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खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Tue, 10/04/2022 - 16:13
कूरम में पुनर्निर्मित समथमन मंदिर तालाब। फोटो - indiawaterportal
परम्परागत तालाबों पर अनुपम मिश्र की किताब ‘आज भी खरे हैं तालाब’, पहली बार, वर्ष 1993 में प्रकाशित हुई थी। इस किताब में अनुपम ने समाज से प्राप्त जानकारी के आधार पर भारत के विभिन्न भागों में बने तालाबों के बारे में व्यापक विवरण प्रस्तुत किया है। अर्थात आज भी खरे हैं तालाब में दर्ज विवरण परम्परागत तालाबों पर समाज की राय है। उनका दृष्टिबोध है। उन विवरणों में समाज की भावनायें, आस्था, मान्यतायें, रीति-रिवाज तथा परम्परागत तालाबों के निर्माण से जुड़े कर्मकाण्ड दर्ज हैं। प्रस्तुति और शैली अनुपम की है।

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Submitted by admin on Sun, 02/01/2009 - 10:16
Source:
samuhik upwas

सामूहिक उपवास

Submitted by admin on Sat, 01/31/2009 - 18:16
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इस “ड्राय होली आईडिया” का एक और मुख्य उद्देश्य आगामी होली और रंगपंचमी के त्यौहार को लेकर जनता में एक रचनात्मक और सकारात्मक संदेश फ़ैलाना है। उल्लेखनीय है कि प्रति वर्ष होली के त्यौहार पर लाखों गैलन पानी व्यर्थ बहाया जाता है, जिसके कारण भूजल स्तर भी कम तो होता ही है, साथ ही होली पर खतरनाक रसायनों के जल स्रोतों में मिल जाने के कारण वे भी प्रदूषित हो जाते हैं। ऐसे समय में जबकि देश का एक बड़ा भूभाग जल संकट से जूझ रहा हो तब होली पर पानी का अपव्यय रोकना हमारी पहली प्राथमिकता होना चाहिये। भास्कर के इस अभियान का मकसद जनता को जागृत करना है कि पानी की एक-एक बूंद कीमती है, इसे बचाना ही होगा।
Submitted by admin on Fri, 01/30/2009 - 10:01
Source:
bhaskar water logo
कम वर्षा के कारण किसी भी जलाशय में पर्याप्त पानी एकत्रित नहीं हो सका और राजधानी भोपाल जैसा बड़ा शहर जल संकट का सामना करने को मजबूर है। अक्टूबर माह के एक आकलन के अनुसार भोपाल की बड़ी झील में उस समय सिर्फ़ 80 दिन का पानी बचा था। “भास्कर” की इस जनजागृति पहल ने भोपालवासियों में एक चेतना का संचार करना शुरु किया और जनता ने भी जल संरक्षण और पानी बचाने के इस अभियान हेतु कमर कसना शुरु कर दिया। इस अभियान द्वारा यह संदेश भी गया कि अब आम जनता को पानी बचाने के लिये और भी जिम्मेदारी से काम तो करना ही होगा, साथ ही लोगों ने इस बात को समझा कि एक अकेला व्यक्ति भी समाज के किसी बड़े बदलाव और भविष्य की किसी योजना में महत्वपूर्ण घटक साबित हो सकता है।

प्रयास

Submitted by Shivendra on Fri, 07/01/2022 - 13:28
राजस्थान के उदयपुर जिले के मेनार गांव में धंध झील में पक्षियों का झुंड
इससे मेवाड़ के ग्रामीण क्षेत्र को रामसर स्थल का दर्जा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। गाँव की दो झीलें ब्रह्मा और धंध में हर साल सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों को देखा जा सकता है। इसी वजह से गांव का नाम बर्ड विलेज पड़ा।   

नोटिस बोर्ड

Submitted by Shivendra on Tue, 09/06/2022 - 14:16
Source:
चरखा फीचर
'संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स – 2022
कार्य अनुभव के विवरण के साथ संक्षिप्त पाठ्यक्रम जीवन लगभग 800-1000 शब्दों का एक प्रस्ताव, जिसमें उस विशेष विषयगत क्षेत्र को रेखांकित किया गया हो, जिसमें आवेदक काम करना चाहता है. प्रस्ताव में अध्ययन की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति, कार्यप्रणाली, चयनित विषय की प्रासंगिकता के साथ-साथ इन लेखों से अपेक्षित प्रभाव के बारे में विवरण शामिल होनी चाहिए. साथ ही, इस बात का उल्लेख होनी चाहिए कि देश के विकास से जुड़ी बहस में इसके योगदान किस प्रकार हो सकता है? कृपया आलेख प्रस्तुत करने वाली भाषा भी निर्दिष्ट करें। लेख अंग्रेजी, हिंदी या उर्दू में ही स्वीकार किए जाएंगे
Submitted by Shivendra on Tue, 08/23/2022 - 17:19
Source:
यूसर्क
जल विज्ञान प्रशिक्षण कार्यशाला
उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र द्वारा आज दिनांक 23.08.22 को तीन दिवसीय जल विज्ञान प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए यूसर्क की निदेशक प्रो.(डॉ.) अनीता रावत ने अपने संबोधन में कहा कि यूसर्क द्वारा जल के महत्व को देखते हुए विगत वर्ष 2021 को संयुक्त राष्ट्र की विश्व पर्यावरण दिवस की थीम "ईको सिस्टम रेस्टोरेशन" के अंर्तगत आयोजित कार्यक्रम के निष्कर्षों के क्रम में जल विज्ञान विषयक लेक्चर सीरीज एवं जल विज्ञान प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्रारंभ किया गया
Submitted by Shivendra on Mon, 07/25/2022 - 15:34
Source:
यूसर्क
जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला
इस दौरान राष्ट्रीय पर्यावरण  इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्था के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अपशिष्ट जल विभाग विभाग के प्रमुख डॉक्टर रितेश विजय  सस्टेनेबल  वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट फॉर लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट (Sustainable Wastewater Treatment for Liquid Waste Management) विषय  पर विशेषज्ञ तौर पर अपनी राय रखेंगे।

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खासम-खास

तालाब ज्ञान-संस्कृति : नींव से शिखर तक

Submitted by Editorial Team on Tue, 10/04/2022 - 16:13
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
talab-gyan-sanskriti-:-ninv-se-shikhar-tak
कूरम में पुनर्निर्मित समथमन मंदिर तालाब। फोटो - indiawaterportal
परम्परागत तालाबों पर अनुपम मिश्र की किताब ‘आज भी खरे हैं तालाब’, पहली बार, वर्ष 1993 में प्रकाशित हुई थी। इस किताब में अनुपम ने समाज से प्राप्त जानकारी के आधार पर भारत के विभिन्न भागों में बने तालाबों के बारे में व्यापक विवरण प्रस्तुत किया है। अर्थात आज भी खरे हैं तालाब में दर्ज विवरण परम्परागत तालाबों पर समाज की राय है। उनका दृष्टिबोध है। उन विवरणों में समाज की भावनायें, आस्था, मान्यतायें, रीति-रिवाज तथा परम्परागत तालाबों के निर्माण से जुड़े कर्मकाण्ड दर्ज हैं। प्रस्तुति और शैली अनुपम की है।

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ड्राय होली आईडिया

Submitted by admin on Sat, 01/31/2009 - 18:16
Author
संपादक
dry-holi-idea
इस “ड्राय होली आईडिया” का एक और मुख्य उद्देश्य आगामी होली और रंगपंचमी के त्यौहार को लेकर जनता में एक रचनात्मक और सकारात्मक संदेश फ़ैलाना है। उल्लेखनीय है कि प्रति वर्ष होली के त्यौहार पर लाखों गैलन पानी व्यर्थ बहाया जाता है, जिसके कारण भूजल स्तर भी कम तो होता ही है, साथ ही होली पर खतरनाक रसायनों के जल स्रोतों में मिल जाने के कारण वे भी प्रदूषित हो जाते हैं। ऐसे समय में जबकि देश का एक बड़ा भूभाग जल संकट से जूझ रहा हो तब होली पर पानी का अपव्यय रोकना हमारी पहली प्राथमिकता होना चाहिये। भास्कर के इस अभियान का मकसद जनता को जागृत करना है कि पानी की एक-एक बूंद कीमती है, इसे बचाना ही होगा।

दैनिक भास्कर का अभियान

Submitted by admin on Fri, 01/30/2009 - 10:01
Author
दैनिक भास्कर
dainik-bhaskar-ka-abhiyan
bhaskar water logo
कम वर्षा के कारण किसी भी जलाशय में पर्याप्त पानी एकत्रित नहीं हो सका और राजधानी भोपाल जैसा बड़ा शहर जल संकट का सामना करने को मजबूर है। अक्टूबर माह के एक आकलन के अनुसार भोपाल की बड़ी झील में उस समय सिर्फ़ 80 दिन का पानी बचा था। “भास्कर” की इस जनजागृति पहल ने भोपालवासियों में एक चेतना का संचार करना शुरु किया और जनता ने भी जल संरक्षण और पानी बचाने के इस अभियान हेतु कमर कसना शुरु कर दिया। इस अभियान द्वारा यह संदेश भी गया कि अब आम जनता को पानी बचाने के लिये और भी जिम्मेदारी से काम तो करना ही होगा, साथ ही लोगों ने इस बात को समझा कि एक अकेला व्यक्ति भी समाज के किसी बड़े बदलाव और भविष्य की किसी योजना में महत्वपूर्ण घटक साबित हो सकता है।

प्रयास

उदयपुर के इस गांव को वेटलैंड घोषित किया जाना तय

Submitted by Shivendra on Fri, 07/01/2022 - 13:28
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राजस्थान के उदयपुर जिले के मेनार गांव में धंध झील में पक्षियों का झुंड
इससे मेवाड़ के ग्रामीण क्षेत्र को रामसर स्थल का दर्जा मिलने का मार्ग प्रशस्त होगा। गाँव की दो झीलें ब्रह्मा और धंध में हर साल सर्दियों के मौसम में बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों को देखा जा सकता है। इसी वजह से गांव का नाम बर्ड विलेज पड़ा।   

नोटिस बोर्ड

'संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स – 2022

Submitted by Shivendra on Tue, 09/06/2022 - 14:16
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चरखा फीचर
'संजॉय घोष मीडिया अवार्ड्स – 2022
कार्य अनुभव के विवरण के साथ संक्षिप्त पाठ्यक्रम जीवन लगभग 800-1000 शब्दों का एक प्रस्ताव, जिसमें उस विशेष विषयगत क्षेत्र को रेखांकित किया गया हो, जिसमें आवेदक काम करना चाहता है. प्रस्ताव में अध्ययन की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति, कार्यप्रणाली, चयनित विषय की प्रासंगिकता के साथ-साथ इन लेखों से अपेक्षित प्रभाव के बारे में विवरण शामिल होनी चाहिए. साथ ही, इस बात का उल्लेख होनी चाहिए कि देश के विकास से जुड़ी बहस में इसके योगदान किस प्रकार हो सकता है? कृपया आलेख प्रस्तुत करने वाली भाषा भी निर्दिष्ट करें। लेख अंग्रेजी, हिंदी या उर्दू में ही स्वीकार किए जाएंगे

​यूसर्क द्वारा तीन दिवसीय जल विज्ञान प्रशिक्षण प्रारंभ

Submitted by Shivendra on Tue, 08/23/2022 - 17:19
USERC-dvara-tin-divasiy-jal-vigyan-prashikshan-prarambh
Source
यूसर्क
जल विज्ञान प्रशिक्षण कार्यशाला
उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र द्वारा आज दिनांक 23.08.22 को तीन दिवसीय जल विज्ञान प्रशिक्षण प्रारंभ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए यूसर्क की निदेशक प्रो.(डॉ.) अनीता रावत ने अपने संबोधन में कहा कि यूसर्क द्वारा जल के महत्व को देखते हुए विगत वर्ष 2021 को संयुक्त राष्ट्र की विश्व पर्यावरण दिवस की थीम "ईको सिस्टम रेस्टोरेशन" के अंर्तगत आयोजित कार्यक्रम के निष्कर्षों के क्रम में जल विज्ञान विषयक लेक्चर सीरीज एवं जल विज्ञान प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्रारंभ किया गया

28 जुलाई को यूसर्क द्वारा आयोजित जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला पर भाग लेने के लिए पंजीकरण करायें

Submitted by Shivendra on Mon, 07/25/2022 - 15:34
28-july-ko-ayojit-hone-vale-jal-shiksha-vyakhyan-shrinkhala-par-bhag-lene-ke-liye-panjikaran-karayen
Source
यूसर्क
जल शिक्षा व्याख्यान श्रृंखला
इस दौरान राष्ट्रीय पर्यावरण  इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्था के वरिष्ठ वैज्ञानिक और अपशिष्ट जल विभाग विभाग के प्रमुख डॉक्टर रितेश विजय  सस्टेनेबल  वेस्ट वाटर ट्रीटमेंट फॉर लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट (Sustainable Wastewater Treatment for Liquid Waste Management) विषय  पर विशेषज्ञ तौर पर अपनी राय रखेंगे।

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