पानी से बिगड़ी कहानी

Submitted by RuralWater on Tue, 05/10/2016 - 10:35
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दोपहर का सामना, 09 मई 2016

सब्जी महंगी


इन दिनों महाराष्ट्र अकाल से प्रभावित है। अकाल के चलते पानी की कमी होने से आम लोगों के जीवन पर प्रभाव पड़ रहा है, जिससे दैनिक उपयोग में आने वाली सब्जियाँ भी अकाल की मार से अछूती नहीं रही हैं। अकाल के कारण बाजार में सब्जियों की आवक में न सिर्फ कमी आई है बल्कि इस कमी के चलते इनके दाम आसमान छू रहे हैं। ऐसे में गर्मी का फायदा उठाकर सब्जी मंडी में इन दिनों सब्जियों में जबरदस्त झोल देखा जा रहा है।गर्मी के कारण इन दिनों सब्जियों के भाव आसमान छू रहे हैं। बाजार में उपलब्ध सब्जियाँ अचानक आसमान छू रही हैं। कुछ सप्ताह पहले भिंडी, टमाटर, ककड़ी, गाजर, फूलगोभी, करेला, पालक, लौकी, हरी मिर्ची, शिमला मिर्च, अदरक, पत्ता गोभी जैसी सब्जियाँ 20 से 25 रुपए किलो मिल रही थीं, वह सब्जियाँ आजकल दोगुने भाव में बिक रही हैं। दादर, भायखला सब्जी मार्केट में ये सब्जियाँ इन दिनों 35 से 60 रुपए किलो बिक रही हैं।

कुछ दिनों पहले भिंडी 20 रुपए किलो मिल रही थी। कल भिंडी मार्केट में 40 रुपए प्रति किलो बिक रहे थे। इस तरह 12 रुपए किलो बिकने वाली लौकी का भाव बढ़कर 30 रुपए हो गए हैं। मिर्ची ने तो जीभ के साथ-साथ जेब को भी तीखा कर दिया है। 80 रुपए में ढाई किलो मिलने वाली मिर्ची इन दिनों 250 रुपए किलो मिल रही है। इसी तरह हरा धनिया भाव 15 रुपए गड्डी से बढ़कर 25 रुपए प्रति गड्डी हो गई है।

अदरक, लहसुन महंगा होने के कारण इन दिनों आम मुम्बईकरों के घरों में पक रही महंगी दाल में अदरक और लहसुन का छौंक नहीं लग पा रहा है। शिमला मिर्ची पहले 60 रुपए ढाई किलो मिल रही थी, जो कि इन दिनों 120 रुपए ढाई किलो है। 2-3 रुपए प्रति गड्डी मिलने वाला पालक अब 5 से 6 रुपए बेचा जा रहा है। अच्छा टमाटर 70 रुपए ढाई किलो और नरम टमाटर 100 रुपए 5 किलो बेचा जा रहा है, जो कि पहले 40 रुपए और 30 रुपए ढाई किलो बिकता था। इसी तरह अन्य सब्जियों के भाव ने भी मुम्बईकरों के सब्जियों का बजट बिगाड़ दिया है।

वजन में झोल


महाराष्ट्र अकाल से प्रभावित होने के कारण इन दिनों बाजार में सब्जियों की आवक पहले से ही कम हो रही है। इसी का फायदा उठाकर सब्जी विक्रेता इन दिनों ग्राहकों को डबल चूना लगा रहे हैं। यह झोल कुछ इस प्रकार है- सब्जी विक्रेता सब्जियाँ महंगी होने का हवाला देकर पहले ही दोगुना भाव में ग्राहकों को सब्जियाँ बेच रहे हैं। इसी तरह अपने वजन-कांटे में 150-200 ग्राम प्रतिकिलो कांटे में झोलकर ग्राहकों की झोली में एक किलो के बजाय 800 ग्राम सब्जियाँ ही डाल रहे हैं।

उत्तर भारत से आवक


पानी की कमी के कारण इन दिनों उत्तर भारत और आन्ध्र प्रदेश से सब्जियों की आवक हो रही है। दूसरे राज्य से यह आवक होने से भी सब्जियों के दामों में बढ़ोत्तरी हुई है। व्यापारियों का कहना है कि दूसरे राज्यों से सब्जियाँ मंगाने से उन्हें ट्रांसपोर्ट और अन्य चीजों के लिये ज्यादा पैसा चुकाना पड़ रहा है, जिसके चलते सब्जियों के दाम में बढ़ोत्तरी की जा रही है।

पानी के आभाव में सूखती फसलें


महाराष्ट्र इन दिनों पानी के अभाव से पस्त है। जमीन के नीचे से मशीन के माध्यम से जिन लोगों ने पानी निकालकर खेती की थी। इन दिनों उनकी सब्जियों को पानी नहीं मिल पाने से खेतों में हरी दिखने वाली सब्जियाँ इन दिनों सूख रही हैं। जमीन के निचले भाग में पानी का औसत कम होने के कारण पाइप के जरिए खेतों में सिंचाई करने पर पानी खेत तक नहीं पहुँच पा रहा है। ऐसे में किसानों की बची हुई फसलें भी सुखने के कगार पर आ गई हैं।

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