आइये, पानी से रिश्ता बनाएँ

Submitted by RuralWater on Thu, 08/11/2016 - 14:48
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.नदियों को जोड़ने, तोड़ने, मोड़ने अथवा बाँधने का काम बन्द करो। रिवर-सीवर को मत मिलने दो। ताजा पानी, नदी में बहने दो। उपयोग किया पानी, नहरों में बहाओ। जल बजट को जल निकासी में कम, वर्षाजल संचयन में ज्यादा लगाओ। नहर नहीं, ताल, पाइन, कूलम आदि को प्राथमिकता पर लाओ।

‘फाॅरेस्ट रिजर्व’ की तर्ज पर ‘वाटर रिजर्व एरिया’ बनाओ। ये सरकारों के करने के काम हो सकते हैं। पानी की ग्राम योजना बनाना, हर स्थानीय ग्रामीण समुदाय का काम हो सकता है। आप पूछ सकते हैं कि निजी स्तर पर मैं क्या कर सकता हूँ? जवाब हाजिर है:

1. पानी..ऊर्जा है और ऊर्जा..पानी। कोयला, गैस, परमाणु से लेकर हाइड्रो स्रोतों से बिजली बनाने में पानी का उपयोग होता है। अतः यदि पानी बचाना है, तो बिजली बचाओ; ईंधन बचाओ। सोलर अपनाओ।

2. दुनिया का कोई ऐसा उत्पाद नहीं, जिसके कच्चा माल उत्पादन से लेकर अन्तिम उत्पाद बनने की प्रक्रिया में पानी का इस्तेमाल न होता हो। अतः न्यूनतम उपभोग करो; वरना पानी की कमी के कारण कई उत्पादों का उत्पादन एक दिन स्वतः बन्द करना पड़ जाएगा।

3. एक लीटर बोतलबन्द पानी के उत्पादन में तीन लीटर पानी खर्च होता है। एक लीटर पेटा बोतल बनाने में 3.4 मेगाज्युल ऊर्जा खर्च होती है। एक टन पेटा बोतल के उत्पादन के दौरान तीन टन कार्बन डाइआॅक्साइड निकलकर वातावरण में समा जाती है। लिहाजा, बोतलबन्द पानी पीना बन्द करो। पाॅली का उपयोग घटाओ।

4. आर ओ प्रणाली, पानी की बर्बादी बढ़ाती है; मिनरल और सेहत के लिये जरूरी जीवाणु घटाती है। इसे हटाओ। अति आवश्यक हो, तो फिल्टर अपनाओ। पानी बचाओ; सेहत बचाओ।

5. पानी दवा भी है और बीमारी का कारण भी। पानी को बीमारी पैदा करने वाले तत्वों से बचाओ; फिर देखिएगा, पानी का उचित मात्रा, समय, पात्र और तरीके से किया गया सेवन दवा का काम करेगा।

6. सूखे में सुख चाहो, तो कभी कम बारिश वाले गुजरात-राजस्थान के गाँवों में घूम आओ। उनकी रोटी, खेती, मवेशी, चारा, हुनर और जीवनशैली देख आओ। सूखें में भी दुख से बचे रहना सीख जाओगे।

7. प्याऊ को पानी के व्यावसायीकरण के खिलाफ औजार मानो। पूर्वजों के नाम पर प्याऊ लगाओ। उनका नाम चमकाओ; खुद पुण्य कमाओ।

8. स्नानघर-रसोई की जल निकासी पाइप व शौचालय की मल निकासी पाइप के लिये अलग-अलग चैम्बर बनाओ। ‘रुफ टाॅप हार्वेस्टिंग’ अपनाओ।

9. शौच को सीवेज में डालने की बजाय, सुलभ सरीखा टैंक बनाओ।

10. बिल्डर हैं, तो अपने परिसर में वर्षाजल संचयन सुनिश्चित करो। खुद अपनी जल-मल शोधन प्रणाली लगाओ। पुनर्चक्रीकरण कर पानी का पुर्नोपयोग बढ़ाओ। मल को सोनखाद बनाओ।

11. फैक्टरी मालिक हैं, तो जितना पानी उपयोग करो उतना और वैसा पानी धरती को वापस लौटाओ। शोधन संयंत्र लगाओ। तालाब बनाओ।

12. कोयला, तैलीय अथवा गैस संयंत्र के मालिक हैं, तो उन्हे पानी की बजाय, हवा से ठंडा करने वाली तकनीक का इस्तेमाल करो।

13. किसान हैं, तो खेत की मेड़ ऊँची बनाओ। सूखा रोधी बीज अपनाओ। कम अवधि व कम पानी की फसल व तरीके अपनाओ। कृषि के साथ बागवानी अपनाओ। देसी खाद व मल्चिंग अपनाकर मिट्टी की गुणवत्ता व नमी बचाओ। बूँद-बूँद सिंचाई व फव्वारा पद्धति अपनाओ।

14. जन्म, ब्याह, मृत्यु में जलदान, तालाब दान यानी महादान का चलन चलाओ। मानसून आने से पहले हर साल नजदीक की सूखी नदी के घुमाव पर एक छोटा कुण्ड बनाओ। मानसून आये, तो पौधे लगाओ। नदी किनारे मोटे पत्ते वाले वृक्ष और छोटी वनस्पतियों के बीज फेंक आओ।

15. “तालों में भोपाल ताल और सब तलैया..’’ जैसे कथानक सुुनो और सुनाओ। जलगान जैसे गीत सुनाओ। बच्चों की नदी-तालाब-कुओं से बात कराओ। पानी का पुण्य और पाप समझाओ। असल जल स्रोतों से रिश्ता बनाओ।
 

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अरुण तिवारीअरुण तिवारी

शिक्षा:


स्नातक, पत्रकारिता एवं जनसंपर्क में स्नातकोत्तर डिप्लोमा

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