गोवर्धन ईको विलेज

Submitted by RuralWater on Tue, 05/24/2016 - 11:12
Source
नवोदय टाइम्स, 08 फरवरी 2016

विश्व भर में 40 से अधिक इस्कॉन ईको विलेज और फार्म कम्यूनिटीज बने हुए हैं। हाल ही में इसका शुभारम्भ किया गया। इसके साथ ही इस्कॉन नीलांचल धाम भी एक और अनोखा और अद्भुत ईको फ्रेंडली फार्म कम्युनिटी है जो ठाणे के पास तलासारी में 20 एकड़ में फैला हुआ है। इसका नाम है ‘नीलांचल धाम परियोजना’। यहाँ पर जैविक खेती, फूलों की खेती, पौधे नर्सरी, कुटीर उद्योग, पशु पालन, चिकित्सा शिविर और ग्रामीण विकास को शामिल किया गया है। सह्याद्री पर्वत की तलहटी में उत्तर मुम्बई से 108 किलोमीटर दूर वाडा (पालघर) में यह बसा है। इसका मुख्य आकर्षण यह है कि वृंदावन के छह मुख्य मन्दिरों की प्रतिकृति यहाँ बनाई गई है।इस्कॉन मुम्बई के करीब दो ऐसे स्थानों का निर्माण किया गया है जो न केवल भक्तों की भक्तिपूर्ण भावना को समर्पित हैं बल्कि समाज के लिये भी लाभकारी व उपयोगी हैं। इसमें से एक ‘गोवर्धन ईको विलेज’ है जो करीब 100 एकड़ में फैला हुआ फार्मिंग कम्युनिटी है। यह एक तरह से आध्यात्मिक स्थल है। गोवर्धन ईको विलेज परिस्थिति के साथ ही प्रकृति के महत्त्व पर प्रकाश डालता है। यह हमें खुद को प्रकृति और पवित्रता के साथ सद्भाव में रहने की जरूरत को बताता है।

सह्याद्री पर्वत की तलहटी में उत्तर मुम्बई से 108 किलोमीटर दूर वाडा (पालघर) में यह बसा है। इसका मुख्य आकर्षण यह है कि वृंदावन के छह मुख्य मन्दिरों की प्रतिकृति यहांँ बनाई गई है। गोवर्धन ईको विलेज हर एक लिये खुला है। यहाँ आप निवास कर सकते हैं और साथ ही आध्यात्मिक भूख को भी मिटा सकते हैं। यह एक तरह का ऐसा आश्रम है जहाँ प्रकृति की अनोखी छटा देखने को मिलती है। नदी के साथ बना आकर्षक घाट आपका मन मोह लेता है। गोवर्धन ईको विलेज प्रकृति और परमात्मा के साथ रहने की जरूरत को रेखांकित करता है।

विश्व भर में 40 से अधिक इस्कॉन ईको विलेज और फार्म कम्यूनिटीज बने हुए हैं। हाल ही में इसका शुभारम्भ किया गया। इसके साथ ही इस्कॉन नीलांचल धाम भी एक और अनोखा और अद्भुत ईको फ्रेंडली फार्म कम्युनिटी है जो ठाणे के पास तलासारी में 20 एकड़ में फैला हुआ है। इसका नाम है ‘नीलांचल धाम परियोजना’। यहाँ पर जैविक खेती, फूलों की खेती, पौधे नर्सरी, कुटीर उद्योग, पशु पालन, चिकित्सा शिविर और ग्रामीण विकास को शामिल किया गया है। सड़कों पर आवारा छोड़ दी गईं गायों को गोद लेकर नीलांचल धाम में उन्हें पाला जाता है। स्थानीय निवासियों के लिये भी कई प्रकार के चिकित्सा शिविर यहाँ चलाए जाते हैं। लोगों को स्वास्थ्य सेवा देने के साथ ही शिक्षा देने का भी यहाँ इन्तजाम किया गया है।

इस्कॉन इस साल स्वर्ण जयन्ती वर्ष मना रहा है। एच.ची. सुरा दास जो 50वीं वर्षगांठ मनाने के लिये बनी समिति के राष्ट्रीय संयोजक हैं, बताते हैं कि इस साल इस्कॉन, अपने संस्थापक आचार्य हिज डिवाइन ग्रेस ए सी भक्तिवेदान्ता स्वामी प्रभुपाद द्वारा 1966 में न्यूयार्क में अपनी स्थापना के 50 साल मना रहा है। इस्कॉन न सिर्फ भारत बल्कि पूरी दुनिया में प्राचीन वैदिक दर्शन और कृष्ण चेतना प्रचार के तौर पर पिछले पचास सालों में एक मजबूत केन्द्र के रूप में उभरा है।

भगवान कृष्ण और भागवद गीता का सन्देश फैलाने के लिये अगस्त 1965 में इस्कॉन के संस्थापक संयुक्त राज्य अमेरिका में गए थे, जिन्हें मूल रूप से अभय चरण के रूप में जाना जाता है। दुनिया भर के इस्कॉन मन्दिर अपने संस्थापक की इसी पश्चिम यात्रा की 50वीं वर्षगाँठ मनाने वाले हैं। उन्होंने 13 जुलाई 1966 को न्यूयॉर्क में इस्कॉन की स्थापना की थी। इस्कॉन गौड़ीय वैष्णव सम्प्रदाय वैदिक या हिन्दू संस्कृति के भीतर एक प्राचीन अद्वैतवादी परम्परा के तहत आता है। यह किसी भी धर्म तक सीमित नहीं है और कालातीत वैदिक दर्शन प्रसारित करता है। भगवान की लीलाओं, चेतना, उनके कार्य, उनके नाम का जप, उनके निर्देश का पालन आदि की शिक्षा जीवन के हर क्षेत्र में दी जाती है। वेद में इसे ही सनातन धर्म कहा गया है।

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