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खासम-खास

समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

Content

हिमालयन काॅन्क्लेव: सनद रहे कि हिमालय संसाधन नहीं है 

Submitted by HindiWater on Mon, 07/29/2019 - 09:24
हिमालयन काॅन्क्लेव: सनद रहे कि हिमालय संसाधन नहीं है ।हिमालयन काॅन्क्लेव: सनद रहे कि हिमालय संसाधन नहीं है। पता नहीं यह कितना सच है कि हमारे हिमालयी राज्य सालाना तकरीबन 94 हजार 500 करोड़ मूल्य की पर्यावरणीय सेवायें दे रहे हैं। पिछले काफी समय से लगातार यह सुनने पढ़ने में आ रहा है कि हिमालयी राज्यों के जंगल इतनी रकम का कार्बन उत्सर्जन करते हैं, मतलब पर्यावरण में कार्बन के प्रभाव को कम करते है। इसी आंकड़े को आधार बनाकर हिमालयी राज्य केंद्र से ग्रीन बोनस की मांग भी कर रहे हैं या यूं कहें कि हिमालय राज्यों की सरकारें पर्यावरण व पारिस्थतिकी सरंक्षण के एवज में ईनाम मांग रहे हैं। हालांकि ईनाम के तौर पर रायल्टी या बोनस की यह मांग कोई नयी नहीं है।

मस्जिदों में बचेगा 18 करोड़ लीटर पानी

Submitted by HindiWater on Mon, 07/29/2019 - 08:14
मस्जिदों में बचेगा 18 करोड़ लीटर पानी।मस्जिदों में बचेगा 18 करोड़ लीटर पानी। इंदौर पहले ही पानी की बड़ी किल्लत से जूझ रहा है। इंदौर शहर जीरो वाटर जोन की तरफ भी तेजी से बढ़ रहा है। जिसके लिए मध्य प्रदेश सरकार ग्रे-वाटर कानून को सख्ती से लागू करने जा रही है। कानून के अंतर्गत काॅलोनी, टाउनशिप और इमारत बनाने वालो को किचन की पाइप लाइन अलग से डालनी होगी। इस पानी को ट्रीटमेंट के बाद वापस घरों में उपयोग किया जाएगा, जहां इसे टाॅयलेट और अन्यों कामों में उपयोग किया जाएगा। इसलिए इंदौर के मस्जिदों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना जल संरक्षण की दृष्टि से काफी सकारात्मक निर्णय है। दरअसल इंदौर में करीब 300 मस्जिदे हैं। हर मस्जिद में 200 लोग रोजाना दो वक्त की नमाज पढ़ने जाते हैं। वजू के लिए हर वक्त एक व्यक्ति को करीब पांच लीटर पानी की आवश्यकता पड़ती है।

पर्यावरण को बचाने के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी

Submitted by HindiWater on Sat, 07/27/2019 - 16:16
Source
हरिभूमि 5 जून 2019
पर्यावरण को बचाने के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी।पर्यावरण को बचाने के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी। तपती धरती बढ़ते संकट, खत्म होते जंगल और हवा में घुलते प्रदूषण के जहर से शिकायत तो सभी को है पर पर्यावरण के बिगड़ते हालातों के प्रति जिम्मेदारी का अहसास सरकारी अमले में ही नहीं आमजन में भी कम ही दिखता है। जबकि पर्यावरण का मुद्दा समग्र समुदाय से जुड़ा मुद्दा है। उचित योजनाओं के साथ-साथ धरती पर उपलब्ध संसाधनों का संयमित उपभोग और सही जीवनशैली ही इस व्यापक विषय को प्रभावी रूप से सम्बोधित कर सकती है। यहाँ तक कि पर्यावरण संरक्षण की सरकारी या गैर सरकारी पहल भी तभी कारगर हो सकती है

प्रयास

कार मैकेनिक से बना पर्यावरण प्रेमी, खेत में 300 से ज्यादा मोरों का बसेरा

Submitted by HindiWater on Tue, 08/20/2019 - 15:54
हिम्मताराम भांबू।हिम्मताराम भांबू। हिम्मताराम भांबू राजस्थान के नागौर जिले के रहने वाले हैं। नागौर जिला पानी की उपलब्धता के हिसाब से डार्क जोन में होने से यहां के लोगों को भारी दिक्कतों को सामना करना पड़ता है। हिम्मताराम भांबू का बचपन इन्हीं परेशानियों से जूझते और कठिनाईयों से निबटने के उपायों को देखते हुए ही बीता था। खेती-किसानी के लिए हिम्मताराम को गांव में कक्षा 6 के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। पैसों की तंगी के कारण बचपन से ही मैकेनिक का काम शुरू कर दिया था और स्थानीय ट्रैक्टर मालिकों को पुर्जे खोलने और मरम्मत करने में सहायता करने लगे।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
Source
दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

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हिमालयन काॅन्क्लेव: सनद रहे कि हिमालय संसाधन नहीं है 

Submitted by HindiWater on Mon, 07/29/2019 - 09:24
हिमालयन काॅन्क्लेव: सनद रहे कि हिमालय संसाधन नहीं है ।हिमालयन काॅन्क्लेव: सनद रहे कि हिमालय संसाधन नहीं है। पता नहीं यह कितना सच है कि हमारे हिमालयी राज्य सालाना तकरीबन 94 हजार 500 करोड़ मूल्य की पर्यावरणीय सेवायें दे रहे हैं। पिछले काफी समय से लगातार यह सुनने पढ़ने में आ रहा है कि हिमालयी राज्यों के जंगल इतनी रकम का कार्बन उत्सर्जन करते हैं, मतलब पर्यावरण में कार्बन के प्रभाव को कम करते है। इसी आंकड़े को आधार बनाकर हिमालयी राज्य केंद्र से ग्रीन बोनस की मांग भी कर रहे हैं या यूं कहें कि हिमालय राज्यों की सरकारें पर्यावरण व पारिस्थतिकी सरंक्षण के एवज में ईनाम मांग रहे हैं। हालांकि ईनाम के तौर पर रायल्टी या बोनस की यह मांग कोई नयी नहीं है।

मस्जिदों में बचेगा 18 करोड़ लीटर पानी

Submitted by HindiWater on Mon, 07/29/2019 - 08:14
मस्जिदों में बचेगा 18 करोड़ लीटर पानी।मस्जिदों में बचेगा 18 करोड़ लीटर पानी। इंदौर पहले ही पानी की बड़ी किल्लत से जूझ रहा है। इंदौर शहर जीरो वाटर जोन की तरफ भी तेजी से बढ़ रहा है। जिसके लिए मध्य प्रदेश सरकार ग्रे-वाटर कानून को सख्ती से लागू करने जा रही है। कानून के अंतर्गत काॅलोनी, टाउनशिप और इमारत बनाने वालो को किचन की पाइप लाइन अलग से डालनी होगी। इस पानी को ट्रीटमेंट के बाद वापस घरों में उपयोग किया जाएगा, जहां इसे टाॅयलेट और अन्यों कामों में उपयोग किया जाएगा। इसलिए इंदौर के मस्जिदों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाना जल संरक्षण की दृष्टि से काफी सकारात्मक निर्णय है। दरअसल इंदौर में करीब 300 मस्जिदे हैं। हर मस्जिद में 200 लोग रोजाना दो वक्त की नमाज पढ़ने जाते हैं। वजू के लिए हर वक्त एक व्यक्ति को करीब पांच लीटर पानी की आवश्यकता पड़ती है।

पर्यावरण को बचाने के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी

Submitted by HindiWater on Sat, 07/27/2019 - 16:16
Source
हरिभूमि 5 जून 2019
पर्यावरण को बचाने के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी।पर्यावरण को बचाने के लिए जीवनशैली में बदलाव जरूरी। तपती धरती बढ़ते संकट, खत्म होते जंगल और हवा में घुलते प्रदूषण के जहर से शिकायत तो सभी को है पर पर्यावरण के बिगड़ते हालातों के प्रति जिम्मेदारी का अहसास सरकारी अमले में ही नहीं आमजन में भी कम ही दिखता है। जबकि पर्यावरण का मुद्दा समग्र समुदाय से जुड़ा मुद्दा है। उचित योजनाओं के साथ-साथ धरती पर उपलब्ध संसाधनों का संयमित उपभोग और सही जीवनशैली ही इस व्यापक विषय को प्रभावी रूप से सम्बोधित कर सकती है। यहाँ तक कि पर्यावरण संरक्षण की सरकारी या गैर सरकारी पहल भी तभी कारगर हो सकती है

प्रयास

कार मैकेनिक से बना पर्यावरण प्रेमी, खेत में 300 से ज्यादा मोरों का बसेरा

Submitted by HindiWater on Tue, 08/20/2019 - 15:54
हिम्मताराम भांबू।हिम्मताराम भांबू। हिम्मताराम भांबू राजस्थान के नागौर जिले के रहने वाले हैं। नागौर जिला पानी की उपलब्धता के हिसाब से डार्क जोन में होने से यहां के लोगों को भारी दिक्कतों को सामना करना पड़ता है। हिम्मताराम भांबू का बचपन इन्हीं परेशानियों से जूझते और कठिनाईयों से निबटने के उपायों को देखते हुए ही बीता था। खेती-किसानी के लिए हिम्मताराम को गांव में कक्षा 6 के बाद पढ़ाई छोड़नी पड़ी। पैसों की तंगी के कारण बचपन से ही मैकेनिक का काम शुरू कर दिया था और स्थानीय ट्रैक्टर मालिकों को पुर्जे खोलने और मरम्मत करने में सहायता करने लगे।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
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दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
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दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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