दिल्ली की लापरवाह सरकार, आम आदमी चिकनगुनिया से बेहाल

Submitted by RuralWater on Fri, 09/30/2016 - 15:15
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बरसात का महीना आने के दो महीने पहले से दिल्ली में मच्छरों को पनपने से रोकने के लिये छिड़काव रुक गया। समस्या के समाधान पर चर्चा करने की जगह दिल्ली की सरकार एमसीडी, से लेकर केन्द्र सरकार तक दिल्ली में महामारी की शक्ल ले रही बीमारी की जिम्मेवारी डालने में इतनी व्यस्त थी कि उसे ख्याल ही नहीं रहा कि यह समय एक्शन का है। आरोप लगाने का नहीं। दिल्ली सरकार ने राज्य के उपराज्यपाल पर हमला करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। यह बात सर्वविदित है कि यमुना में चौड़ी पत्ती वाली जलकुम्भी, रुके हुए पाॅलीथीन, मूर्तियों के ढाँचे भी मच्छरों के लार्वा पनपने के लिये सही जगह साबित होते हैं। दिल्ली की सरकार पिछले दिनों मीडिया कांफ्रेंस में जिस तरह मच्छरों को नियंत्रित करने के लिये मशीन खरीदने और दवा के छिड़काव की बात कर रही थी। उससे यही लग रहा था कि मीडिया कांफ्रेंस के खत्म होते ही दिल्ली में डेंगू और चिकनगुनिया पर नियंत्रण लग जाएगा। इस बीमारी के निदान के लिये सरकार गम्भीर हो चुकी है।

खबर के अखबार और टेलीविजन में आते ही दिल्ली के आम आदमी की दिल्ली की सरकार से यह शिकायत जरूर थी कि इन मशीनों को दिल्ली सरकार को ही खरीदना था फिर दिल्ली में हजारों लोगों को चिकनगुनिया और डेंगू का शिकार बनाने के बाद सरकार द्वारा यह कदम क्यों उठाया गया? कायदे से इसे बरसात का मौसम शुरू होने से दो महीने पहले से शुरू कर देना चाहिए था। जिससे चिकनगुनिया, डेंगू या फिर मलेरिया के मच्छर दिल्ली में ना पनपे। दिल्ली वालों को बीमार ना बनाए। जबकि दिल्ली में उल्टा हुआ।

बरसात का महीना आने के दो महीने पहले से दिल्ली में मच्छरों को पनपने से रोकने के लिये छिड़काव रुक गया। समस्या के समाधान पर चर्चा करने की जगह दिल्ली की सरकार एमसीडी, से लेकर केन्द्र सरकार तक दिल्ली में महामारी की शक्ल ले रही बीमारी की जिम्मेवारी डालने में इतनी व्यस्त थी कि उसे ख्याल ही नहीं रहा कि यह समय एक्शन का है। आरोप लगाने का नहीं। दिल्ली सरकार ने राज्य के उपराज्यपाल पर हमला करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी।

यह बात सर्वविदित है कि यमुना में चौड़ी पत्ती वाली जलकुम्भी, रुके हुए पाॅलीथीन, मूर्तियों के ढाँचे भी मच्छरों के लार्वा पनपने के लिये सही जगह साबित होते हैं। इन्हीं मच्छरों की वजह से यमुना नदी के आस-पास के मोहल्ले सबसे अधिक मच्छर प्रभावित क्षेत्र घाोषित किये जा चुके हैं। अब तक नगर निगम के अनुसार दिल्ली में चिकनगुनिया के 2625 मामले प्रकाश में आये हैं। इसी प्रकार डेंगू के 1378 मामले दर्ज किये गए हैं। जबकि चिकनगुनिया की बात की जाये तो सिर्फ एम्स और सफदरजंग अस्पताल में 3122 मामले सामने आये हैं। इससे नगर निगम के दावों पर सन्देह होता है।

बात सरकारी संस्थाओं द्वारा बरती जाने वाली लापरवाही की, की जाये तो इस बात में सच्चाई है कि यमुना के घाटों की सफाई ठीक प्रकार से ना होने की वजह से मच्छरों को वहाँ पनपने का अवसर मिलता है। जगह-जगह यमुना के किनारे पसरी गन्दगी, पाॅलीथीन और कचरे का ढेर कोई भी जाकर देख सकता है। यह हाल निगमबोध घाट से लेकर आईटीओ पर स्थित यमुना घाट तक का है। बाकि दिल्ली का भी हाल बेहतर नहीं है। इसी गन्दगी का परिणाम है कि डेंगू-चिकनगुनिया के मामलों में 30 फीसदी मामले यमुना के किनारे के क्षेत्रों से सामने आये हैं।

दिल्ली में डेंगू और चिकनगुनिया के मामले इस साल बढ़ने की सम्भावना पहले ही व्यक्त की जा रही थी। उसके बाद दिल्ली नगर निगम और दिल्ली की सरकार की लापरवाही ने हालात को और अधिक चिन्ताजनक बना दिया। दिल्ली में जून से ही स्प्रे नहीं हो रहा। सबसे अधिक मामले शहर में अगस्त और सितम्बर में सामने आये हैं। अब जब पूरी दिल्ली में बीमारी के महामारी बनने को लेकर भय का माहौल बन गया तब जाकर नगर निगम और दिल्ली की सरकार जागी। एक तरफ मच्छरों को भगाने के लिये स्प्रे की मशीने लाई जा रही हैं, वहीं यमुना के पानी में मच्छरों का लार्वा ना पनपे इसके लिये वहाँ भी स्प्रे की योजना बनाई जा रही है।

हाल में गणेश उत्सव के बाद विसर्जित मूर्तियों से यमुना की सफाई का दावा सरकारी एजेंसियों ने किया था। लेकिन अब तक कई जगहों पर विसर्जित मूर्तियाँ जस-की-तस मिल जाएँगी। उन्हीं मूर्तियों के ढाँचे में मच्छर पनप रहे हैं। पाॅलीथीन भी नदी किनारे इकट्ठा हैं। जो मच्छरों के पैदा होने के लिये अनुकूल माहौल तैयार कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में यदि यह कोई कहे कि सरकार के काम-काज के तरीके पर सवाल ना कीजिए तो कहिए उन्हें क्या कहा जाये।

दिल्ली की सरकार का दावा था कि दिल्ली में चिकनगुनिया और डेंगू के खिलाफ युद्ध स्तर पर कार्यवाई होगी। सरकार के इस दावे के बावजूद 24 सितम्बर को सफदरजंग अस्पताल में 800 से अधिक मरीज बुखार से पीड़ित होकर पहुँचे। 22-23 सितम्बर को भी करीब पाँच सौ की संख्या में मरीज अस्पताल में आये थे।

जानकार कह रहे हैं कि सरकार की कार्यवाई देखकर यह अनुमान लगाना कठिन नहीं है कि चिकनगुनिया और डेंगू पर नियंत्रण कर लेना इस सरकार के वश की बात नहीं है। अक्टूबर तक इस बीमारी पर रोक नहीं लगाया जा पाएगा। अब कुछ नवम्बर के दूसरे या तीसरे सप्ताह के बाद ही हो सकता है। यह बात डाॅक्टर भी कह रहे हैं।

फिलहाल दिल्ली की सरकार मीडिया कांफ्रेंस कर रही है। चाहे दिल्ली का आम आदमी डेंगू और चिकनगुनिया से राहत ना पा रहा हो लेकिन मीडिया में आॅल इज वेल का दावा करने में क्या जाता है? इस बात को आम आदमी पार्टी के प्रवक्ता और दिल्ली की सरकार दोनों भली प्रकार से समझ गए हैं।

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. 24 दिसम्बर 1984 को बिहार के पश्चिम चम्पारण ज़िले में जन्मे आशीष कुमार ‘अंशु’ ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक उपाधि प्राप्त की और दिल्ली से प्रकाशित हो रही ‘सोपान स्टेप’ मासिक पत्रिका से कॅरियर की शुरुआत की। आशीष जनसरोकार की पत्रकारिता के चंद युवा चेहरों में से एक हैं। पूरे देश में घूम-घूम कर रिपोर्टिंग करते हैं। आशीष जीवन की बेहद सामान्य प्रतीत होने वाली परिस्थितियों को अपनी पत्रकारीय दृष्

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