अनदेखी के शिकार होते मगरमच्छ

Submitted by RuralWater on Sun, 06/19/2016 - 13:55

तालाबों में पानी की कमी और आपसी घमासान से मगरमच्छों पर खतरा



.इस साल जनवरी के बाद मूड़ा तालाब में पानी की कमी और आपसी घमासान के चलते कोटमीसोनार स्थित देश के दूसरे सबसे बड़े मगरमच्छ पार्क में मगरमच्छों का जीवन खतरे में है। तीन सौ से ज्यादा मगरमच्छों का घर बना मूड़ा तालाब का हाल यह है कि उसके दो हिस्सों में महज तीन से चार फीट पानी बचा है।

दस साल पहले बने इस पार्क में आसपास के इलाकों से पकड़कर मगरमच्छों को लगातार यहाँ छोड़ा जा रहा है। इससे यहाँ मगरमच्छों की संख्या तो बढ़ गई है, लेकिन उनके लिये भोजन का सालाना बजट नहीं बढ़ा है। एक दशक पहले मगरमच्छ के पोषण का सालाना बजट पाँच लाख रुपए था जो आज भी उतना ही है। ग्रामीणों का आरोप है कि मगरमच्छों के आहार की आधी से ज्यादा राशि अफसर हजम कर जाते हैं।

मगरमच्छ क्यों कर रहे हमले


मगरमच्छों की संख्या लगातार बढ़ने से 85 एकड़ जमीन पर फैला मुड़ा तालाब भी छोटा पड़ने लगा है। मगरमच्छों की संख्या लगातार बढ़ने से इनमें अब प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। तालाब का जलस्तर लगातार घटने और पर्याप्त चारा न मिलने से इनमें आक्रामकता बढ़ती जा रही है। मादा मगरमच्छ पर एकाधिकार जमाने की नीयत से भी नर मगरमच्छ आपस में हमले कर रहे हैं। इससे दर्जन भर से ज्यादा वयस्क मगरमच्छ मारे जा चुके हैं।

मार्च के बाद मगरमच्छों का प्रजनन काल शुरू हो जाता है। इस दौरान नर मगरमच्छ काफी उत्तेजना में होते हैं और मादा मगरमच्छ से सम्पर्क कायम करने के लिये दूसरे मगरमच्छ पर टूट पड़ते है। पार्क के कर्मचारी बताते हैं कि छोटे मगरमच्छों को बड़े मगरमच्छ अपना आहार बना रहे हैं। जलीय जीव के विशेषज्ञों का मानना है कि मगरमच्छ तब नरभक्षी बन जाते हैं जब उन्हें प्राकृतिक भोज्य पदार्थ की कमी होती है। ग्रामीणों द्वारा मगरमच्छ के प्राकृतिक आहार मछली का शिकार किये जाने से पीड़ित मगरमच्छ हिंसक हो गए।

2005-06 में मगरमच्छ का पार्क विकसित किया गया था। गाँव के लोगों को मगरमच्छ के हिंसक हमले से बचाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया था। यह मगरमच्छ पार्क आकर्षक पर्यटन स्थल भी बन गया है। बड़ी संख्या में पर्यटक यहाँ घूमने आते हैं। मगर इस साल पानी की कमी से मगरमच्छों पर गहराई संकट के चलते पार्क का आकर्षण कम हुआ है। वहीं, जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोटमीसोनार में मगरमच्छ बचाने की बजाय अलग कामों पर अधिक खर्च किया जा रहा है। उदाहरण के लिये बीते दिनों 3डी थियेटर का शुभारम्भ किया। मगरमच्छ पार्क में पर्यटकों के साथ ही क्षेत्र के लोगों को 3 डी थियेटर की सौगात देने के पीछे इसे और अधिक आकर्षक बनाने का कारण गिनाया गया है।

अधर में तालाब संरक्षण योजना


कोई सात साल पहले शासन ने मुड़ा तालाब को कर्रा नाला जलाशय से भरने की योजना बनाई गई थी। जलाशय से पाइप लाइन विस्तार कर मगरमच्छ पार्क के मुड़ा तालाब को नियमित तौर पर भरा जाना था। इसके लिये राशि भी मंजूर हो चुकी थी, लेकिन अधिकारियों ने इस योजना पर ध्यान नहीं दिया। तालाब के चारों ओर बोर खनन की योजना भी सालों से खटाई में पड़ी है।

संकट में मगरमच्छयहाँ सालों से रहकर मगरमच्छों की सेवा करने वाले सीताराम महाराज ने ग्रामीणों से मदद लेकर पिछले दिनों नहर के पानी से मुड़ा तालाब को कुछ हद तक भरा है, फिर भी जरूरत के हिसाब से तालाब में पानी नहीं है। वहीं, गाँव के अन्य तालाबों में बचे मगरमच्छ भी आये दिन हादसों के शिकार हो रहे हैं। हाल ही में पार्क से बाहर कई मगरमच्छों की मौत के प्रकरण सामने आये हैं। वहीं, डीएफओ प्रभात मिश्रा बताते हैं कि मगरमच्छ पार्क को बेहतर बनाने का प्रयास लगातार जारी है। पार्क के बाहर के मगरमच्छों को संरक्षित करना हमारी जिम्मेदारी नहीं है।

किया जाएगा दूसरी जगहों पर शिफ्ट


नया रायपुर की जंगल सफारी में क्रोकोडाइल पार्क के लिये कोटमीसोनार से मगरमच्छ लाए जाएँगे। शुरू में ट्रक से 8-10 मगरमच्छ लाए जाएँगे। वन विभाग के प्रमुख सचिव आरपी मंडल ने क्रोकोडाइल पार्क बनाने के लिये जगह तय करने को कहा है।

उन्होंने बरसात के पहले उसकी गहराई बढ़ाकर मगरमच्छों के लिये अनुकूल वातावरण भी तैयार करने को कहा गया है।

कोटमीसोनार में मगरमच्छों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अफसरों ने बताया कि अभी लगभग 300 मगरमच्छ हैं।

कलेक्टर ओपी चौधरी ने बताया कि यहाँ के ग्रामीणों के श्रमदान से कोटमीसोनार में मगरमच्छों के संरक्षण के लिये इस पार्क का निर्माण प्रारम्भ किया गया। चौधरी ने कहा कि इस मगरमच्छ पार्क में 15 हेक्टेयर क्षेत्र और शामिल किया जाएगा। साथ ही यहाँ मगरमच्छों के एक ब्रीडिंग सेंटर का निर्माण भी किया जाएगा, ताकि यह एक अभयारण्य के रूप में विस्तारित हो सके। उन्होंने कहा कि इस पार्क के अभयारण्य के रूप में विस्तार करने में वो अपनी सहभागिता दे पाएँ यह उनके लिये सौभाग्य की बात है। उनका मानना है कि बारिश के आते ही मगरमच्छों के जीवन पर मँडरा रहा खतरा समाप्त हो जाएगा।

उधर, माओवाद प्रभावित बस्तर सम्भाग में प्रदेश का दूसरा मगरमच्छ पार्क बनाने की योजना तैयार हो चुकी है। इसके लिये वन्य जीव विभाग द्वारा करीब एक करोड़ रुपए का प्रस्ताव भी राज्य सरकार को भेजा जा चुका है। इंद्रावती टाइगर रिजर्व के छह हेक्टेयर तालाब को पार्क के तौर पर विकसित किया जाएगा। वन जीव संरक्षण से जुड़े अधिकारी बताते हैं कि बस्तर सम्भाग में मगरमच्छ बड़ी संख्या में मौजूद हैं। खासतौर से गोदावरी बेसिन में मगरमच्छ मिलने की सूचनाएँ लगातार आ रही हैं। अब विभागीय स्तर पर पहली बार इनके संरक्षण की योजना तैयार हुई है।

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शिरीष खरेशिरीष खरेमासक्मयुनिकेशन में डिग्री लेने के बाद चार साल डाक्यूमेंट्री फिल्म आरगेनाइजेशन में शोध और लेखन.उसके बाद दो साल 'नर्मदा बचाओ आन्दोलन, बडवानी' से जुड़े रहे.

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