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खासम-खास

समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

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सरकारी योजनाएं भी नहीं बुझा सकीं बुंदेलखंड की प्यास

Submitted by HindiWater on Tue, 07/16/2019 - 17:17
Source
बुदेलखंड कनेक्ट जून 2019

सरकारी योजनाएं भी नहीं बुझा सकीं बुंदेलखंड की प्यास।सरकारी योजनाएं भी नहीं बुझा सकीं बुंदेलखंड की प्यास।

बुंदेलखंड में साल दर साल पेयजल संकट बढ़ता जा रहा है। इसकी ताजा बानगी अप्रैल-मई 2019 में बांदा में देखने को मिली। शहर की ज्यादातर पेयजल योजनाएं धड़ाम हो जाने से शहर के लोग प्यास से बिलख उठे। पानी के लिए आन्दोलन होने लगे, प्रदर्शन हुए और शासन प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया गया, फिर भी समस्या नहीं सुधरी। जल संकट क्यों बढ़ रहा है ? इस दिशा में सोचने और शुरू की गई पेयजल योजनाओं को सुचारु बनाने के लिए खास कदम नहीं उठाए गये।

गर्मी में भारत जैसा बन गया यूरोप

Submitted by HindiWater on Tue, 07/16/2019 - 15:49
Source
अमर उजाला, 14 जुलाई 2019
फ्रांस में गर्मी में तपती धूम में प्यास बुझाने के लिए पानी भरते लोग।फ्रांस में गर्मी में तपती धूम में प्यास बुझाने के लिए पानी भरते लोग। कल्पना कीजिए कि आप भारत की गर्मी से परेशान हो गए हैं। इससे बचने के लिए किसी पहाड़ी स्थान पर जाना चाहते हैं, लेकिन वहां भी बहुत गर्मी है। लगता है कि इससे अच्छा तो किसी ठंडे देश में ही चले जाते  और फिर आप स्वीटजरलैंड जैसे ही किसी देश की तरफ उड़ लेते है, लेकिन जब यहां आते हैं तो पाला पड़ता है, 38 और 40 डिग्री सेल्सियस के तापमान से। इसके अलावा पहाड़ी इलाकों की धूप भी बहुत तीखी होती है। पिछले कुछ दिनों से ऐसे नजारे मैंने हर जगह देखे हैं। फ्रांस में तो इतनी गर्मी थी कि सांस फूलती थी। खबरों के अनुसार वहां लोग गर्मी से बचने के ंलिए बीयर पीकर पानी में उतर जाते हैं और उनमें से बहुत से डूब जाते हैं। गर्मी से लड़ने के तरीके भी इन्हें मालूम नही हैं। इसलिए इन्हें लगता है कि अगर गर्मी से बचना है तो नंगे बदन रहा जाए। इस कारण डिहाइड्रेशन और तरह तरह के रोगों के शिकार भी होते हैं।

पृथ्वी की प्यास बुझाने को पुरुषार्थ जरूरी है

Submitted by HindiWater on Tue, 07/16/2019 - 12:32
Source
झंकार, दैनिक जागरण, 14 जुलाई 2019

पृथ्वी की प्यास बुझाने को पुरुषार्थ जरूरी है।पृथ्वी की प्यास बुझाने को पुरुषार्थ जरूरी है।

पृथ्वी प्रकृति के उत्पादों का ही दूसरा नाम है, मतलब पृथ्वी में उसका आवरण। पृथ्वी का इतिहास इस बात का साक्षी है कि जीवन की उत्पत्ति हवा, पानी, मिट्टी के कारण ही संभव हुई है। इसकी अन्य आवश्यकताओं का बोझ भी इन्हीं पर पड़ा है। अपने जीवन को प्रभु की कृपा मान लें या प्रकृति की, बात एक ही है। पृथ्वी की पहली शिक्षा इसको समझने की ही है, जिसको समझने में हम पूरी तरह चूक चुके हैं। शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी 84 लाख योनियों का स्थान भी है। मतलब इसमें पेड़, पौधों से लेकर वन्य जीव व हर तरह के जीव जुड़े हैं, इसलिए पृथ्वी को मां का दर्जा प्राप्त है। इसकी कृपा में इतने जीव पलते हैं,

प्रयास

पहली बार बिजली से रोशन हुआ गांव, ग्रामीणों को मिला साफ पानी

Submitted by HindiWater on Thu, 07/11/2019 - 16:56
राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां।राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां। आज देश में जहां एक ओर शहरों को ‘‘स्मार्ट सिटी’’ और गांवों को ‘‘स्मार्ट गांव’’ बनाया जा रहा है, तो वहीं देश के करीब एक लाख गांव विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। यहां लोगों के पास जीवनयापन तक के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। ये लोग पीने के पानी से लेकर भोजन और बिजली तक के लिए मोहताज हैं। रोजगार के अभाव में बच्चें शिक्षा से वंचित हैं। नेता और मंत्री तो दूर गांव में अभी सड़क तक नहीं पहुंची है। पेयजल की पर्याप्त सुविधा न होने के कारण कई गांवों के लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। विकास की पहुंच से दूर होने के कारण कोई इस गांव में शादी नहीं करता है, जिस कारण गांव में आखिरी शादी 22 साल पहले हुई थी। इन एक लाख गांवों पर न तो कभी दिल्ली के वातानुकुलित दफ्तरों में बैठकर योजनाएं तैयार करने वाली सरकार की नजर गई और न ही लाखों रुपये वेतन लेने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
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दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

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सरकारी योजनाएं भी नहीं बुझा सकीं बुंदेलखंड की प्यास

Submitted by HindiWater on Tue, 07/16/2019 - 17:17
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बुदेलखंड कनेक्ट जून 2019

सरकारी योजनाएं भी नहीं बुझा सकीं बुंदेलखंड की प्यास।सरकारी योजनाएं भी नहीं बुझा सकीं बुंदेलखंड की प्यास।

बुंदेलखंड में साल दर साल पेयजल संकट बढ़ता जा रहा है। इसकी ताजा बानगी अप्रैल-मई 2019 में बांदा में देखने को मिली। शहर की ज्यादातर पेयजल योजनाएं धड़ाम हो जाने से शहर के लोग प्यास से बिलख उठे। पानी के लिए आन्दोलन होने लगे, प्रदर्शन हुए और शासन प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया गया, फिर भी समस्या नहीं सुधरी। जल संकट क्यों बढ़ रहा है ? इस दिशा में सोचने और शुरू की गई पेयजल योजनाओं को सुचारु बनाने के लिए खास कदम नहीं उठाए गये।

गर्मी में भारत जैसा बन गया यूरोप

Submitted by HindiWater on Tue, 07/16/2019 - 15:49
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अमर उजाला, 14 जुलाई 2019
फ्रांस में गर्मी में तपती धूम में प्यास बुझाने के लिए पानी भरते लोग।फ्रांस में गर्मी में तपती धूम में प्यास बुझाने के लिए पानी भरते लोग। कल्पना कीजिए कि आप भारत की गर्मी से परेशान हो गए हैं। इससे बचने के लिए किसी पहाड़ी स्थान पर जाना चाहते हैं, लेकिन वहां भी बहुत गर्मी है। लगता है कि इससे अच्छा तो किसी ठंडे देश में ही चले जाते  और फिर आप स्वीटजरलैंड जैसे ही किसी देश की तरफ उड़ लेते है, लेकिन जब यहां आते हैं तो पाला पड़ता है, 38 और 40 डिग्री सेल्सियस के तापमान से। इसके अलावा पहाड़ी इलाकों की धूप भी बहुत तीखी होती है। पिछले कुछ दिनों से ऐसे नजारे मैंने हर जगह देखे हैं। फ्रांस में तो इतनी गर्मी थी कि सांस फूलती थी। खबरों के अनुसार वहां लोग गर्मी से बचने के ंलिए बीयर पीकर पानी में उतर जाते हैं और उनमें से बहुत से डूब जाते हैं। गर्मी से लड़ने के तरीके भी इन्हें मालूम नही हैं। इसलिए इन्हें लगता है कि अगर गर्मी से बचना है तो नंगे बदन रहा जाए। इस कारण डिहाइड्रेशन और तरह तरह के रोगों के शिकार भी होते हैं।

पृथ्वी की प्यास बुझाने को पुरुषार्थ जरूरी है

Submitted by HindiWater on Tue, 07/16/2019 - 12:32
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झंकार, दैनिक जागरण, 14 जुलाई 2019

पृथ्वी की प्यास बुझाने को पुरुषार्थ जरूरी है।पृथ्वी की प्यास बुझाने को पुरुषार्थ जरूरी है।

पृथ्वी प्रकृति के उत्पादों का ही दूसरा नाम है, मतलब पृथ्वी में उसका आवरण। पृथ्वी का इतिहास इस बात का साक्षी है कि जीवन की उत्पत्ति हवा, पानी, मिट्टी के कारण ही संभव हुई है। इसकी अन्य आवश्यकताओं का बोझ भी इन्हीं पर पड़ा है। अपने जीवन को प्रभु की कृपा मान लें या प्रकृति की, बात एक ही है। पृथ्वी की पहली शिक्षा इसको समझने की ही है, जिसको समझने में हम पूरी तरह चूक चुके हैं। शास्त्रों के अनुसार पृथ्वी 84 लाख योनियों का स्थान भी है। मतलब इसमें पेड़, पौधों से लेकर वन्य जीव व हर तरह के जीव जुड़े हैं, इसलिए पृथ्वी को मां का दर्जा प्राप्त है। इसकी कृपा में इतने जीव पलते हैं,

प्रयास

पहली बार बिजली से रोशन हुआ गांव, ग्रामीणों को मिला साफ पानी

Submitted by HindiWater on Thu, 07/11/2019 - 16:56
राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां।राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां। आज देश में जहां एक ओर शहरों को ‘‘स्मार्ट सिटी’’ और गांवों को ‘‘स्मार्ट गांव’’ बनाया जा रहा है, तो वहीं देश के करीब एक लाख गांव विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। यहां लोगों के पास जीवनयापन तक के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। ये लोग पीने के पानी से लेकर भोजन और बिजली तक के लिए मोहताज हैं। रोजगार के अभाव में बच्चें शिक्षा से वंचित हैं। नेता और मंत्री तो दूर गांव में अभी सड़क तक नहीं पहुंची है। पेयजल की पर्याप्त सुविधा न होने के कारण कई गांवों के लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। विकास की पहुंच से दूर होने के कारण कोई इस गांव में शादी नहीं करता है, जिस कारण गांव में आखिरी शादी 22 साल पहले हुई थी। इन एक लाख गांवों पर न तो कभी दिल्ली के वातानुकुलित दफ्तरों में बैठकर योजनाएं तैयार करने वाली सरकार की नजर गई और न ही लाखों रुपये वेतन लेने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
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दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
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दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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