आज भी खरे हैं तालाब

Submitted by admin on Wed, 05/05/2010 - 14:01
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आज भी खरे हैं तालाबआज भी खरे हैं तालाबअपनी पुस्तक “आज भी खरे हैं तालाब” में श्री अनुपम जी ने समूचे भारत के तालाबों, जल-संचयन पद्धतियों, जल-प्रबन्धन, झीलों तथा पानी की अनेक भव्य परंपराओं की समझ, दर्शन और शोध को लिपिबद्ध किया है।

भारत की यह पारम्परिक जल संरचनाएं, आज भी हजारों गाँवों और कस्बों के लिये जीवनरेखा के समान हैं। अनुपम जी का यह कार्य, देश भर में काली छाया की तरह फ़ैल रहे भीषण जलसंकट से निपटने और समस्या को अच्छी तरह समझने में एक “गाइड” का काम करता है। अनुपम जी ने पर्यावरण और जल-प्रबन्धन के क्षेत्र में वर्षों तक काम किया है और वर्तमान में वे गाँधी शान्ति प्रतिष्ठान, नई दिल्ली के साथ कार्य कर रहे हैं। उनकी पुस्तकें, खासकर “आज भी खरे हैं तालाब” तथा “राजस्थान की रजत बूंदें”, पानी के विषय पर प्रकाशित पुस्तकों में मील के पत्थर के समान हैं, और आज भी इन पुस्तकों की विषयवस्तु से कई समाजसेवियों, वाटर हार्वेस्टिंग के इच्छुकों और जल तकनीकी के क्षेत्र में कार्य कर रहे लोगों को प्रेरणा और सहायता मिलती है।

अनुपम जी ने खुद की लिखी इन पुस्तकों पर किसी प्रकार का “कॉपीराईट” अपने पास नहीं रखा है। इसी वजह से “आज भी खरे हैं तालाब” पुस्तक का अब तक विभिन्न शोधार्थियों और युवाओं द्वारा ब्रेल लिपि सहित 19 भाषाओं में अनुवाद किया जा चुका है। सामाजिक पुस्तकों में महात्मा गाँधी की पुस्तक “माय एक्सपेरिमेंट्स विथ ट्रुथ” के बाद सिर्फ़ यही एक पुस्तक ब्रेल लिपि में उपलब्ध है। सन् 2009 तक, इस अनुकरणीय पुस्तक “आज भी खरे हैं तालाब” की एक लाख प्रतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं।

यहां पर 'आज भी खरे हैं तालाब' के पीडीएफ की हाई रिजोल्यूशन और लो रिजोल्यूशन प्रतियां संलग्न हैं। पढ़ने के लिए डाउनलोड करें।

 

आज भी खरे हैं तालाब

हाई रिजोल्यूशन
 

आज भी खरे हैं तालाब लो रिजोल्यूशन


Tags: Aaj Bhi Khare Hain Talab in Hindi, Anupam Mishra in Hindi, Aaj Bhi Khare Hain Talab, Anupam Mishra, Talab in Bundelkhand, Talab in Rajasthan, Tanks in Bundelkhand, Tanks in Rajasthan, Simple living and High Thinking, Honest society, Role Models for Water Conservation and management, Experts in tank making techniques
 

Comments

Submitted by विजय कुमार आर्… (not verified) on Tue, 12/20/2016 - 10:19

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मुझे बेहद अफसोस है कि मैं अनुपम जी की इस किताब के बारे में जानकारी होने के बावजूद पढ़ने का संकल्प पूरा नहीं कर पाया था जो आज आपके सहयोग से कर पा रहा हूँ। पूरी पढ़कर प्रतिक्रिया अवश्य दूंगा।दूसरे, यदि 'राजस्थान की रजत बूँदें'का भी ई-प्रति उपलब्ध करा सकेंगे तो अत्यंत आभार होगा।धन्यवाद!

विद्यार्थी जी, पोर्टल पढ़ने के लिये धन्यवाद। राजस्थान की रजत बूंदें और अन्य पुस्तकों की भी ई प्रति इस पोर्टल पर उपलब्ध हैं।

http://hindi.indiawaterportal.org/Anupam पर क्लिक करेंगें तो आपको अन्य पुस्तकें भी मिलेंगी। राजस्थान की रजत बूंदें पृष्ठ पर दायीं ओर पी़डीएफ में उपलब्ध है। 

Submitted by Rochak Bajpai (not verified) on Sat, 06/24/2017 - 13:42

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ek avismarinya pustak, jo na sirf ye batati hai ki samaj apne liye apne star par bahut kuch aisa kar sakta hai, jo badi badi sarkaron ke liye sirf divaswapn hai........,

 

parantu is samaj ko apni awastha aur apni samrthya ka ahsas kyun nahin hai.........

 

ye prasn ab bhi anuttarit hai...............

 

shayad koi jambvant aaye aur is soye hue hanuman ko jagye, to kuch sambhav ho jaye...

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