जखनियां में पोखरा सूखा हैंडपंपों ने भी छोड़ा पानी

Submitted by RuralWater on Thu, 05/02/2019 - 16:31

गाजीपुर हिन्दुस्तान । 3 मई 2019

मई माह के शुरुआत में ही क्षेत्र के अधिकांश जगहों की पोखरी जहां सूख गयी है, वहीं हैंडपंप का भी पानी ने साथ छोड़ दिया है। जल स्तर नीचा होने से तालाबों, पोखरी व हैंडपंपों ने जवाब देना शुरू कर दिया है। पड़ रही भीषण गर्मी से पूरा जनमानस बेहाल हो गया है। .

मई के पहले दिन ही पारा 44 डिग्री के पार हो गया है। इससे गर्मी काफी बढ़ गयी है। प्रत्येक वर्ष धीरे-धीरे तापमान के बढ़ने से लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। गर्मी शुरू होने से पहले प्रशासन द्वारा पोखरा को पानी से भरवाया जाता था, ताकि पशु-पक्षी सहित जीव-जंतु गर्मी में अपनी प्यास बुझा सकें। वहीं जलस्तर घटने ना पाए, लेकिन इस बार प्रशासन की ओर से कोई पहल नहीं किए जाने से क्षेत्र के अधिकांश पोखरे सूखे पड़े हैं। वहीं गांव में लगे अधिकांश हैंडपंपों ने पानी देना बंद कर दिया है। क्योंकि वहां का जलस्तर नीचे चला गया है। .

जलाशयों में पानी न होने से पशु-पक्षी व्याकुल

कोईिरयापार (मऊ) हिन्दुस्तान । 3 मई 2019

विकास खण्ड मुहम्मदाबाद गोहना अन्तर्गत कोईिरयापार क्षेत्र की अधिकांश ग्रामसभाओं में जल संचयन के उद्देश्य से खोदे गए आदर्श जलाशयों में तेज धूप व उमस के मौसम में धूल उड़ रही है। साथ ही आदर्श जलाशय बच्चों का क्रीड़ा स्थल बनकर रह गया है। इस समय जल के लिए पशु पक्षी दम तोड़ रहे हैं। जबकि सरकार जल संचयन के उद्देश्य से ग्रामसभाओं को लाखों रूपये मुहैया कराती तो है। लेकिन इन सरकारी धन का ग्रामसभा से लेकर ब्लॉक स्तर तक बंदर बाट की जा रही है। इसके बाद भी प्रशासन स्तर पर कोई ठोस कारवाई नहीं की जा रही है। जिसके चलते जलाशयों का अस्तित्व समाप्त होता नजर आ रहा है। .

ग्रामपंचायत भाटापारा के पशु अस्पताल स्थित जलाशय लगभग अधिकतर सूखा ही रहता है। इसके बाद भी जनप्रतिनिधि या प्रशासनिक अधिकरी कोई ध्यान नहीं दे रहे है। गाँव के राकेश पाण्डेय व सन्तोष उपाध्याय का कहना है कि है कि सरकार की मंशा है कि ग्रामसभाओं में अधिक से अधिक पोखरों की खुदाई कराकर समुचित रूप से जल संचयन किया जा सके। लेकिन इन पोखरियों के जीर्णोद्धार व जल संचयन के लिए प्रशासनिक स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिससे पशु पक्षी के साथ ही लोग पानी के संकट से जूझने को विवश हैं। गांव के सत्येंद्र लाल व बिहारी मौर्य का कहना है कि सरकार लाखों रूपये खर्च करके आदर्श जलाशयों का निर्माण तो करवा रही है कि जल संचयन किया जा सके। लेकिन विभाग उसके उद्देश्यों को नजरअंदाज कर रहा है। साथ ही जल संचयन व जल प्रबन्ध के अभाव में दर्जनों कुंए मृत पड़े हुए हैं। आज जल संकट की वजह से लोगों को पोखरियों व कुएं की कमी लोगों को खलने लगी है। क्योकि प्रशासन अपने कर्तव्यों से विमुख होता नजर आ रहा है। क्षेत्र के दर्जनों पोखरियां सूखी पड़ी हैं। जिसके चलते पशु पक्षी व आम जन जीवन प्रभावित हो रहा है।.

मऊ में सबमर्सिबल के नाम पर 46 लाख का घोटाला

मुहम्तदाबाद गोहना (मऊ) | हिन्दुस्तान । 3 मई 2019

मुहम्मदाबाद गोहना नगर पंचायत में विगत तीन सालों में कराए गए विकास कार्यो और सामानों की खरीद में धांधली और भ्रष्टाचार होने की शिकायत पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर जिलाधिकारी द्वारा गठित कमेटी की जांच में 46 लाख रुपए के भ्रष्टाचार का मामला उजागर हुआ है। जिलाधिकारी की संस्तुति पर मंडलायुक्त आजमगढ़ ने संबंधित अधिशासी अधिकारी और तत्कालीन नपं अध्यक्ष के खिलाफ कार्रवाई किए जाने के साथ ही 46 लाख रुपए की रिकवरी का आदेश दिया है।

मुहम्मदाबाद गोहना नगर पंचायत में विगत तीन वर्षों में लगाए गए सबमर्सिबल पंप, बिजली लाइट, एलइडी बल्ब, कंबल व अलाव की लकड़ी खरीद समेत 0 बिंदुओं पर जांच को लेकर नगर पंचायत के शेखवाड़ा वार्ड क सभासद आजम खान ने हाइकोर्ट में रिट दाखिल किया था। मामले में उच्च न्यायालय ने शासन व प्रशासन को तीन माह के भीतर सभी बिंदुओं की जांचकर आख्या देने और शिकायत निस्तारित करने का आदेश पारित किया। हाइकोर्ट के आदेश पर जिलाधिकारी ने अपर जिलाधिकारी मऊ की अध्यक्षता में जल निगम व लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता और मुहम्मदाबाद गोहना के उप जिलाधिकारी /ज्वाइंट मजिस्ट्रेट की संयुक्त टीम गठित कर सभी 40 शिकायतों की जांच कराई। मामले जांच टीम ने 46 लाख रुपये के घोटाला हुआ है। जांच टीम ने पाया कि 2016-17 में नपं के विभिन्न वाड़ों में 25 सबमर्सिबल 2017 -18 के कार्यकाल में 30 सबमर्सिबल और 2018- 19 में 37 सबमर्सिबल के साथ कुल 92 सबमर्सिबल लगाए गए। जिसके लिए 77 लाख 98 हजार 224 रुपए का भुगतान किया गया। प्रति सबमर्सिबल लगभग 84 हजार 736 रुपये का खर्च दिखाया गया है। जांच टीम के मुताबिक नगर पंचायत द्वारा जारी टेंडर में 2 हॉर्स पावर मोटर लगाने का टेंडर मांगा गया था जबकि मौके पर एक हॉर्स पावर का मोटर लगा मिला। जांच टीम का कहना है कि एक मोटर, स्टार्टर, पाइप, वायर आदि के साथ बोरिंग का कुल खर्च 30 से 35 हजार रुपए है लेकिन नगर पंचायत द्वारा एक एचपी सबमर्सिबल पंप के लिए औसत 84 हजार 736 रुपए का भुगतान किया गया है।

इतना ही नहीं सभी सबमर्सिबल की पाइप को अंडरग्राउंड वायरिंग का भुगतान किया गया जबकि सभी पाइप ऊपर लगे पाये गए। इस प्रकार कुल 92 सबमर्सिबल में प्रति  सबमर्सिबल में 46 हजार का अधिक भुगतानकिया गया है। जांचटीम का यह भी कहना है कि जांच में तीन सबमर्सिबल निजी घरों में लगे मिले जबकि एक की बोरिंग करके छोड़ दिया गया। इस प्रकार सबमर्सिबल लगाने में 46 लाख रुपये का घोटाला हुआ है। पूरे मामले को लेकर लोगों में काफी चर्चा है।

 

 

 

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