मछली पालन को लेकर बिहार सरकार गम्भीर

Submitted by RuralWater on Sun, 12/04/2016 - 15:01
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मछलीपालन के लिये तालाब निर्माण से जहाँ कुछ लोगों को रोजगार मिलेगा, वहीं भूजल का स्तर बढ़ाने में भी ये तालाब मदद करेंगे। यह तालाब सूखे की स्थिति से संघर्ष करने में भी दोस्त की भूमिका निभाएँगे। सरकारी मदद से बिहार में यह मछलीपालन से अच्छी आमदनी कमाने का सही समय है। इस क्षेत्र में जाकर जहाँ मछली पालक बिहार को मछलीपालन में आत्मनिर्भर बनाने में सहायता करेंगे और वहीं दूसरी तरफ मछली को इस काम में अच्छी आमदनी भी हासिल होगी।

बिहार के अन्दर मछली की माँग और राज्य में मछली के उत्पादन के बीच भारी अन्तर है। इस अन्तर को भरा जा सकता है और यह अन्तर बिहार के बेरोजगार युवकों के लिये एक अवसर भी बन सकता है। इस तरह के युवाओं के लिये प्रसन्नता की बात यह है कि मछलीपालन को लेकर बिहार सरकार प्रशिक्षण और अनुदान दोनों स्तर पर मदद कर रही है।

यदि बिहार में रहते हुए मछली पालन में जो हाथ आजमाना चाहते हैं, सरकारी सहायता को देखते हुए लग रहा है कि यह सही समय है। सरकार मछली पालन का प्रशिक्षण राज्य के बाहर और राज्य के अन्दर बिल्कुल निशुल्क दे रही है। चैर, माॅन, टाल जैसी आर्द्र भूमि पर मछली पालन के लिये आसानी से सरकारी सहायता मिल सकती है। चैर में आमतौर पर पर्याप्त पानी लगा रहता है। मछली पालन से चैर की जमीन और पानी दोनों का सही उपयोग हो सकता है।

मछलीपालन ने सिर्फ क्षेत्रों में लगभग डेढ़ करोड़ लोगों को देश में रोजगार दिया है। संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के अनुसार आजादी के बाद से अब तक मछली उत्पादन में दस गुणा की वृद्धी हुई है। देश में चार हजार गाँव का जीवनयापन मछली पालन पर निर्भर है। भारत दुनिया में मछली का प्रमुख निर्यातक है। देश का वातावरण भी मछलीपालन के अनुकूल है।

बिहार को देश में आज भी बीमारू राज्य के तौर पर देखा जाता है। जबकि बिहार के युवा देश भर में अपनी मेहनत के लिये जाने जाते हैं। अब समय है कि बिहार के प्रतिभा पलायन को रोकने के लिये बिहार सरकार की सकारात्मक पहल का प्रचार ठीक प्रकार से हो। जिससे उस योजना का लाभ अधिक-से-अधिक योग्य व्यक्ति उठा पाएँ।

गौरतलब है कि मछली पालन की योजना का लाभ एससी और एसटी श्रेणी के लोगों को विशेष सुविधाओं के साथ उपलब्ध होगा। बिहार में पिछड़े समाज से आने वाले बेरोजगार युवकों को इस योजना का लाभ जरूर उठाना चाहिए। इसके साथ-साथ सामान्य श्रेणी के लोग भी इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

इस योजना पर एससी और एसटी श्रेणी के लोगों को जहाँ नब्बे फीसदी तक अनुदान की व्यवस्था है, वहीं सामान्य श्रेणी के लोगों को पचास फीसदी तक की सहायता मिल सकती है। वैसे मछली बेचने वाला सदस्य यदि एससी अथवा एसटी श्रेणी से है तो उन्हें चार पहिया वाहन अथवा आॅटो रिक्शा की खरीद पर भी 90 प्रतिशत तक का अनुदान हासिल हो सकता है। इसके साथ-साथ मछली का बीज खरीदने और बोरिंग कराने अथवा पम्पिंग सेट खरीदने के लिये भी वे अनुदान हासिल कर सकते हैं।

मछलीपालन के लिये तालाब निर्माण से जहाँ कुछ लोगों को रोजगार मिलेगा, वहीं भूजल का स्तर बढ़ाने में भी ये तालाब मदद करेंगे। यह तालाब सूखे की स्थिति से संघर्ष करने में भी दोस्त की भूमिका निभाएँगे।

सरकारी मदद से बिहार में यह मछलीपालन से अच्छी आमदनी कमाने का सही समय है। इस क्षेत्र में जाकर जहाँ मछली पालक बिहार को मछलीपालन में आत्मनिर्भर बनाने में सहायता करेंगे और वहीं दूसरी तरफ मछली को इस काम में अच्छी आमदनी भी हासिल होगी।

इस सम्बन्ध में अधिक जानकारी के लिये मत्स्य प्रशिक्षण केन्द्र, मीठापुर के डॉ टुनटुन से 9473191559 नम्बर पर सम्पर्क किया जा सकता है।

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. 24 दिसम्बर 1984 को बिहार के पश्चिम चम्पारण ज़िले में जन्मे आशीष कुमार ‘अंशु’ ने दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में स्नातक उपाधि प्राप्त की और दिल्ली से प्रकाशित हो रही ‘सोपान स्टेप’ मासिक पत्रिका से कॅरियर की शुरुआत की। आशीष जनसरोकार की पत्रकारिता के चंद युवा चेहरों में से एक हैं। पूरे देश में घूम-घूम कर रिपोर्टिंग करते हैं। आशीष जीवन की बेहद सामान्य प्रतीत होने वाली परिस्थितियों को अपनी पत्रकारीय दृष्

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