अमोनिया से दिल्ली परेशान

Submitted by RuralWater on Fri, 02/10/2017 - 11:39
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यमुना में हर साल अमोनिया की मात्रा बढ़ती जा रही है। लेकिन इस गम्भीर समस्या निपटने के लिये प्रदूषण को रोकने के लिये कोई सख्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। यमुना के पानी से अमोनिया की मात्रा के उपचार की एक सीमा होगी। लेकिन यदि अमोनिया उस सीमा को पार कर जाये पानी में फिर उसका उपचार कैसे किया जा सकेगा? जानकारों की माने तो यमुना के पानी में 3.5 से 4 पीपीएम तक अमोनिया पाया गया है। दिल्ली में पीने का पानी लाने के लिये इस्तेमाल कॅरियर लाइन चैनल में लीकेज होने की वजह से जिस पानी को यमुना की तरफ मोड़ दिया गया। पिछले दिनों दिल्ली के बड़े हिस्से में अमोनिया प्रभावित पानी आपूर्ति हुई। जब यह बात मीडिया में आई। अचानक दिल्ली जल बोर्ड के काम काज में तेजी आई। चंद्रावल और वजीराबाद जल शोधन संयंत्रों को बन्द किया गया, जहाँ से अमोनिया प्रभावित क्षेत्रों पानी भेजा जा रहा था।

बाद में स्थिति नियंत्रण में आने पर जल बोर्ड के ठप हुए जल शोधन संयंत्रों से पानी की आपूर्ति शुरू कर दी गई, लेकिन जो यमुना जीवनदायिनी है उसमें अभी भी अमोनिया की मात्रा बरकरार है। दिल्ली में जिन क्षेत्रों का पानी बुरी तरह से प्रभावित हुआ, उनमें करोलबाग, राजौरी गार्डन, तिलक नगर, बुराड़ी, पंजाबी बाग प्रमुख रहे।

जल बोर्ड की सिफारिश पर केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 12 जगहों से यमुना के पानी के सैम्पल उठाया। बोर्ड प्रदूषण तत्वों की जाँच कर रहा है। दिल्ली जल बोर्ड ने हरियाणा के सिंचाई विभाग और केन्द्रीय प्रदूषण बोर्ड से कार्रवाई करने की सिफारिश की है।

यमुना में हर साल अमोनिया की मात्रा बढ़ती जा रही है। लेकिन इस गम्भीर समस्या निपटने के लिये प्रदूषण को रोकने के लिये कोई सख्त कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। यमुना के पानी से अमोनिया की मात्रा के उपचार की एक सीमा होगी। लेकिन यदि अमोनिया उस सीमा को पार कर जाये पानी में फिर उसका उपचार कैसे किया जा सकेगा? जानकारों की माने तो यमुना के पानी में 3.5 से 4 पीपीएम (पार्ट पर मिलियन) तक अमोनिया पाया गया है। दिल्ली में पीने का पानी लाने के लिये इस्तेमाल कॅरियर लाइन चैनल में लीकेज होने की वजह से जिस पानी को यमुना की तरफ मोड़ दिया गया। वह पानी प्रदूषित था, उसमें अमोनिया की मात्रा उपचार होने की सीमा को पार गया था। अर्थात वह 04 पीपीएम की मात्रा तक पहुँच गया था। इसी पानी ने पूरी दिल्ली को पानी के लिये त्राहीमाम-त्राहीमाम करने के लिये विवश किया। बाद में कॅरियर लाइन चैनल की मरम्मत कर दी गई।

वैसे यमुना में अमोनिया की मात्रा अधिक होने की यह पहली घटना नहीं हैै। यमुना में शिकायत होने पर वहाँ अमोनिया की मात्रा को नियंत्रित करने के लिये हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से अतिरिक्त पानी छोड़ दिया जाता है ताकि जल प्रवाह के साथ अमोनिया भी बह जाये। करीब एक महीने से अधिक समय से यमुना में अमोनिया की मात्रा बढ़ी हुई है। यमुना में अमोनिया की मात्रा बढ़कर 4 पीपीएम हो गई थी, जबकि सामान्य स्तर 0.2 पीपीएम है।

जब वजीराबाद में अमोनिया की मात्रा दो पीपीएम पाई गई थी, उस दिन जल बोर्ड ने वजीराबाद जलाशय से जल शोधन संयंत्रों के लिये पानी उठाना बन्द कर मूनक नहर से पानी लिया। पहले जल बोर्ड वजीराबाद व चंद्रावल जल शोधन संयंत्र के लिये यमुना से पानी उठाता था, लेकिन बार-बार अमोनिया की मात्रा बढ़ने से वैकल्पिक तौर पर मूनक नहर से पानी लेना शुरू कर दिया है। अब इस बात की जाँच जरूरी है कि यमुना के जल प्रदूषण के लिये जिम्मेवार कौन है? वैसे बताया जा रहा है कि पानीपत के पास औद्योगिक कचरा बिना शोधित किये यमुना में गिराया जाता है। इस वजह से यमुना में अमोनिया की मात्रा बढ़ जाती है। इस तरह की शिकायतों को समाज, सरकार और प्रशासन को गम्भीरता से लेना चाहिए। यदि समाज, सरकार और प्रशासन मुस्तैद नहीं होगा तो कितने भी एक्शन प्लान ले आएँ, यमुना को हम साफ नहीं कर पाएँगे और ना ही दिल्ली को कभी हम पीने का साफ पानी ही दे पाएँगे।

बहरहाल जिस अमोनिया शोधक संयंत्र का उद्घाटन दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने पिछले साल किया था, वह एक से दो पीपीएम से अधिक मात्रा में अमोनिया का उपचार नहीं कर सकता। अब दिल्ली जिस तरह पानी के प्रदूषण से जूझ रहा है, इसे देखकर लगता है कि दिल्ली के लिये आने वाले दिन और भी कठिन रहने वाले हैं।

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. 24 दिसम्बर 1984 को बिहार के पश्चिम चम्पारण ज़िले में जन्मे आशीष कुमार ‘अंशु’ ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक उपाधि प्राप्त की और दिल्ली से प्रकाशित हो रही ‘सोपान स्टेप’ मासिक पत्रिका से कॅरियर की शुरुआत की। आशीष जनसरोकार की पत्रकारिता के चंद युवा चेहरों में से एक हैं। पूरे देश में घूम-घूम कर रिपोर्टिंग करते हैं। आशीष जीवन की बेहद सामान्य प्रतीत होने वाली परिस्थितियों को अपनी पत्रकारीय दृष्

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