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Submitted by UrbanWater on Thu, 05/13/2021 - 10:25
हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

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Submitted by HindiWater on Wed, 06/16/2021 - 14:24
Source:
पीएमओ इंडिया
भारत 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर बंजर भूमि को बहाल करेगा: पीएम मोदी
भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भूमि-क्षरण के मुद्दों को उजागर करने का बीड़ा उठाया है और यह बताया कि 2019 के "दिल्ली घोषणापत्र" ने भूमि पर बेहतर पहुंच और प्रबंधन का आह्वान किया और लिंग-संवेदनशील परिवर्तनकारी परियोजनाओं पर जोर दिया।प्रधान मंत्री ने कहा, "भारत में, पिछले 10 वर्षों में, लगभग 30 लाख (30 लाख) हेक्टेयर वन क्षेत्र जोड़ा गया है।
Submitted by HindiWater on Sat, 06/12/2021 - 13:50
Source:
मार्गदर्शी निर्देश: एक लोकतांत्रिक अवसर
पानी कनेक्शन देना, मीटर की जांच करना, टूट-फूट की मरम्मत, 24 घण्टे जलापूर्ति, एवज् में मासिक शुल्क तय करने से लेकर संग्रह करने तक की जिम्मेदारी पंचायतों को निभानी है। सरपंच को देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पानी समिति चयन में सहयोग, प्रशासन-पंचायत के बीच समन्वय, रिकाॅर्ड रखने तथा ग्राम सभा बैठक बुलाने की जिम्मेदारी पंचायत सचिव की है। जल ग्रामसभा का प्रावधान किया गया है। पानी प्रबंधन की ग्राम कार्य योजना के संबंध में अंतिम निर्णय देने का अधिकार, ग्रामसभा का है।
Submitted by HindiWater on Sat, 06/12/2021 - 12:21
Source:
 जल प्रबंधन
 जल प्रबंधन: समग्रता के संकल्प सूत्र
जलवायु परिवर्तन के संकेत सावधान कर रहे हैं कि यदि समय रहते नहीं चेता गया तो परम्परागत खेती बचेगी नहीं। यदि हमारा इलाका बाढ़ क्षेत्र से सुखाड़ क्षेत्र होने की ओर अग्रसर है, तो भी धान, गन्ने जैसी फसलों को सिर्फ इसलिए बोते जाना कि परम्परा से हम इन्हे ही बो रहे हैं; क्या समझदारी होगी ? आवश्यक है कि जल और वायु बदल रहें हैं तो कृषि चक्र, बीजों के चुनाव और सिंचाई के तौर-तरीके भी बदलें। रासायनिक उर्वरकों, खर-पतवार व कीटनाशकों ने पानी की गुणवत्ता की गारण्टी छीन ली है। प्राकृतिक खेती की ओर लौटे बगै़र यह गारण्टी हमेशा असंभव ही रहने वाली है। अतः स्थानीय भूगोल तथा जलवायु अनुकूल बीजों, प्रजातियों, तौर-तरीकों व खान-पान को प्राथमिकता देकर अपनाएं। धरती सिर्फ ज़रूरत पूर्ति के लिए है। अतः सिर्फ अजीविका चलाने वाली कृषि हो। अधिक धन की मांग करने वाले ग्रामीण सपनों की पूर्ति के लिए उपलब्ध ग्राम्य उत्पाद, शिल्प व कौशल आधारित आय मार्ग प्रशस्त करने पर ध्यान दिया जाए। 

प्रयास

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

Submitted by HindiWater on Thu, 06/10/2021 - 12:03
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मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।
Submitted by HindiWater on Wed, 04/21/2021 - 14:24
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विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे ।
Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
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वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।

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खासम-खास

हिन्दुकुश हिमालय पर्वतमाला: दी थर्ड पोल

Submitted by UrbanWater on Thu, 05/13/2021 - 10:25

कृष्ण गोपाल 'व्यास'

हिन्दुकुश हिमालय, फोटो - इंडिया साइंस वायर

तिब्बत के पठार तथा लगभग 3500 किलोमीटर लम्बी हिन्दुकुश हिमालय पर्वत श्रृंखला, संयुक्त रूप से, उत्तर ध्रुव और दक्षिण ध्रुव के बाद, दुनिया का स्वच्छ जल का सबसे बड़ा स्रोत है। ध्रुवों की तर्ज पर बर्फ का विशाल भंडार होने के कारण इस क्षेत्र को कुछ लोग तीसरा ध्रुव (The Third Pole) भी कहते हैं।

hindukush-himalaya-parvatamala-third-pole

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भारत 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर बंजर भूमि को बहाल करेगा: पीएम मोदी

Submitted by HindiWater on Wed, 06/16/2021 - 14:24
bharat-2030-tak-2.6-karod-hectare-banjar-bhoomi-ko-bahal-karega:-pm-modi
Source
पीएमओ इंडिया
भारत 2030 तक 2.6 करोड़ हेक्टेयर बंजर भूमि को बहाल करेगा: पीएम मोदी
भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भूमि-क्षरण के मुद्दों को उजागर करने का बीड़ा उठाया है और यह बताया कि 2019 के "दिल्ली घोषणापत्र" ने भूमि पर बेहतर पहुंच और प्रबंधन का आह्वान किया और लिंग-संवेदनशील परिवर्तनकारी परियोजनाओं पर जोर दिया।प्रधान मंत्री ने कहा, "भारत में, पिछले 10 वर्षों में, लगभग 30 लाख (30 लाख) हेक्टेयर वन क्षेत्र जोड़ा गया है।

मार्गदर्शी निर्देश: एक लोकतांत्रिक अवसर

Submitted by HindiWater on Sat, 06/12/2021 - 13:50
Author
अरुण तिवारी
margadarshi-nirdesh:-ek-loktantrik-avasar
मार्गदर्शी निर्देश: एक लोकतांत्रिक अवसर
पानी कनेक्शन देना, मीटर की जांच करना, टूट-फूट की मरम्मत, 24 घण्टे जलापूर्ति, एवज् में मासिक शुल्क तय करने से लेकर संग्रह करने तक की जिम्मेदारी पंचायतों को निभानी है। सरपंच को देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पानी समिति चयन में सहयोग, प्रशासन-पंचायत के बीच समन्वय, रिकाॅर्ड रखने तथा ग्राम सभा बैठक बुलाने की जिम्मेदारी पंचायत सचिव की है। जल ग्रामसभा का प्रावधान किया गया है। पानी प्रबंधन की ग्राम कार्य योजना के संबंध में अंतिम निर्णय देने का अधिकार, ग्रामसभा का है।

 जल प्रबंधन: समग्रता के संकल्प सूत्र

Submitted by HindiWater on Sat, 06/12/2021 - 12:21
Author
अरुण तिवारी
jal-prabandhan:-samagrata-k-sankalp-sutra
Source
 जल प्रबंधन
 जल प्रबंधन: समग्रता के संकल्प सूत्र
जलवायु परिवर्तन के संकेत सावधान कर रहे हैं कि यदि समय रहते नहीं चेता गया तो परम्परागत खेती बचेगी नहीं। यदि हमारा इलाका बाढ़ क्षेत्र से सुखाड़ क्षेत्र होने की ओर अग्रसर है, तो भी धान, गन्ने जैसी फसलों को सिर्फ इसलिए बोते जाना कि परम्परा से हम इन्हे ही बो रहे हैं; क्या समझदारी होगी ? आवश्यक है कि जल और वायु बदल रहें हैं तो कृषि चक्र, बीजों के चुनाव और सिंचाई के तौर-तरीके भी बदलें। रासायनिक उर्वरकों, खर-पतवार व कीटनाशकों ने पानी की गुणवत्ता की गारण्टी छीन ली है। प्राकृतिक खेती की ओर लौटे बगै़र यह गारण्टी हमेशा असंभव ही रहने वाली है। अतः स्थानीय भूगोल तथा जलवायु अनुकूल बीजों, प्रजातियों, तौर-तरीकों व खान-पान को प्राथमिकता देकर अपनाएं। धरती सिर्फ ज़रूरत पूर्ति के लिए है। अतः सिर्फ अजीविका चलाने वाली कृषि हो। अधिक धन की मांग करने वाले ग्रामीण सपनों की पूर्ति के लिए उपलब्ध ग्राम्य उत्पाद, शिल्प व कौशल आधारित आय मार्ग प्रशस्त करने पर ध्यान दिया जाए। 

प्रयास

उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा

Submitted by HindiWater on Mon, 02/15/2021 - 16:21
uttarakhand-jal-sankat-:-chhote-prayas-sey-bada-samadhan-nikalega
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चरखा फीचर
उत्तराखंड जल संकट : छोटे प्रयास से बड़ा समाधान निकलेगा
उत्तराखंड में 2013 में आई आपदा और फिर 7 फरवरी को चमोली के तपोवन में आई जलप्रलय की घटनाएँ पूरी दुनिया को बड़े बांधों के निर्माण और पर्यावरण असंतुलन से होने वालेदुष्परिणामों से आगाह कर रही है। यह बड़े बांध स्थानीय जनता को न तो सिंचाई और न ही पेयजल की पूर्ति करते हैं बल्कि इसके विपरीत प्राकृतिक रूप से संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों के लिएगंभीर खतरा उत्पन्न करते हैं। बड़े बांधों में बहुत अधिक जलराशि एकत्रित होने से पहाड़ों परअत्यधिक दबाव पड़ता है। इसके निर्माण के दौरान भारी मशीनरी और विस्फोटकों आदि काप्रयोग होता है, जो पहाड़ों की नींव को भी हिला देते हैं, जिससे पहाड़ों में भूस्खलन, भूकंप आदिकी संभावनाएं भी बढ़ जाती हैं। चूँकि बड़े बांधों को भरने के लिए नदियों का प्रवाह रोकना पड़ताहै, इसलिए नदी के पानी से जो नैसर्गिक भूमिगत जलसंचय होता है, उसमें भी व्यवधान पड़ता है। 

नोटिस बोर्ड

मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार

Submitted by HindiWater on Thu, 06/10/2021 - 12:03
media-dialogue-:jalvayu-sankat-or-bihar
मीडिया डायलॉग:जलवायु संकट और बिहार
जलवायु संकट से लगातार जूझ रहे बिहार को नीति आयोग ने अच्छी रैंकिंग नहीं दी है। इससे पहले भी आईआईटी की एक रिपोर्ट ने बिहार के 14 जिलों को जलवायु परिवर्तन के संकट से मुकाबला करने में सबसे अक्षम जिलों की सूची में रखा है। बिहार सरकार के तमाम दावों के बावजूद जलवायु संकट को लेकर उसकी तैयारी जमीन पर क्यों उतरती नजर नहीं आ रही।

विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता

Submitted by HindiWater on Wed, 04/21/2021 - 14:24
vishva-prithvi-divas-2021:corona-sankat-k-beach-paryavaraniya-chinta
 विश्व पृथ्वी दिवस 2021:कोरोना संकट के बीच पर्यवरणीय चिंता
आजकल विभिन्न क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता में भिन्नता दिखाई दे रही है। बाढ़ और सुखाड़ पहले से अधिक बारबार होने लगे है,पहले से अधिक तबाही लाने लगे है ऐसे में जरूरी है जलवायू परिवर्तन के प्रभावों के मद्देनजर जल साधानो के प्रबंधन की रणनीति और तरीकों में बदलाव पर विचार करे ।

विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल

Submitted by HindiWater on Thu, 01/21/2021 - 15:14
vishva-vetlands-divas-2021:-vetlands-aur-jal
Source
वेटलैंड्स डे इंटरनेशनल साउथ एशिया
विश्व वेटलैंड्स दिवस 2021: वेटलैंड्स और जल
रामसर कन्वेन्शन में वेटलैंड्स को शामिल किए जाने पर  हर वर्ष की तरह इस बार भी 02 फरवरी 2021 को भारत सहित पूरे विश्व मे वेटलैंड्स डे मनाया जाएगा।  इस दिन को मनाए जाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को वेटलैंड्स डे के प्रति जागरूक करना है। इस वर्ष विश्व वेटलैंड्स दिवस का विषय "वेटलैंड्स और जल " (Wetlands and water) है।

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