बंजर भूमि बनेगी कमाई का जरिया, निवेशक करेंगे गुलजार

Submitted by RuralWater on Sat, 03/31/2018 - 12:29
Source
अमर उजाला, 31 मार्च 2018

 

अगर किसान के पास जमीन होने के बाद भी खेती करने वाला कोई नहीं है तो वह संविदा खेती को अपनाकर जमीन को बंजर होने से बचा सकता है। इसके लिये मंडी समिति के पास आवेदन करना होगा। उस जमीन में किन-किन फसलों की पैदावार हो सकती है इसके लिये मंडी समिति निजी कम्पनियों से सम्पर्क करेगी। कम्पनी जमीन को कृषि कार्य के लिये इस्तेमाल करेगी। इसकी एवज में भूमि मालिक को अंशदान मिलेगा।

पहाड़ों में बंजर भूमि अब भू-मालिकों के लिये कमाई का जरिया बनेगी। इसके लिये उन्हें खाली पड़ी जमीन को लीज पर देना होगा। जिससे कृषि व औद्योनिकी के क्षेत्र में पूँजी निवेश करने वाले निवेशकों को आसानी से जमीन उपलब्ध होगी। साथ ही भू-मालिकों को जमीन की एवज में आमदनी प्राप्त होगी।

सरकार ने सिंगल विंडो सिस्टम में लैंड लीज पोर्टल बनाया है। इसके माध्यम से भूमि मालिकों को ऑनलाइन जमीन का ब्योरा देना होगा। उत्तराखण्ड जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम में बंजर व परती भूमि को कृषि सम्बन्धित कार्यों के लिये लीज पर देने का प्रावधान किया गया है। रोजगार व शिक्षा के लिये लोग पहाड़ों से पलायन कर गए। जिस कारण कृषि भूमि बंजर होती जा रही है।

सरकार की ओर से बंजर व खाली पड़ी भूमि को आबाद करने के लिये नई पहल शुरू की जा रही है। इसके लिये सिंगल विंडो सिस्टम में लैंड लीज पोर्टल बनाया गया। देश-विदेश में बसे उत्तराखण्ड में प्रवासियों के साथ यदि किसी भू-मालिक के पास खाली जमीन हो तो वह पोर्टल पर लीज के लिये आवेदन कर सकता है। इसमें जमीन का खसरा नम्बर, स्थान, मोबाइल नम्बर आदि तमाम जानकारी देनी होगी। ताकि निवेशक जमीन को लीज पर लेने को सीधे भूमि मालिक से सम्पर्क कर सके। निवेशक व भूमि मालिक ही आपस में लीज अवधि की सीमा तय करेंगे।

 

 

 

उत्तराखण्ड में 3.16 लाख हेक्टर बंजर भूमि


राज्य गठन के बाद 17 सालों में उत्तराखण्ड में 15 प्रतिशत कृषि क्षेत्र में कमी आई है। वर्तमान में राज्य में 6.98 लाख हेक्टेयर क्षेत्र कृषि के अधीन है। जिसमें 3.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही सिंचाई की सुविधा है। इसमें पर्वतीय क्षेत्रों में मात्र 43250 हेक्टेयर (13.11 प्रतिशत) सिंचित क्षेत्र शामिल है। सरकार का प्रयास है कि कर्नाटक और मैसूर की तर्ज पर कांट्रेक्ट फार्मिंग के माध्यम से कृषि क्षेत्र को बचाया जाये। कई निजी कम्पनियाँ मसाले, हल्दी व अन्य फसलों की पैदावार कर रही है। निवेशकों को जमीन उपलब्ध होने पर उत्तराखण्ड में भी बंजर भूमि गुुलजार होगी और भूमि मालिकों की इससे कमाई होगी।

 

 

 

 

संविदा खेती से क्या होगा फायदा


अगर किसान के पास जमीन होने के बाद भी खेती करने वाला कोई नहीं है तो वह संविदा खेती को अपनाकर जमीन को बंजर होने से बचा सकता है। इसके लिये मंडी समिति के पास आवेदन करना होगा। उस जमीन में किन-किन फसलों की पैदावार हो सकती है इसके लिये मंडी समिति निजी कम्पनियों से सम्पर्क करेगी। कम्पनी जमीन को कृषि कार्य के लिये इस्तेमाल करेगी। इसकी एवज में भूमि मालिक को अंशदान मिलेगा।

 

 

 

 

ऑनलाइन करें आवेदन


सिंगल विंडो सिस्टम में लैंड लीज पोर्टल बनाया गया है। इस पोर्टल पर भूमि मालिक अपनी खाली जमीन को लीज पर देने के लिये ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। इससे यह फायदा होगा कि कृषि, उद्यान से सम्बन्धित कार्यों के लिये निवेशकों की आसानी से जमीन उपलब्ध होगी। निवेशकों को भी यह सुविधा होगा कि राज्य में कहाँ-कहाँ जमीन खाली है। इसके लिये सीधे भूमि मालिकों से सम्पर्क कर सकता है।

- सौजन्या, महानिदेशक, उद्योग विभाग

 

 

 

 

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