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खासम-खास

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25
हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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Submitted by Shivendra on Tue, 09/28/2021 - 18:12
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जल स्रोत प्रबंधन के सफल प्रयास पर वैज्ञानिक मंथन
कार्यक्रम का संचालन करते हुए यूसर्क के वैज्ञानिक तथा कार्यक्रम समन्वयक डॉ भवतोष शर्मा ने कहा कि पर्वतीय भाग जल स्रोतों के पुनर्जीवन, संरक्षण, स्वच्छता तथा संवर्द्धन  के लिए  सामाजिक सहभागिता के साथ कार्य करना होगा तथा जल संरक्षण की स्थानीय परम्परागत विधियों को अपनाना होगा। जल संरक्षण तथा वर्षाजल संचयन का कार्य अपने-अपने घर एवं गांवों से ही शुरवात करनी होगी। तभी समाज में सभी की सहभागिता से बढ़ती हुई जल की मांग को पूरा किया जा सकेगा। वही तकनीकी सत्र में  रिलायंस  फाउंडेशन उत्तराखण्ड के परियोजना निदेशक कमलेश गुरूरानी ने  ‘‘सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से पर्वतीय भाग में जल संरक्षण’’ विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि रिलाइंस फाउंडेशन ने उत्तराखंड  के उत्तकाशी एवं रूद्रप्रयाग जनपदों में सामूहिक भागीदारी के माध्यम से विभिन्न प्रकार के रिचार्ज सरचनाएँ  बनायी गयी है  
Submitted by Shivendra on Mon, 09/27/2021 - 13:16
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किशोर सागर तालाब जिसे अतिक्रमण मुक्त कराने सात साल पहले एनजीटी में दायर की थी याचिक
एनजीटी के माननीय न्यायाधीश श्री शेव कुमार सिंह व श्री अरुण कुमार वर्मा ने इस मामले में 20 सितम्बर को ऐतिहासिक फैसला दिया हैं। जिसमे एनजीटी के पूर्व आदेश का निष्पादन कराने के छतरपुर जिला न्यायाधीश को अधिकार सोंपे दिये गये हैं। इस आदेश के तहत छतरपुर जिला जज किसी भी मजिस्ट्रेट को यह मामला सौंप सकते हैं जिससे किशोर सागर तालाब से पूर्व आदेश के तहत कब्ज़ा हटाने की कार्यवाही संभव हों सके।गौरतलब हैं कि एनजीटी ने अपने पूर्व आदेश में किशोर सागर तालाब को अतिक्रमण मुक्त करने के लिये कठोर आदेश दिये थे। तालाब के मूल रकवे, फुल टेंक लेबल भराव क्षेत्र और उसके बाद 10 मीटर में ग्रीन जोन बनाने के आदेश दिये थे। एनजीटी में मूल याचिका में जिला कलेक्टर, प्रदूषण विभाग सहित अन्य जिम्मेदार विभागों को भी पक्षकार बनाया गया था। जिनकी दलीलो को भी सुना गया था। इसके बाद एनजीटी का आदेश पारित हुआ था।
Submitted by Shivendra on Mon, 09/27/2021 - 11:37
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नरेंद्र मोदी यूट्यूब
पीएम मोदी ने क्यों कहा साल में एक बार 'नदी उत्सव' मनाएं
पहले जमाने में हमारे बड़े इन श्लोकों बच्चों को याद कराते थे। इससे हमारे देश मे नदियों के प्रति आस्था पैदा होती थी और विशाल भारत का मानचित्र मन में अंकित हो जाता था नदियों के प्रति जुड़ाव बनता था जिस नदी को हम मां के रूप में जानते हैं और देखते हैं जीते हैं उस नदी के प्रति एक आस्था का भाव पैदा होता था। एकसंस्कार प्रक्रिया थी। उन्होंने कहा जब हमारे देश में  नदियों की महिमा पर बात कर रहे हैं तो सौभाविक रूप से हर कोई यह प्रश्न उठाएगा। और प्रश्नन उठाने का हक भी है।इसका जवाब देना हमारी जिम्मेवारी भी है कोई भी सवाल पूछेगा कि आप नदी के गीत गा रहे हो नदी को माँ कह रहे हो तो नदी प्रदूषित क्यों हो जाती है।

प्रयास

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।
Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
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गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।
Submitted by Shivendra on Thu, 06/10/2021 - 12:03
Source:
मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।

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खासम-खास

हिन्दुकुश हिमालय पर्वतमाला: दी थर्ड पोल

Submitted by Editorial Team on Thu, 05/13/2021 - 10:25

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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जल स्रोत प्रबंधन के सफल प्रयास पर वैज्ञानिक मंथन

Submitted by Shivendra on Tue, 09/28/2021 - 18:12
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जल स्रोत प्रबंधन के सफल प्रयास पर वैज्ञानिक मंथन
कार्यक्रम का संचालन करते हुए यूसर्क के वैज्ञानिक तथा कार्यक्रम समन्वयक डॉ भवतोष शर्मा ने कहा कि पर्वतीय भाग जल स्रोतों के पुनर्जीवन, संरक्षण, स्वच्छता तथा संवर्द्धन  के लिए  सामाजिक सहभागिता के साथ कार्य करना होगा तथा जल संरक्षण की स्थानीय परम्परागत विधियों को अपनाना होगा। जल संरक्षण तथा वर्षाजल संचयन का कार्य अपने-अपने घर एवं गांवों से ही शुरवात करनी होगी। तभी समाज में सभी की सहभागिता से बढ़ती हुई जल की मांग को पूरा किया जा सकेगा। वही तकनीकी सत्र में  रिलायंस  फाउंडेशन उत्तराखण्ड के परियोजना निदेशक कमलेश गुरूरानी ने  ‘‘सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से पर्वतीय भाग में जल संरक्षण’’ विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि रिलाइंस फाउंडेशन ने उत्तराखंड  के उत्तकाशी एवं रूद्रप्रयाग जनपदों में सामूहिक भागीदारी के माध्यम से विभिन्न प्रकार के रिचार्ज सरचनाएँ  बनायी गयी है  

किशोर सागर तालाब मामले में एनजीटी का ऐतिहासिक फैसला

Submitted by Shivendra on Mon, 09/27/2021 - 13:16
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किशोर सागर तालाब जिसे अतिक्रमण मुक्त कराने सात साल पहले एनजीटी में दायर की थी याचिक
एनजीटी के माननीय न्यायाधीश श्री शेव कुमार सिंह व श्री अरुण कुमार वर्मा ने इस मामले में 20 सितम्बर को ऐतिहासिक फैसला दिया हैं। जिसमे एनजीटी के पूर्व आदेश का निष्पादन कराने के छतरपुर जिला न्यायाधीश को अधिकार सोंपे दिये गये हैं। इस आदेश के तहत छतरपुर जिला जज किसी भी मजिस्ट्रेट को यह मामला सौंप सकते हैं जिससे किशोर सागर तालाब से पूर्व आदेश के तहत कब्ज़ा हटाने की कार्यवाही संभव हों सके।गौरतलब हैं कि एनजीटी ने अपने पूर्व आदेश में किशोर सागर तालाब को अतिक्रमण मुक्त करने के लिये कठोर आदेश दिये थे। तालाब के मूल रकवे, फुल टेंक लेबल भराव क्षेत्र और उसके बाद 10 मीटर में ग्रीन जोन बनाने के आदेश दिये थे। एनजीटी में मूल याचिका में जिला कलेक्टर, प्रदूषण विभाग सहित अन्य जिम्मेदार विभागों को भी पक्षकार बनाया गया था। जिनकी दलीलो को भी सुना गया था। इसके बाद एनजीटी का आदेश पारित हुआ था।

पीएम मोदी ने क्यों कहा साल में एक बार 'नदी उत्सव' मनाएं

Submitted by Shivendra on Mon, 09/27/2021 - 11:37
pm modi on river says people to observe river festival once a year
Source
नरेंद्र मोदी यूट्यूब
पीएम मोदी ने क्यों कहा साल में एक बार 'नदी उत्सव' मनाएं
पहले जमाने में हमारे बड़े इन श्लोकों बच्चों को याद कराते थे। इससे हमारे देश मे नदियों के प्रति आस्था पैदा होती थी और विशाल भारत का मानचित्र मन में अंकित हो जाता था नदियों के प्रति जुड़ाव बनता था जिस नदी को हम मां के रूप में जानते हैं और देखते हैं जीते हैं उस नदी के प्रति एक आस्था का भाव पैदा होता था। एकसंस्कार प्रक्रिया थी। उन्होंने कहा जब हमारे देश में  नदियों की महिमा पर बात कर रहे हैं तो सौभाविक रूप से हर कोई यह प्रश्न उठाएगा। और प्रश्नन उठाने का हक भी है।इसका जवाब देना हमारी जिम्मेवारी भी है कोई भी सवाल पूछेगा कि आप नदी के गीत गा रहे हो नदी को माँ कह रहे हो तो नदी प्रदूषित क्यों हो जाती है।

प्रयास

गांवों को जगाता एक शिक्षक

Submitted by Shivendra on Sat, 08/14/2021 - 17:50
ganvon-ko-jagata-ek-shikshak
Source
6 जुलाई 2003,जनसत्ता
महिला मंगल दल कार्यकर्ताओं के साथ उनके प्रेरणास्त्रोत मोहन चंद्र कांडपाल,फोटो:पानी बोओ
सीड’ आज 15 गांवों में बालवाड़ियां चला रही है। इनमें ढाई से 5 साल तक के बच्चों को न सिर्फ रोजाना 4 घंटे देखभाल की जाती है, बल्कि तरह-तरह के खेलों, बाल-कार्यों, भावगीतों इत्यादि के जरिए उनको पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों सबसे बढ़-चढ़कर अपनी मिट्टी से प्रेम करना सिखाया जाता है। ‘एक बनेंगे, नेक बनेंगे’ ‘मिलकर के हम काम करेंगे’ और ‘आज हिमालय जागेगा, दूर कुल्हाड़ा भागेगा।’ जैसे नारे पूरे गांव को एकता के सूत्र में बांधने का काम बखूबी करते रहे हैं। प्राइमरी में पढ़ रहे बच्चों के लिए शाम को गांव में संध्या केंद्र चलाते हैं, यहां बच्चे न सिर्फ अपने स्थानीय परिवेश के बारे में चर्चा करते हैं, बल्कि नन्हें हाथों से गांव के झरने, नौले-धारे आदि की साफ करने का, पॉलिथीन के बेकार थैली में पेड़-पौधे लगाने जैसा कार्य करके बड़ों को प्रेरणा दे रहे हैं। कांडे गांव की जानकी कांडपाल बताती हैं कि घर में पड़ी प्लास्टिक की थैली खाली होते ही बच्चों में उसे पाने की होड़ मची रहती है।

नोटिस बोर्ड

एक्वा कांग्रेस के 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की महत्वपूर्ण जानकारियां

Submitted by Shivendra on Wed, 08/18/2021 - 12:32
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Source
एक्वा कांग्रेस
एक्वा कांग्रेस 15वाँ अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन
कार्यक्रम में इस बार पानी का लोगों के पर्यावरणीय सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों के असर को शामिल किया जाएगा।  पानी का मतलब अलग-अलग लोगों के लिए अलग अलग चीजें है। जैसे घरों, स्कूलों और कार्यस्थलों में पानी का मतलब स्वास्थ्य, स्वच्छता, गरिमा और उत्पादकता हो सकता है  तो वही  सांस्कृतिक, धार्मिक और आध्यात्मिक स्थानों में, पानी का तात्पर्य  सृजन, समुदाय और स्वयं के साथ संबंध हो सकता है। प्राकृतिक स्थानों में, पानी का मतलब शांति, सद्भाव  और संरक्षण हो सकता है। आज, बढ़ती आबादी के कारण  कृषि और उद्योग की बढ़ती मांगों और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से पानी अत्यधिक खतरे में है।

गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग का आयोजन 

Submitted by Shivendra on Sat, 07/17/2021 - 12:48
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गंगा की अविरलता और निर्मलता को स्थापित करने के लिये वर्चुअल मीटिंग
स्वामी सांनद  के जन्मदिन 20 जुलाई को जूम पर एक वर्चुअल बैठक का आयोजन शाम 4:00 बजे से 6:00 बजे तक किया जा रहा है।

मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार

Submitted by Shivendra on Thu, 06/10/2021 - 12:03
media-dialogue-:jalvayu-sankat-or-bihar
मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।

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