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खासम-खास

समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

Content

हमारी बेरुखी से जन्मी है पानी की समस्या

Submitted by HindiWater on Fri, 07/12/2019 - 12:21
Source
आई नेक्स्ट, 12 जुलाई 2019
हमारी बेरुखी से जन्मी है पानी की समस्या।हमारी बेरुखी से जन्मी है पानी की समस्या। विडंबना है कि मानसून के बादल घिरे होने के बावजूद देश में पानी सबसे बड़ी समस्या के रूप में उभर कर सामने आया है। इस संकट के शहरों और गाँवों में अलग-अलग रूप हैं। गाँवों में यह खेती और सिंचाई के सामने खड़े संकट के रूप में है, तो शहरों में पीने के पानी की किल्लत के रूप में। पेयजल की समस्या गांवों में भी है, पर चूंकि मीडिया शहरों पर केन्द्रित है, इसलिए शहरी समस्या ज्यादा भयावह रूप में सामने आ रही है। हम पेयजल के बारे में ही सुन रहे हैं, इसलिए खेती से जुड़े मसले सामने नहीं आ रहे हैं, जबकि इस समस्या का वास्तविक रूप इन दोनों को साथ रखकर ही समझा जा सकता है।

दूर होगी दिल्ली में पानी की समस्या

Submitted by HindiWater on Fri, 07/12/2019 - 11:05
Source
दैनिक जागरण, 12 जुलाई 2019 

दूर होगी दिल्ली की पानी की समस्या।दूर होगी दिल्ली की पानी की समस्या।

यमुना के फ्लड प्लेन (डूब) क्षेत्र में बाढ़ के पानी के संग्रहण के लिए किराये पर जमीन लेने की योजना को दिल्ली सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद किसानों से बातचीत शुरू कर दी गई है, ताकि किसानों से जमीन लेकर जल्दी उसमें छोटे-छोटे तालाब बनाए जा सकें। इस साल शुरुआत निःसंदेह छोटे स्तर पर होगी और 50 एकड़ में करीब 1575 मिलियन गेलन पानी का संग्रहण होगा, लेकिन जल बोर्ड द्वारा कराये गए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि यमुना रिवर बेड में जल संग्रहण की अपार क्षमता है। मानसून में एक दिन में यमुना में बाढ़ का जितना पानी आता है, यदि उसे संग्रहण कर लिया जाए तो दिल्ली में पूरे साल की पेयजल की जरूरतें पूरी हो जाएंगी। यही वजह है कि इस योजना पर दिल्ली सरकार व अन्य सरकारी एजेंसियां तेजी से अमल में जुटी हुई हैं।

बारिश की कमी से बुंदेलखंड का जीवन अस्त-व्यस्त

Submitted by UrbanWater on Thu, 07/11/2019 - 16:58
बुंदेलखंड में जल संकट गहराता जा रहा है।बुंदेलखंड में जल संकट गहराता जा रहा है। इसे कुदरत की विडंबना ही कहिए कि जो देश जल का सबसे बड़ा भंडार है वही देश आज जल संकट से जूझ रहा है। इस समय भारत में बिहार, गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट और चेन्नई जल संकट की कमी से जूझ रहा है। बुंदेलखंड जो हमेशा से सूखे के लिए जाना जाता था इस बार वहां के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। बच्चों को माता-पिता जबरदस्ती स्कूल जाने से रोक रहे हैं क्योंकि वे चाहते थे कि उनका बच्चा कुछ काम कराये और पैसा लाये। महिलाएं खेतों में काम कर रही हैं, पानी ढो रही हैं और आदमी नौकरी की खोज में अपने घर से दूर जा रहे हैं। ये सब हो रहा है सूखा और पानी की कमी वजह से।

प्रयास

पहली बार बिजली से रोशन हुआ गांव, ग्रामीणों को मिला साफ पानी

Submitted by HindiWater on Thu, 07/11/2019 - 16:56
राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां।राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां। आज देश में जहां एक ओर शहरों को ‘‘स्मार्ट सिटी’’ और गांवों को ‘‘स्मार्ट गांव’’ बनाया जा रहा है, तो वहीं देश के करीब एक लाख गांव विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। यहां लोगों के पास जीवनयापन तक के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। ये लोग पीने के पानी से लेकर भोजन और बिजली तक के लिए मोहताज हैं। रोजगार के अभाव में बच्चें शिक्षा से वंचित हैं। नेता और मंत्री तो दूर गांव में अभी सड़क तक नहीं पहुंची है। पेयजल की पर्याप्त सुविधा न होने के कारण कई गांवों के लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। विकास की पहुंच से दूर होने के कारण कोई इस गांव में शादी नहीं करता है, जिस कारण गांव में आखिरी शादी 22 साल पहले हुई थी। इन एक लाख गांवों पर न तो कभी दिल्ली के वातानुकुलित दफ्तरों में बैठकर योजनाएं तैयार करने वाली सरकार की नजर गई और न ही लाखों रुपये वेतन लेने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
Source
दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
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कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

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हमारी बेरुखी से जन्मी है पानी की समस्या

Submitted by HindiWater on Fri, 07/12/2019 - 12:21
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आई नेक्स्ट, 12 जुलाई 2019
हमारी बेरुखी से जन्मी है पानी की समस्या।हमारी बेरुखी से जन्मी है पानी की समस्या। विडंबना है कि मानसून के बादल घिरे होने के बावजूद देश में पानी सबसे बड़ी समस्या के रूप में उभर कर सामने आया है। इस संकट के शहरों और गाँवों में अलग-अलग रूप हैं। गाँवों में यह खेती और सिंचाई के सामने खड़े संकट के रूप में है, तो शहरों में पीने के पानी की किल्लत के रूप में। पेयजल की समस्या गांवों में भी है, पर चूंकि मीडिया शहरों पर केन्द्रित है, इसलिए शहरी समस्या ज्यादा भयावह रूप में सामने आ रही है। हम पेयजल के बारे में ही सुन रहे हैं, इसलिए खेती से जुड़े मसले सामने नहीं आ रहे हैं, जबकि इस समस्या का वास्तविक रूप इन दोनों को साथ रखकर ही समझा जा सकता है।

दूर होगी दिल्ली में पानी की समस्या

Submitted by HindiWater on Fri, 07/12/2019 - 11:05
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दैनिक जागरण, 12 जुलाई 2019 

दूर होगी दिल्ली की पानी की समस्या।दूर होगी दिल्ली की पानी की समस्या।

यमुना के फ्लड प्लेन (डूब) क्षेत्र में बाढ़ के पानी के संग्रहण के लिए किराये पर जमीन लेने की योजना को दिल्ली सरकार से स्वीकृति मिलने के बाद किसानों से बातचीत शुरू कर दी गई है, ताकि किसानों से जमीन लेकर जल्दी उसमें छोटे-छोटे तालाब बनाए जा सकें। इस साल शुरुआत निःसंदेह छोटे स्तर पर होगी और 50 एकड़ में करीब 1575 मिलियन गेलन पानी का संग्रहण होगा, लेकिन जल बोर्ड द्वारा कराये गए अध्ययन में यह बात सामने आई है कि यमुना रिवर बेड में जल संग्रहण की अपार क्षमता है। मानसून में एक दिन में यमुना में बाढ़ का जितना पानी आता है, यदि उसे संग्रहण कर लिया जाए तो दिल्ली में पूरे साल की पेयजल की जरूरतें पूरी हो जाएंगी। यही वजह है कि इस योजना पर दिल्ली सरकार व अन्य सरकारी एजेंसियां तेजी से अमल में जुटी हुई हैं।

बारिश की कमी से बुंदेलखंड का जीवन अस्त-व्यस्त

Submitted by UrbanWater on Thu, 07/11/2019 - 16:58
बुंदेलखंड में जल संकट गहराता जा रहा है।बुंदेलखंड में जल संकट गहराता जा रहा है। इसे कुदरत की विडंबना ही कहिए कि जो देश जल का सबसे बड़ा भंडार है वही देश आज जल संकट से जूझ रहा है। इस समय भारत में बिहार, गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट और चेन्नई जल संकट की कमी से जूझ रहा है। बुंदेलखंड जो हमेशा से सूखे के लिए जाना जाता था इस बार वहां के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं। बच्चों को माता-पिता जबरदस्ती स्कूल जाने से रोक रहे हैं क्योंकि वे चाहते थे कि उनका बच्चा कुछ काम कराये और पैसा लाये। महिलाएं खेतों में काम कर रही हैं, पानी ढो रही हैं और आदमी नौकरी की खोज में अपने घर से दूर जा रहे हैं। ये सब हो रहा है सूखा और पानी की कमी वजह से।

प्रयास

पहली बार बिजली से रोशन हुआ गांव, ग्रामीणों को मिला साफ पानी

Submitted by HindiWater on Thu, 07/11/2019 - 16:56
राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां।राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां। आज देश में जहां एक ओर शहरों को ‘‘स्मार्ट सिटी’’ और गांवों को ‘‘स्मार्ट गांव’’ बनाया जा रहा है, तो वहीं देश के करीब एक लाख गांव विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। यहां लोगों के पास जीवनयापन तक के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। ये लोग पीने के पानी से लेकर भोजन और बिजली तक के लिए मोहताज हैं। रोजगार के अभाव में बच्चें शिक्षा से वंचित हैं। नेता और मंत्री तो दूर गांव में अभी सड़क तक नहीं पहुंची है। पेयजल की पर्याप्त सुविधा न होने के कारण कई गांवों के लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। विकास की पहुंच से दूर होने के कारण कोई इस गांव में शादी नहीं करता है, जिस कारण गांव में आखिरी शादी 22 साल पहले हुई थी। इन एक लाख गांवों पर न तो कभी दिल्ली के वातानुकुलित दफ्तरों में बैठकर योजनाएं तैयार करने वाली सरकार की नजर गई और न ही लाखों रुपये वेतन लेने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
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दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
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दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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