जलीय पर्यावरण पर पॉलीविनाइल क्लोराइड प्लास्टिक के प्रभाव

Submitted by editorial on Sat, 09/22/2018 - 13:05
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संघर्षबोध

पीवीसी से बने एस्कलेटरपीवीसी से बने एस्कलेटर पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC) आमतौर पर पीवीसी या सिर्फ विनाइल (Vinyl) के रूप में जाना जाता है वास्तव में मध्य 20वीं सदी के बाद यह पीवीसी व्यापक रूप से दुनिया भर में प्रयोग किया गया है। पीवीसी बहुत मजबूत रासायनिक पदार्थ है। यह तेल और विभिन्न रासायनिक पदार्थ के साथ कोई प्रतिक्रिया नहीं करते हैं। यह धूप, मौसम और आग प्रतिरोधी है। यह हमारे आस-पास हर जगह है। पीवीसी एक अविश्वसनीय बहुमुखी उपयोगी सामग्री है जो बोतलें, पैकेजिंग, खिलौने निर्माण के लिये, कपड़े, पाइपिंग, तार कोटिंग्स, नकली चमड़ा जैसे समान के लिये विस्तृत रूप से प्रयोग किया जा रहा है। प्लास्टिक के वैश्विक उत्पादन और उपभोग में पीवीसी का तीसरा स्थान है। तथ्य के अनुसार प्रति वर्ष 33 मिलियन टन से भी अधिक पीवीसी का उत्पादन किया जा रहा है और यह आंकड़ा सालाना बढ़ता जा रहा है। पीवीसी के द्रव्यमान में लगभग 57% क्लोरीन है, अत: इसमें अन्य किसी पॉलीमर से कम पेट्रोलियम की आवश्यकता है।

गलती से पीवीसी पहले सन 1835 में हेनरी विक्टर रेगनल्ट और बाद में सन 1872 में यूजन बाउमैन ने इसका आविष्कार किया। इन दोनों अवसरों पर बहुलक विनाइल क्लोराइड एक सफेद ठोस के रूप में बोतल के अंदर प्रकट हुआ जो कि धूप के संपर्क में छोड़ दिया गया था। बीसवीं सदी में रूसी रसायनज्ञ इवान ओस्ट्रोमिसलेंस्की और जर्मन रसायन कंपनी ग्रेशम इलेक्ट्रॉन के फ्रिट्ज क्लेट में वाणिज्यिक उत्पादों के लिये पीवीसी का उपयोग करने का प्रयास किया, लेकिन इन कठिन सामग्री या कभी-कभी भंगुर बहुलक प्रसंस्करण ने उनके प्रयासों को अवरुद्ध करने में कठिनाइयों का सामना किया था।

वाल्डो सेमन और बी. एफ गुडरीक कंपनी ने सन 1926 में विभिन्न एडिटिव्स के साथ सम्मिश्रण द्वारा पीवीसी को प्लास्टिक के रूप में रूपांतरण करने के लिये एक विधि विकसित की। परिणाम स्वरूप एक और अधिक लचीला और अधिक आसानी से संसाधित पदार्थ मिला जिसने जल्दी ही बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उपयोगिता हासिल कर ली थी।

पीवीसी के साथ समस्या क्या है ?
सबसे पहले यह स्पष्ट कर दिया जाना चाहिए कि तेल और क्लोरीन को पर्यावरण अनुकूल नहीं कहा जा सकता है क्योंकि इसका निष्कर्षण, शोधन और उत्पादों की अपनी पद्धति अनुकूल नहीं है। हमारी आधुनिक जीवनशैली तेल पर इतनी ज्यादा निर्भर है कि अगर इसका उत्पादन अचानक बंद हो जाता है तो यह ना सिर्फ परिवहन के लिये घातक होगा बल्कि - यह हमारे जीवन के हर पहलू को प्रभावित करेगा। हमें वास्तव में अपनी जीवनशैली से जीवाश्म ईंधन की निकासी करने से पहले हमको हमारी जीवाश्म ईंधन की लत को रोकने की जरूरत है।

पीवीसी से बने पाइपपीवीसी से बने पाइप पीवीसी का स्थायित्व भी हमारे पर्यावरण के दृष्टिकोण से अनुकूल नहीं है। यह जैव क्षय (non-bio-degradable) नहीं है। पीवीसी से बने आइटम कई दशकों तक अपना अस्तित्व बनाए रख सकते हैं। और यह टूटने पर बस दानेदार हो जाता है पशु इनके टुकड़ों को निगलने से यह उनके पाचन तंत्र को ब्लॉक कर सकता है।

ग्रीनपीस पीवीसी उत्पादन की समाप्ति के लिये एक बहुत बड़ा धक्का है क्योंकि पीवीसी के निर्माण प्रक्रिया जलाए जाने से डाइऑक्सिन जैसे विषाक्त पदार्थ उत्पन्न हो जाता है। डाइऑक्सिन एक सबसे खतरनाक मानव निर्मित जहर है और यह एक संचयी विष है, जिसका अर्थ है कि यह एक लंबे समय के लिये शरीर में रहता है, मांसाहारी खाद्य श्रृंखला में यह उच्चतम स्तर पर जमा हो जाता है जिसमें हम भी शामिल हैं। थ्यालेट (phthalates) जैसे पदार्थ पीवीसी के साथ जुड़ रहे हैं इनको लचीला बनाने के लिये। पशुओं के अध्ययनों से पता चलता है कि इनमें से कुछ रसायनों के वजह से कैंसर हो सकता है और यह गुर्दे और प्रजनन प्रणाली के लिये भी नुकसान का कारण हो सकता है। परेशानी की बात यह है कि सॉफ्ट पीवीसी अक्सर छोटे बच्चों के लिये खिलौने बनाने में प्रयोग किया जाता है – और वे बस प्यार से उन्हें मुँह में डालते हैं। इसलिये थ्यालेट (phthalates) का मुद्दा अब इस तरह की एक चिंता का विषय है। अमेरिका पर्यावरण संरक्षण एजेंसी ने हाल ही में एक कार्य श्रृंखला घोषणा की।

पीवीसी का पुन : प्रयोग चक्र
पीवीसी के लिये भी सीशा और कैडमियम जैसे भारी धातुओं की उपस्थिति में रिसाइकल करना मुश्किल है। वास्तव में यह माना जाता है कि अन्य रिसाइकिलिंग में यह एक संदूषक के रूप में रहते हैं। वर्तमान में पीवीसी 1% के नीचे पुनः नवीनीकरण योग्य हैं। पीवीसी से बने कुछ प्लास्टिक के यंत्र जो चिकित्सा के क्षेत्र में लागू होते हैं।

पीवीसी से प्रदूषण के जीवन चक्र
क्लोरीन उत्पादन

पीवीसी से बने खिलौनेपीवीसी से बने खिलौने - पीवीसी के उत्पादन में सबसे बड़ा घटक ऑर्गेनोक्लोरिन (organochlorines) है। ऑर्गेनोक्लोरिन मानव और पर्यावरण प्रदूषण के रूप में जाना जाता है।
- पीवीसी के उत्पादन की प्रक्रिया में क्लोरीन के प्रयोग से डाइआक्सिन जैसे विषाक्त पदार्थ उत्पन्न होता है। यह एक ज्ञात खतरनाक विषाक्त पदार्थ है।
- मछली और तलछट के साथ ओक्टाक्लोरोस्टाइरिन (octachlorostyrene) जैसे विषाक्त पदार्थ का लगातार संदूषण एक अत्यंत गंभीर समस्या है। यह एक अत्यंत स्थाई पदार्थ है।
- अकेले संयुक्त राज्य अमरीका में विनाइल निर्माण के लिये 35,000 पाउंड से अधिक (लगभग 16 मीट्रिक टन) पारा प्रत्येक वर्ष वातावरण में रिलीज होता है।
- क्लोरीन मांग के आधार पर 40 प्रतिशत क्लोरीन, विनाइल उत्पादन में इस्तेमाल होता है। इसके लिये प्रतिवर्ष लगभग 47 अरब किलोवाट घंटे की बिजली का उपभोग होता है।

पीवीसी उत्पादन और पॉलीमेराईजेशन
- पॉलीविनाइल क्लोराइड बनाने के लिये एथिलीन डाइक्लोराइड और विनाइल क्लोराइड बनाया जाता है।
- अनुसंधानकर्ताओं का अनुमान है कि EDC और VCM का 10,00,000 टन हवा में हर साल मिल रहा है।
- VCM एक ज्ञात कैंसर जनक है।
- EDC एक संभावित कैंसरजनक है।
दोनों EDC और VCM जिगर के खतरे से जुड़े होते हैं। वृषण और डीएनए की क्षति, स्नायविक विषाक्ता, और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली के लिये भी ये जिम्मेदार हैं।
- EDC और VCM की विनिर्माण द्वारा ऑर्गेनोक्लोरींस और PCBs उत्पाद के रूप में पैदा करता है। यह अनुमान है। प्रतिवर्ष EDC निर्माण से 20000 पाउंड पीसीवी उत्पादन भी होता है।
- PCBs दोनों प्रकार के कैंसर जनक और विष हैं। यह मानव और पर्यावरण के स्वास्थ्य के लिये खतरे प्रस्तुत करते हैं। वे लंबी समय की अवधि के लिये पानी और मिट्टी में रह सकते हैं।
- EDC/VCM विनिर्माण संयंत्रों के आस-पास क्षेत्र में ऑर्गेनोक्लोरीन (organochloirines) जैसे विषाक्त पदार्थ का उच्च स्तर पाया गया है। एक उप उत्पाद के रूप में यह डाइऑक्सिन बनाता है।
- EDC/VCM निर्माण प्रकल्प के आस-पास के क्षेत्रों से नमूने लिये गए हैं जिससे पता चलता है कि उच्च स्तर के डाइऑक्सिन मछली और पानी के धाराओं में मौजूद है।

पुन : चक्रण और निपटान
- प्रयुक्त पीवीसी सामग्री का पुन : चक्रण करना बेहद मुश्किल है क्योंकि विनाइल (vinyl) उत्पाद पीवीसी और additives के मिश्रण हैं और प्रत्येक विशिष्ट सूत्रीकरण इसके प्रयोग के लिये विशिष्ट रूप से अनुकूल है।
- पीवीसी को यदि मिट्टी के नीचे फेंक दिया जाता है तो यह प्रदूषण का विस्तार कर सकते हैं और विषाक्त पदार्थ मिट्टी के बाहर आ सकते हैं और यह सिलसिला जारी रहेगा।11

पीवीसी में मौजूद रासायनिक पदार्थ
पीवीसी से बना मेडिसिन का पेपरपीवीसी से बना मेडिसिन का पेपर पीवीसी में निम्न रसायनों का समावेश है – आर्सेनिक, ब्रोमीन, कैल्शियम, क्लोरीन कॉपर, आयरन सीसा, मैंगनीज, चाँदी, स्ट्रांशियम, टिन, टाइटेनियम, जिंक।

ग्रीनपीस ने कहा है कि पीवीसी के साथ मिश्रित पदार्थ प्लास्टिक के साथ बंधे हुए नहीं रहते हैं बल्कि पानी के साथ बाहर आ जाते हैं।11 वास्तव में जब एक बार कार्बनिक रसायन का रिसाव हो जाता है तो पीवीसी (PVC) एवं (PE) पाइपों के कारण संदूषण की संभावना बढ़ चुकी होती है। एक प्रयोगशाला अध्ययन में छोटे क्रस्टेसियंस जिन्हें पादप प्लवक खिलाया गया था को चाँदी, जस्ता, तांबा और निकल के साथ पाला गया तो उनकी प्रजनन क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव देखा गया। अधिकतर भारी धातुएँ मात्रा में प्रभावशाली होती हैं एवं आत्मसात की निम्न दर भी जैविक विशिष्टता या हानिकारक सांद्रता (मछली के लिये) काफी है।22

आर्सेनिक से दूषण
- यह देखा गया कि कई जलीय पौधे अत्यधिक उच्च दर पर आर्सेनिक संग्रह कर सकते हैं। यदि ये पौधे मनुष्य या जलीय जीवों के लिये खाद्य का स्रोत रहे हैं तो उनके स्वास्थ्य के लिये खतरा हो सकता है।1
- फास्फोरस का स्तर कम होने पर, आर्सेनिक शैवाल के लिये बहुत विशाक्त होता है।2
- जलीय पिस्सू (fleas) आर्सेनिक के प्रति अत्यंत संवेदनशील है।2
- किशोर मम्मीचोग्स (mummichogs), मिन्नोव (minnows) जैसी छोटी मछली, जिनके माता-पिता आर्सेनिक के संपर्क में रहे उनकी पूँछ विकृत हो जाती है।3
- शोधकर्ताओं ने देखा कि किशोर mummichogs जिनके माता-पिता आर्सेनिक के संपर्क में रहे, उनकी 13 जींस (genes) में बदलाव हो गया। यह जीन भ्रूण विकास के लिये महत्त्वपूर्ण हैं और यह संरचनात्मक विकृति के कारण हो सकते हैं।3
- बहुत कम मात्रा में भी आर्सेनिक मछली की प्रतिरक्षा प्रणाली के लिये विषैला होता है।4
- आर्सेनिक तेजी से जलीय आवासों में जमा होता है और खाद्य श्रृंखला में आगे बढ़ते हुए अंततः मनुष्य को प्रभावित कर सकता है।5
- मछली के शरीर में आर्सेनिक का स्तर अत्यधिक पाया गया।5
- अकार्बनिक आर्सेनिक इसके कार्बनिक रूप से अधिक विषैला होता है।5
- मछली में पाए जाने वाले 200 से अधिक एंजाइम की सक्रियता आर्सेनिक रोकता है और उनकी क्रियाशीलता में हस्तछेप करता है।5
- आर्सेनिक द्वारा मछली के जिगर एवं पित्ताशय में वेदना उत्पन्न होना ज्ञात हुआ है।5
- आर्सेनिक विभिन्न तरीकों से मछली में प्रजनन क्रिया को नष्ट करता है जैसे डिम्बग्रंथी कोशिका चक्र को बाधित करना डिम्बग्रंथी कूप के विकास को रोकना, शुक्राणु जनन और वृषण की आकृति में परिवर्तन करना।5
- पक्षियों की प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को आर्सेनिक प्रभावित कर सकता है5

क्लोरीन से दूषण
- क्लोरीन के संपर्क में आने से छोटी मछली के अपेक्षा बड़ी मछली मृत्यु के प्रति अति संवेदनशील होती है।9
- एक निश्चित स्तर पर, अवशिष्ट क्लोरीन पादप प्लवक के विकास को बाधित करती है।9
- कई अध्ययनों से यह निष्कर्ष निकला है कि सालमोनॉयड्स (salmonoids) मछली की प्रजातियाँ अवशिष्ट क्लोरीन के प्रति सर्वाधिक संवेदनशील है।9
- विकास और प्रजनन पर घातक विषाक्त प्रभाव, अत्यंत मारक जमाव की अपेक्षा निम्नतम जमाव पर घटित होते हैं।9
- प्रयोगों में देखा गया कि समान मछली क्लोरीन से दूषित समुद्री जल से बचती है।10
- क्लोरीन से संपर्क में आने से सीपी (Mussels) की शारीरिक गतिविधियों में निःस्पंदन और पाद संचालन में कमी पाई गई।9
- कोहो सालमॉन सहित मछलियों की कई प्रजातियाँ क्लोरिन से दूषित जल के संपर्क में आने से बचती हैं।20

तांबे से दूषण
- तांबे की कम सांद्रता के संपर्क से कोहो सालमॉन की घ्राण प्रणाली पर विपरित प्रभाव पड़ता है।13
- घ्राण प्रणाली प्रभावित होने से सालमॉन को प्राकृतिक शिकारी से बचाव की प्रतिक्रिया खत्म हो जाती है।13
- चिनूक सालमॉन, रेनबो ट्राउट, ब्राउन ट्राउट, फैटहेड मिन्नाव और तिलापिया की घ्राण प्रणाली पर भी तांबे के इसी प्रकार के प्रभाव देखे गए।13
- तांबे के संपर्क से मछली के शिशुओं के व्यवहार, जैसे की झुंड में रहना, धाराओं में स्थिति बनाए रखना और अन्य प्रकार के व्यवहार जो प्रवास और अस्तित्व के अभिन्न अंग हैं, पर प्रभाव पड़ता है।14
- तांबा कांटेदार डॉगफिश (Dogfish) में स्वसन तनाव पैदा करता है।16
- पानी के पिस्सू (fleas) को तांबे से दूषित सवाल का आहार खिलाने से उनके विकास और प्रजनन में कमी आ जाती है।17

सीसा से दूषण
- स्टेबलाइजर युक्त पीवीसी पाइप के माध्यम से गुजर रहे पानी में सीसा का रिसाव हो जाता है।
- कई प्रकार के परीक्षण जीव सीसा के उच्च सांद्रता से युक्त पानी में विस्तारित समयावधि में भी जीवित रहने में सक्षम थे।6
- सीसा की उच्च सांद्रता से समुद्री मादा अर्चिन (urchins) के अस्तित्व और प्रजनन कोशिकाओं के उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पाया गया।7
- इसी प्रकार की सांद्रता समुद्री अर्चिन (urchins) के जीवन के प्रारंभिक चरणों को विषाक्त करता है।7
- शोधकर्ताओं ने पाया कि सीसे के कुछ स्तरों पर संपर्क में आई मछली मरती तो नहीं है लेकिन उनके व्यवहार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
- सीसा मुक्त पानी में रखने पर मछली में ये प्रतिकूल प्रभाव देखे जाते हैं।8
- कचरा खाने वाले सीपी आदि सीसे का जैविक संग्रहण करते पाए जाते हैं।
- सीपी आदि के लिये सीसा की तीव्र और क्रोनिक विषाक्ता निर्धारित करने के लिये आगे की जाँच पड़ताल की जरूरत है, फिर भी उच्च स्तरों के साथ सीसा से ग्रस्त सीपी आदि खाना मानव स्वास्थ्य के लिये हानिकारक हो सकता है। अधिक जानकारी के लिये देखें - Health Effects of Lead।

जस्ता से दूषण
- प्रयोगों में, जलीय पिस्सू (fleas) को जस्ते के लगातार संपर्क में रखा गया तो उनकी कैल्शियम ग्रहण करने की क्षमता में कमी हुई जिससे उनकी गतिशीलता एवं छानने की क्रिया में कमी हुई तथा अंत में खाद ग्रहण करना कम हो गया।18
- जब जस्ता के संपर्क से जलीय पिस्सू (fleas) पशु को हटा दिया गया तो उनका कैल्शियम ग्रहण करना सामान्य हो गया।

संदर्भ
1. Robinson, Brett et al. Arsenic Hyperaccumulation by Aquatic Macrophytes in the Taupo Volcanic Zone, New Zealand. Environmental and Experimental Botany 58 (2006): 206-15.
2. Tisler, T., and J. Zagorc-Koncan. Acute and Chronic Toxicity of Arsenic to Some Aquatic Organisms. Bulletin of Environmental Contamination and Toxicology 69 (2002): 421-29.
3. Gonzalez, Horacio 0 et al. Physiological Changes and Differential Gene Expression in Mummichogs (Fundulus Heteroclitus) Exposed to Arsenic. Aquatic Toxicology 77 (2006): 43-52.
4. Datta, Soma et al. Chronic Exposure to Low Concentration of Arsenic Is Immunotoxic to Fish: Role of Head Kidney Macrophages as Biomarkers of Arsenic Toxicity to Clarias Batrachus. Aquatic Toxicology 92 (2009): 86-94.
5. Lage, Christopher R. Arsenic Ecotoxicology and Innate Immunity. Integrative and Comparative Biology 46.6 (2006): 1040-054.
6. Warnick, Stephen L., and Henry L. Bell. The Acute Toxicity of Some Heavy Metals to Different Species of Aquatic Insects. Journal (Water Pollution Control Federation) 41.2 (1969): 280-84.
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19. S. Rajagopal et al. Response of Mussel Brachidontes Striatulus to Chlorination: an Experimental Study. Aquatic Toxicology 39.2 (1997): 135-49.
20. Tierney, Keith B. Olfactory Toxicity in Fishes. Aquatic Toxicology 96.1 (2010): 2-26.
21. Fukunaga, Atsuko, and Marti J. Anderson. Bioaccumulation of Copper, Lead and Zinc by the Bivalves Macomona Liliana and Austrovenus Stutchburyi. Journal of Experiemental Marine Biology and Ecology 396 (2011): 244-52.
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23. Thornton, Ph.D., Joe. Environmental Impact of Polyvinyl Chloride Building Materials. Publication. Washington, D.C.: Healthy Building Network, 2002.

 

 

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