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खासम-खास

नदियों के प्रवाह की अनदेखी पड़ेगी भारी

Submitted by editorial on Sun, 10/07/2018 - 17:59
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
Source
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
कृष्ण गोपाल ‘व्यास’कृष्ण गोपाल ‘व्यास’धरती पर हमारे स्वस्थ बचे रहने के लिये नदियाँ बेहद आवश्यक हैं। यदि हमारी पीढ़ी ने नदियों के घटते प्रवाह की अनदेखी की तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें नदियों के विनाश और पर्यावरण को गम्भीर नुकसान पहुँचाने वाले बेहद गैर-जिम्मेदार पूर्वजों के तौर पर याद करेंगी। इसलिये नदियों की बर्बादी को रोका जाना चाहिए। उनके प्रवाह की बहाली के लिये सार्थक प्रयास किया जाना चाहिए।

Content

संत गोपाल दास भी स्वामी सानंद की राह पर, पानी भी त्यागा

Submitted by editorial on Mon, 10/15/2018 - 14:25
Author
उमेश कुमार राय
एम्स में भर्ती संत गोपालदासएम्स में भर्ती संत गोपालदास (फोटो साभार - दैनिक जागरण)गंगा की अविरलता को वापस लौटाने की माँग पर करीब चार महीने से अनशन पर बैठे प्रो. जीडी अग्रवाल यानी स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद के निधन के बाद संत गोपालदास ने भी पानी ग्रहण करना छोड़ दिया है।

स्वामी सानंद - कलयुग का भगीरथ

Submitted by editorial on Sat, 10/13/2018 - 14:02
Author
उमेश कुमार राय
गंगा के लिये पंचतत्व में विलीन स्वामी सानंदगंगा के लिये पंचतत्व में विलीन स्वामी सानंद (फोटो साभार - डॉ. अनिल गौतम)हुक्मरां तो गंगा को बचाने के अपने वादे पूरा नहीं कर पाये, लेकिन स्वामी सानंद ने अपना वादा निभाया। दशहरा से पहले ही यानी गुरुवार को उन्होंने शरीर त्याग दिया। वह 86 साल के थे और लम्बे समय से गंगा के लिये निहत्थे संघर्ष कर रहे थे। सही मायनों में कहा जाये, तो वह कलयुग के भगीरथ थे। आज गंगा जितनी भी बची हुई है, उसका श्रेय निश्चित तौर पर स्वामी सानंद को जाता है। लेकिन वह इतने से सन्तुष्ट नहीं थे।

गंगा की जिद में गए ‘भीष्म’

Submitted by editorial on Sat, 10/13/2018 - 13:50
Author
हिमांशु ठक्कर
Source
राष्ट्रीय सहारा, 13 अक्टूबर, 2018
स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंदस्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (फोटो साभार - लाइव हिन्दुस्तान)आमरण अनशनरत प्रो. जीडी अग्रवाल (जो स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के नाम से विख्यात थे) के बीती ग्यारह अक्टूबर को निधन ने सभी को बेहद व्यथित कर दिया है। वह गंगा के लिये अलग से एक्ट तथा उत्तराखण्ड में तमाम जलविद्युत परियोजनाओं को रद्द करने की माँग को लेकर बीती 22 जून से आमरण अनशन पर बैठे थे।

प्रयास

पुनर्जीवित हुआ ढाई सौ साल पुराना तालाब

Submitted by editorial on Fri, 10/12/2018 - 14:31
Author
मनीष वैद्य
मीठा तालाबमीठा तालाब"जिस दौर में ये तालाब बने थे, उस दौर में आबादी और भी कम थी। यानी तब जोर इस बात पर था कि अपने हिस्से में बरसने वाली हरेक बूँद इकट्ठी कर ली जाये और संकट के समय में आसपास के क्षेत्रों में भी उसे बाँट लिया जाये। वरुण देवता का प्रसाद गाँव अपनी अंजुली में भर लेता था।

नोटिस बोर्ड

गंगा के लिये गंगाभक्त ने त्यागे प्राण

Submitted by editorial on Thu, 10/11/2018 - 18:26
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
Source
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंदस्वामी ज्ञानस्वरूप सानंदगंगा भक्त और प्रसिद्ध पर्यावरणविद स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (प्रोफेसर जी.डी. अग्रवाल) ने गुरूवार को एम्स, ऋषिकेश में अपने प्राण त्याग दिए। वे 87 वर्ष के थे। गंगा की अविरलता और निर्मलता को कायम रखने के उद्देश्य से गंगा एक्ट लागू करने सहित अन्य कई माँगों को लेकर स्वामी सानंद 22 जून से आमरण अनशन पर थे। गुरूवार को उनके अनशन का 112 वाँ दिन था।

मिलिए सीएसआर की बेहतरीन शख्सियतों से

Submitted by editorial on Mon, 10/01/2018 - 14:35
Author
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
Source
इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
इण्डिया सीएसआरइण्डिया सीएसआरआयोजक - इण्डिया सीएसआर
दिन - सोमवार
तारिख - 01 अप्रैल 2019
स्थान - पीएचडी हाउस, अगस्त क्रान्ति मार्ग, नई दिल्ली।


इण्डिया सीएसआर (कारपोरेट सस्टेनेबिलिटी एंड रिस्पॉन्सिबिलिटी) द्वारा सोमवार 1 अप्रैल 2019 को पीएचडी हाउस (अगस्त क्रान्ति मार्ग, नई दिल्ली) में सीएसआर लीडरशिप समिट एंड अवार्ड का आयोजन किया जा रहा है।यह 2019 की इण्डिया की सबसे बड़ी लीडरशिप समिट में से एक होगी जो नागरिकों, बिजनेस और स्वयंसेवी संगठनों के लिये मील का पत्थर साबित होगी।

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नदियों के प्रवाह की अनदेखी पड़ेगी भारी

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कृष्ण गोपाल ‘व्यास’कृष्ण गोपाल ‘व्यास’धरती पर हमारे स्वस्थ बचे रहने के लिये नदियाँ बेहद आवश्यक हैं। यदि हमारी पीढ़ी ने नदियों के घटते प्रवाह की अनदेखी की तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें नदियों के विनाश और पर्यावरण को गम्भीर नुकसान पहुँचाने वाले बेहद गैर-जिम्मेदार पूर्वजों के तौर पर याद करेंगी। इसलिये नदियों की बर्बादी को रोका जाना चाहिए। उनके प्रवाह की बहाली के लिये सार्थक प्रयास किया जाना चाहिए।

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संत गोपाल दास भी स्वामी सानंद की राह पर, पानी भी त्यागा

Submitted by editorial on Mon, 10/15/2018 - 14:25
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उमेश कुमार राय
एम्स में भर्ती संत गोपालदासएम्स में भर्ती संत गोपालदास (फोटो साभार - दैनिक जागरण)गंगा की अविरलता को वापस लौटाने की माँग पर करीब चार महीने से अनशन पर बैठे प्रो. जीडी अग्रवाल यानी स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद के निधन के बाद संत गोपालदास ने भी पानी ग्रहण करना छोड़ दिया है।

स्वामी सानंद - कलयुग का भगीरथ

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उमेश कुमार राय
गंगा के लिये पंचतत्व में विलीन स्वामी सानंदगंगा के लिये पंचतत्व में विलीन स्वामी सानंद (फोटो साभार - डॉ. अनिल गौतम)हुक्मरां तो गंगा को बचाने के अपने वादे पूरा नहीं कर पाये, लेकिन स्वामी सानंद ने अपना वादा निभाया। दशहरा से पहले ही यानी गुरुवार को उन्होंने शरीर त्याग दिया। वह 86 साल के थे और लम्बे समय से गंगा के लिये निहत्थे संघर्ष कर रहे थे। सही मायनों में कहा जाये, तो वह कलयुग के भगीरथ थे। आज गंगा जितनी भी बची हुई है, उसका श्रेय निश्चित तौर पर स्वामी सानंद को जाता है। लेकिन वह इतने से सन्तुष्ट नहीं थे।

गंगा की जिद में गए ‘भीष्म’

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हिमांशु ठक्कर
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राष्ट्रीय सहारा, 13 अक्टूबर, 2018
स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंदस्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (फोटो साभार - लाइव हिन्दुस्तान)आमरण अनशनरत प्रो. जीडी अग्रवाल (जो स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद के नाम से विख्यात थे) के बीती ग्यारह अक्टूबर को निधन ने सभी को बेहद व्यथित कर दिया है। वह गंगा के लिये अलग से एक्ट तथा उत्तराखण्ड में तमाम जलविद्युत परियोजनाओं को रद्द करने की माँग को लेकर बीती 22 जून से आमरण अनशन पर बैठे थे।

प्रयास

पुनर्जीवित हुआ ढाई सौ साल पुराना तालाब

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मनीष वैद्य
मीठा तालाबमीठा तालाब"जिस दौर में ये तालाब बने थे, उस दौर में आबादी और भी कम थी। यानी तब जोर इस बात पर था कि अपने हिस्से में बरसने वाली हरेक बूँद इकट्ठी कर ली जाये और संकट के समय में आसपास के क्षेत्रों में भी उसे बाँट लिया जाये। वरुण देवता का प्रसाद गाँव अपनी अंजुली में भर लेता था।

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गंगा के लिये गंगाभक्त ने त्यागे प्राण

Submitted by editorial on Thu, 10/11/2018 - 18:26
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इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
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स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंदस्वामी ज्ञानस्वरूप सानंदगंगा भक्त और प्रसिद्ध पर्यावरणविद स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (प्रोफेसर जी.डी. अग्रवाल) ने गुरूवार को एम्स, ऋषिकेश में अपने प्राण त्याग दिए। वे 87 वर्ष के थे। गंगा की अविरलता और निर्मलता को कायम रखने के उद्देश्य से गंगा एक्ट लागू करने सहित अन्य कई माँगों को लेकर स्वामी सानंद 22 जून से आमरण अनशन पर थे। गुरूवार को उनके अनशन का 112 वाँ दिन था।

मिलिए सीएसआर की बेहतरीन शख्सियतों से

Submitted by editorial on Mon, 10/01/2018 - 14:35
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इण्डिया वाटर पोर्टल (हिन्दी)
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इण्डिया सीएसआरइण्डिया सीएसआरआयोजक - इण्डिया सीएसआर
दिन - सोमवार
तारिख - 01 अप्रैल 2019
स्थान - पीएचडी हाउस, अगस्त क्रान्ति मार्ग, नई दिल्ली।


इण्डिया सीएसआर (कारपोरेट सस्टेनेबिलिटी एंड रिस्पॉन्सिबिलिटी) द्वारा सोमवार 1 अप्रैल 2019 को पीएचडी हाउस (अगस्त क्रान्ति मार्ग, नई दिल्ली) में सीएसआर लीडरशिप समिट एंड अवार्ड का आयोजन किया जा रहा है।यह 2019 की इण्डिया की सबसे बड़ी लीडरशिप समिट में से एक होगी जो नागरिकों, बिजनेस और स्वयंसेवी संगठनों के लिये मील का पत्थर साबित होगी।

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