

Submitted by Editorial Team on Sun, 01/02/2022 - 13:06
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
bharat-ki-sukhti-nadiyaan-or-bekhabari-ka-alam
आजाद बहती लोहित नदी, फोटो साभार : पेमा खांडू
नोडल विभाग की भूजल शाखा, साल में चार बार भूजल स्तर के परिवर्तन को दर्ज करती है। परिवर्तन के आधार पर भूजल दोहन के प्रतिशत को ज्ञात करती है। प्रतिशत के आधार पर विकासखंड़ों को सुरक्षित, सेमी-क्रिटिकल, क्रिटिकल और अतिदोहित श्रेणियों में विभाजित करती है लेकिन भूजल दोहन के कारण उत्पन्न होने वाले कुदरती जलचक्र के असन्तुलन, असन्तुलन के कुप्रभाव और उन कुप्रभावों को ठीक करने की रणनीति पर कोई काम नहीं करती। इसी कारण, पूरे देश में कुओं, नलकूपों, परकोलेशन तालाबों तथा नदियों के सूखने की समस्या का इलाज नहीं हो पा रहा है। इस बेरुखी के चलते अनेक लोग, अवैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर नदियों पर काम कर रहे हैं। उदाहरण के लिए कुछ संगठन नदी के किनारे की गंदगी साफ कर रहे है। कुछ उसके पानी से प्लास्टिक या अन्य किस्म की बायलाजिकल गंदगी हटा रहे हैं।

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बोतल में बंद होता पानी

Submitted by admin on Fri, 06/26/2009 - 19:29
Source
भारतीय पक्ष

बोतलबंद पानी में पानी तो आदमी पी जाता है लेकिन बोतल पर्यावरण के सिर आ पड़ती है। पैसिफिक इंस्टीटयूट का कहना है कि अमरीकी जितना मिनरल वाटर पीता है उसका बाटल बनाने के लिए 20 मिलियन बैरल पेट्रो उत्पादों को खर्च किया जाता है। एक टन बाटल तीन टन कार्बन डाईआक्साईड का उत्सर्जन करता है।पहले कुछ डराने वाले आंकड़े फिर चौंकाने वाले तथ्य भी। फिर यह भी कि लाभ की मानसिकता के आगे इंसानियत कैसे घुटने टेक देती है। सिविल सोसायटी के कुकर्मों की लिस्ट लंबी है।

जयपुर का पानी

Submitted by admin on Fri, 06/26/2009 - 10:03
Source
timesofindia.indiatimes.com
पानी का अगला घूँट पीने से पहले थोड़ा रुकिये, क्या आप आश्वस्त हैं कि यह पानी पीने के लिये सुरक्षित है? नहीं ना… जी हाँ, जयपुर (राजस्थान) के निवासियों के लिये यह प्रश्न बेहद अहम बन गया है। जो पानी आप पी रहे हैं उसमें बैक्टीरिया और विभिन्न केमिकल्स का ऐसा भयानक घालमेल है जो कभी भी आपके स्वास्थ्य पर एक बुरा प्रभाव तो डाल ही सकता है, शरीर के किसी महत्वपूर्ण अंग को भी कुछ समय बाद खराब बना सकता है। यह वही पानी है जो रोज़ाना आपके नलों से आ रहा है, और जिसके बारे में लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के अधिकारी, आधिकारिक रूप से कहते हैं कि “यह पानी सुरक्षित है…”।

हिमालय की पुकार

Submitted by admin on Thu, 06/25/2009 - 12:12
Author
सुंदर लाल बहुगुणा
Source
amarujala.com

वैश्विक तापमान वृद्धि का हिमालय पर पड़ने वाला प्रभाव स्पष्ट दिखाई देने लगा है। अब मध्य हिमालय की पहाड़ियों पर हिमपात नहीं होता। टिहरी के सामने प्रताप नगर की पहाड़ियों और उससे जुड़ी हुई खैर पर्वतमाला पर अब बर्फ नहीं दिखाई देती। यही नहीं, भागीरथी के उद्गम गोमुख ग्लेशियर में बर्फ पीछे हट रही है। हिमालय के पारिस्थितिकी तंत्र विशेषज्ञों ने भविष्यवाणी की है कि वर्ष 2030 में गोमुख ग्लेशियर पूर्णतया लुप्त हो जाएगा। यानी गंगा सिर्फ पहाड़ी नालों से पोषित नदी बनकर रह जाएगी। इन नालों में गर्मियों में जब पानी की सबसे अधिक आवश्यकता होती है, पानी का स्तर न्यूनतम होता है। मैंने गोमुख की यात्रा पहली बार

प्रयास

पाली सोलर लिफ्टिंग योजना: एक साझा अनुभव

Submitted by Shivendra on Mon, 01/10/2022 - 12:07
pali-solar-lifting-yojana:-ek-sajha-anubhav"
Source
लोक विज्ञान संस्थान,देहरादून
सोलर पैनल और सोलर लिफ्टिंग कार्य
उत्तराखण्ड राज्य के पौडी जनपद के अर्न्तगत द्वाराीखाल ब्लाक का सुदूरवर्ती छोटा सा गांव पाली, सडक से लगभग 1 किमी0 दूरी पर बसा हुआ है।  इस गांव में पानी की किल्लत काफी थी जिसके चलते ज्यादातर परिवार शहरों की ओर पलायन करने को मजबूर हुए और शेष परिवार सड़क के नजदीक मष्टखाल या चैलूसैंण आ बसे।इस समय लगभग 13 परिवार ही गांव में निवास करते हैं।

नोटिस बोर्ड

जल संसाधन प्रबंधन पर एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन

Submitted by Shivendra on Mon, 12/06/2021 - 14:01
jal-sansadhan-prabandhan-per-ekdivsia-karyashala-ka-ayojan
 एकदिवसीय कार्यशाला का आयोजन
इंडिया वाटर पार्टनरशिप द्वारा जलवायु परिवर्तन के दौर में उत्तराखंड में जल संसाधानों की क्षमता को बढ़ाने को लेकर एक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम जल संसाधनो पर काम कर रहे राज्य के तमाम सरकारी विभागों संस्था और अधिकारियों की क्षमता बढ़ाने का काम करेगा। इंडिया वाटर पार्टनरशिप मैनजमेंट (IWRM)  की इस उत्साहपूर्वक पहल से राज्य सरकार को पानी को लेकर हालही की चुनौतियों और हर क्षेत्र में उसका सही इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी। 

चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

Submitted by Editorial Team on Thu, 10/07/2021 - 11:03
pratirodh-ka-cinema-char-divasiya-cinema-karyashala
चार‌ ‌दिवसीय‌ ‌सिनेमा‌ ‌कार्यशाला‌ (18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर 2021‌)

अभी‌ ‌तक‌ ‌हम‌ ‌अलग‌ ‌–अलग‌ ‌माध्यमों‌ ‌पर‌ ‌तरह‌ ‌–तरह‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌देखते‌ ‌आये‌ ‌हैं.‌ ‌क्या‌ ‌आपने‌ ‌कभी‌ ‌सोचा‌ ‌है‌ ‌कि‌ ‌जो‌ ‌सिनेमा‌ ‌हमें‌ ‌देखने‌ ‌को‌ ‌मिलता‌ ‌रहा‌ ‌है‌ ‌क्या‌ ‌उसके‌ ‌अलावा‌ ‌भी‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌कोई‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌है.‌ ‌और‌ ‌यह‌ ‌भी‌ ‌कि‌ ‌सिनेमा‌ ‌की‌ ‌अलग‌ ‌दुनिया‌ ‌से‌ ‌आपका‌ ‌भी‌ ‌रिश्ता‌ ‌बन‌ ‌सकता‌ ‌है। दोस्तों,‌ ‌प्रतिरोध‌ ‌का‌ ‌सिनेमा‌ ‌अभियान‌ ‌सम्भावना‌ ‌ट्रस्ट‌ ‌के‌ ‌साथ‌ ‌मिलकर‌ ‌आगामी‌ ‌18‌ ‌से‌ ‌21‌ ‌नवम्बर‌ ‌हिमांचल‌ ‌के‌ ‌पालमपुर‌ ‌शहर‌ ‌में‌ ‌चार‌ ‌दिनी‌ ‌वर्कशॉप‌ ‌आयोजित‌ ‌कर‌ ‌रहा‌ ‌है‌। ‌जिसके‌ ‌लिए‌ ‌हम‌ ‌आपको‌ ‌न्योता‌ ‌दे‌ ‌रहे‌ ‌हैं।

एक्वा कांग्रेस के 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की महत्वपूर्ण जानकारियां

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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Source
एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।

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