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खासम-खास

समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

Content

जलते मानव बाल बिगड़ती हवा

Submitted by HindiWater on Tue, 07/09/2019 - 10:12
Source
विज्ञान प्रगति

जलते मानव बाल बिगड़ती हवा।जलते मानव बाल बिगड़ती हवा।

‘हाड़ जले ज्यों लकड़ी, केस जले ज्यों घास‘, कबीर दास की उदासी का कारण आज फिर उभर कर सामने आ रहा है। मानव के कटे बाल व्यर्थ माने जाते रहे हैं और उन्हें जला दिया जाता है। मगर इधर वैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि इन बालों का जलाया जाना गंभीर वायु प्रदूषण का कारण बन रहा है। कुछ व्यवसाय ऐसे भी हैं जहां मानव बालों को जलाया जा रहा है। वैज्ञानिक विश्लेषण से पता चला है कि मानव बालों का जलाया जाना प्रदूषणकारी है, जो मानव ही नहीं अन्य जीवों के लिए भी जानलेवा है। मानव बालों को प्रयोगशाला में जलाने के बाद किए गए विश्लेषण से पता चला है कि मात्र 100 ग्राम बाल जलने पर आसपास के वातावरण में इतनी जहरीली गैस पैदा करते हैं कि दम घुटने लगता है और त्वचा में जलन की हालत बन जाती है।

चीड़ से ‘मोहब्बत’ में झुलसता पहाड़

Submitted by HindiWater on Mon, 07/08/2019 - 13:37

 धधकते जंगल। धधकते जंगल।

उत्तराखंड में हर साल औसतन ढाई हजार हेक्टेअर जंगल जल रहे हैं, गर्मियां शुरू होते ही पहाड ़पर हाहाकार शुरू हो जाता है। हर ओर धुंध ही धुंध। जलते जंगलों के बीच अक्सर सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। पहाड़ों पर जंगल में आग फैलने के साथ ही शुरू होता है आग के कारणों पर बहस का एक अंतहीन सिलसिला। वन विभाग ‘खलनायक’ की भूमिका में नजर आने लगता है, तो दोष स्थानीय ग्रामीणों के सिर भी जाता है । दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि असल कारण हर कोई जानता है, मगर उसका उपाय न सरकार करना चाहती है और न महकमा। दरअसल पहाड़ में आग का असल कारण है चीड, जिसकी सूखी पत्तियों के कारण आज पूरा पहाड़ ‘बारूद’ के ढेर पर है। आश्चर्य यह है कि सरकार इसे खत्म करने या रोकने के बजाय उसकी सूखी पत्तियों से कभी बिजली और ईधन बनाने की योजनाएं बनाकर राज्य की आर्थिकी मजबूत करने और बेरोजगारी दूर करने का दावा करती है, तो कभी चीड़ की सूखी पत्तियों से चेकडैम बनाकर भूकटाव रोकने की बात करती है। न जाने क्यों सरकार और उसके सलाहकार यह भूल जाते हैं कि इन योजनाओं से न तो चीड़ के दुष्प्रभावों में ही कमी आएगी और न उसका मूल स्वभाव ही बदलेगा।

क्या है मानसून का अर्थ?

Submitted by UrbanWater on Mon, 07/08/2019 - 12:02
Author
सुनीता नारायण
Source
झंकार, दैनिक जागरण, 7 जुलाई 2019
पर्यावरण संकट से मानसून भी बिगड़ने लगा है।पर्यावरण संकट से मानसून भी बिगड़ने लगा है। एक भारतीय चीज ऐसी है जो गांव-शहर, गरीब-अमीर में बंटे सभी लोगों के बीच फैली है, वह है मानसून। जिसे हम हर वर्ष देखने के लिए बेसब्री से इंतजार करते हैं। तापमान का चढ़ना और मानसून का दस्तक देना, यह हर वर्ष बिना किसी बाधा के होता है। किसान बहुत ही बेसब्री से इसका इंतजार करते हैं क्योंकि उन्हें नई फसल की बुआई के लिए समय पर बारिश चाहिए। शहर के प्रबंधकों को भी मानसून का इंतजार होता है क्योंकि हर वर्ष मानसून की शुरुआत से पहले उनके जलाशय खाली होते हैं और शहर की जलापूर्ति सामान्य से कम होती है।

प्रयास

पहली बार बिजली से रोशन हुआ गांव, ग्रामीणों को मिला साफ पानी

Submitted by HindiWater on Thu, 07/11/2019 - 16:56
राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां।राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां। आज देश में जहां एक ओर शहरों को ‘‘स्मार्ट सिटी’’ और गांवों को ‘‘स्मार्ट गांव’’ बनाया जा रहा है, तो वहीं देश के करीब एक लाख गांव विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। यहां लोगों के पास जीवनयापन तक के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। ये लोग पीने के पानी से लेकर भोजन और बिजली तक के लिए मोहताज हैं। रोजगार के अभाव में बच्चें शिक्षा से वंचित हैं। नेता और मंत्री तो दूर गांव में अभी सड़क तक नहीं पहुंची है। पेयजल की पर्याप्त सुविधा न होने के कारण कई गांवों के लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। विकास की पहुंच से दूर होने के कारण कोई इस गांव में शादी नहीं करता है, जिस कारण गांव में आखिरी शादी 22 साल पहले हुई थी। इन एक लाख गांवों पर न तो कभी दिल्ली के वातानुकुलित दफ्तरों में बैठकर योजनाएं तैयार करने वाली सरकार की नजर गई और न ही लाखों रुपये वेतन लेने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
Source
दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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खासम-खास

समाधान खोजता भूजल संकट

Submitted by UrbanWater on Thu, 06/13/2019 - 21:06
Author
कृष्ण गोपाल 'व्यास’
भूजल संकट गहराता जा रहा है।भूजल संकट गहराता जा रहा है। बरसात के बाद के सभी जलस्रोत (कुएं, तालाब और नदी) भूजल पर निर्भर होते हैं। हम यह भी जानते हैं कि धरती में भूजल का संचय स्थानीय भूगोल और धरती की परतों की पानी सहेजने की क्षमता पर निर्भर होता है। बरसात भले ही धरती की गागर भर दे पर जब भूजल का दोहन प्रारंभ होता है तो सारा गणित धरा का धरा रह जाता है। भूजल स्तर के घटने के कारण धरती की उथली परतों का पानी खत्म हो जाता है। उस पर निर्भर झरने और जल स्रोत सूख जाते हैं। चूँकि भूजल का दोहन हर साल लगातार बढ़ रहा है इस कारण धीरे-धीरे गहरी परतें भी रीतने लगी हैं।

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जलते मानव बाल बिगड़ती हवा

Submitted by HindiWater on Tue, 07/09/2019 - 10:12
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विज्ञान प्रगति

जलते मानव बाल बिगड़ती हवा।जलते मानव बाल बिगड़ती हवा।

‘हाड़ जले ज्यों लकड़ी, केस जले ज्यों घास‘, कबीर दास की उदासी का कारण आज फिर उभर कर सामने आ रहा है। मानव के कटे बाल व्यर्थ माने जाते रहे हैं और उन्हें जला दिया जाता है। मगर इधर वैज्ञानिक विश्लेषण पर आधारित रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि इन बालों का जलाया जाना गंभीर वायु प्रदूषण का कारण बन रहा है। कुछ व्यवसाय ऐसे भी हैं जहां मानव बालों को जलाया जा रहा है। वैज्ञानिक विश्लेषण से पता चला है कि मानव बालों का जलाया जाना प्रदूषणकारी है, जो मानव ही नहीं अन्य जीवों के लिए भी जानलेवा है। मानव बालों को प्रयोगशाला में जलाने के बाद किए गए विश्लेषण से पता चला है कि मात्र 100 ग्राम बाल जलने पर आसपास के वातावरण में इतनी जहरीली गैस पैदा करते हैं कि दम घुटने लगता है और त्वचा में जलन की हालत बन जाती है।

चीड़ से ‘मोहब्बत’ में झुलसता पहाड़

Submitted by HindiWater on Mon, 07/08/2019 - 13:37

 धधकते जंगल। धधकते जंगल।

उत्तराखंड में हर साल औसतन ढाई हजार हेक्टेअर जंगल जल रहे हैं, गर्मियां शुरू होते ही पहाड ़पर हाहाकार शुरू हो जाता है। हर ओर धुंध ही धुंध। जलते जंगलों के बीच अक्सर सांस लेना तक मुश्किल हो जाता है। पहाड़ों पर जंगल में आग फैलने के साथ ही शुरू होता है आग के कारणों पर बहस का एक अंतहीन सिलसिला। वन विभाग ‘खलनायक’ की भूमिका में नजर आने लगता है, तो दोष स्थानीय ग्रामीणों के सिर भी जाता है । दुर्भाग्यपूर्ण यह है कि असल कारण हर कोई जानता है, मगर उसका उपाय न सरकार करना चाहती है और न महकमा। दरअसल पहाड़ में आग का असल कारण है चीड, जिसकी सूखी पत्तियों के कारण आज पूरा पहाड़ ‘बारूद’ के ढेर पर है। आश्चर्य यह है कि सरकार इसे खत्म करने या रोकने के बजाय उसकी सूखी पत्तियों से कभी बिजली और ईधन बनाने की योजनाएं बनाकर राज्य की आर्थिकी मजबूत करने और बेरोजगारी दूर करने का दावा करती है, तो कभी चीड़ की सूखी पत्तियों से चेकडैम बनाकर भूकटाव रोकने की बात करती है। न जाने क्यों सरकार और उसके सलाहकार यह भूल जाते हैं कि इन योजनाओं से न तो चीड़ के दुष्प्रभावों में ही कमी आएगी और न उसका मूल स्वभाव ही बदलेगा।

क्या है मानसून का अर्थ?

Submitted by UrbanWater on Mon, 07/08/2019 - 12:02
Author
सुनीता नारायण
Source
झंकार, दैनिक जागरण, 7 जुलाई 2019
पर्यावरण संकट से मानसून भी बिगड़ने लगा है।पर्यावरण संकट से मानसून भी बिगड़ने लगा है। एक भारतीय चीज ऐसी है जो गांव-शहर, गरीब-अमीर में बंटे सभी लोगों के बीच फैली है, वह है मानसून। जिसे हम हर वर्ष देखने के लिए बेसब्री से इंतजार करते हैं। तापमान का चढ़ना और मानसून का दस्तक देना, यह हर वर्ष बिना किसी बाधा के होता है। किसान बहुत ही बेसब्री से इसका इंतजार करते हैं क्योंकि उन्हें नई फसल की बुआई के लिए समय पर बारिश चाहिए। शहर के प्रबंधकों को भी मानसून का इंतजार होता है क्योंकि हर वर्ष मानसून की शुरुआत से पहले उनके जलाशय खाली होते हैं और शहर की जलापूर्ति सामान्य से कम होती है।

प्रयास

पहली बार बिजली से रोशन हुआ गांव, ग्रामीणों को मिला साफ पानी

Submitted by HindiWater on Thu, 07/11/2019 - 16:56
राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां।राजघाट में अथक प्रयासों के बाद लगाई गई पानी की टंकियां। आज देश में जहां एक ओर शहरों को ‘‘स्मार्ट सिटी’’ और गांवों को ‘‘स्मार्ट गांव’’ बनाया जा रहा है, तो वहीं देश के करीब एक लाख गांव विकास की मुख्यधारा से दूर हैं। यहां लोगों के पास जीवनयापन तक के लिए पर्याप्त साधन उपलब्ध नहीं हैं। ये लोग पीने के पानी से लेकर भोजन और बिजली तक के लिए मोहताज हैं। रोजगार के अभाव में बच्चें शिक्षा से वंचित हैं। नेता और मंत्री तो दूर गांव में अभी सड़क तक नहीं पहुंची है। पेयजल की पर्याप्त सुविधा न होने के कारण कई गांवों के लोग गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। विकास की पहुंच से दूर होने के कारण कोई इस गांव में शादी नहीं करता है, जिस कारण गांव में आखिरी शादी 22 साल पहले हुई थी। इन एक लाख गांवों पर न तो कभी दिल्ली के वातानुकुलित दफ्तरों में बैठकर योजनाएं तैयार करने वाली सरकार की नजर गई और न ही लाखों रुपये वेतन लेने वाले प्रशासनिक अधिकारियों की।

नोटिस बोर्ड

भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून

Submitted by HindiWater on Sat, 07/13/2019 - 14:19
Source
दैनिक भास्कर, 09 जुलाई 2019
भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून।भूजल स्तर बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश में सरकार लायेगी ग्रे-वाटर कानून। बारिश शुरू होते ही जल संकट दूर हो गया है, लेकिन यह राहत कुछ ही महीनों की रहेगी। यह समस्या फिर सामने आएगी, क्योंकि जितना पानी धरती में जाता है, उससे ज्यादा हम बाहर निकाल लेतेे हैं। भूजल दोहन का यह प्रतिशत 137 है। यानी, 100 लीटर पानी अंदर जाता है, तो हम 137 लीटर पानी बाहर निकालते हैं। यह प्रदेश के 56 मध्यप्रदेश के 56 फीसद से दोगुना से भी ज्यादा है।

पर्यावरण मंत्रालय से हटा नदियों की सफाई का काम

Submitted by UrbanWater on Wed, 06/19/2019 - 14:46
Source
दैनिक जागरण, 19 जून 2019
अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा।अब नदियों के सारे काम जल शक्ति मंत्रालय करेगा। सरकार ने पर्यावरण मंत्रालय से नदियों की सफाई का काम छीनकर जलशक्ति मंत्रालय को सौंप दिया है। अब तक जलशक्ति मंत्रालय के पास सिर्फ नदियों की सफाई का ही जिम्मा था, लेकिन अब वह शेष नदियों के प्रदूषण को दूर करने का काम भी देखेगा। कैबिनेट सचिवालय ने सरकार (कार्य आबंटन) नियम, 1961 में संशोधन करते हुए केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय का नाम बदल कर जलशक्ति मंत्रालय करने की अधिसूचना जारी कर दी है।

श्रीनगर बांध परियोजना की खुली नहर से खतरा

Submitted by UrbanWater on Fri, 06/07/2019 - 14:44
श्रीनगर बांध।श्रीनगर बांध।। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने श्रीनगर बांध परियोजना के पाॅवर चैनल में लीकेज के कारण हो रही समस्याओं पर उत्तम सिंह भंडारी और विमल भाई की याचिका पर सरकार से रिपोर्ट मांगी है। ऊर्जा विभाग, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा टिहरी के जिलाधिकारी से भी एक महीने में ई-मेल पर इस संदर्भ में रिपोर्ट मांगी है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इस काम के समन्वयन और अनुपालन की जिम्मेदारी भी दी गई है। साथ ही याचिका की प्रतिलिपि वादियों द्वारा एक हफ्ते में पहुंचाने का भी आदेश दिया है।

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