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खासम-खास

Submitted by HindiWater on Sat, 04/04/2020 - 08:58
नदियों के सूखने का कारण
बीसवीं सदी के पहले कालखंड तक भारत की अधिकांश नदियाँ बारहमासी थीं। उस दौरान यदि कोई नदी सूखती थी तो वह सूखना अपवाद स्वरूप था। पिछले 50-60 सालों से भारत की सभी नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह में गंभीर कमी आ रही है।

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Submitted by admin on Fri, 09/11/2009 - 21:37
Source:

अब से लगभग 25 साल पहले तक भीषणतम अकाल में भी सघन वनों से आच्छादित और पानी से लबालब रहने वाला उदयपुर के समीप स्थित राजसमन्द क्षेत्र पिछले आठ साल से पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रहा है। इस बार राज्य में औसत से अधिक वर्षा के बावजूद यह जिला इस समय राज्य का सर्वाधिक पेयजल संकट वाला जिला है।
Submitted by admin on Fri, 09/11/2009 - 21:15
Source:
हिमांशु ठक्कर


बरसात के मौसम में बाढ़ आना कोई नई बात नहीं है, सो इस वर्ष भी बाढ़ आई। लोगों के खेत-खलिहान, घर, दुकानें डूबीं और सरकार ने राहत की रस्म भी निभाई। लेकिन इस सारे घटनाक्रम में लोग यह जान नहीं पाए कि कौन सी बाढ़ प्रकृति की मार है और कौन है मानव की लापरवाही का नतीजा।

Submitted by admin on Thu, 09/10/2009 - 20:26
Source:
सुरेन्द्र बंसल / गांधी मार्ग

पांच नदियों के नाम पर बसे पंजाब में आज उन नदियों की बात करना पिछड़ा कहलाना होगा। पंजाब की मिट्टी, पंजाब का पशुधन, पंजाब का पानी, पंजाब के परिंदों का दिन दूनी-रात चौगुनी गति से गायब होना जितने माथों की शिकन होना चाहिए था, जितने दिलों की उदासी होना चाहिए था, उतना है नहीं। ऋषियों, गुरूओं, संतों द्वारा प्राकृतिक संपदाओं के गुणगान, लोकगीतों में बहारों की धमक, किसी प्रिय के आगमन के लिए परिंदों को छतों की मुडेरों पर बुलावे मानो छलावे थे। इन्हीं रसभरी परंपराओं वाले पंजाब को लंदन-पेरिस बनाने पर तुले हैं नए विकास पुरूष।

प्रयास

Submitted by HindiWater on Mon, 03/23/2020 - 16:18
कश्मीर के चश्मों की पहचान बचा रहे रिफत
वादी -ए-कश्मीर में चश्मे जो कभी पहचान थे आज वे लुप्त होने की कगार पर हैं, लेकिन इन्हें बचाने के लिये नए कश्मीर के नौजवान आग आए हैं। इनमें पर्यावरण संरक्षक रिफत अब्दुल्ला हैं। मदर टेरेसा अवार्ड से सम्मानित रिफत ने घाटी के जल स्रोतों को बचाने के लिये अभियान छेड़ रखा है। इनमें उनके कुछ दोस्त और स्थानीय लोग मदद कर रहे हैं।

नोटिस बोर्ड

Submitted by UrbanWater on Thu, 04/02/2020 - 16:31
Source:
कोविड-19 और तनाव मुक्ति के लिये नोलेज सत्र
ECHO India और NIMHANs के साथ कोविड-19 (COVID-19) पर एक ऑनलाइन ज्ञान सत्र का आयोजन किया जा रहा है। यह इंटरैक्शन एनजीओ और उनके कर्मचारियों पर केंद्रित है और उम्मीद करते हैं कि इससे लॉकडाउन के दौरान उत्पन्न हुए तनाव से कर्मचारियों को बेहतर तरीके से निपटने में मदद मिलेगी।
Submitted by HindiWater on Mon, 03/30/2020 - 07:47
Source:
स्वामी शिवानंद और साध्वी पद्मावती का अनशन समाप्त
गंगा की अविरलता के लिए अनशन कर रहे मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने अनशन को विराम दे दिया है। कोरोना के संकट के बीच देशभर के गंगा प्रेमियों के अनुरोध पर उन्होंने ये निर्णय लिया है। वहीं उन्होंने साध्वी पद्मावती का अनशन समाप्त करने की भी घोषणा की है।
Submitted by HindiWater on Fri, 03/06/2020 - 13:46
Source:
द्वाराहाट में होगा "नौला मंथन कुंभ"
नौला फाउंडेशन इंडिया सेव वाटर सिविल सोसाइटी द्वारा हिमालयन डिक्लेरेशन ऑफ स्प्रिंगशेड रेजुवेनेशन के तहत हितधारक सामुदायिक सहभागिता से उत्तराखंड में सभी पारंपरिक जल स्रोतों जैसे नौले धारे के संरक्षण और उनके पुनर्जीवित करने के लिए हितकारक सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रम ‘‘पहाड़-पानी-परंपरा’’ की ऐतिहासिक नींव रखी है। इसी क्रम में बिपिन त्रिपाठी कुमाऊं प्रौद्योगिकी संस्थान, द्वाराहाट में विश्व जल दिवस के अवसर पर 21 मार्च को नौला मंथन महाकुंभ का आयोजन किया जाएगा। नौलों के संरक्षण के लिए कार्यक्रम में शामिल होने और अपने विचार रखने के लिए आप स्वतंत्र हैं। 

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खासम-खास

नदियों के सूखने का कारण

Submitted by HindiWater on Sat, 04/04/2020 - 08:58
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
नदियों के सूखने का कारण
बीसवीं सदी के पहले कालखंड तक भारत की अधिकांश नदियाँ बारहमासी थीं। उस दौरान यदि कोई नदी सूखती थी तो वह सूखना अपवाद स्वरूप था। पिछले 50-60 सालों से भारत की सभी नदियों के गैर-मानसूनी प्रवाह में गंभीर कमी आ रही है।

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राजसमन्द का पानी?

Submitted by admin on Fri, 09/11/2009 - 21:37

अब से लगभग 25 साल पहले तक भीषणतम अकाल में भी सघन वनों से आच्छादित और पानी से लबालब रहने वाला उदयपुर के समीप स्थित राजसमन्द क्षेत्र पिछले आठ साल से पानी के लिए त्राहि-त्राहि कर रहा है। इस बार राज्य में औसत से अधिक वर्षा के बावजूद यह जिला इस समय राज्य का सर्वाधिक पेयजल संकट वाला जिला है।

मानव निर्मित बांध, मानव निर्मित बाढ़

Submitted by admin on Fri, 09/11/2009 - 21:15
Source
हिमांशु ठक्कर


बरसात के मौसम में बाढ़ आना कोई नई बात नहीं है, सो इस वर्ष भी बाढ़ आई। लोगों के खेत-खलिहान, घर, दुकानें डूबीं और सरकार ने राहत की रस्म भी निभाई। लेकिन इस सारे घटनाक्रम में लोग यह जान नहीं पाए कि कौन सी बाढ़ प्रकृति की मार है और कौन है मानव की लापरवाही का नतीजा।

पंजाब: सब्मर्सिबलों की शर-शय्या पर

Submitted by admin on Thu, 09/10/2009 - 20:26
Source
सुरेन्द्र बंसल / गांधी मार्ग

पांच नदियों के नाम पर बसे पंजाब में आज उन नदियों की बात करना पिछड़ा कहलाना होगा। पंजाब की मिट्टी, पंजाब का पशुधन, पंजाब का पानी, पंजाब के परिंदों का दिन दूनी-रात चौगुनी गति से गायब होना जितने माथों की शिकन होना चाहिए था, जितने दिलों की उदासी होना चाहिए था, उतना है नहीं। ऋषियों, गुरूओं, संतों द्वारा प्राकृतिक संपदाओं के गुणगान, लोकगीतों में बहारों की धमक, किसी प्रिय के आगमन के लिए परिंदों को छतों की मुडेरों पर बुलावे मानो छलावे थे। इन्हीं रसभरी परंपराओं वाले पंजाब को लंदन-पेरिस बनाने पर तुले हैं नए विकास पुरूष।

प्रयास

कश्मीर के चश्मों की पहचान बचा रहे रिफत

Submitted by HindiWater on Mon, 03/23/2020 - 16:18
Source
दैनिक जागरण, 23 मार्च 2020
कश्मीर के चश्मों की पहचान बचा रहे रिफत
वादी -ए-कश्मीर में चश्मे जो कभी पहचान थे आज वे लुप्त होने की कगार पर हैं, लेकिन इन्हें बचाने के लिये नए कश्मीर के नौजवान आग आए हैं। इनमें पर्यावरण संरक्षक रिफत अब्दुल्ला हैं। मदर टेरेसा अवार्ड से सम्मानित रिफत ने घाटी के जल स्रोतों को बचाने के लिये अभियान छेड़ रखा है। इनमें उनके कुछ दोस्त और स्थानीय लोग मदद कर रहे हैं।

नोटिस बोर्ड

कोविड-19 और तनाव मुक्ति के लिये नोलेज सत्र

Submitted by UrbanWater on Thu, 04/02/2020 - 16:31
कोविड-19 और तनाव मुक्ति के लिये नोलेज सत्र
ECHO India और NIMHANs के साथ कोविड-19 (COVID-19) पर एक ऑनलाइन ज्ञान सत्र का आयोजन किया जा रहा है। यह इंटरैक्शन एनजीओ और उनके कर्मचारियों पर केंद्रित है और उम्मीद करते हैं कि इससे लॉकडाउन के दौरान उत्पन्न हुए तनाव से कर्मचारियों को बेहतर तरीके से निपटने में मदद मिलेगी।

स्वामी शिवानंद और साध्वी पद्मावती का अनशन समाप्त

Submitted by HindiWater on Mon, 03/30/2020 - 07:47
स्वामी शिवानंद और साध्वी पद्मावती का अनशन समाप्त
गंगा की अविरलता के लिए अनशन कर रहे मातृसदन के परमाध्यक्ष स्वामी शिवानंद सरस्वती ने अनशन को विराम दे दिया है। कोरोना के संकट के बीच देशभर के गंगा प्रेमियों के अनुरोध पर उन्होंने ये निर्णय लिया है। वहीं उन्होंने साध्वी पद्मावती का अनशन समाप्त करने की भी घोषणा की है।

द्वाराहाट में होगा "नौला मंथन कुंभ"

Submitted by HindiWater on Fri, 03/06/2020 - 13:46
द्वाराहाट में होगा "नौला मंथन कुंभ"
नौला फाउंडेशन इंडिया सेव वाटर सिविल सोसाइटी द्वारा हिमालयन डिक्लेरेशन ऑफ स्प्रिंगशेड रेजुवेनेशन के तहत हितधारक सामुदायिक सहभागिता से उत्तराखंड में सभी पारंपरिक जल स्रोतों जैसे नौले धारे के संरक्षण और उनके पुनर्जीवित करने के लिए हितकारक सामुदायिक सहभागिता कार्यक्रम ‘‘पहाड़-पानी-परंपरा’’ की ऐतिहासिक नींव रखी है। इसी क्रम में बिपिन त्रिपाठी कुमाऊं प्रौद्योगिकी संस्थान, द्वाराहाट में विश्व जल दिवस के अवसर पर 21 मार्च को नौला मंथन महाकुंभ का आयोजन किया जाएगा। नौलों के संरक्षण के लिए कार्यक्रम में शामिल होने और अपने विचार रखने के लिए आप स्वतंत्र हैं। 

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