डौला गाँव के तालाबों की दुनियाभर में धूम

Submitted by editorial on Sun, 07/01/2018 - 13:41
Printer Friendly, PDF & Email
Source
दैनिक जागरण, 01 जुलाई, 2018

 

बागपत। शुक्र है, मृत्यु शय्या पर पड़े 700 साल पुराने तालाब को नई जिन्दगी मिल गई और बागपत के डौला गाँव को भी। इसे बचाना आसान नहीं था, 14 साल लग गये। यह काम सरकार से नहीं, जन सरोकार से हुआ। सरोकार जल संरक्षण का। बड़ी बात यह कि तालाब संरक्षण की यह कहानी अब शोध का विषय बन गई है। अमेरिकी विद्यार्थियों को भी इस तालाब की कहानी सुनाई-दिखाई जाएगी ताकि वे जल संरक्षण का पाठ ठीक से सीख और समझ सके।

आइए डौला चलें

उत्तर प्रदेश में बागपत जिला मुख्यालय से 10 किलोमीटर दूर इस गाँव की आबादी करीब 15 हजार है। 80 फीसद परिवार खेती पर निर्भर है। 1998 में डौला निवासी जल पुरुष राजेन्द्र सिंह को जल संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिये 2001 में मैग्सेसे पुरस्कार मिला। इसी से प्रेरित होकर गाँव के ही कृष्णपाल सिंह ने ग्रामीणों से बात की तो वे भी इस मुहिम में शामिल हो गये। ग्रामीणों ने एक-एक कर गाँव के सभी तालाबों से अवैध कब्जा हटवाया।आखिर में सबसे बड़े गोसाईं वाला तालाब पर काम शुरू हुआ। इस तालाब के जल संग्रहण क्षेत्र में अवैध कब्जों के कारण इसमें पानी आना बन्द हो गया था।

करीब 25 साल से यह सूखा पड़ा था। 2004 में ग्रामीणों ने पहले अवैध कब्जा हटवाया फिर तालाब की खुदाई और सौन्दर्यीकरण शुरू हुआ। दिसम्बर 2016 में प्रधानमंत्री सिंचाई योजना के जरिए 45 लाख रुपए की मदद मिली तो करीब 20 साल से बन्द 13 किलोमीटर लम्बे नाले की सफाई कराकर हिंडन नदी से तालाब तक पानी लाया गया। तालाब अब लबालब हैं तो भूजल भी रिचार्ज होगा और फसलें भी लहलहाएँगी।

कुछ खास है यह तालाब

डौला गाँव 700 साल पहले बसा था। बताया जाता है कि तब गोसाईं बाबा ने इस तालाब की खुदाई कराई थी। इस तालाब में 14 किलोमीटर क्षेत्र का बारिश का पानी आता था, लेकिन करीब 25 साल से जगह-जगह अतिक्रमण के चलते तालाब में पानी आना बन्द हो चुका था। यह इकलौता तालाब है, जो हिंडन नदी से पानी लेने की बजाय उल्टे पानी देकर उसे रिचार्ज करता था। गाँव में कुल 17 तालाब हैं। कुछ तालाबों का नामकरण जातियों पर किया गया है। जैसे कि वाल्मीकी तालाब, ठाकुरों वाला तालाब आदि।

अमेरिकी शोधार्थी भी आये

हम्बोल्ट स्टेट यूनिवर्सिटी, कैलीफिर्निया (अमेरिका) और दिल्ली विश्वविद्यालय के शोधार्थियों की एक सयुक्त टीम भार में गिरते भूजल स्तर और जल संरक्षण के प्रोजेक्ट पर काम कर रही है, जो डौला गाँव पहुँची। यह टीम इसी जून में चार बार डौला जाकर विस्तृत जानकारी जुटा चुकी है। हम्बोल्ट स्टेट यूनिवर्सिटी, कैलिफोर्निया के प्रोफेसर लोनी ग्राफमैन का कहना है कि वे डौला का गोसाईं वाला तालाब के बारे में अपने छात्रों को बताएँगे और इसका वीडियो दिखाकर पानी बचाने का पाठ पढ़ाएँगे।

मेरा गाँव मेरा तालाब

1. जनसहयोग से जिन्दा हुआ 700 साल पुराना तालाब।
2.अमेरिका में पढ़ाया जाएगा जल संरक्षण का यह पाठ गाँव पहुँचा अमेरिकी प्रोफेसर और छात्रों का दल।
3.डौला निवासी राजेन्द्र सिंह को 2001 में मैग्सेसे पुरस्कार मिला था, अब गाँव के कृष्णपाल सिंह ने लिखी नई कहानी।

“पानी की बर्बादी तथा तालाबों का मिटता वजूद हम सबके लिये चिन्ता की बात है। इसे बचाने की पहल करनी होगी। डौला के ग्रामीणों ने 700 साल पुराने तालाब को बचाकर अनूठा काम किया है।” राजेन्द्र सिंह, मैग्सेसे से सम्मानित

“2001 में राजेन्द्र को जल संरक्षण के लिये मैग्सेसे पुरुस्कार मिला, उनसे प्रभावित हो मैंने गाँव में एक तालाब बनवाया। फिर उन्हीं की प्रेरणा से अपने गाँव के सभी 17 तालाबों का पुनरुद्धार कराया।” कृष्णपाल सिंह, डौला गाँव
 

Add new comment

This question is for testing whether or not you are a human visitor and to prevent automated spam submissions.

18 + 0 =
Solve this simple math problem and enter the result. E.g. for 1+3, enter 4.

Related Articles (Topic wise)

Related Articles (District wise)

About the author

नया ताजा